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महात्मा गांधी जीवनी | Mahatma Gandhi Biography UPSC

📅 सोमवार, 26 जनवरी 2026 📖 3-5 min read
महात्मा गांधी: संपूर्ण जीवन परिचय और इतिहास (1869-1948) | UPSC, RPSC, SSC

महात्मा गांधी

Mohandas Karamchand Gandhi (1869-1948)

🎓 परीक्षा उपयोगी: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 1915 से 1948 तक के कालखंड को 'गांधी युग' (Gandhian Era) कहा जाता है। UPSC, RPSC, SSC सभी परीक्षाओं में इस टॉपिक से प्रश्न पूछे जाते हैं।

प्रस्तावना

मोहनदास करमचंद गांधी (अंग्रेज़ी: Mohandas Karamchand Gandhi), जिन्हें विश्व 'महात्मा गांधी' के नाम से जानता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सर्वाधिक प्रभावशाली नेता, दार्शनिक, समाज सुधारक और अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांतकार थे। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। गांधीजी ने अपने जीवन में सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि विश्व भर में सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की लड़ाई के लिए एक नई राह दिखाई।

भारतीय इतिहास में 1915 से 1948 तक के कालखंड को 'गांधी युग' (Gandhian Era) के रूप में जाना जाता है। इस काल में गांधीजी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया और जनसामान्य इसमें व्यापक रूप से शामिल हुए। उनके द्वारा प्रतिपादित सत्याग्रह, असहयोग और सविनय अवज्ञा के सिद्धांतों ने न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में उत्पीड़ितों को संघर्ष का एक नया मार्ग दिखाया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा (1869-1893)

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में स्थित पोरबंदर रियासत में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर राज्य के दीवान (प्रधानमंत्री) थे और माता पुतलीबाई एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। गांधी परिवार वैष्णव संप्रदाय से संबंधित था और जैन धर्म के सिद्धांतों — विशेषकर अहिंसा, शाकाहार और आत्मशुद्धि — से गहराई से प्रभावित था।

इंग्लैंड में कानून की शिक्षा (1888-1891)

परिवार के एक मित्र की सलाह पर गांधीजी ने कानून (बैरिस्टर) की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड जाने का निर्णय लिया। 4 सितंबर 1888 को वे बॉम्बे (अब मुंबई) से लंदन के लिए रवाना हुए। लंदन में रहते हुए उन्होंने अपनी माता को दिए गए वचन का पालन करते हुए शाकाहार, मद्यपान और मांसाहार से परहेज किया।

1891 में गांधीजी ने बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की और भारत लौट आए। वे मुंबई में वकालत करने का प्रयास किया, परंतु अनुभव की कमी और संकोची स्वभाव के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष (1893-1914)

पीटरमैरिट्जबर्ग घटना — जीवन का निर्णायक मोड़

1893 में गांधीजी को दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी नामक एक भारतीय फर्म के कानूनी मामले में सहायता के लिए दक्षिण अफ्रीका बुलाया गया। यह यात्रा उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर एक यादगार घटना घटी जिसने गांधीजी के जीवन की दिशा ही बदल दी। उनके पास प्रथम श्रेणी का वैध टिकट होने के बावजूद एक गोरे यात्री ने उनसे डिब्बा खाली करने को कहा। गांधीजी के इनकार करने पर उन्हें रात के समय ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया। इस अपमानजनक घटना ने उनमें रंगभेद और नस्लीय भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करने का दृढ़ संकल्प जगाया।

"उस रात मैंने अपने अपमान को सहन करने या उसके विरुद्ध खड़े होने के बीच चयन किया। मैंने संघर्ष का मार्ग चुना। वह रात मेरे जीवन की सबसे रचनात्मक रातों में से एक साबित हुई।"

— महात्मा गांधी

सत्याग्रह का जन्म (1906)

1906 में ट्रांसवाल सरकार ने एक नया कानून 'एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट' पारित किया। इस अपमानजनक कानून के विरोध में गांधीजी ने एक नए प्रकार के अहिंसक प्रतिरोध की शुरुआत की, जिसे उन्होंने 'सत्याग्रह' नाम दिया।

सत्याग्रह का अर्थ है: सत्य के लिए आग्रह या सत्य का दुराग्रह। इसकी मुख्य विशेषताएं थीं:

  • अहिंसा: किसी भी परिस्थिति में हिंसा का प्रयोग न करना
  • सत्य: हमेशा सत्य का पालन करना
  • आत्म-पीड़न: स्वयं कष्ट सहना लेकिन दूसरों को कष्ट न पहुंचाना

भारत वापसी और प्रारंभिक आंदोलन (1915-1919)

भारत आगमन (9 जनवरी 1915)

दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्षों तक रहने के बाद गांधीजी 9 जनवरी 1915 को भारत लौटे। उनकी वापसी एक विजेता की तरह हुई। भारत सरकार इस दिन को 'प्रवासी भारतीय दिवस' के रूप में मनाती है।

चंपारण सत्याग्रह (1917) — भारत में प्रथम सत्याग्रह

चंपारण सत्याग्रह (1917) गांधीजी का भारत में पहला बड़ा सत्याग्रह आंदोलन था। यह बिहार के चंपारण जिले में नील की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं से संबंधित था। ब्रिटिश बागान मालिक किसानों को 'तिनकठिया प्रथा' के तहत अपनी जमीन के 3/20 हिस्से में अनिवार्य रूप से नील की खेती करने के लिए बाध्य करते थे।

राजकुमार शुक्ल नामक एक किसान ने गांधीजी को चंपारण आने का आग्रह किया। अप्रैल 1917 में गांधीजी चंपारण पहुंचे। इस सत्याग्रह के परिणामस्वरूप तिनकठिया प्रथा समाप्त हो गई।

खेड़ा सत्याग्रह (1918)

1918 में गुजरात के खेड़ा जिले में भयंकर अकाल पड़ा। गांधीजी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ मिलकर किसानों को लगान न देने की सलाह दी। अंततः सरकार को झुकना पड़ा और गरीब किसानों का लगान माफ कर दिया गया।

जन आंदोलनों का दौर (1920-1947)

असहयोग आंदोलन (1920-1922)

1 अगस्त 1920 को गांधीजी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का पहला जन आंदोलन था। इस आंदोलन के मुख्य कार्यक्रम थे:

  • सरकारी उपाधियों और पदों का त्याग
  • सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और न्यायालयों का बहिष्कार
  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी अपनाना
  • चरखा चलाकर खादी वस्त्र बनाना और पहनना

चौरी चौरा कांड (5 फरवरी 1922)

5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चौरी चौरा नामक स्थान पर एक भीड़ ने पुलिस चौकी में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए। यह हिंसक घटना गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत के विपरीत थी। 12 फरवरी 1922 को गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल स्थगित कर दिया।

दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)

12 मार्च 1930 को गांधीजी ने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 385 किलोमीटर (240 मील) की पैदल यात्रा शुरू की। इस यात्रा का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए नमक कर का विरोध करना था।

6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने दांडी के समुद्र तट पर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा। इस प्रतीकात्मक कार्य ने पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत कर दी।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942) — 'करो या मरो'

8 अगस्त 1942 को बंबई (मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किया गया। गांधीजी ने अपने भाषण में 'करो या मरो' (Do or Die) का ऐतिहासिक नारा दिया।

"यहां एक मंत्र है, एक छोटा सा मंत्र जो मैं आपको देता हूं। इस मंत्र को आप अपने हृदय में अंकित कर लें और अपनी हर सांस के साथ इसे जीवित रखें। वह मंत्र है 'करो या मरो'। हम या तो भारत को स्वतंत्र कराएंगे या इस प्रयास में अपनी जान दे देंगे।"

— महात्मा गांधी, 8 अगस्त 1942

शहादत और विरासत (1948)

अंतिम उपवास और शहादत

30 जनवरी 1948 को शाम 5:17 बजे नई दिल्ली के बिड़ला हाउस (अब गांधी स्मृति) में नाथूराम गोडसे नामक एक कट्टरपंथी हिंदू ने गांधीजी को गोली मारकर हत्या कर दी। उनके अंतिम शब्द 'हे राम' थे।

वैश्विक प्रभाव और विरासत

महात्मा गांधी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उनके अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों ने विश्व भर के स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित किया:

  • मार्टिन लूथर किंग जूनियर (अमेरिका) — नागरिक अधिकार आंदोलन
  • नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका) — रंगभेद विरोधी संघर्ष
  • आंग सान सू की (म्यांमार) — लोकतंत्र आंदोलन

संयुक्त राष्ट्र ने गांधीजी के जन्मदिन 2 अक्टूबर को 'अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस' (International Day of Non-Violence) घोषित किया है।

गांधीवादी दर्शन और सिद्धांत

प्रमुख सिद्धांत

1. सत्य (Truth)

गांधीजी के जीवन दर्शन का मूल आधार सत्य था। उनका मानना था कि ईश्वर ही सत्य है और सत्य ही ईश्वर है। उन्होंने अपनी आत्मकथा का शीर्षक 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' रखा।

2. अहिंसा (Non-Violence)

अहिंसा गांधीवादी दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। गांधीजी का मानना था कि अहिंसा केवल हिंसा न करना नहीं है, बल्कि विरोधी के प्रति भी प्रेम और करुणा रखना है।

3. सत्याग्रह (Satyagraha)

सत्याग्रह का अर्थ है 'सत्य का आग्रह'। यह गांधीजी द्वारा विकसित एक अहिंसक प्रतिरोध की विधि थी। सत्याग्रह के तीन मुख्य रूप थे: असहयोग, सविनय अवज्ञा और उपवास

4. स्वदेशी और आर्थिक स्वावलंबन

गांधीजी स्वदेशी के प्रबल समर्थक थे। चरखा और खादी उनके स्वदेशी अभियान के प्रतीक बन गए। उन्होंने ग्राम स्वराज और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया।

परीक्षा उपयोगी: प्रमुख तिथियां और तथ्य

महत्वपूर्ण तिथियां (कालक्रम)

वर्ष प्रमुख घटना
1869 2 अक्टूबर — पोरबंदर, गुजरात में जन्म
1888 कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए
1893 दक्षिण अफ्रीका प्रस्थान; पीटरमैरिट्जबर्ग घटना
1894 नटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना
1906 दक्षिण अफ्रीका में प्रथम सत्याग्रह
1909 'हिन्द स्वराज' पुस्तक की रचना
1915 9 जनवरी — भारत वापसी (प्रवासी भारतीय दिवस)
1917 चंपारण सत्याग्रह — भारत में प्रथम सत्याग्रह
1918 खेड़ा सत्याग्रह; अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन
1919 रॉलेट एक्ट विरोध; जलियांवाला बाग हत्याकांड
1920 1 अगस्त — असहयोग आंदोलन शुरू
1922 5 फरवरी — चौरी चौरा कांड; असहयोग आंदोलन स्थगित
1924 बेलगाम अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष (एकमात्र बार)
1930 12 मार्च — दांडी यात्रा; 6 अप्रैल — नमक कानून तोड़ा
1931 5 मार्च — गांधी-इरविन समझौता
1932 24 सितंबर — पूना पैक्ट (डॉ. अम्बेडकर के साथ)
1942 8 अगस्त — भारत छोड़ो आंदोलन ('करो या मरो')
1947 15 अगस्त — भारत स्वतंत्र (विभाजन के साथ)
1948 30 जनवरी — नाथूराम गोडसे द्वारा हत्या

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि किसने और कब दी?
उत्तर: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1917 में चंपारण सत्याग्रह के दौरान गांधीजी को 'महात्मा' (महान आत्मा) की उपाधि दी।
प्रश्न 2: गांधीजी को 'राष्ट्रपिता' किसने कहा?
उत्तर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर रेडियो से प्रसारण के दौरान सर्वप्रथम गांधीजी को 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया।
प्रश्न 3: भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह कौन सा था?
उत्तर: चंपारण सत्याग्रह (1917, बिहार) भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह था। यह नील की खेती करने वाले किसानों के समर्थन में किया गया था।
प्रश्न 4: चौरी चौरा कांड के बाद गांधीजी ने क्या किया?
उत्तर: 5 फरवरी 1922 को चौरी चौरा में हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को तुरंत स्थगित कर दिया क्योंकि यह घटना अहिंसा के सिद्धांत के विरुद्ध थी।
प्रश्न 5: दांडी यात्रा कितनी दूरी की थी और कितने दिन चली?
उत्तर: दांडी यात्रा 385 किलोमीटर (240 मील) की थी जो 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 तक (24 दिन) चली। गांधीजी ने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से शुरू करके दांडी (गुजरात) तक पैदल यात्रा की।
प्रश्न 6: 'करो या मरो' का नारा कब दिया गया?
उत्तर: 8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत करते समय गांधीजी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का ऐतिहासिक नारा दिया।
प्रश्न 7: गांधीजी की हत्या किसने और कब की?
उत्तर: 30 जनवरी 1948 को शाम 5:17 बजे नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में नाथूराम गोडसे नामक एक कट्टरपंथी हिंदू ने गांधीजी को गोली मारकर हत्या कर दी। इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
प्रश्न 8: 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। उनके सम्मान में और प्रवासी भारतीयों के योगदान को मान्यता देने के लिए 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Divas) मनाया जाता है।

Previous Year Questions (UPSC/RPSC/SSC)

UPSC सिविल सेवा परीक्षा

  1. गांधीजी ने चंपारण के नील की खेती करने वाले किसानों की समस्याओं की जांच किस वर्ष की? (UPSC 2010)

    उत्तर: 1917

  2. गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष हुआ? (UPSC 2013)

    उत्तर: 1931 (5 मार्च)

  3. भारत छोड़ो आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? (UPSC 2019)

    उत्तर: यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ और 'करो या मरो' इसका मुख्य नारा था।

RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग)

  1. गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में कितने वर्ष रहे? (RPSC 2018)

    उत्तर: 21 वर्ष (1893-1914)

  2. असहयोग आंदोलन किस घटना के कारण स्थगित किया गया? (RPSC 2021)

    उत्तर: चौरी चौरा कांड (5 फरवरी 1922, गोरखपुर)

SSC (कर्मचारी चयन आयोग)

  1. महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा किस भाषा में लिखी? (SSC CGL 2019)

    उत्तर: गुजराती

  2. सविनय अवज्ञा आंदोलन किस घटना से शुरू हुआ? (SSC CHSL 2020)

    उत्तर: दांडी मार्च और नमक कानून का उल्लंघन (6 अप्रैल 1930)

निष्कर्ष

महात्मा गांधी केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता नहीं थे, बल्कि वे एक युगद्रष्टा, दार्शनिक और मानवता के मार्गदर्शक थे। उन्होंने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि हिंसा के बिना भी सबसे शक्तिशाली साम्राज्य को परास्त किया जा सकता है।

आज जब विश्व हिंसा, असहिष्णुता और विभाजन से जूझ रहा है, गांधीजी के अहिंसा, सत्य और सर्वधर्म समभाव के संदेश की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

"मेरा जीवन ही मेरा संदेश है।"

— महात्मा गांधी

Tags: महात्मा गांधी गांधी युग सत्याग्रह असहयोग आंदोलन दांडी मार्च भारत छोड़ो आंदोलन UPSC History RPSC Preparation SSC Modern History

अस्वीकरण: यह सामग्री केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। सभी तथ्य NCERT और विश्वसनीय स्रोतों से लिए गए हैं।

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Last Updated: 25 January 2026

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