भारत में राष्ट्रवाद Class 10 Notes | Nationalism in India RBSE 2025

📅 गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 📖 3-5 min read
भारत में राष्ट्रवाद | Nationalism in India Class 10 Notes | RBSE NCERT CBSE 2025

भारत में राष्ट्रवाद

Nationalism in India — कक्षा 10 इतिहास, अध्याय 2 | RBSE · NCERT · CBSE Board 2025

भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism in India) का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। 20वीं सदी के प्रारंभ में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ने एक नया स्वरूप ग्रहण किया। गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित जन-आंदोलनों के माध्यम से करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।

प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के बाद भारत में राजनीतिक जागृति का एक नया दौर शुरू हुआ। रॉलेट एक्ट (1919), जलियाँवाला बाग हत्याकांड, और खिलाफत आंदोलन ने भारतीय जनमानस को झकझोर दिया। इसके बाद असहयोग आंदोलन (1920-22), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।

32
वर्ष (1915-1947)
60,000+
नमक सत्याग्रह में गिरफ्तारियाँ
1,650
जलियाँवाला बाग में गोलियाँ
385 km
दांडी मार्च की दूरी

1. प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय राष्ट्रवाद (1914-1918)

प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) ने भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को गहराई से प्रभावित किया। युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारत से भारी मात्रा में संसाधन और सैनिक लिए। इस युद्ध ने भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई।

युद्ध का भारत पर प्रभाव

प्रथम विश्व युद्ध का भारत पर प्रभाव (1914-1918)
क्षेत्रप्रभावपरिणाम
आर्थिक बोझरक्षा व्यय में भारी वृद्धि; युद्ध के लिए करों में वृद्धिआम जनता पर आर्थिक बोझ; गरीबी बढ़ी
सैन्य भर्तीगाँवों से जबरन सैनिक भर्ती; 13 लाख भारतीय सैनिक युद्ध में भेजे गएग्रामीण क्षेत्रों में रोष; कृषि प्रभावित
मूल्य वृद्धि1913-18 के बीच वस्तुओं की कीमतें दोगुनी हुईंजीवन यापन कठिन; आर्थिक संकट
महामारी1918-19 में इन्फ्लुएंजा महामारी फैली12-13 मिलियन (1.2-1.3 करोड़) लोगों की मृत्यु
राजनीतिक निराशास्वशासन की आशा टूटी; रॉलेट एक्ट जैसे दमनकारी कानूनक्रांतिकारी विचारधारा को बल; राष्ट्रवाद का उदय
📌 महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ

भारतीयों को आशा थी कि युद्ध में ब्रिटेन की सहायता के बदले उन्हें स्वशासन (Home Rule) मिलेगा। परंतु युद्ध समाप्त होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट जैसे दमनकारी कानून बनाए, जिससे भारतीयों में गहरी निराशा और क्रोध उत्पन्न हुआ।

2. गांधीजी का भारत आगमन और प्रारंभिक गतिविधियाँ (1915)

मोहनदास करमचंद गांधी (2 अक्टूबर 1869 - 30 जनवरी 1948) जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने 21 वर्ष (1893-1914) बिताए और वहाँ भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। वहीं उन्होंने सत्याग्रह की अनूठी पद्धति विकसित की।

दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी का संघर्ष (1893-1914)

दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी की प्रमुख गतिविधियाँ
वर्षघटनामहत्व
1893पीटरमारित्ज़बर्ग स्टेशन पर प्रथम श्रेणी डिब्बे से बाहर फेंके गएनस्लीय भेदभाव का पहला अनुभव; संघर्ष की प्रेरणा
1894नेटाल इंडियन कांग्रेस (NIC) की स्थापनाभारतीयों के अधिकारों के लिए पहला संगठन
1906ट्रांसवाल में एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट के विरुद्ध पहला सत्याग्रहसत्याग्रह का पहला प्रयोग
1910टॉल्स्टॉय फार्म की स्थापनाआश्रम जीवन और सामूहिक प्रतिरोध का केंद्र

भारत आगमन के बाद (1915-1916)

भारत आने के बाद गांधीजी ने पहले एक वर्ष देश भ्रमण किया। उनके राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले ने उन्हें सलाह दी:

"पहले भारत को जानो, उसके लोगों को समझो, उनकी समस्याओं को महसूस करो, फिर राजनीति में उतरो।" — गोपाल कृष्ण गोखले, गांधीजी को सलाह

गांधीजी ने 1916 में अहमदाबाद में साबरमती आश्रम की स्थापना की।

📝 परीक्षा में याद रखें
  • गांधीजी का जन्म: 2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर (गुजरात)
  • भारत आगमन: जनवरी 1915
  • दक्षिण अफ्रीका में समय: 1893-1914 (21 वर्ष)
  • साबरमती आश्रम: 1916, अहमदाबाद
  • राजनीतिक गुरु: गोपाल कृष्ण गोखले

3. सत्याग्रह: विचार और प्रारंभिक प्रयोग (1916-1918)

📖 सत्याग्रह की परिभाषा

सत्याग्रह (Satyagraha) = सत्य (Truth) + आग्रह (Insistence) = "सत्य का आग्रह"। यह सत्य और अहिंसा पर आधारित प्रतिरोध की विधि है जिसमें शारीरिक बल का प्रयोग नहीं किया जाता।

सत्याग्रह के मूल सिद्धांत

  • सत्य (Truth): सत्य ही ईश्वर है; सत्य की अंततः विजय होती है
  • अहिंसा (Non-violence): किसी भी प्राणी को कष्ट न देना - मन, वचन और कर्म से
  • आत्मशुद्धि: अपने भीतर के दोषों को दूर करना
  • स्वावलंबन: स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग, खादी पहनना
  • निर्भयता: सत्य के लिए किसी भी कष्ट को सहने की तैयारी

गांधीजी के प्रारंभिक सत्याग्रह (1916-1918)

भारत में गांधीजी के प्रथम तीन सत्याग्रह
वर्षस्थानमुद्दापरिणाम
1916चंपारण (बिहार)तिनकठिया प्रथा (नील की खेती) - किसानों को 3/20 भाग पर नील उगाने के लिए मजबूर किया जाता थातिनकठिया प्रथा समाप्त; गांधीजी को "महात्मा" उपाधि
1917खेड़ा (गुजरात)फसल खराब होने पर भी कर वसूलीग़रीब किसानों को कर में छूट
1918अहमदाबादमिल मज़दूरों के वेतन35% वेतन वृद्धि
व में चलाया गया पहला राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन था। इसका मुख्य सिद्धांत था - "सरकार के साथ सहयोग न करना"।

असहयोग आंदोलन के कारण

  1. रॉलेट एक्ट 1919: नागरिक स्वतंत्रता का हनन
  2. जलियाँवाला बाग हत्याकांड: अमानवीय दमन
  3. खिलाफत का मुद्दा: मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस
  4. आर्थिक शोषण: युद्ध के बाद बढ़ती महँगाई

असहयोग आंदोलन का कार्यक्रम

असहयोग आंदोलन के दो चरण
प्रथम चरण (त्याग/बहिष्कार)द्वितीय चरण (रचनात्मक कार्य)
सरकारी उपाधियाँ और पदवियाँ लौटानाराष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना
सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कारपंचायती अदालतों की स्थापना
सरकारी अदालतों का बहिष्कारस्वदेशी वस्तुओं का उपयोग
विदेशी वस्त्रों का बहिष्कारखादी का प्रचार-प्रसार; चरखा कातना
विधान परिषदों के चुनावों का बहिष्कारहिंदू-मुस्लिम एकता को मज़बूत करना
शराब की दुकानों पर धरनाअस्पृश्यता का अंत करना
📝 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
  • असहयोग = सहयोग न करना (Negative approach)
  • लक्ष्य: "एक वर्ष में स्वराज" (गांधीजी का वादा)
  • कलकत्ता अधिवेशन: सितंबर 1920 (प्रस्ताव स्वीकार)
  • नागपुर अधिवेशन: दिसंबर 1920 (कार्यक्रम अंतिम)

8. चौरी-चौरा कांड और आंदोलन वापसी (1922)

5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले के चौरी-चौरा गाँव में एक दुखद घटना घटी। स्वयंसेवकों के जुलूस पर पुलिस ने गोलियाँ चलाईं। इससे भड़की भीड़ ने थाने में आग लगा दी जिसमें 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए

गांधीजी की प्रतिक्रिया

गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में असहयोग आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी।

"हिंसा के साथ स्वराज नहीं चाहिए। एक गाँव की हिंसा पूरे आंदोलन को कलंकित कर देती है।" — महात्मा गांधी, चौरी-चौरा के बाद

गांधीजी की गिरफ्तारी

10 मार्च 1922 को गांधीजी को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्हें 6 वर्ष की सज़ा सुनाई गई। बीमारी के कारण फरवरी 1924 में रिहा।

9. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-1934)

सविनय अवज्ञा आंदोलन = "अन्यायपूर्ण कानूनों को जानबूझकर तोड़ना"। यह असहयोग से एक कदम आगे था।

असहयोग और सविनय अवज्ञा में अंतर

पक्षअसहयोग (1920-22)सविनय अवज्ञा (1930-34)
अर्थसरकार को सहयोग न देनाअन्यायपूर्ण कानूनों को तोड़ना
माँगस्वराज (Self-rule)पूर्ण स्वराज (Complete Independence)
प्रतीकखादी, चरखानमक
उदाहरणस्कूल छोड़नानमक कानून तोड़ना

पूर्ण स्वराज की घोषणा (लाहौर अधिवेशन, दिसंबर 1929)

दिसंबर 1929 में लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में दो ऐतिहासिक निर्णय:

  1. पूर्ण स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया
  2. 26 जनवरी 1930 को प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय
📌 26 जनवरी का महत्व

26 जनवरी 1930 को प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इसी कारण 1950 में संविधान को 26 जनवरी को लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

10. दांडी मार्च / नमक सत्याग्रह (1930)

दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रसिद्ध घटना है। गांधीजी ने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।

नमक कानून क्यों चुना गया?

  • नमक हर व्यक्ति की ज़रूरत है - अमीर हो या ग़रीब
  • नमक पर सरकारी एकाधिकार था
  • नमक पर भारी कर - ग़रीबों पर अन्याय
  • यह मुद्दा धर्म, जाति, वर्ग से परे था

गांधीजी का वायसराय को पत्र (2 मार्च 1930)

"प्रिय मित्र, मैं जानबूझकर किसी भी जीवित प्राणी को कष्ट नहीं दे सकता। मैं नमक कानून तोड़ूँगा क्योंकि यह सबसे अन्यायपूर्ण कानून है।" — महात्मा गांधी, वायसराय इरविन को पत्र (2 मार्च 1930)

दांडी मार्च - महत्वपूर्ण तथ्य

विवरणजानकारी
प्रारंभ12 मार्च 1930, साबरमती आश्रम (अहमदाबाद)
समाप्ति6 अप्रैल 1930, दांडी समुद्र तट (गुजरात)
कुल दूरी385 किमी (240 मील)
कुल दिन24 दिन
प्रतिदिन चलना16-19 किमी
गांधीजी की आयु61 वर्ष
प्रारंभिक सहयात्री78 स्वयंसेवक
धार्मिक विविधताहिंदू, 2 मुसलमान, 1 ईसाई, 2 हरिजन
नमक बनाया6 अप्रैल 1930, सुबह 8:30 बजे

मार्च की पूर्व संध्या पर गांधीजी का भाषण (11 मार्च 1930)

"संभवतः यह आपसे मेरा अंतिम भाषण होगा। साबरमती की पवित्र भूमि पर यह मेरा अंतिम संबोधन है। कल प्रातः हम यात्रा प्रारंभ करेंगे। हम लौटेंगे तभी जब स्वराज प्राप्त कर लेंगे।" — महात्मा गांधी, साबरमती आश्रम (11 मार्च 1930)

दांडी पहुँचने पर (6 अप्रैल 1930)

गांधीजी ने समुद्र तट पर नमक उठाकर नमक कानून तोड़ासरोजिनी नायडू ने उद्घोष किया: "जय हो, मुक्तिदाता!" (Hail, Deliverer!)

"इसके साथ, मैं ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला रहा हूँ।" — महात्मा गांधी, नमक कानून तोड़ते हुए

आंदोलन का प्रसार

  • गांधीजी की गिरफ्तारी: 4-5 मई 1930 की मध्यरात्रि
  • देश भर में 60,000+ लोग गिरफ्तार
  • धरासना नमक कारखाने पर छापा: 21 मई 1930
  • टाइम मैगज़ीन ने गांधीजी को 1930 का "Man of the Year" चुना

गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931)

  • सभी राजनीतिक बंदी रिहा
  • समुद्र तट पर नमक बनाने की अनुमति
  • गांधीजी दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में भाग लेंगे
📝 परीक्षा के लिए याद रखें
  • दांडी मार्च: 12 मार्च - 6 अप्रैल 1930 (24 दिन, 385 किमी, 78 सहयात्री)
  • गांधी-इरविन समझौता: 5 मार्च 1931

11. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और सबसे शक्तिशाली जन-आंदोलन था। 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) में कांग्रेस ने यह प्रस्ताव पारित किया।

भारत छोड़ो आंदोलन के कारण

  • क्रिप्स मिशन की असफलता (मार्च 1942)
  • द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों की बिना सहमति के भागीदारी
  • जापानी सेना का भारत की सीमाओं तक पहुँचना
  • युद्ध के कारण आर्थिक संकट और महँगाई

"करो या मरो" (Do or Die)

"हम या तो भारत को आज़ाद करेंगे या आज़ादी की कोशिश में मर जाएँगे। हम अपनी गुलामी का स्थायित्व देखने के लिए जीवित नहीं रहेंगे।" — महात्मा गांधी, 8 अगस्त 1942

प्रमुख घटनाएँ

तिथिघटना
8 अगस्त 1942भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित; "करो या मरो" का नारा
9 अगस्त 1942गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार
1942-43समानांतर सरकारें स्थापित (बलिया, सतारा, तामलुक)
1944गांधीजी रिहा (बीमारी के कारण)

भूमिगत नेता

प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, अरुणा आसफ अली ने भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया।

📝 परीक्षा के लिए याद रखें
  • भारत छोड़ो प्रस्ताव: 8 अगस्त 1942
  • स्थान: ग्वालिया टैंक मैदान, मुंबई
  • नारा: "करो या मरो" (Do or Die)
  • समानांतर सरकार: बलिया (यूपी), सतारा (महाराष्ट्र), तामलुक (बंगाल)

12. विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी

किसान आंदोलन

क्षेत्रनेतामुद्दे
अवध (यूपी)बाबा रामचंद्रभारी लगान, बेगार, तालुकदारों का अत्याचार
आंध्र (गुडेम पहाड़ियाँ)अल्लूरी सीताराम राजूवन कानूनों का विरोध, आदिवासी अधिकार

आदिवासी आंदोलन

अल्लूरी सीताराम राजू ने आंध्र प्रदेश की गुडेम पहाड़ियों में आदिवासियों को संगठित किया। उन्होंने गांधीजी को महान माना और अहिंसा में विश्वास किया, लेकिन गुरिल्ला युद्ध का रास्ता अपनाया। 1924 में अंग्रेज़ों द्वारा मारे गए।

महिलाओं की भागीदारी

  • सरोजिनी नायडू: दांडी मार्च में शामिल; "भारत की कोकिला"
  • कस्तूरबा गांधी: गांधीजी की पत्नी; आंदोलनों में सक्रिय
  • कमला नेहरू: जवाहरलाल नेहरू की पत्नी
  • अरुणा आसफ अली: भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिगत नेता

दलित और पिछड़े वर्ग

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। 1932 में पूना पैक्ट के तहत गांधीजी और अंबेडकर के बीच समझौता हुआ जिसमें दलितों को आरक्षित सीटें दी गईं।

13. 🏜️ राजस्थान विशेष: स्वतंत्रता संग्राम

1857 का विद्रोह राजस्थान में

राजस्थान में 1857 के विद्रोह का प्रथम केंद्र नसीराबाद (अजमेर) था जहाँ 28 मई 1857 को विद्रोह हुआ - मेरठ के 18 दिन बाद।

राजस्थान में 1857 के विद्रोह के प्रमुख केंद्र
स्थानतिथिविशेष
नसीराबाद (अजमेर)28 मई 1857राजस्थान में प्रथम विद्रोह
देवली (टोंक)जून 185715वीं नेटिव इन्फैंट्री का विद्रोह
एरिनपुरा (पाली)अगस्त 1857ठाकुर कुशाल सिंह ने बिथोला में अंग्रेज़ों को हराया
कोटाअक्टूबर 1857मेजर बर्टन और दो पुत्रों की हत्या

बिजोलिया किसान आंदोलन (1897-1941)

बिजोलिया किसान आंदोलन भारत का सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन था जो 44 वर्षों तक चला। यह मेवाड़ रियासत के बिजोलिया जागीर (वर्तमान भीलवाड़ा ज़िला) में हुआ।

84 प्रकार के कर

बिजोलिया के किसानों पर 84 प्रकार के अत्याचारी कर लगे थे:

  • लाग: विभिन्न अवसरों पर वसूला जाने वाला कर
  • बाग: बागों पर कर
  • बेगार: मुफ्त श्रम
  • चवरी (₹5): बेटी की शादी पर कर
  • तलवार बंधाई: उत्तराधिकार कर

आंदोलन के तीन चरण

चरणकालनेताविशेषताएँ
प्रथम1897-1915साधु सीताराम दास, फतेह करण चारणस्थानीय नेतृत्व; 1897 में नानजी और ठाकरी पटेल ने महाराणा से मिलने का असफल प्रयास
द्वितीय1916-1923विजय सिंह पथिकसंगठित आंदोलन; 1916 में बिजोलिया किसान पंचायत का गठन; राष्ट्रीय ध्यान; तिलक का समर्थन
तृतीय1923-1941माणिक्यलाल वर्माअंतिम समझौता; मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
  • 1913: 15,000 किसानों ने "कर नहीं देंगे" अभियान चलाया; खेत खाली छोड़े
  • बाल गंगाधर तिलक ने महाराणा फतेह सिंह को पत्र लिखकर किसानों का समर्थन किया
  • गांधीजी ने महादेव देसाई को आंदोलन का अध्ययन करने भेजा

राजस्थान के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी

सागरमल गोपा (1900-1946)
जैसलमेर
जैसलमेर रियासत के विरुद्ध संघर्ष। 5 वर्ष यातना सही। 4 अप्रैल 1946 को जेल में जलाकर मार डाले गए। 1986 में डाक टिकट जारी।
विजय सिंह पथिक (1882-1954)
बूँदी → बिजोलिया
"राष्ट्रीय पथिक"। मूल नाम भूप सिंह। 1915 लाहौर षड्यंत्र केस के बाद नाम बदला। बिजोलिया आंदोलन के संगठनकर्ता। "राजस्थान केसरी" के संपादक।
माणिक्यलाल वर्मा (1897-1969)
मेवाड़
बिजोलिया आंदोलन के तीसरे चरण के नेता। मेवाड़ प्रजामंडल के संस्थापक। "पंछीड़ा" जैसे प्रेरणादायक गीत लिखे।
दौलतमल भंडारी
जयपुर
1942 में "आज़ाद मोर्चा" का गठन। जयपुर प्रजामंडल के संस्थापक। राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (1968)।
दौलतराम सरण (1924-2011)
चुरू
"थार का गांधी" और "किसानों का मसीहा"। गांधीवादी सिद्धांतों के अनुयायी। बीकानेर राज्य प्रजा परिषद के सदस्य।

प्रजामंडल आंदोलन

राजस्थान के प्रमुख प्रजामंडल
रियासतप्रजामंडलस्थापनासंस्थापक
जयपुरजयपुर प्रजामंडल1931कपूरचंद पाटनी
मेवाड़मेवाड़ प्रजामंडल1938माणिक्यलाल वर्मा
मारवाड़मारवाड़ प्रजामंडल1934जयनारायण व्यास
बीकानेरबीकानेर प्रजामंडल1936वैद्य मघाराम
📝 RBSE परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
  • बिजोलिया आंदोलन: भारत का सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन (44 वर्ष)
  • नसीराबाद: राजस्थान में 1857 विद्रोह का प्रथम केंद्र (28 मई)
  • विजय सिंह पथिक: "राष्ट्रीय पथिक", गांधीजी से पहले सत्याग्रह का प्रयोग
  • सागरमल गोपा: जेल में जलाकर मारे गए (4 अप्रैल 1946)
  • 84 कर: बिजोलिया के किसानों पर लगे करों की संख्या

14. महत्वपूर्ण तिथियाँ (1915-1947)

जनवरी 1915
गांधीजी का भारत आगमन
दक्षिण अफ्रीका से 21 वर्ष बाद वापसी
1916
चंपारण सत्याग्रह
भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह; तिनकठिया प्रथा के विरुद्ध
मार्च 1919
रॉलेट एक्ट पारित
"काला कानून" - बिना मुकदमे के गिरफ्तारी
6 अप्रैल 1919
राष्ट्रव्यापी हर्ताल
रॉलेट एक्ट के विरोध में
13 अप्रैल 1919
जलियाँवाला बाग हत्याकांड
जनरल डायर द्वारा निहत्थी भीड़ पर गोलीबारी; 1,650 गोलियाँ
दिसंबर 1920
असहयोग आंदोलन प्रारंभ
नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस की स्वीकृति
5 फरवरी 1922
चौरी-चौरा कांड
गोरखपुर में 22 पुलिसकर्मी जलकर मरे
12 फरवरी 1922
असहयोग आंदोलन वापस
हिंसा के कारण गांधीजी का निर्णय
दिसंबर 1929
लाहौर अधिवेशन
"पूर्ण स्वराज" का प्रस्ताव; नेहरू अध्यक्ष
26 जनवरी 1930
प्रथम स्वतंत्रता दिवस
पूरे भारत में स्वतंत्रता की शपथ
12 मार्च 1930
दांडी मार्च प्रारंभ
साबरमती से 78 सहयात्रियों के साथ
6 अप्रैल 1930
नमक कानून तोड़ा
दांडी समुद्र तट पर गांधीजी ने नमक बनाया
5 मार्च 1931
गांधी-इरविन समझौता
सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित
1932
पूना पैक्ट
गांधीजी-अंबेडकर समझौता; दलितों को आरक्षित सीटें
8 अगस्त 1942
भारत छोड़ो प्रस्ताव
ग्वालिया टैंक, मुंबई में पारित; "करो या मरो"
15 अगस्त 1947
स्वतंत्रता
भारत आज़ाद; नेहरू प्रथम प्रधानमंत्री

15. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) - बोर्ड परीक्षा 2025

1. गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब लौटे?
(A) 1910
(B) 1914
(C) 1915 ✓
(D) 1920
2. जलियाँवाला बाग हत्याकांड कब हुआ?
(A) 13 मार्च 1919
(B) 13 अप्रैल 1919 ✓
(C) 13 मई 1919
(D) 13 जून 1919
3. असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?
(A) साइमन कमीशन
(B) चौरी-चौरा कांड ✓
(C) जलियाँवाला बाग
(D) रॉलेट एक्ट
4. दांडी मार्च कब प्रारंभ हुआ?
(A) 12 फरवरी 1930
(B) 12 मार्च 1930 ✓
(C) 12 अप्रैल 1930
(D) 12 मई 1930
5. "करो या मरो" का नारा किसने दिया?
(A) महात्मा गांधी ✓
(B) जवाहरलाल नेहरू
(C) सुभाष चंद्र बोस
(D) सरदार पटेल
6. पूर्ण स्वराज की माँग किस अधिवेशन में की गई?
(A) नागपुर
(B) कलकत्ता
(C) लाहौर ✓
(D) मुंबई
7. खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(A) गांधीजी
(B) अली बंधु (मुहम्मद अली और शौकत अली) ✓
(C) जिन्ना
(D) आज़ाद
8. भारत छोड़ो आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?
(A) 1940
(B) 1941
(C) 1942 ✓
(D) 1943
9. साबरमती से दांडी की दूरी कितनी थी?
(A) 200 मील
(B) 240 मील (385 किमी) ✓
(C) 300 मील
(D) 150 मील
10. चंपारण सत्याग्रह का मुख्य मुद्दा क्या था?
(A) नमक कर
(B) नील की खेती (तिनकठिया प्रथा) ✓
(C) लगान
(D) बेगार

RBSE विशेष प्रश्न

11. राजस्थान में 1857 के विद्रोह का प्रथम केंद्र कौन सा था?
(A) नसीराबाद ✓
(B) कोटा
(C) नीमच
(D) एरिनपुरा
12. बिजोलिया किसान आंदोलन कितने वर्षों तक चला?
(A) 20 वर्ष
(B) 30 वर्ष
(C) 44 वर्ष ✓
(D) 50 वर्ष
13. विजय सिंह पथिक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) लौह पुरुष
(B) राष्ट्रीय पथिक ✓
(C) थार का गांधी
(D) किसानों का मसीहा
14. सागरमल गोपा की जेल में हत्या कब हुई?
(A) 4 अप्रैल 1942
(B) 4 अप्रैल 1944
(C) 4 अप्रैल 1946 ✓
(D) 4 अप्रैल 1947
15. बिजोलिया में किसानों पर कितने प्रकार के कर लगे थे?
(A) 50
(B) 64
(C) 84 ✓
(D) 100

16. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

📝 परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्न

प्रश्न 1: असहयोग आंदोलन के कारण और कार्यक्रम का वर्णन करें।

उत्तर के मुख्य बिंदु: रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग, खिलाफत मुद्दा → कार्यक्रम: उपाधियाँ लौटाना, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्कूल-कॉलेज छोड़ना, खादी अपनाना → चौरी-चौरा कांड के कारण वापसी

प्रश्न 2: सविनय अवज्ञा आंदोलन और असहयोग आंदोलन में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर के मुख्य बिंदु: असहयोग = सरकार से सहयोग न करना; सविनय अवज्ञा = कानून तोड़ना → माँग: स्वराज vs पूर्ण स्वराज → उदाहरण: स्कूल छोड़ना vs नमक कानून तोड़ना

प्रश्न 3: दांडी मार्च का ऐतिहासिक महत्व बताइए।

उत्तर के मुख्य बिंदु: 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 → 385 किमी, 78 सहयात्री → नमक कानून = सबके लिए मुद्दा → अंतर्राष्ट्रीय ध्यान → 60,000+ गिरफ्तारियाँ → गांधी-इरविन समझौता

प्रश्न 4: जलियाँवाला बाग हत्याकांड के कारण और परिणाम लिखिए।

उत्तर के मुख्य बिंदु: रॉलेट एक्ट का विरोध, बैसाखी का दिन → 1,650 गोलियाँ, 379+ मृत → टैगोर ने नाइटहुड लौटाई → असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि → उधम सिंह का प्रतिशोध

प्रश्न 5 (RBSE): बिजोलिया किसान आंदोलन के तीन चरणों का वर्णन करें।

उत्तर के मुख्य बिंदु: प्रथम (1897-1915): साधु सीताराम दास, स्थानीय → द्वितीय (1916-1923): विजय सिंह पथिक, संगठित → तृतीय (1923-1941): माणिक्यलाल वर्मा, सफलता → 84 कर, 44 वर्ष, भारत का सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन

संदर्भ स्रोत

  • NCERT History Textbook - Class 10 "India and the Contemporary World - II"
  • RBSE History Textbook - Class 10
  • Gandhi Heritage Portal - gandhiheritageportal.org
  • National Gandhi Museum - gandhimuseum.org
  • The Collected Works of Mahatma Gandhi (CWMG)
  • Rajasthan Government Foundation - foundation.rajasthan.gov.in
  • Kim Wagner - "Amritsar 1919: An Empire of Fear" (Yale University Press)

ecommmitra | Vidhya Mitra Vedic Foundation

कक्षा 10 इतिहास, अध्याय 2: भारत में राष्ट्रवाद | RBSE · NCERT · CBSE Board 2025

अंतिम अपडेट: जनवरी 2025 | संस्करण: 2.0 (World-Class Edition)

यह लेख शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। सभी तथ्य NCERT/RBSE पाठ्यक्रम और प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित हैं।

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