राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) – Directive Principles of State Policy | भाग 4 | संविधान के अनुच्छेद 36 से 51

📅 रविवार, 7 दिसंबर 2025 📖 3-5 min read
राज्य के नीति निदेशक तत्व DPSP Article 36-51 | UPSC RAS Notes

राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)

राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) भारतीय संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं। ये राज्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं जो कानून बनाते समय ध्यान में रखे जाने चाहिए।

परिभाषा और प्रकृति

Article 36: इस भाग में "राज्य" का वही अर्थ है जो Article 12 में है।

Article 37: इस भाग में दिए गए उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे, किन्तु फिर भी देश के शासन में ये तत्व मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।

मुख्य बिंदु: DPSP Non-Justiciable हैं (न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं), लेकिन देश के शासन में मूलभूत हैं। प्रेरणा: आयरलैंड का संविधान 1937।

DPSP का वर्गीकरण

श्रेणी मुख्य अनुच्छेद विषय
समाजवादी सिद्धांत 38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47 आर्थिक-सामाजिक न्याय, श्रमिक अधिकार
गांधीवादी सिद्धांत 40, 43, 43B, 46, 47, 48 ग्राम पंचायत, कुटीर उद्योग, गौ-रक्षा
उदारवादी सिद्धांत 44, 45, 48A, 49, 50, 51 UCC, शिक्षा, पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय शांति

समाजवादी सिद्धांत

Article 38: लोक कल्याण की अभिवृद्धि

राज्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से युक्त सामाजिक व्यवस्था का संरक्षण करेगा। Article 38(2) - आय की असमानता कम करना (44वां संशोधन 1978)।

Article 39: राज्य की नीति के तत्व

  • (a) सभी को जीविका के साधन
  • (b) संसाधनों का समान वितरण
  • (c) धन का संकेंद्रण न हो
  • (d) समान कार्य समान वेतन
  • (e) श्रमिकों के स्वास्थ्य की रक्षा
  • (f) बच्चों का स्वस्थ विकास (42वां संशोधन)

Article 39A: निःशुल्क विधिक सहायता

42वां संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया। Legal Services Authorities Act 1987। NALSA की स्थापना।

Article 41: काम, शिक्षा, लोक सहायता

बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी में सहायता। MGNREGA 2005 इसी का कार्यान्वयन है।

Article 42: काम की दशाएं और प्रसूति सहायता

Maternity Benefit Act 1961, Factories Act 1948, Minimum Wages Act 1948।

Article 43: निर्वाह मजदूरी और कुटीर उद्योग

Living wage का प्रावधान। ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग। KVIC, Coir Board।

Article 43A: उद्योगों में श्रमिकों की भागीदारी

42वां संशोधन 1976। Industrial Democracy। Works Committee का प्रावधान।

Article 47: पोषाहार और स्वास्थ्य

जीवन स्तर सुधार। मादक पेयों का प्रतिषेध। गुजरात, बिहार आदि में शराबबंदी।

गांधीवादी सिद्धांत

Article 40: ग्राम पंचायतों का संगठन

73वां संविधान संशोधन 1992 द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा। Part IX (Article 243-243O) जोड़ा गया।

Article 43B: सहकारी समितियां

97वां संशोधन 2011। Part IXB जोड़ा गया। सहकारिता को मूल कर्तव्य में भी जोड़ा।

Article 46: SC/ST और दुर्बल वर्गों का हित

शिक्षा और आर्थिक संरक्षण। SC/ST Prevention of Atrocities Act 1989। आरक्षण व्यवस्था।

Article 48: कृषि, पशुपालन और गौ-रक्षा

आधुनिक कृषि। गायों का वध प्रतिषेध। अधिकांश राज्यों में गौ-हत्या पर प्रतिबंध।

उदारवादी सिद्धांत

Article 44: समान नागरिक संहिता (UCC)

सभी नागरिकों के लिए एक समान civil law। वर्तमान में गोवा (1867 से) और उत्तराखंड (2024) में लागू। Shah Bano Case 1985, Triple Talaq Case 2017।

Article 45: बालकों की शिक्षा

मूल: 14 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा। 86वां संशोधन 2002 के बाद: 6 वर्ष से कम के लिए Early Childhood Care। Article 21A (6-14 वर्ष) अब मूल अधिकार है।

Article 48A: पर्यावरण संरक्षण

42वां संशोधन 1976। वन और वन्य जीव संरक्षण। Wildlife Act 1972, Forest Conservation Act 1980, Environment Protection Act 1986, National Green Tribunal Act 2010।

Article 49: राष्ट्रीय स्मारकों का संरक्षण

Ancient Monuments Act 1958। Archaeological Survey of India (ASI)।

Article 50: न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण

Separation of Powers। CrPC 1973 में Judicial और Executive Magistrates अलग किए गए।

Article 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति

अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा। अंतर्राष्ट्रीय विधि का सम्मान। पंचशील, गुटनिरपेक्षता का आधार।

FR vs DPSP तुलना

आधार मूल अधिकार DPSP
भाग भाग 3 (12-35) भाग 4 (36-51)
प्रकृति Justiciable Non-Justiciable
उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र
चरित्र नकारात्मक सकारात्मक
संशोधन कठिन सरल

महत्वपूर्ण संविधान संशोधन

संशोधन वर्ष प्रावधान
25वां 1971 Article 31C जोड़ा - 39(b), 39(c) को FR से ऊपर
42वां 1976 Article 39A, 43A, 48A जोड़े। 31C का विस्तार
44वां 1978 Article 38(2) जोड़ा
86वां 2002 Article 45 संशोधन, Article 21A जोड़ा
97वां 2011 Article 43B जोड़ा, Part IXB

Article 31C की कहानी

25वां संशोधन 1971 में Article 31C जोड़ा गया - Article 39(b) और 39(c) को लागू करने वाले कानूनों को Article 14, 19 से चुनौती नहीं दी जा सकती।

42वां संशोधन 1976 ने इसे सभी DPSP (36-51) तक विस्तारित किया।

Minerva Mills Case 1980: सुप्रीम कोर्ट ने 42वें संशोधन द्वारा किए गए विस्तार को असंवैधानिक घोषित किया। अब Article 31C केवल 39(b) और 39(c) तक सीमित है।

महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

1. Champakam Dorairajan Case (1951)

FR और DPSP में संघर्ष हो तो FR को वरीयता। इसके बाद 1st Amendment लाया गया।

2. Kesavananda Bharati Case (1973)

Basic Structure Doctrine। संसद मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं कर सकती।

3. Minerva Mills Case (1980)

सबसे महत्वपूर्ण: "FR और DPSP संविधान के दो पहिये हैं। दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।" 42वें संशोधन का कुछ हिस्सा असंवैधानिक।

4. Unni Krishnan Case (1993)

Article 45 को Article 21 का हिस्सा माना। शिक्षा मूल अधिकार है।

5. Shah Bano Case (1985)

Supreme Court ने UCC (Article 44) लागू करने की सिफारिश की।

कार्यान्वयन

DPSP कानून/योजना वर्ष
39Equal Remuneration Act1976
39ALegal Services Authorities Act1987
4073वां संशोधन (पंचायती राज)1992
41MGNREGA2005
42Maternity Benefit Act1961
43Minimum Wages Act1948
45RTE Act2009
48AEnvironment Protection Act1986

अनुच्छेदवार सारांश

अनुच्छेदविषय
36राज्य की परिभाषा
37Non-justiciable but fundamental
38लोक कल्याण, सामाजिक न्याय
396 खंड - समान वेतन, संसाधन वितरण
39Aनिःशुल्क कानूनी सहायता (42वां)
40ग्राम पंचायत (73वां संशोधन)
41काम, शिक्षा, सहायता
42काम की दशाएं, प्रसूति
43निर्वाह मजदूरी, कुटीर उद्योग
43Aश्रमिकों की भागीदारी (42वां)
43Bसहकारिता (97वां संशोधन)
44समान नागरिक संहिता (UCC)
456 वर्ष से कम शिक्षा
46SC/ST का हित
47पोषाहार, स्वास्थ्य, शराबबंदी
48कृषि, गौ-रक्षा
48Aपर्यावरण (42वां संशोधन)
49राष्ट्रीय स्मारक
50न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण
51अंतर्राष्ट्रीय शांति

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

याद रखें:

  • DPSP के 3 प्रकार: समाजवादी, गांधीवादी, उदारवादी
  • महत्वपूर्ण संशोधन: 25वां (31C), 42वां (39A, 43A, 48A), 44वां (38(2)), 86वां (45), 97वां (43B)
  • Landmark Cases: Champakam, Kesavananda, Minerva Mills, Unni Krishnan
  • Article 31C की पूरी कहानी
  • UCC - गोवा (1867), उत्तराखंड (2024)
  • FR vs DPSP तुलना

FAQs

Q: DPSP की प्रकृति क्या है?

A: Non-Justiciable (न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं) लेकिन देश के शासन में मूलभूत।

Q: DPSP किससे प्रेरित हैं?

A: आयरलैंड के संविधान 1937 से।

Q: Article 44 क्या है?

A: समान नागरिक संहिता (UCC) - सभी नागरिकों के लिए एक समान civil law।

Q: Minerva Mills Case का महत्व?

A: "FR और DPSP दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।" Article 31C का विस्तार असंवैधानिक।

निष्कर्ष

DPSP भारतीय संविधान की अनूठी विशेषता हैं। ये सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की नींव हैं। हालांकि ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन कल्याणकारी राज्य बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

Minerva Mills Case ने स्पष्ट किया कि FR और DPSP परस्पर पूरक हैं। पिछले 75 वर्षों में MGNREGA, RTE Act, NALSA, पंचायती राज आदि के माध्यम से इन्हें लागू किया गया है।

परीक्षा में: DPSP से 3-5 प्रश्न निश्चित हैं। महत्वपूर्ण संशोधन, Cases, Article 31C, UCC पर विशेष ध्यान दें।

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भारतीय संविधान Complete Notes | UPSC • RAS • RPSC • SSC
Article 2/67 | Last Updated: December 2024

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