राजस्थान में विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था का वार्षिक संचालन केवल तिथियों का प्रश्न नहीं होता, बल्कि यह प्रवेश, अध्यापन, अवकाश, मूल्यांकन, प्रार्थना सभा, विद्यालय प्रबंधन, समय-सारिणी, समावेशन, स्वच्छता, समुदाय सहभागिता और प्रशासनिक अनुशासन का संयुक्त ढांचा भी होता है। इसी समग्र दृष्टि से शिविरा पंचांग 2026-27 अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में सामने आता है।
यह सामग्री राजस्थान के प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अधीन संचालित विद्यालयों के लिए सत्र 2026-27 की मूल दिशा निर्धारित करती है। इसमें सत्रारम्भ, प्रवेशोत्सव, प्रवेश की अंतिम तिथियां, अवकाश, विद्यालय संचालन समय, एक पारी व दो पारी व्यवस्था, प्रार्थना सभा, विद्यालय प्रबंधन, समेकित योजना और शैक्षणिक अनुशासन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।
यह प्रस्तुति राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिविरा पंचांग 2026-27 में उल्लिखित निर्देशों, तिथियों और प्रावधानों पर आधारित है। इस पंचांग के अनुसार ही विद्यालयी कार्यक्रम, अवकाश, परीक्षा, खेलकूद प्रतियोगिताएं तथा अन्य शैक्षणिक और सहशैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाना अपेक्षित है।
यदि किसी विशेष अवसर, स्थानीय परिस्थिति या संस्थागत आवश्यकता के कारण परिवर्तन आवश्यक हो, तो वह संबंधित सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के बाद ही किया जा सकता है। इसलिए संस्था प्रधान, शिक्षक, कार्यालय कर्मी, विद्यालय प्रबंधन समितियां तथा संबंधित शिक्षा अधिकारी इस पंचांग को सत्रीय कार्ययोजना के मूल दस्तावेज के रूप में देखें।
- शैक्षणिक सत्र 2026-27 का प्रारम्भ 01 अप्रैल 2026 से माना गया है।
- सामान्य प्रवेश प्रक्रिया तथा नियमित कक्षा शिक्षण भी 01 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ होगा।
- प्रवेशोत्सव का प्रथम चरण 01 अप्रैल 2026 से 25 अप्रैल 2026 तक रहेगा।
- कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2026 निर्धारित है।
- ग्रीष्मावकाश 17 मई 2026 से 20 जून 2026 तक रहेगा।
- मध्यावधि अवकाश 04 नवम्बर 2026 से 15 नवम्बर 2026 तक रहेगा।
- शीतकालीन अवकाश 31 दिसम्बर 2026 से 10 जनवरी 2027 तक रहेगा।
- एक पारी विद्यालयों के लिए ग्रीष्मकाल और शीतकाल की अलग-अलग समय-सारिणी लागू रहेगी।
- दो पारी विद्यालयों के लिए कक्षा-स्तरानुसार अलग संचालन व्यवस्था निर्धारित की गई है।
- प्रार्थना सभा, विद्यालय प्रबंधन, SMC/SDMC और शैक्षणिक अनुशासन को भी पंचांग में स्पष्ट महत्व दिया गया है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 दिनांक 01 अप्रैल 2026 से आरम्भ माना गया है। सामान्य प्रवेश प्रक्रिया एवं नियमित कक्षा शिक्षण भी इसी तिथि से प्रारम्भ होगा। प्रवेशोत्सव का प्रथम चरण 01 अप्रैल 2026 से 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा।
कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के प्रवेश की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। व्यावसायिक शिक्षा संचालित विद्यालयों में योजनाओं के प्रचार-प्रसार तथा नवीन विद्यार्थियों के प्रवेश हेतु काउंसलिंग कार्य 21 जून 2026 से 30 जून 2026 तक किया जाएगा।
अनामांकित, ड्रॉपआउट तथा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है। वार्षिक अथवा बोर्ड परीक्षा की अंतिम परीक्षा समाप्त होने के बाद विद्यार्थियों को अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश दिए जाने का भी प्रावधान है।
मध्यावधि अवकाश 04 नवम्बर 2026 से 15 नवम्बर 2026, शीतकालीन अवकाश 31 दिसम्बर 2026 से 10 जनवरी 2027 तथा ग्रीष्मावकाश 17 मई 2026 से 20 जून 2026 तक रहेगा। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समस्त राष्ट्र के लिए घोषित अवकाश विद्यालयों में भी मान्य होंगे।
यदि किसी विशेष वर्ग, क्षेत्र अथवा कारण के आधार पर कोई स्थानीय अथवा क्षेत्रीय अवकाश घोषित किया जाता है, तो वह केवल संबंधित विद्यालयों या क्षेत्रों पर ही लागू होगा। यदि शिविरा पंचांग और राज्य सरकार के पंचांग की समान अवकाश तिथि में कोई विसंगति हो, तो राज्य सरकार के पंचांग की तिथि को मान्य माना जाएगा।
सत्रारम्भ एवं सत्रांत से संबंधित संस्था प्रधान वाक्पीठ का आयोजन पंचांग में निर्दिष्ट अवधि में ही किया जाना आवश्यक होगा। बिना सक्षम स्वीकृति किसी प्रकार का परिवर्तन मान्य नहीं होगा।
बाल सभाओं तथा सामुदायिक बैठकों में बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध, सड़क सुरक्षा तथा सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर चर्चा का प्रावधान रखा गया है। साथ ही PTM, SMC, SDMC जैसी बैठकों में भी समुदाय के साथ ऐसे विषयों पर आवश्यक चर्चा अपेक्षित है।
सभी विद्यालयों में 01 सितम्बर 2026 से 15 सितम्बर 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा अनिवार्य रूप से मनाया जाना है।
कक्षा 1 में प्रवेश के समय राज्य सरकार द्वारा संशोधित प्रावधानों के अनुसार विद्यार्थी की आयु 6 वर्ष या उससे अधिक, परंतु 7 वर्ष से कम निर्धारित की गई है।
राज्य सरकार प्रवेश प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित तिथि निर्धारित कर सकती है, तथापि आरटीई अधिनियम 2009 के अनुसार बालक-बालिकाओं का विद्यालय में प्रवेश शैक्षणिक वर्ष भर संभव रहेगा।
राज्य कर्मचारी, माता-पिता अथवा अभिभावक के स्थान परिवर्तन की स्थिति में स्थानांतरण प्रमाण-पत्र के आधार पर विद्यार्थी को मध्य सत्र में प्रवेश दिया जा सकेगा।
यदि बोर्ड द्वारा रोके गए परीक्षा परिणाम विलम्ब से घोषित हों, तो परिणाम घोषणा के सात दिन के भीतर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाना चाहिए। प्रवेश के समय ही निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी अपेक्षित है।
हाउसहोल्ड सर्वे में आउट ऑफ स्कूल चाइल्ड के रूप में चिन्हित विद्यार्थियों की मुख्यधारा में वापसी, आयु अनुरूप कक्षा में प्रवेश, विशेष शैक्षणिक आवश्यकता का आकलन तथा आवश्यकता अनुसार विशेष शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
ड्रॉपआउट, अनामांकित एवं विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं को आयु अनुरूप कक्षा में प्रवेश दिलाने, उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने तथा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत सहायक सामग्री प्रदान करने पर भी स्पष्ट बल दिया गया है।
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों एवं संबंधित व्यवस्थाओं में भी अनामांकित तथा ड्रॉपआउट बालिकाओं के प्रवेश के लिए विशेष प्रयास अपेक्षित हैं। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए सीटों का निर्धारित अनुपात सुनिश्चित करने का भी उल्लेख किया गया है।
प्रार्थना सभा कार्यक्रम हेतु 25 मिनट का समय निर्धारित है। इसमें राष्ट्रगीत, प्रार्थना, योगाभ्यास, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, समाचार वाचन, प्रतिज्ञा तथा राष्ट्रगान जैसी गतिविधियां सम्मिलित रहेंगी।
प्रत्येक माह के प्रथम सोमवार को प्रार्थना सभा में समस्त कार्मिक एवं विद्यार्थी तंबाकू का उपयोग नहीं करने की शपथ लेंगे।
विद्यालय की व्यवस्था एवं प्रबंधन का दायित्व विद्यालय प्रबंधन समिति तथा विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति (SMC/SDMC) के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।
समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में सामान्य शैक्षणिक तथा सहशैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति, पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन तथा स्वच्छता एक्शन प्लान के लिए समेकित विद्यालय अनुदान का प्रावधान है। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अनुदान राशि का एक भाग स्वच्छता, पेयजल, शौचालय-स्वच्छता, हाथ धोने की व्यवस्था और विद्यालयीय साफ-सफाई में उपयोग किया जाएगा।
प्रत्येक विद्यार्थी की शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच तथा उसका अभिलेख संधारित किया जाना चाहिए।
अगस्त 2026 से सितम्बर 2026 तक आयोजित SMC/SDMC प्रशिक्षण में समिति सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया है।
ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवधि में विद्यालय संचालन समय के अनुसार कुल 8 कालांश निर्धारित रहेंगे। प्रार्थना सभा और मध्यांतर, दोनों के लिए पृथक 25-25 मिनट का समय रखा गया है। मध्यांतर चौथे कालांश के पश्चात होगा।
1 अप्रैल से 30 सितम्बर तक विद्यालय समय प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में प्रत्येक कालांश 35 मिनट का होगा।
1 अक्टूबर से 31 मार्च तक विद्यालय समय प्रातः 10:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में प्रथम से षष्ठ कालांश 40 मिनट तथा सप्तम एवं अष्टम कालांश 35 मिनट के रहेंगे।
विषय आवंटन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि अपेक्षाकृत कठिन विषय के बाद सरल विषय रखा जाए। यथासंभव मुख्य विषयों का शिक्षण पहले छह कालांशों में किया जाना उचित माना गया है।
जहां तक संभव हो, सभी विद्यालय एक पारी में संचालित किए जाएं। जो विद्यालय वर्तमान में दो पारी में चल रहे हैं और आगामी सत्र में भी दो पारी या आंशिक दो पारी संचालन आवश्यक है, वहां संस्था प्रधान को सक्षम अधिकारी के माध्यम से प्रस्ताव भेजना होगा।
1 अप्रैल से 30 सितम्बर तक विद्यालय संचालन समय प्रातः 7:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक रहेगा, जिसमें प्रत्येक पारी 5 घंटे 30 मिनट की होगी और प्रत्येक कालांश 35 मिनट का होगा।
1 अक्टूबर से 31 मार्च तक विद्यालय संचालन समय प्रातः 7:30 बजे से सायं 5:30 बजे तक रहेगा, जिसमें प्रत्येक पारी 5 घंटे की होगी। प्रथम और पंचम कालांश 35 मिनट तथा शेष कालांश 30 मिनट के रहेंगे।
- उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 12): प्रथम पारी में कक्षा 9 से 12, द्वितीय पारी में कक्षा 1 से 8।
- उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 6 से 12): प्रथम पारी में कक्षा 9 से 12, द्वितीय पारी में कक्षा 6 से 8।
- उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9 से 12): प्रथम पारी में कक्षा 11 से 12, द्वितीय पारी में कक्षा 9 से 10।
- माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 10): प्रथम पारी में कक्षा 6 से 10, द्वितीय पारी में कक्षा 1 से 5।
- माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 6 से 10): प्रथम पारी में कक्षा 9 से 10, द्वितीय पारी में कक्षा 6 से 8।
दो पारी विद्यालयों में संस्था प्रधान का समय प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक रहेगा। विद्यालय कार्यालय का समय भी इसी अनुरूप रहेगा और इसमें स्वेच्छा से परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
- 01 अप्रैल 2026 से सत्रारम्भ, प्रवेश प्रक्रिया और नियमित शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- प्रवेशोत्सव के प्रथम चरण को 25 अप्रैल 2026 तक प्रभावी ढंग से संचालित करें।
- कक्षा 9 से 12 के प्रवेश 11 जुलाई 2026 तक पूर्ण करवाएं।
- ड्रॉपआउट, अनामांकित और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की पहचान कर प्रवेश सुनिश्चित करें।
- विद्यालय समय-सारिणी को पंचांगानुसार लागू करें; एक पारी/दो पारी व्यवस्था में स्वयं परिवर्तन न करें।
- प्रार्थना सभा, स्वच्छता पखवाड़ा और मासिक शपथ कार्यक्रम को नियमित रखें।
- SMC/SDMC की सक्रियता, प्रशिक्षण सहभागिता और विद्यालय प्रबंधन दस्तावेज व्यवस्थित रखें।
- विद्यालयी कार्ययोजना में अवकाश, प्रवेश, संचालन, स्वच्छता और स्वास्थ्य परीक्षण का समन्वय सुनिश्चित करें।
- प्रार्थना सभा में सक्रिय भागीदारी करें और विद्यार्थियों को अनुशासन, योग, प्रतिज्ञा एवं जागरूकता गतिविधियों से जोड़ें।
- अनामांकित और ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की पहचान में सहयोग दें।
- आयु अनुरूप प्रवेश और पाठ्यपुस्तक उपलब्धता से जुड़ी प्रक्रिया में विद्यालय प्रशासन का सहयोग करें।
- कक्षा-शिक्षण में समय-सारिणी के अनुसार विषय नियोजन करें, विशेषकर कठिन और सरल विषयों के क्रम पर ध्यान दें।
- स्वच्छता, स्वास्थ्य, बाल अधिकार और तंबाकू निषेध जैसे विषयों पर विद्यालयी गतिविधियों में सहयोग दें।
- SMC/SDMC तथा सामुदायिक संवाद से जुड़े कार्यक्रमों में शैक्षणिक दृष्टिकोण से सार्थक योगदान दें।
| कार्य | तिथि/अवधि |
|---|---|
| शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ | 01 अप्रैल 2026 |
| नियमित शिक्षण एवं सामान्य प्रवेश प्रारम्भ | 01 अप्रैल 2026 |
| प्रवेशोत्सव प्रथम चरण | 01 अप्रैल 2026 से 25 अप्रैल 2026 |
| कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश की अंतिम तिथि | 11 जुलाई 2026 |
| व्यावसायिक शिक्षा काउंसलिंग | 21 जून 2026 से 30 जून 2026 |
| ग्रीष्मावकाश | 17 मई 2026 से 20 जून 2026 |
| स्वच्छता पखवाड़ा | 01 सितम्बर 2026 से 15 सितम्बर 2026 |
| मध्यावधि अवकाश | 04 नवम्बर 2026 से 15 नवम्बर 2026 |
| शीतकालीन अवकाश | 31 दिसम्बर 2026 से 10 जनवरी 2027 |
शिविरा पंचांग 2026-27 केवल तिथियों की सूची नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के विद्यालयों के लिए सत्र संचालन का आधारभूत प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचा प्रस्तुत करता है। सत्रारम्भ, प्रवेश, अवकाश, प्रार्थना सभा, विद्यालय प्रबंधन और समय-सारिणी से जुड़े प्रावधानों को समझना संस्था प्रधान, शिक्षक और विद्यालय समुदाय सभी के लिए अनिवार्य है। आगे बढ़ते हुए इसी आधिकारिक क्रम में शेष प्रावधानों, सहशैक्षिक गतिविधियों, मूल्यांकन, ICT, No Bag Day, UDISE, ELC और अन्य प्रमुख व्यवस्थाओं को भी इसी लेख में विस्तृत रूप से जोड़ा जा सकता है।
शिविरा पंचांग 2026-27 में यह स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों की सहशैक्षिक गतिविधियाँ केवल औपचारिक कार्यक्रम न होकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सामाजिक चेतना, अनुशासन, स्वास्थ्य, सृजनशीलता और सामुदायिक सहभागिता का सशक्त माध्यम बननी चाहिए। इसी कारण समस्त सहशैक्षिक गतिविधियों का आयोजन विभागीय निर्देशों के अनुरूप करने पर विशेष बल दिया गया है।
सभी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में चाइल्ड राइट्स क्लब, वन एवं पर्यावरण क्लब, विज्ञान क्लब, रोड सेफ्टी क्लब, टूरिज्म क्लब आदि की स्थापना तथा संचालन को अनिवार्य रूप से महत्व दिया गया है। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को अधिकार, पर्यावरणीय संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नागरिक अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा जाना अपेक्षित है।
तंबाकू नियंत्रण के लिए Tobacco Monitor संबंधी व्यवस्थाएँ भी विभागीय निर्देशानुसार लागू की जानी हैं, ताकि विद्यालय परिसर और उसके आसपास का वातावरण सुरक्षित, स्वस्थ और जागरूक बना रहे।
विद्यालयों के वार्षिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ, समाजोपयोगी उत्पादक कार्य (SUPW), समाज सेवा शिविर, वार्षिक उत्सव और सम्मान-संबंधी गतिविधियाँ निर्धारित समयानुसार सम्पन्न की जानी चाहिए। पंचांग का आशय यह है कि शैक्षणिक वर्ष के भीतर विद्यालय गतिविधियाँ योजनाबद्ध और समयबद्ध रूप से पूरी हों, ताकि सत्र के उत्तरार्ध में केवल आवश्यक सीमित कार्यक्रम ही रखे जाएँ।
विद्यालय स्तर पर स्वच्छता, श्रम, पर्यावरण संरक्षण और सौंदर्यीकरण को भी सहशैक्षिक जीवन का हिस्सा माना गया है। विद्यार्थियों में व्यवहारिक जीवन कौशल विकसित करने के लिए सामूहिक श्रमदान, परिसर स्वच्छता, वृक्षारोपण और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों को अर्थपूर्ण रूप में आयोजित किया जाना चाहिए।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर से संबंधित प्रावधानों के अनुसार कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय में संचालित साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों का विकास केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि वे अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक समझ और सामाजिक प्रस्तुति के स्तर पर भी मजबूत बनें।
इसी प्रकार स्वास्थ्य और शारीरिक विकास से संबंधित गतिविधियों में भी विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है, ताकि शिक्षा का वातावरण समग्र, संतुलित और जीवनोपयोगी बन सके।
शिविरा पंचांग 2026-27 में विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) तथा विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति (SDMC) की बैठकों को अनिवार्य महत्व दिया गया है। इन बैठकों का उद्देश्य विद्यालय संचालन, समुदाय सहभागिता, संसाधन उपयोग, शैक्षणिक सुधार, छात्र-हित और निगरानी व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखना है।
यदि किसी अपरिहार्य कारण से निर्धारित तिथि पर बैठक आयोजित न हो सके, तो अगले दिन उसका आयोजन किया जाना चाहिए। इसका स्पष्ट आशय यह है कि बैठकें केवल कागजी औपचारिकता न बनें, बल्कि नियमित और प्रभावी ढंग से आयोजित हों।
वर्ष 2026-27 में SMC/SDMC की बैठकों को उद्देश्यपरक, परिणामोन्मुख और निगरानी-समर्थ बनाने के लिए विशेष रूप से अगस्त, सितम्बर और दिसम्बर माह में उनके आयोजन पर बल दिया गया है। यह व्यवस्था विद्यालय और समुदाय के बीच उत्तरदायी संवाद को मजबूत करती है।
पंचांग में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली के अंतर्गत विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालयों से संबंधित आवश्यक सूचनाओं का संकलन समयबद्ध रूप से किया जाना चाहिए। यह केवल डाटा एंट्री का कार्य नहीं, बल्कि शैक्षणिक योजना, संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णय-निर्माण का आधार है।
सभी शिक्षक एवं संस्था प्रधानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचनाएँ समय पर, सही रूप में और प्रामाणिक आधार के साथ भरी जाएँ। विद्यालय से संबंधित छात्र संख्या, कक्षा-वार जानकारी, शिक्षकों का विवरण और अन्य प्रशासनिक तथ्य सही अभिलेखन के साथ उपलब्ध रहें।
यह व्यवस्था आगे चलकर UDISE, शाला दर्पण, विद्यालय प्रबंधन, अनुदान, निरीक्षण, योजना निर्माण और शैक्षणिक निगरानी सभी के लिए आधार तैयार करती है।
प्रखर राजस्थान 2.0 का उद्देश्य बच्चों के पठन कौशल को सुदृढ़ करना, बेहतर शिक्षण पद्धतियों का उपयोग बढ़ाना और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है।
पंचांग में उल्लेखित इस कार्यक्रम का स्वरूप 90 दिवसीय अभियान के रूप में देखा गया है, जिसमें विद्यालय स्तर पर पठन-कौशल को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह पहल केवल बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों को संरचित शिक्षण सामग्री, गतिविधि-आधारित अभ्यास और व्यवस्थित पाठ योजना के माध्यम से सहयोग देने की दिशा में भी केंद्रित है।
इसमें वर्ण-शब्द पहचान, आदर्श पठन गतिविधियाँ, छोटे वाक्यों और कहानियों के सामूहिक अभ्यास तथा आयु-उपयुक्त पठन सामग्री के उपयोग पर बल दिया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि प्रारम्भिक कक्षाओं में भाषा-कौशल की गुणवत्ता आगामी समस्त शिक्षण की नींव मानी जा रही है।
अभिभावकों को भी अपने बच्चों के साथ प्रतिदिन 15 से 20 मिनट पढ़ने, सुनने और शब्द उच्चारण का अभ्यास कराने के लिए प्रेरित करने का प्रावधान इस कार्यक्रम को विद्यालय-समुदाय साझेदारी का रूप देता है।
पंचांग में मेगा Parent & Teacher Meeting (PTM) का उल्लेख विद्यालय, परिवार और समुदाय के बीच शैक्षणिक संवाद को मजबूत करने वाली व्यवस्था के रूप में किया गया है। इसका मूल उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, पठन कौशल की स्थिति और सीखने से जुड़ी चुनौतियों को अभिभावकों के साथ साझा करना है।
इस प्रकार की बैठक से घर, समुदाय और विद्यालय के बीच सहयोग बढ़ता है, जिससे बच्चों के सीखने के वातावरण में सुधार आता है। पंचांग का संकेत स्पष्ट है कि ऐसी PTM व्यवस्था केवल उपस्थिति भर का कार्यक्रम न होकर वास्तविक शैक्षणिक साझेदारी का माध्यम बने।
भविष्य के लिए भी जब-जब शासन स्तर से निर्धारित तिथियाँ जारी हों, विद्यालयों को उस अनुसार मेगा PTM आयोजित करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
- मूलभूत साक्षरता को मजबूत करना
- संख्याज्ञान और आधारभूत गणितीय समझ विकसित करना
- वर्ण, शब्द, वाक्य और लेखन कौशल को व्यवस्थित रूप से विकसित करना
- शिक्षकों को पाठ आधारित और सतत् मूल्यांकन आधारित सामग्री से सहयोग देना
पंचांग में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत निपुण राजस्थान कार्यक्रम का भी स्पष्ट उल्लेख है। इसका मूल लक्ष्य विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता और संख्याज्ञान के कौशल को सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत संख्याओं की समझ, जोड़-घटाव जैसे आधारभूत गणितीय कौशल, अक्षर पहचान, सरल शब्द पढ़ना, वाक्य पढ़ना और लेखन क्षमता के विकास को प्राथमिकता दी गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रारम्भिक कक्षाओं की सीखने की गुणवत्ता को राज्य स्तर पर एक संरचित अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षकों को पाठ्यपुस्तक-आधारित कक्षा अभ्यास, सतत् मूल्यांकन सामग्री और सुदृढ़ शिक्षण पद्धति से जोड़ा जाना इस कार्यक्रम की व्यवहारिक सफलता का आधार माना गया है।
PRABAL कार्यक्रम राजस्थान के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए जीवन कौशल, नेतृत्व क्षमता, नागरिक समझ और भविष्य उन्मुख दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में उल्लिखित है।
इस कार्यक्रम का दृष्टिकोण यह है कि किशोर विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें 21वीं सदी के जीवन कौशल, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता, संवाद कौशल और उत्तरदायी नागरिकता के लिए भी तैयार किया जाए।
पंचांग में इसका उल्लेख राज्य स्तरीय कार्यक्रम के रूप में किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास को भी राज्य की शैक्षणिक प्राथमिकताओं में स्थान मिला हुआ है।
शिविरा पंचांग 2026-27 में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को विद्यालयी शिक्षा का पूरक नहीं, बल्कि आवश्यक सहयोगी माध्यम माना गया है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यालयों में उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का नियमित, सुरक्षित और उद्देश्यपूर्ण उपयोग हो।
पंचांग में स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों में स्थापित कंप्यूटर लैब का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि सभी उपकरण कार्यशील बने रहें। प्रत्येक विद्यार्थी को कंप्यूटर कक्ष के उपयोग का अवसर दिया जाना चाहिए और सामान्य कंप्यूटर ज्ञान के साथ-साथ विषय शिक्षण में भी उसका उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
यदि उपकरण वारंटी या गारंटी में हों, तो संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी से समय पर संपर्क कर उन्हें ठीक करवाना आवश्यक होगा। साथ ही कंप्यूटर लैब उपकरणों का सुरक्षा-उन्मुख रखरखाव और आवश्यकतानुसार बीमा करवाने जैसी बातों का भी उल्लेख किया गया है।
जिन विद्यालयों में राजकीय कंप्यूटर अनुदेशक पदस्थापित हैं, वहाँ लैब संचालन का दायित्व व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ICT लैब वाले विद्यालयों में समय विभाजन चक्र में कक्षाओं के लिए कंप्यूटर उपयोग संबंधी कालांश भी नियत किए जाने अपेक्षित हैं।
संचालित ICT कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासरूम और रोबोटिक्स लैब के लिए प्रभारी नियुक्त करने का प्रावधान पंचांग में उल्लेखित है। जहाँ कंप्यूटर अनुदेशक उपलब्ध हों, वहाँ उन्हें प्राथमिकता के साथ यह जिम्मेदारी दी जा सकती है; अन्यथा विज्ञान, गणित या संबंधित विषय के सक्षम शिक्षक को दायित्व सौंपा जा सकता है।
लैब प्रभारी को e-Kaksha, Mission Gyan e-content Apps, YouTube channel, Hard Drive तथा Diksha RISE Portal जैसे उपलब्ध माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों तक ई-कंटेंट आधारित शिक्षण पहुँचाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
डिजिटल संसाधनों के उपयोग से संबंधित रजिस्टर संधारित करना भी आवश्यक है, जिसमें तिथि, कक्षा, कालांश, विषय और उपयोग किए गए प्लेटफ़ॉर्म का विवरण दर्ज रहे।
कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को Word, Excel, PowerPoint, Internet और E-mail से संबंधित आधारभूत डिजिटल जानकारी प्रदान करना भी अपेक्षित है।
पंचांग के अनुसार राज्य में चयनित विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब संचालित हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी समझ, समस्या-समाधान क्षमता, सेंसर आधारित कार्यप्रणाली, यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बुनियादी जानकारी तथा कोडिंग के व्यवहारिक पक्ष से परिचित कराया जाता है।
रोबोट, ड्रोन, 3D प्रिंटर, इलेक्ट्रिकल-मैकेनिकल किट और विविध सेंसर जैसे संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों को नवाचार आधारित शिक्षा से जोड़ा जाना इस पहल की प्रमुख विशेषता है।
पंचांग में AI-ML आधारित समझ, डेटा विज़ुअलाइजेशन और आधुनिक प्रौद्योगिकी की मूलभूत पहचान को भी ऐसे संसाधनों के साथ जोड़ा गया है, जिससे डिजिटल शिक्षा को भविष्य-केंद्रित दृष्टि मिलती है।
- विद्यालयों में उपलब्ध ICT हार्डवेयर का प्रभावी उपयोग
- ई-कंटेंट की उपलब्धता और मैपिंग सुनिश्चित करना
- इंटरनेट आधारित ई-कक्षा संचालन को बढ़ाना
- साप्ताहिक डिजिटल समय-सारिणी तैयार करना
- शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग करना
Mission START का उद्देश्य उन्नत उपचारात्मक तकनीकों के साथ शिक्षण को सहयोग देना है। इस योजना के अंतर्गत विद्यालयों में उपलब्ध ICT लैब, स्मार्ट टीवी, IFPD, प्रोजेक्टर और अन्य हार्डवेयर का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
ई-कंटेंट के लिए हार्ड ड्राइव प्रबंधन, विषयवार सामग्री की उपलब्धता, ई-कंटेंट मैपिंग और इंटरनेट आधारित ई-कक्षा संचालन को व्यवस्थित रूप में लागू किया जाना इस कार्यक्रम की कार्यात्मक आवश्यकता है।
प्रत्येक विद्यालय में ई-कक्षा हेतु साप्ताहिक समय-सारिणी तैयार करना और उसे शाला दर्पण पोर्टल पर नियत अंतराल पर अपलोड करना भी प्रबंधन का हिस्सा माना गया है।
यह व्यवस्था दर्शाती है कि डिजिटल संसाधनों का उपयोग केवल उपलब्धता तक सीमित नहीं, बल्कि नियमितता, अभिलेखन, मॉनिटरिंग और परिणाम-आधारित उपयोग के साथ होना चाहिए।
- विद्यालय में संचालित सभी सहशैक्षिक क्लबों और गतिविधियों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करें।
- SMC/SDMC बैठकों को उद्देश्यपरक एजेंडा के साथ अगस्त, सितम्बर और दिसम्बर में प्रभावी रूप से आयोजित करें।
- विद्यालय स्तर पर SUPW, स्वच्छता, वृक्षारोपण और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों को नियमित करें।
- ICT लैब, स्मार्ट क्लास, रोबोटिक्स लैब और ई-कंटेंट संसाधनों के लिए जिम्मेदार प्रभारी निर्धारित करें।
- डिजिटल उपयोग रजिस्टर, उपकरण रखरखाव और ई-कक्षा समय-सारिणी का संधारण सुनिश्चित करें।
- प्रखर राजस्थान 2.0, निपुण राजस्थान और PRABAL जैसे कार्यक्रमों को विद्यालय की शैक्षणिक योजना में शामिल करें।
- अभिभावक सहभागिता आधारित PTM को वास्तविक शैक्षणिक समीक्षा मंच के रूप में विकसित करें।
- विद्यालयी क्लबों और सहशैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय शैक्षणिक भूमिका निभाएँ।
- पठन कौशल, मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान सुधार हेतु संरचित गतिविधियों का उपयोग करें।
- अभिभावकों से संवाद कर बच्चों के घर-आधारित अभ्यास को प्रोत्साहित करें।
- ई-कंटेंट, स्मार्ट क्लास और उपलब्ध डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विषयानुसार उपयोग बढ़ाएँ।
- विद्यार्थियों को Word, Excel, PowerPoint, Internet और E-mail जैसे डिजिटल कौशलों से परिचित कराएँ।
- विद्यालय प्रबंधन बैठकों, PTM और समुदाय-आधारित कार्यक्रमों में शिक्षण-सुधार संबंधी सार्थक सुझाव दें।
| विषय | मुख्य संकेत |
|---|---|
| सहशैक्षिक गतिविधियाँ | क्लब, SUPW, समाज सेवा, स्वच्छता और रचनात्मक कार्यक्रमों का योजनाबद्ध आयोजन |
| SMC/SDMC | अनिवार्य बैठकें, विशेष ध्यान अगस्त, सितम्बर और दिसम्बर |
| प्रखर राजस्थान 2.0 | पठन कौशल सुधार, संरचित शिक्षण, अभिभावक भागीदारी |
| निपुण राजस्थान | मूलभूत साक्षरता, संख्याज्ञान, शब्द-वाक्य-लेखन विकास |
| PRABAL | कक्षा 9-12 के लिए जीवन कौशल, नेतृत्व और नागरिकता विकास |
| ICT | नियमित लैब उपयोग, ई-कंटेंट आधारित शिक्षण, डिजिटल कौशल प्रशिक्षण |
| Mission START | ई-कक्षा, हार्डवेयर उपयोग, शाला दर्पण आधारित डिजिटल मॉनिटरिंग |
शिक्षक, संस्था प्रधान और विद्यालय प्रबंधन से जुड़े कार्मिक नीचे दिए गए लिंक से शिविरा पंचांग 2026-27 का PDF डाउनलोड कर सकते हैं।
शिविरा पंचांग 2026-27 में उल्लिखित उत्सव और अवकाश केवल तिथि-सूचना नहीं हैं, बल्कि विद्यालयी संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सहभागिता और शैक्षणिक अनुशासन का अभिन्न हिस्सा हैं। पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में अंकित उत्सवों को अनिवार्य रूप से मनाया जाना अपेक्षित है।
पंचांग में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उल्लिखित जयंती, उत्सव और विशेष अवसरों को सामान्यतः प्रार्थना सभा अथवा प्रथम कालांश में आयोजित किया जाए, ताकि नियमित शैक्षणिक कार्य बाधित न हो और विद्यालयी दिनचर्या संतुलित बनी रहे।
यदि किसी सप्ताह में एक से अधिक बड़े उत्सव अथवा विशेष आयोजन आ जाएँ, तो उन्हें आगे आने वाले No Bag Day के साथ समायोजित कर आयोजित किया जा सकता है। यह प्रावधान विद्यालयों को लचीलापन देते हुए भी पंचांगानुसार संचालन बनाए रखने की दिशा में उपयोगी है।
विशेष रूप से 15 अगस्त, 26 जनवरी और 02 अक्टूबर को पूर्ण अवकाश होने के बावजूद विद्यालयों में उत्सव आयोजन अनिवार्य माना गया है। इन अवसरों पर शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की उपस्थिति को आवश्यक महत्व दिया गया है।
02 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा महात्मा गांधी के जीवन, विचार और मूल्यों पर आधारित नाटक, कविता, अभिनय तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि मूल्य-आधारित प्रेरणा देना है।
मध्यावधि, शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन अवकाशों के दौरान विद्यालयों के मंत्रालयिक तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए भी राजकीय प्रावधानों के अनुसार कार्य-संबंधी निर्देश लागू रहेंगे। संस्था प्रधानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अवकाश प्रबंधन शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक संतुलन के अनुरूप हो।
पंचांग में यह भी प्रावधान है कि संस्था प्रधान निर्धारित अवकाशों के अतिरिक्त सत्र में केवल एक दिन का स्थानीय अवकाश घोषित कर सकते हैं, जिसकी सूचना 30 अप्रैल 2026 से पूर्व नियंत्रण अधिकारी को भेजी जानी चाहिए। इस प्रकार स्थानीय आवश्यकता और राज्य स्तरीय अनुशासन दोनों के बीच संतुलन रखा गया है।
शिविरा पंचांग 2026-27 में मूल्यांकन और परीक्षा व्यवस्था को चरणबद्ध, संतुलित और शैक्षणिक प्रवाह के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यालयी शिक्षण, परीक्षण और वार्षिक मूल्यांकन के बीच समन्वित व्यवस्था बनी रहे।
पंचांग के अनुसार परीक्षा दिवसों में कालांशवार व्यवस्था इस प्रकार रहेगी कि कुछ कालांश शिक्षण कार्य के लिए तथा कुछ कालांश परीक्षण/मूल्यांकन के लिए नियत हों। इससे यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा को संपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया से अलग नहीं, बल्कि उसी के भीतर संतुलित रूप में जोड़ा गया है।
- प्रथम और द्वितीय कालांश: शिक्षण कार्य
- तृतीय और चतुर्थ कालांश: परीक्षा/परीक्षण आयोजन
- पंचम और षष्ठ कालांश: शिक्षण कार्य
- सप्तम और अष्टम कालांश: परीक्षा/परीक्षण आयोजन
कक्षा 6 से 12 तक के लिए परीक्षा, अर्द्धवार्षिक, वार्षिक और पूरक परीक्षाओं का आयोजन पंचांगानुसार किया जाना है। कक्षा 5, कक्षा 8, कक्षा 10 और कक्षा 12 से जुड़े मूल्यांकन संबंधी प्रावधानों को संबंधित बोर्ड और प्रारम्भिक शिक्षा व्यवस्थाओं के अनुसार संचालित किया जाएगा।
परीक्षा परिणामों की घोषणा तथा विद्यार्थियों को प्रगति पत्रों का वितरण समय पर किया जाना अनिवार्य है। पंचांग में 25 मार्च 2027 तक परिणाम और प्रगति विवरण वितरण को प्रमुख रूप से रेखांकित किया गया है।
कक्षा 1 से 5 तक CCE के अंतर्गत तीन योगात्मक आकलनों का प्रावधान है। यह व्यवस्था शिक्षण को सतत् अवलोकन और चरणबद्ध मूल्यांकन से जोड़ती है।
| आकलन | भारांश | आयोजन माह |
|---|---|---|
| प्रथम योगात्मक आकलन | लगभग 45% | अगस्त 2026 (अंतिम सप्ताह) |
| द्वितीय योगात्मक आकलन | लगभग 35% | नवम्बर 2026 (अंतिम सप्ताह) |
| तृतीय योगात्मक आकलन | लगभग 20% | मार्च 2027 |
अर्द्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा से पूर्व क्रमशः एक और दो दिन का परीक्षा तैयारी अवकाश रखा जाएगा, किन्तु इन दिनों विद्यालय खुले रहेंगे और शिक्षक/कार्मिक परीक्षा व्यवस्था से संबंधित कार्य करेंगे।
कक्षा 10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा पूर्व 14 दिन का तैयारी अवकाश भी महत्वपूर्ण प्रावधानों में शामिल है। इस अवधि में विशेष कक्षाओं की आवश्यकता अनुसार व्यवस्था की जा सकती है।
विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं के नियमित मूल्यांकन संबंधी प्रावधानों का भी पालन अनिवार्य रूप से किया जाना है, ताकि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य व्यवहारिक रूप में पूरा हो सके।
पंचांग के अनुसार सत्र 2026-27 में माध्यमिक शिक्षा के अधीन कक्षा 9 और 11 की पूरक परीक्षाओं का आयोजन अप्रैल 2027 के द्वितीय सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है।
पूरक परीक्षा परिणामों को 15 अप्रैल 2027 से पूर्व घोषित कर प्रगति पत्र वितरित करना अपेक्षित है। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थियों की अगली शैक्षणिक प्रगति अनावश्यक विलम्ब से प्रभावित न हो।
No Bag Day का उद्देश्य विद्यार्थियों के समग्र विकास, अंतर्निहित क्षमताओं की पहचान और पारंपरिक अध्ययन-अध्यापन के अतिरिक्त सहगामी गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाना है।
पंचांग में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि No Bag Day प्रत्येक माह के द्वितीय और चतुर्थ शनिवार को मनाया जाएगा। यह व्यवस्था केवल बैग रहित दिवस घोषित करने भर के लिए नहीं, बल्कि अनुभवात्मक, सामुदायिक, व्यावहारिक और जीवन-कौशल आधारित शिक्षण को विद्यालयी संस्कृति में शामिल करने के लिए है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, No Bag Day के दौरान स्थानीय स्तर पर दक्ष और अनुभवी व्यक्तियों को विद्यालय से जोड़कर विद्यार्थियों को उनके अनुभवों का लाभ देने की व्यवस्था भी पंचांग में निहित है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों को Master Instructor के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है।
इनमें स्थानीय कारीगर, शिल्पकार, कृषि कार्य से जुड़े लोग, सेवामुक्त अनुभवी व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रेरक व्यक्तित्व, प्रशासनिक अधिकारी, बैंक, डाकघर, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े कार्मिक शामिल हो सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन-व्यवहार, कार्य-कौशल, सामाजिक भूमिकाओं और स्थानीय ज्ञान से परिचित कराया जा सकता है।
Master Instructor द्वारा अपने कार्यक्षेत्र, उपयोग में आने वाले उपकरणों, प्रक्रियाओं और अनुभवजन्य ज्ञान का परिचय कराया जा सकता है। इससे विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जीवन और समाज से जोड़ने वाली व्यवहारिक समझ विकसित करते हैं।
पंचांग का आशय यह भी है कि इस प्रकार के स्थानीय विशेषज्ञों को मानदेय आधारित औपचारिक व्यवस्था के बजाय विद्यालय-समुदाय सहभागिता के आधार पर जोड़ा जाए। राष्ट्रीय पर्व, वार्षिक उत्सव अथवा अन्य उपयुक्त अवसरों पर ऐसे सहयोगी व्यक्तियों को सम्मानित भी किया जा सकता है।
No Bag Day के साथ बालिका शिक्षा के अंतर्गत मीना मंच, राजू मंच और गार्गी मंच जैसी किशोरी सशक्तिकरण गतिविधियों को भी जोड़ा गया है। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी मानी गई है।
विद्यालय स्वच्छता से संबंधित भाव विकसित करने के लिए कक्षा 7 और उससे ऊपर के विद्यार्थियों द्वारा पौधों की देखभाल, परिसर-सफाई और संबंधित जिम्मेदारियों को भी No Bag Day के अवसर से जोड़ा जा सकता है।
यह दिवस विद्यालय के नियमित कार्य दिवसों में गिना जाएगा, लेकिन इसकी विषयवार कालांश व्यवस्था पृथक रूप से बनाई जा सकती है। पंचांग में यह भी व्यवस्था दी गई है कि कुछ विशेष उत्सवों, जयंती कार्यक्रमों और सहशैक्षिक गतिविधियों को No Bag Day के साथ समायोजित कर आयोजित किया जा सकता है।
बाल सभा, मासिक स्टाफ बैठक, अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM), SMC/SDMC की कार्यकारिणी बैठक, मीना-राजू-गार्गी मंच की गतिविधियाँ तथा सामुदायिक संवाद जैसे कार्यक्रम भी No Bag Day के अवसर पर संयोजित किए जा सकते हैं।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद, वाद-विवाद, भाषण, निबंध-लेखन, व्यवहारिक प्रदर्शन, रचनात्मक प्रस्तुति और लोकजीवन से जुड़े कौशल आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
समग्र रूप से देखा जाए तो No Bag Day विद्यालयी शिक्षा को केवल पुस्तकीय ढांचे से निकालकर जीवन, समाज, कौशल, संवाद और अनुभव के अधिक वास्तविक क्षेत्र में ले जाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
- विद्यालय में उत्सव, अवकाश और परीक्षा कैलेंडर को पंचांगानुसार प्रदर्शित करें।
- स्थानीय अवकाश घोषित करने की स्थिति में 30 अप्रैल 2026 से पूर्व नियमानुसार सूचना भेजें।
- परीक्षा, परिणाम, प्रगति पत्र वितरण और तैयारी अवकाश की व्यवस्था समय से सुनिश्चित करें।
- No Bag Day के लिए मासिक कार्ययोजना बनाएँ और द्वितीय व चतुर्थ शनिवार की गतिविधियाँ पूर्व-नियोजित रखें।
- Master Instructor हेतु स्थानीय स्तर पर योग्य व्यक्तियों की सूची तैयार करें।
- No Bag Day को PTM, SMC/SDMC, बाल सभा, स्वच्छता और कौशल-आधारित गतिविधियों से जोड़ें।
- कक्षा 9 और 11 की पूरक परीक्षा तथा परिणाम प्रक्रिया पर अग्रिम तैयारी रखें।
- उत्सवों को मूल्य-आधारित और शिक्षण-संबद्ध रूप में आयोजित करने में सहयोग दें।
- परीक्षा दिवसों की कालांश व्यवस्था के अनुसार शिक्षण और परीक्षण में संतुलन बनाएँ।
- CCE और योगात्मक आकलन के लिए कक्षा 1 से 5 तक व्यवस्थित तैयारी रखें।
- No Bag Day पर गतिविधि-आधारित, व्यवहारिक और कौशल उन्मुख सत्र संचालित करें।
- विद्यार्थियों को स्थानीय ज्ञान, सामाजिक अनुभव और जीवन कौशल से जोड़ने वाली गतिविधियाँ संचालित करें।
- PTM, बाल सभा, निबंध, भाषण, खेल और रचनात्मक कार्यों को No Bag Day के साथ सार्थक रूप से जोड़ें।
| विषय | तिथि/अवधि |
|---|---|
| स्थानीय अवकाश सूचना की अंतिम समयसीमा | 30 अप्रैल 2026 से पूर्व |
| प्रथम योगात्मक आकलन | अगस्त 2026 (अंतिम सप्ताह) |
| द्वितीय योगात्मक आकलन | नवम्बर 2026 (अंतिम सप्ताह) |
| तृतीय योगात्मक आकलन | मार्च 2027 |
| प्रगति पत्र वितरण | 25 मार्च 2027 तक |
| पूरक परीक्षा (कक्षा 9 व 11) | अप्रैल 2027 का द्वितीय सप्ताह |
| पूरक परीक्षा परिणाम | 15 अप्रैल 2027 से पूर्व |
| No Bag Day | प्रत्येक माह का द्वितीय और चतुर्थ शनिवार |
शिक्षक, संस्था प्रधान, विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्य और अन्य संबंधित कार्मिक नीचे दिए गए लिंक से शिविरा पंचांग 2026-27 का PDF डाउनलोड कर सकते हैं।
शिविरा पंचांग 2026-27 में समावेशी शिक्षा को केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि विद्यालयी न्याय, पहुंच और समान अवसर के आधारभूत सिद्धांत के रूप में देखा गया है। विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं का प्रवेश, उनकी पहचान, समर्थन और विद्यालयी सहभागिता सुनिश्चित करना विद्यालय व्यवस्था की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
पंचांग में यह स्पष्ट संकेत है कि विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को विद्यालयी तंत्र से बाहर नहीं रहने दिया जाना चाहिए। उनके प्रवेश, उपयुक्त कक्षा में समायोजन, आवश्यकता-आधारित सहयोग और सहायक संसाधनों की उपलब्धता पर विद्यालय स्तर पर सक्रिय कार्य किया जाना अपेक्षित है।
समावेशी शिक्षा का उद्देश्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ऐसे विद्यार्थी विद्यालय के नियमित शैक्षणिक और सहशैक्षिक वातावरण का सम्मानजनक हिस्सा बन सकें।
| गतिविधि | तिथि / अवधि |
|---|---|
| विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं का विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करना | जून से जुलाई 2026 |
| विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस | 02 अप्रैल 2026 |
| विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस | 10 अक्टूबर 2026 |
| विश्व विशेष योग्यजन दिवस | 03 दिसम्बर 2026 |
विद्यालय केवल भवन और कक्षाओं का समूह नहीं होता; वह समुदाय, अभिभावक, स्थानीय नेतृत्व और शैक्षणिक व्यवस्था के बीच एक सक्रिय सेतु भी होता है। इसी कारण शिविरा पंचांग 2026-27 में सामुदायिक गतिशीलता को अलग महत्व दिया गया है।
SMC/SDMC प्रशिक्षण तथा सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था इस बात का संकेत है कि विद्यालय प्रबंधन और समुदाय सहयोग को राज्य स्तरीय प्राथमिकता प्राप्त है। जब समुदाय विद्यालय की प्रक्रियाओं से जुड़ता है, तो प्रवेश, उपस्थिति, अनुशासन, संसाधन प्रबंधन और शैक्षणिक सुधार सभी में सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है।
सामुदायिक सहभागिता का अर्थ केवल बैठकें आयोजित करना नहीं, बल्कि विद्यालयी लक्ष्यों और स्थानीय सामाजिक शक्ति के बीच व्यावहारिक साझेदारी स्थापित करना है।
| गतिविधि | आयोजन माह |
|---|---|
| SMC/SDMC प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रोत्साहन | 04 जनवरी 2026 |
| KRP प्रशिक्षण (SMC/SDMC) | अगस्त 2026 |
| RP प्रशिक्षण (SMC/SDMC) | अगस्त से सितम्बर 2026 |
बालिका शिक्षा खंड में किशोरी सशक्तिकरण, मंच-आधारित सहभागिता और विशेष दिवसों के माध्यम से छात्राओं को नेतृत्व, संवाद और आत्मविश्वास से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
पंचांग में बालिका शिक्षा को विद्यालयी जीवन के स्वतंत्र और महत्वपूर्ण आयाम के रूप में रखा गया है। विशेष रूप से किशोरी सशक्तिकरण गतिविधियों को मीना मंच, राजू मंच और गार्गी मंच जैसी संरचनाओं के माध्यम से संचालित करने पर बल दिया गया है।
कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को इन मंचों और संबंधित गतिविधियों से जोड़ना इस बात का संकेत है कि विद्यालयी वातावरण में संवेदनशीलता, समान अवसर, नेतृत्व, संवाद क्षमता और आत्म-अभिव्यक्ति को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा दिया जाना है।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और राष्ट्रीय बालिका दिवस जैसे अवसरों को केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रम न बनाकर छात्राओं के विकास, सम्मान और प्रेरणा से जोड़कर मनाना अधिक प्रभावी रहेगा।
| गतिविधि | लक्षित समूह | तिथि / अवधि |
|---|---|---|
| किशोरी सशक्तिकरण गतिविधियाँ, मीना मंच, राजू मंच और गार्गी मंच | कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थी | No Bag Day के साथ |
| अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस | नामांकित बालिकाएँ | 11 अक्टूबर 2026 |
| राष्ट्रीय बालिका दिवस | नामांकित बालिकाएँ | 24 जनवरी 2027 |
शिविरा पंचांग 2026-27 में U-DISE Plus पोर्टल पर विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थियों से संबंधित सूचनाओं के अद्यतन को अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य के रूप में स्थापित किया गया है। यह केवल डेटा संधारण का कार्य नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित करने वाला आधार है।
राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालय, शिक्षक और विद्यार्थियों की जानकारी समय पर अपडेट हो। साथ ही राज्य में संचालित विभिन्न पोर्टलों जैसे शाला दर्पण, PSP और U-DISE के बीच विद्यालय कोड संबंधी एकरूपता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नए सत्र 2026-27 की डेटा फीडिंग प्रारम्भ होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर विद्यार्थियों के पिछले सत्र के परीक्षा परिणाम, उपस्थिति और प्रगति से संबंधित प्रविष्टियाँ पूरी करना अनिवार्य है।
विद्यालय छोड़ने वाले, लगातार अनुपस्थित रहने वाले या ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को ड्रॉप-बॉक्स में भेजने तथा नवीन प्रवेशित विद्यार्थियों को वहाँ से विद्यालय रिकॉर्ड में जोड़ने की प्रक्रिया भी U-DISE प्रबंधन का आवश्यक भाग है।
यह व्यवस्था इस बात को रेखांकित करती है कि विद्यालयी नामांकन और वास्तविक छात्र स्थिति के बीच कोई अंतर न रहे, और शिक्षा विभाग को जमीनी स्थिति का सही परिप्रेक्ष्य प्राप्त हो।
यदि आप U-DISE, समावेशी शिक्षा, बालिका शिक्षा या ELC गतिविधियों की मूल तिथियाँ और निर्देश PDF में देखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक का उपयोग करें।
शिविरा पंचांग 2026-27 में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए Electoral Literacy Club (ELC) गतिविधियों का भी विस्तृत माहवार विवरण दिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना, मतदाता साक्षरता, संवैधानिक समझ और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करना है।
इन गतिविधियों में ग्राम पंचायत यात्रा, फिल्म प्रदर्शन, मतदाता शपथ, निबंध लेखन, पोस्टर, रंगोली, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, मतदान जागरूकता, Election Corner reading और विशेष राष्ट्रीय दिवसों से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।
पंचांग का यह भाग इस बात को दर्शाता है कि विद्यालय शिक्षा केवल विषय ज्ञान तक सीमित नहीं है; बल्कि नागरिकता, लोकतंत्र और समाज में सक्रिय भागीदारी की चेतना भी विद्यालयी जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
| माह / तिथि | कक्षा | मुख्य गतिविधि |
|---|---|---|
| अप्रैल 2026 | 9, 10, 11, 12 | ग्राम पंचायत यात्रा |
| मई 2026 | 9, 10, 11, 12 | मतदाता जागरूकता फिल्म प्रदर्शन |
| जुलाई 2026 | 11, 12 | फिल्म प्रदर्शन / निर्वाचन जागरूकता गतिविधि |
| 15 अगस्त 2026 | 9, 10, 11, 12 | मतदाता शपथ |
| 08 सितम्बर 2026 | 9, 10, 11, 12 | निबंध लेखन प्रतियोगिता |
| 26 नवम्बर 2026 | 9, 10, 11, 12 | संवैधानिक अधिकार और नैतिक मतदान जागरूकता |
| 10 दिसम्बर 2026 | 9, 10, 11, 12 | भाषण प्रतियोगिता |
| 25 जनवरी 2027 | 9 से 12 | नाटक, पोस्टर, रंगोली, वाद-विवाद, निबंध, प्रश्नोत्तरी |
| 26 जनवरी 2027 | 9, 10, 11, 12 | मतदाता शपथ |
| सत्र भर | 9, 10, 11, 12 | Election Corner में Reading Period आधारित जागरूकता |
- विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के प्रवेश और सहयोगात्मक वातावरण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- SMC/SDMC और सामुदायिक प्रशिक्षण गतिविधियों को विद्यालयी कार्ययोजना में शामिल करें।
- बालिका शिक्षा से जुड़े मंचों और दिवसों का उद्देश्यपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करें।
- U-DISE Plus पर छात्र, शिक्षक और विद्यालय डेटा समयबद्ध रूप से अपडेट करवाएँ।
- ड्रॉप-बॉक्स, नवीन प्रवेश और विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की प्रविष्टियों पर निगरानी रखें।
- ELC गतिविधियों के लिए मासिक कार्यक्रम तय कर संबंधित शिक्षकों को जिम्मेदारी दें।
- समावेशी शिक्षा के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की कक्षा-स्तरीय भागीदारी बढ़ाएँ।
- बालिका शिक्षा मंचों, किशोरी सशक्तिकरण गतिविधियों और विशेष दिवसों में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
- U-DISE से संबंधित छात्र विवरण, उपस्थिति और प्रगति अभिलेख सही रखें।
- ELC गतिविधियों में विद्यार्थियों को लोकतंत्र, मतदान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ें।
- पोस्टर, निबंध, भाषण, प्रश्नोत्तरी और चर्चा-आधारित गतिविधियों से नागरिक चेतना विकसित करें।
शिविरा पंचांग 2026-27 PDF डाउनलोड लिंक
- सत्र 2026-27 का प्रारम्भ 01 अप्रैल 2026 से माना गया है।
- प्रवेशोत्सव का प्रथम चरण 01 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा।
- कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2026 है।
- ग्रीष्मावकाश, मध्यावधि और शीतकालीन अवकाश स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं।
- एक पारी और दो पारी विद्यालयों के लिए अलग समय-सारिणी निर्धारित की गई है।
- प्रार्थना सभा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, SMC/SDMC और विद्यालय प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया है।
- प्रखर राजस्थान 2.0, निपुण राजस्थान, PRABAL और ICT पहलें शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार से जुड़ी हैं।
- परीक्षा, CCE, पूरक परीक्षा और तैयारी अवकाश का स्पष्ट ढांचा पंचांग में दिया गया है।
- No Bag Day प्रत्येक माह के द्वितीय और चतुर्थ शनिवार को आयोजित होगा।
- समावेशी शिक्षा, बालिका शिक्षा, U-DISE और ELC गतिविधियाँ भी वार्षिक योजना का हिस्सा हैं।
- शिक्षक और संस्था प्रधान इस पंचांग को सत्रीय कार्ययोजना का आधार बनाकर विद्यालय संचालन को व्यवस्थित कर सकते हैं।
यदि आप शिविरा पंचांग 2026-27 की मूल प्रति PDF में देखना या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक का उपयोग करें।
- 01 अप्रैल 2026 से सत्रारम्भ, नियमित शिक्षण और प्रवेश व्यवस्था को समय पर लागू करें।
- प्रवेशोत्सव, ड्रॉपआउट नामांकन और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के प्रवेश पर अलग निगरानी रखें।
- विद्यालय समय-सारिणी, एक पारी/दो पारी व्यवस्था और कार्यालय समय को पंचांगानुसार संचालित करें।
- प्रार्थना सभा, तंबाकू निषेध शपथ, स्वच्छता पखवाड़ा और स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम नियमित रखें।
- SMC/SDMC बैठकों, समुदाय सहभागिता और PTM को दस्तावेजीकृत और परिणामोन्मुख बनाएँ।
- ICT लैब, स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट, Mission START और डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था सक्रिय रखें।
- CCE, अर्द्धवार्षिक, वार्षिक, बोर्ड और पूरक परीक्षा कैलेंडर का समयपूर्व अनुपालन सुनिश्चित करें।
- No Bag Day के लिए मासिक गतिविधि योजना तथा Master Instructor सूची तैयार रखें।
- U-DISE Plus पर डेटा अपडेट, ड्रॉप-बॉक्स प्रबंधन और छात्र प्रगति रिकॉर्ड समय पर पूर्ण करवाएँ।
- ELC, बालिका शिक्षा, समावेशी शिक्षा और विशेष दिवसों को विद्यालयी कार्ययोजना से समेकित करें।
- नियमित शिक्षण को पंचांगानुसार समय-सारिणी और कालांश संरचना के साथ संचालित करें।
- अनामांकित, ड्रॉपआउट और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की पहचान तथा पुनः नामांकन में सहयोग दें।
- प्रखर राजस्थान 2.0 और निपुण राजस्थान के तहत पठन, भाषा और मूलभूत संख्याज्ञान सुधार पर कार्य करें।
- प्रार्थना सभा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, बाल अधिकार, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय योगदान दें।
- ई-कंटेंट, ICT लैब, स्मार्ट क्लास और डिजिटल उपकरणों का शिक्षण से जुड़ा व्यवहारिक उपयोग बढ़ाएँ।
- CCE, योगात्मक आकलन, परीक्षा प्रबंधन और प्रगति मूल्यांकन को समय पर संधारित करें।
- No Bag Day, बाल सभा, भाषण, निबंध, खेल, चर्चा और कौशल-आधारित गतिविधियों को रचनात्मक रूप से संचालित करें।
- बालिका शिक्षा, मीना-राजू-गार्गी मंच और किशोरी सशक्तिकरण गतिविधियों को प्रोत्साहन दें।
- ELC गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक, संवैधानिक और मतदाता जागरूकता विकसित करें।
- विद्यालय, अभिभावक और समुदाय के बीच शैक्षणिक संवाद में सकारात्मक भूमिका निभाएँ।
| कार्य / विषय | तिथि / अवधि |
|---|---|
| शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ | 01 अप्रैल 2026 |
| प्रवेशोत्सव प्रथम चरण | 01 अप्रैल 2026 से 25 अप्रैल 2026 |
| विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों का प्रवेश | जून से जुलाई 2026 |
| व्यावसायिक शिक्षा काउंसलिंग | 21 जून 2026 से 30 जून 2026 |
| कक्षा 9 से 12 प्रवेश की अंतिम तिथि | 11 जुलाई 2026 |
| प्रथम योगात्मक आकलन | अगस्त 2026 (अंतिम सप्ताह) |
| SMC/SDMC विशेष सक्रियता अवधि | अगस्त, सितम्बर और दिसम्बर 2026 |
| स्वच्छता पखवाड़ा | 01 सितम्बर 2026 से 15 सितम्बर 2026 |
| विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस | 10 अक्टूबर 2026 |
| अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस | 11 अक्टूबर 2026 |
| मध्यावधि अवकाश | 04 नवम्बर 2026 से 15 नवम्बर 2026 |
| विश्व विशेष योग्यजन दिवस | 03 दिसम्बर 2026 |
| शीतकालीन अवकाश | 31 दिसम्बर 2026 से 10 जनवरी 2027 |
| राष्ट्रीय बालिका दिवस | 24 जनवरी 2027 |
| प्रगति पत्र वितरण | 25 मार्च 2027 तक |
| पूरक परीक्षा (कक्षा 9 और 11) | अप्रैल 2027 का द्वितीय सप्ताह |
| पूरक परीक्षा परिणाम | 15 अप्रैल 2027 से पूर्व |
| No Bag Day | प्रत्येक माह का द्वितीय और चतुर्थ शनिवार |
नीचे दिए गए लिंक से आप किसी भी समय शिविरा पंचांग 2026-27 की PDF प्रति खोलकर मूल निर्देश देख सकते हैं।
शिविरा पंचांग 2026-27 राजस्थान के विद्यालयों के लिए केवल एक वार्षिक कैलेंडर नहीं, बल्कि सत्र संचालन का व्यापक प्रशासनिक, शैक्षणिक और प्रबंधन-आधारित दस्तावेज है। इसमें प्रवेश से लेकर परीक्षा तक, प्रार्थना सभा से लेकर डिजिटल पहल तक, स्वच्छता से लेकर सामुदायिक सहभागिता तक और बालिका शिक्षा से लेकर लोकतांत्रिक चेतना तक विद्यालयी जीवन के अनेक आयामों को एकीकृत रूप में रखा गया है।
संस्था प्रधानों के लिए यह पंचांग विद्यालय संचालन की मास्टर रूपरेखा प्रदान करता है, जबकि शिक्षकों के लिए यह कक्षा-शिक्षण, मूल्यांकन, गतिविधि-आधारित शिक्षण, छात्र सहभागिता और विद्यालय-समुदाय समन्वय का कार्यकारी मार्गदर्शक बनता है।
यदि विद्यालय इस पंचांग को केवल तिथियों की सूची मानने के बजाय सत्रीय कार्यसंस्कृति के रूप में अपनाएँ, तो प्रवेश, उपस्थिति, शैक्षणिक गुणवत्ता, सामुदायिक जुड़ाव, डिजिटल उपयोग और विद्यार्थी विकास सभी क्षेत्रों में अधिक सुव्यवस्थित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
अतः शिक्षक, संस्था प्रधान, विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्य और शिक्षा प्रशासन से जुड़े सभी कार्मिकों के लिए यह आवश्यक है कि वे शिविरा पंचांग 2026-27 को ध्यानपूर्वक समझें, PDF की मूल प्रति देखें और विद्यालय स्तर पर समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर उसका अनुशासित क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
शिविरा पंचांग 2026-27 की PDF प्रति देखने या डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक का उपयोग करें।

















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