विषय: विज्ञान (Science) कक्षा: 10 बोर्ड: RBSE (राजस्थान) अध्याय: 3 अंक भार: 8 marks महत्वपूर्ण: सक्रियता श्रेणी, धातुकर्म, मिश्रधातु
धातु एवं अधातु
हमारे चारों ओर विभिन्न प्रकार के तत्व पाए जाते हैं। इन तत्वों को उनके भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर धातु, अधातु और उपधातु में वर्गीकृत किया जाता है।
धातु (Metals)
धातुओं के भौतिक गुण
1. चमक (Lustre)
धातुओं की सतह चमकदार होती है। इसे धात्विक चमक कहते हैं।
उदाहरण: सोना, चांदी, तांबा
नोट: सोडियम और पोटैशियम धातुएं मुलायम होती हैं और चाकू से काटी जा सकती हैं। इन्हें केरोसिन में रखा जाता है क्योंकि ये वायु में तुरंत ऑक्सीकृत हो जाती हैं।
2. कठोरता (Hardness)
अधिकांश धातुएं कठोर होती हैं।
सबसे कठोर धातु: क्रोमियम
अपवाद: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) मुलायम धातुएं हैं
3. आघातवर्ध्यता (Malleability)
धातुओं को पीटकर पतली चादर (Sheet) बनाया जा सकता है।
सर्वाधिक आघातवर्ध्य धातु: सोना (1 ग्राम सोने से 1 वर्ग किमी की चादर)
उदाहरण: एल्युमिनियम फॉयल (खाना पैक करने में)
4. तन्यता (Ductility)
धातुओं को खींचकर पतला तार बनाया जा सकता है।
सर्वाधिक तन्य धातु: सोना (1 ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार)
उदाहरण: तांबे और एल्युमिनियम के तार (विद्युत संचालन में)
5. ऊष्मा और विद्युत चालकता
धातुएं ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।
गुण
सर्वश्रेष्ठ चालक
अपवाद
विद्युत चालकता
चांदी > तांबा > सोना > एल्युमिनियम
सीसा (Lead) - कुचालक
ऊष्मा चालकता
चांदी > तांबा > एल्युमिनियम
पारा, सीसा - खराब चालक
महत्वपूर्ण: बर्तन तांबे या एल्युमिनियम के बनाए जाते हैं क्योंकि ये ऊष्मा के अच्छे चालक हैं। बर्तन के हैंडल लकड़ी या प्लास्टिक के होते हैं (कुचालक)।
6. ध्वानिक गुण (Sonority)
धातुओं को ठोकने पर विशेष ध्वनि (घंटी जैसी आवाज) निकलती है।
उपयोग: स्कूल की घंटी, मंदिर की घंटी (धातु से बनी)
7. घनत्व और गलनांक
उच्च घनत्व: अधिकांश धातुओं का घनत्व अधिक होता है
अपवाद: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) जल पर तैरते हैं
उच्च गलनांक: अधिकांश धातुएं उच्च ताप पर पिघलती हैं
अपवाद: गैलियम और सीज़ियम (हाथ की गर्मी से पिघल जाते हैं)
सबसे उच्च गलनांक: टंगस्टन (3422°C) - बल्ब के फिलामेंट में उपयोग
Na और K अत्यधिक क्रियाशील - केरोसिन में रखे जाते हैं
Mg वायु में जलती है - चमकीली सफेद रोशनी (फोटोग्राफी में)
Fe और Cu धीरे-धीरे संक्षारित होते हैं
1. सबसे प्रचुर धातु:
पृथ्वी की भूपर्पटी में: एल्युमिनियम (Al) - 8.3%
मानव शरीर में: कैल्शियम (Ca)
2. सबसे प्रचुर अधातु:
पृथ्वी की भूपर्पटी में: ऑक्सीजन (O) - 46%
वायुमंडल में: नाइट्रोजन (N₂) - 78%
3. एकमात्र द्रव धातु: पारा (Hg) - कमरे के ताप पर
4. एकमात्र द्रव अधातु: ब्रोमीन (Br) - कमरे के ताप पर
5. सबसे हल्की धातु: लिथियम (Li)
6. सबसे भारी धातु: ऑस्मियम (Os)
7. सर्वाधिक तन्य: सोना (Au)
8. सर्वाधिक आघातवर्ध्य: सोना (Au)
9. सर्वोत्तम विद्युत चालक: चांदी (Ag)
10. सर्वोत्तम ऊष्मा चालक: चांदी (Ag)
11. सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ: हीरा (कार्बन का अपररूप)
12. सबसे कठोर धातु: क्रोमियम (Cr)
13. सबसे मुलायम धातु: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K)
14. उच्चतम गलनांक: टंगस्टन (W) - 3422°C
15. निम्नतम गलनांक: पारा (Hg) - (-39°C)
आयनिक यौगिक (Ionic Compounds)
आयनिक यौगिक का निर्माण
धातु और अधातु के बीच इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से आयनिक यौगिक बनते हैं।
महत्वपूर्ण: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि आयन स्थिर रहते हैं। लेकिन गलित या जलीय विलयन में विद्युत के सुचालक हो जाते हैं क्योंकि आयन गतिशील हो जाते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: सोडियम और पोटैशियम को केरोसिन में क्यों रखा जाता है?
उत्तर: सोडियम और पोटैशियम अत्यधिक क्रियाशील धातुएं हैं जो वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी से तुरंत अभिक्रिया करती हैं। इसलिए इन्हें केरोसिन में डुबोकर रखा जाता है ताकि ये वायु के संपर्क में न आएं।
प्रश्न 2: एल्युमिनियम की वस्तुओं पर जंग नहीं लगती, क्यों?
उत्तर: एल्युमिनियम की सतह पर ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) की पतली परत बन जाती है। यह परत एल्युमिनियम को आगे संक्षारित होने से बचाती है।
प्रश्न 3: सोने के आभूषण बनाते समय उसमें तांबा क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर: शुद्ध सोना (24 कैरेट) बहुत मुलायम होता है और आसानी से मुड़ या टूट सकता है। इसलिए इसमें तांबा या चांदी मिलाकर कठोर बनाया जाता है जिससे आभूषण मजबूत और टिकाऊ बनें।
प्रश्न 4: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं लेकिन गलित अवस्था में सुचालक, क्यों?
उत्तर: ठोस अवस्था में आयन एक निश्चित स्थान पर स्थिर रहते हैं और गति नहीं कर सकते। लेकिन गलित अवस्था में आयन गतिशील हो जाते हैं और विद्युत धारा का प्रवाह संभव हो जाता है।
प्रश्न 5: थर्मिट प्रक्रिया क्या है और इसका उपयोग कहां होता है?
उत्तर: थर्मिट प्रक्रिया में एल्युमिनियम चूर्ण द्वारा धातु ऑक्साइड (जैसे Fe₂O₃) का अवकरण किया जाता है। यह अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। समीकरण: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ + ऊष्मा उपयोग: रेल की पटरियों को जोड़ने में, टूटे हुए मशीन पुर्जों को जोड़ने में।
प्रश्न 6: धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है। यह गुण क्या कहलाता है?
उत्तर: आघातवर्ध्यता (Malleability)। सोना सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातु है।
प्रश्न 7: किन धातुओं को तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती?
उत्तर: वे धातुएं जो सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे हैं - कॉपर (Cu), सिल्वर (Ag), गोल्ड (Au), प्लेटिनम (Pt), मर्करी (Hg)।
प्रश्न 8: गैल्वनीकरण क्या है?
उत्तर: लोहे या इस्पात पर जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया गैल्वनीकरण कहलाती है। यह लोहे को जंग से बचाती है।
प्रश्न 9: एनोडीकरण क्या है?
उत्तर: एल्युमिनियम पर विद्युत अपघटन द्वारा एल्युमिनियम ऑक्साइड की मोटी परत चढ़ाने की प्रक्रिया एनोडीकरण कहलाती है। यह एल्युमिनियम को संक्षारण से बचाती है।
प्रश्न 10: ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक क्यों है?
उत्तर: ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु षट्कोणीय परतों में व्यवस्थित होते हैं। प्रत्येक परमाणु तीन अन्य परमाणुओं से बंधित होता है और एक इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है। ये मुक्त इलेक्ट्रॉन विद्युत चालन में सहायक होते हैं।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
धातुएं इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं
अधातुएं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं
धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं
अधातु ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं
सक्रियता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au > Pt
सोना सबसे अधिक तन्य और आघातवर्ध्य धातु है
चांदी विद्युत और ऊष्मा की सर्वोत्तम चालक है
पारा एकमात्र द्रव धातु है (कमरे के ताप पर)
ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है (कमरे के ताप पर)
हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है
ग्रेफाइट एकमात्र अधातु है जो विद्युत का सुचालक है
आयोडीन एकमात्र अधातु है जिसमें धात्विक चमक होती है
गतिविधि 1: धातुओं की अम्ल के साथ अभिक्रिया सामग्री: Zn, Mg, Fe, Cu, तनु HCl या H₂SO₄, परखनली प्रक्रिया: प्रत्येक धातु को अलग-अलग परखनली में लें और तनु अम्ल डालें। प्रेक्षण:
Mg और Zn - तेजी से H₂ गैस निकलती है
Fe - धीरे-धीरे H₂ गैस निकलती है
Cu - कोई अभिक्रिया नहीं
निष्कर्ष: धातुओं की सक्रियता: Mg > Zn > Fe > Cu
गतिविधि 2: विस्थापन अभिक्रिया सामग्री: Zn की पत्ती, CuSO₄ विलयन (नीला) प्रक्रिया: CuSO₄ विलयन में Zn की पत्ती डालें और कुछ समय प्रतीक्षा करें। प्रेक्षण:
नीला रंग धीरे-धीरे फीका पड़ता है
Zn की पत्ती पर लाल-भूरी परत चढ़ती है (Cu)
समीकरण: Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu↓ निष्कर्ष: Zn, Cu से अधिक क्रियाशील है
गतिविधि 3: धातु ऑक्साइड की प्रकृति सामग्री: Mg रिबन, लाल लिटमस पेपर प्रक्रिया:
Mg रिबन को जलाएं - सफेद MgO राख बनती है
राख को जल में घोलें
लाल लिटमस पेपर डुबोएं
प्रेक्षण: लाल लिटमस नीला हो जाता है निष्कर्ष: धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं
आरेख और चित्र
सारांश
धातु और अधातु तत्वों के दो मुख्य वर्ग हैं जो अपने भौतिक और रासायनिक गुणों में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। धातुएं सामान्यतः चमकीली, कठोर, विद्युत और ऊष्मा की सुचालक होती हैं, जबकि अधातुएं इन गुणों से रहित होती हैं। धातुओं की सक्रियता श्रेणी उनकी रासायनिक क्रियाशीलता को दर्शाती है। अयस्कों से धातुओं का निष्कर्षण धातुकर्म कहलाता है जिसमें सांद्रण, भर्जन/निस्तापन, अवकरण और परिष्करण जैसे चरण शामिल हैं। संक्षारण धातुओं के क्षय की प्रक्रिया है जिसे विभिन्न विधियों द्वारा रोका जा सकता है। मिश्रधातुएं दो या अधिक धातुओं के मिश्रण होते हैं जो विशेष गुण प्रदान करते हैं।
नियम: जो धातु सक्रियता श्रेणी में ऊपर है, वह नीचे वाली धातु को विस्थापित कर देती है।
धातुओं की सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)
सक्रियता श्रेणी: धातुओं को उनकी रासायनिक सक्रियता के घटते क्रम में व्यवस्थित करना।
सक्रियता श्रेणी का महत्व
विस्थापन अभिक्रिया: ऊपर की धातु नीचे की धातु को विस्थापित करती है
हाइड्रोजन से ऊपर: तनु अम्ल से H₂ विस्थापित करती हैं
हाइड्रोजन से नीचे: तनु अम्ल से H₂ विस्थापित नहीं करतीं
धातु निष्कर्षण: ऊपर की धातुओं को निकालना कठिन (अधिक ऊर्जा चाहिए)
याद रखने की ट्रिक: "Please Send Charlie's Monkeys And Zebras In Lead Hydrogen Cages Heavily Sealed, Gilded, Packed"
P - Potassium (K)
S - Sodium (Na)
C - Calcium (Ca)
M - Magnesium (Mg)
A - Aluminium (Al)
Z - Zinc (Zn)
I - Iron (Fe)
L - Lead (Pb)
H - Hydrogen (H)
C - Copper (Cu)
H - Mercury (Hg)
S - Silver (Ag)
G - Gold (Au)
P - Platinum (Pt)
अधातु (Non-Metals)
अधातुओं के भौतिक गुण
गुण
अधातु में
अपवाद
चमक
चमकहीन (Dull)
आयोडीन और ग्रेफाइट में चमक
कठोरता
भंगुर (Brittle)
हीरा (सबसे कठोर)
आघातवर्ध्यता
नहीं (टूट जाते हैं)
कोई नहीं
तन्यता
नहीं
कोई नहीं
विद्युत चालकता
कुचालक
ग्रेफाइट (सुचालक)
ऊष्मा चालकता
कुचालक
कोई नहीं
ध्वानिक गुण
नहीं
कोई नहीं
भौतिक अवस्था
ठोस, द्रव या गैस
ब्रोमीन (द्रव अधातु)
कार्बन के अपररूप:
हीरा: सबसे कठोर, विद्युत कुचालक, पारदर्शी
ग्रेफाइट: मुलायम, विद्युत सुचालक, काला (पेंसिल में उपयोग)
क्रोमियम लेपन: सजावटी वस्तुओं पर (Chromium Plating)
एनोडीकरण: एल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड परत
मिश्रधातु बनाना: स्टेनलेस स्टील (जंगरोधी)
गैल्वनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात पर जिंक की परत चढ़ाना। जिंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए पहले जिंक संक्षारित होता है और लोहे की रक्षा करता है।
उपयोग: लोहे की बाल्टी, पाइप, छत की चादरें
मिश्रधातु (Alloys)
मिश्रधातु: दो या दो से अधिक धातुओं (या धातु और अधातु) का समांगी मिश्रण।
मिश्रधातु बनाने के उद्देश्य
कठोरता बढ़ाना
संक्षारण प्रतिरोध बढ़ाना
गलनांक को परिवर्तित करना
रंग और चमक बढ़ाना
विशेष गुण प्राप्त करना
प्रमुख मिश्रधातुएं
मिश्रधातु
संघटक
उपयोग
स्टेनलेस स्टील
Fe (74%) + Cr (18%) + Ni (8%)
बर्तन, चाकू, सर्जिकल उपकरण
पीतल (Brass)
Cu (70%) + Zn (30%)
बर्तन, सजावटी सामान, संगीत वाद्य
कांस्य (Bronze)
Cu (90%) + Sn (10%)
मूर्तियां, सिक्के, घंटी
सोल्डर (Solder)
Pb (50%) + Sn (50%)
धातुओं को जोड़ना, विद्युत तार जोड़ना
मैग्नेलियम (Magnalium)
Al (95%) + Mg (5%)
हवाई जहाज, बस, कार के हिस्से
ड्यूरालुमिन
Al (94%) + Cu (4%) + Mn (1%) + Mg (1%)
हवाई जहाज के ढांचे
जर्मन सिल्वर
Cu (60%) + Zn (20%) + Ni (20%)
बर्तन, सजावटी सामान (चांदी जैसा)
अमलगम
Hg + अन्य धातु
दांतों की फिलिंग (Dental Amalgam)
सोने के आभूषण
Au (22 या 18 कैरेट) + Cu या Ag
आभूषण (कठोरता बढ़ाने के लिए)
गन मेटल
Cu (88%) + Sn (10%) + Zn (2%)
तोप, बंदूक, मशीन के पुर्जे
विशेष नोट:
24 कैरेट सोना: शुद्ध सोना (100%)
22 कैरेट सोना: 22/24 × 100 = 91.6% शुद्ध सोना
18 कैरेट सोना: 18/24 × 100 = 75% शुद्ध सोना
शुद्ध सोना बहुत मुलायम होता है, इसलिए आभूषण बनाने के लिए इसमें कॉपर या चांदी मिलाई जाती है।
दैनिक जीवन में धातु और अधातु
1. विद्युत तार
तांबा: विद्युत का अच्छा चालक, तन्य
एल्युमिनियम: हल्का, सस्ता, अच्छा चालक
2. बर्तन
एल्युमिनियम: हल्का, ऊष्मा का अच्छा चालक, जंगरोधी
स्टेनलेस स्टील: मजबूत, संक्षारण प्रतिरोधी
3. निर्माण कार्य
लोहा/इस्पात: इमारत, पुल, रेल की पटरी
एल्युमिनियम: खिड़की, दरवाजे के फ्रेम
4. आभूषण
सोना, चांदी: सुंदर, चमकदार, संक्षारण प्रतिरोधी
5. थर्मामीटर
पारा: कमरे के ताप पर द्रव, तापमान के साथ समान रूप से फैलता है
महत्वपूर्ण तथ्य
महत्वपूर्ण तथ्य और प्रश्नोत्तर
महत्वपूर्ण तथ्य (एक पंक्ति बिंदु)
धातुएं सामान्यतः इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं, जबकि अधातुएं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं।
धातु ऑक्साइड प्रायः क्षारीय या उभयधर्मी होते हैं, जबकि अधातु ऑक्साइड अधिकांशतः अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
सोना (Au) सबसे अधिक तन्य और आघातवर्ध्य धातु है, इसलिए इससे अत्यंत पतली चादर और बारीक तार बनाए जा सकते हैं।
चांदी (Ag) ऊष्मा और विद्युत की सर्वोत्तम सुचालक धातु मानी जाती है, परंतु तार सामान्यतः तांबे से बनाए जाते हैं क्योंकि यह सस्ता और पर्याप्त सुचालक है।
पारा (Hg) कमरे के ताप पर पाई जाने वाली एकमात्र द्रव धातु है, जबकि ब्रोमीन (Br) एकमात्र द्रव अधातु है।
ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होने वाली एकमात्र अधातु है; इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन परतों के बीच चलायमान रहते हैं।
हीरा कार्बन का अपररूप है और सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ माना जाता है।
अत्यधिक क्रियाशील धातुएं (K, Na, Ca, Mg, Al) विद्युत अपघटन द्वारा निकाली जाती हैं क्योंकि इन्हें कार्बन द्वारा अवकरित करना संभव नहीं होता।
मध्यम क्रियाशील धातुएं (Zn, Fe, Pb, Sn, Cu) के ऑक्साइडों का अवकरण कोक या कार्बन मोनोऑक्साइड द्वारा किया जाता है।
कम क्रियाशील धातुएं (Hg, Ag, Au, Pt) प्रायः मुक्त अवस्था में मिलती हैं तथा हल्की गर्मी या रोस्टिंग से प्राप्त की जा सकती हैं।
लोहे पर जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल (या नमी) दोनों की उपस्थिति अनिवार्य है।
गैल्वनीकरण में लोहे पर जिंक की परत चढ़ाई जाती है, जबकि एनोडीकरण में एल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड परत बनाई जाती है।
मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं अथवा धातु और अधातु का समांगी मिश्रण होता है; उदाहरण: स्टेनलेस स्टील, पीतल, कांस्य, सोल्डर।
संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Exam Focus)
प्रश्न 1: धातु और अधातु को उनके आयनिक व्यवहार के आधार पर परिभाषित कीजिए।
उत्तर: धातु ऐसे तत्व हैं जो रासायनिक अभिक्रियाओं में एक या अधिक इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाते हैं; जैसे Na → Na⁺ + e⁻, Ca → Ca²⁺ + 2e⁻ आदि। अधातु वे तत्व हैं जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाते हैं; जैसे Cl + e⁻ → Cl⁻, O + 2e⁻ → O²⁻। इसी कारण धातु इलेक्ट्रोपॉजिटिव और अधातु इलेक्ट्रोनिगेटिव कहलाते हैं।
प्रश्न 2: अत्यधिक क्रियाशील, मध्यम क्रियाशील और कम क्रियाशील धातुओं के उदाहरण लिखिए तथा उनके निष्कर्षण की सामान्य विधि बताइए।
उत्तर: (क) अत्यधिक क्रियाशील धातुएं: K, Na, Ca, Mg, Al – इन्हें उनके पिघले हुए लवणों के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त किया जाता है; जैसे NaCl (गलित) से Na। (ख) मध्यम क्रियाशील धातुएं: Zn, Fe, Pb, Sn, Cu – इनके ऑक्साइडों का अवकरण कोक या CO द्वारा किया जाता है। (ग) कम क्रियाशील धातुएं: Hg, Ag, Au, Pt – इनके अयस्कों को रोस्टिंग या हल्की गर्मी से सीधे धातु में बदला जा सकता है।
प्रश्न 3: धातुओं की सक्रियता श्रेणी का दो महत्वपूर्ण उपयोग लिखिए।
उत्तर: (क) किसी धातु द्वारा अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापन की भविष्यवाणी करने के लिए; हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएं तनु अम्ल से H₂ गैस निकालती हैं, नीचे वाली नहीं। (ख) यह जानने के लिए कि कौन‑सी धातु किसी अन्य धातु के लवण विलयन से उसे विस्थापित कर पाएगी; सक्रियता श्रेणी में ऊपर स्थित धातु नीचे स्थित धातु को उसके लवण से विस्थापित कर देती है।
प्रश्न 4: जंग रोकने के दो भौतिक तथा दो रासायनिक उपाय लिखिए।
उत्तर: भौतिक उपाय: (क) लोहे की सतह पर पेंट, तेल या ग्रीस लगाना, (ख) प्लास्टिक या एनामेल कोटिंग करना ताकि वायु और नमी सीधे धातु तक न पहुँच सकें। रासायनिक उपाय: (क) गैल्वनीकरण द्वारा लोहे पर जिंक की बलि परत चढ़ाना, (ख) क्रोमियम प्लेटिंग या स्टेनलेस स्टील जैसी मिश्रधातु बनाकर धातु की संक्षारण‑प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना।
प्रश्न 5: मिश्रधातु बनाने के दो प्रमुख लाभ उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: (क) मिश्रधातु बनाने से धातुओं की कठोरता और संक्षारण‑प्रतिरोध बढ़ता है; जैसे स्टेनलेस स्टील (Fe + Cr + Ni) साधारण लोहे से अधिक जंगरोधी और मजबूत है। (ख) विशेष गुण प्राप्त किए जा सकते हैं; जैसे Pb–Sn सोल्डर का गलनांक कम होने से यह विद्युत तारों को जोड़ने के लिए उपयुक्त है, जबकि शुद्ध Pb या Sn उतना प्रभावी नहीं होता।
प्रयोगात्मक गतिविधियां
गतिविधि 1: धातुओं की अम्ल के साथ अभिक्रियाशीलता
उद्देश्य: Mg, Zn, Fe और Cu की तनु HCl के साथ अभिक्रियाशीलता की तुलना करना।
सामग्री: मैग्नीशियम रिबन, जिंक ग्रैन्यूल, लोहे की कील, तांबे की तार, तनु HCl, चार परखनलियाँ, डिलीवरी ट्यूब, साबुन घोल, स्टैंड।
प्रक्रिया: प्रत्येक परखनली में अलग‑अलग धातु का छोटा टुकड़ा लें। सभी में समान मात्रा में तनु HCl डालें। निकलती गैस को डिलीवरी ट्यूब द्वारा साबुन घोल में प्रवाहित करें और बने बुलबुलों के पास जलती माचिस/तीली ले जाकर H₂ गैस की पहचान कीजिए।
प्रेक्षण: मैग्नीशियम में सबसे तीव्र गति से गैस निकलती है और अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है। जिंक में उससे कम, लोहे में और मंद गैस निकलती है, जबकि तांबे के साथ कोई दृश्यमान अभिक्रिया नहीं होती।
निष्कर्ष: सक्रियता क्रम: Mg > Zn > Fe > Cu। जितनी अधिक सक्रिय धातु होगी, उतनी ही तीव्रता से HCl के साथ अभिक्रिया करके H₂ गैस उत्पन्न करेगी।
गतिविधि 2: विस्थापन अभिक्रिया द्वारा सक्रियता श्रेणी का प्रदर्शन
उद्देश्य: यह दिखाना कि अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
सामग्री: CuSO₄ का नीला विलयन, Zn की पट्टी, Fe की कील, दो परखनलियाँ।
प्रक्रिया: पहली परखनली में CuSO₄ विलयन लें और उसमें जिंक की पट्टी डालें। दूसरी परखनली में CuSO₄ विलयन लेकर उसमें लोहे की कील डालें। दोनों को कुछ समय तक स्थिर रखें और रंग तथा धातु की सतह के परिवर्तन को देखें।
प्रेक्षण: Zn वाली परखनली में नीला रंग धीरे‑धीरे फीका होता है और Zn पर लाल‑भूरे रंग की कॉपर की परत जम जाती है। Fe वाली परखनली में भी समय के साथ Cu की परत दिखती है। Cu को ZnSO₄ या FeSO₄ में डालने पर कोई परिवर्तन नहीं होता।
निष्कर्ष: Zn और Fe, Cu से अधिक क्रियाशील हैं, इसलिए वे Cu²⁺ आयन को विस्थापित कर सकते हैं। सक्रियता श्रेणी में ऊपर की धातु नीचे की धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।
गतिविधि 3: धातु ऑक्साइड की प्रकृति की जाँच
उद्देश्य: MgO जैसे धातु ऑक्साइड के विलयन की अम्ल‑क्षार प्रकृति निर्धारित करना।
सामग्री: मैग्नीशियम रिबन, बन्सन बर्नर/स्पिरिट लैम्प, क्रूसिबल या चीनी प्लेट, जल, बीकर, कांच की रॉड, लाल और नीला लिटमस पेपर।
प्रक्रिया: मैग्नीशियम रिबन को ज्वाला में जलाएँ और बनने वाली सफेद MgO राख को चीनी प्लेट पर इकट्ठा करें। इसे थोड़े से जल में घोलकर Mg(OH)₂ का विलयन तैयार करें। अब इसमें लाल और नीले लिटमस पेपर डुबोकर रंग परिवर्तन देखें।
प्रेक्षण: लाल लिटमस नीला हो जाता है, जबकि नीले लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं होता। इससे विलयन क्षारीय सिद्ध होता है।
निष्कर्ष: धातु ऑक्साइड प्रायः क्षारीय प्रकृति के होते हैं और जल में घुलकर धातु हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं, जो क्षार हैं।
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