राजकीय विद्यालय में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार किसे मिलेगा? | Acting Principal Charge & Seniority Rules Rajasthan

📅 मंगलवार, 14 जुलाई 2026 📖 पूरा लेख

राजकीय विद्यालय में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार किसे मिलेगा?

उप-प्रधानाचार्य, वरिष्ठतम व्याख्याता, DPC, चयन तिथि, वरिष्ठता सूची, विद्यालय कार्यग्रहण और कार्यभार हस्तांतरण से जुड़े नियमों की संपूर्ण व्यावहारिक मार्गदर्शिका

एक पंक्ति में नियम: प्रधानाचार्य के पद रिक्त अथवा अनुपस्थित होने पर नियमित उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध है तो वह कार्यवाहक प्रधानाचार्य का दायित्व निभाएगा। उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध नहीं होने पर विद्यालय में पदस्थ संवर्गीय रूप से वरिष्ठतम पात्र व्याख्याता को सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश से प्रभार दिया जाना चाहिए।

राजस्थान के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य का पद रिक्त होने, प्रधानाचार्य के अवकाश पर रहने, स्थानांतरण होने, सेवानिवृत्त होने अथवा किसी अन्य कारण से अनुपस्थित रहने पर विद्यालय संचालन के लिए कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार देना आवश्यक हो जाता है।

व्यावहारिक स्तर पर विवाद तब उत्पन्न होता है जब विद्यालय में एक से अधिक व्याख्याता कार्यरत हों। कोई वर्तमान विद्यालय में पहले कार्यग्रहण करने के आधार पर स्वयं को वरिष्ठ बताता है, कोई कुल सरकारी सेवा को आधार बनाता है, कोई DPC वर्ष अथवा चयन तिथि को निर्णायक मानता है और कोई मेरिट या वरिष्ठता क्रमांक के आधार पर प्रभार का दावा करता है।

इन सभी तथ्यों का महत्व है, लेकिन प्रत्येक तथ्य का कानूनी अर्थ अलग है। इसलिए कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार केवल स्थानीय सहमति, आयु, अनुभव अथवा विद्यालय में पहले आने के आधार पर नहीं दिया जाना चाहिए। सही निर्णय के लिए पदानुक्रम, विभागीय कार्यभार आदेश, सेवा नियमों में वरिष्ठता का सिद्धांत और संबंधित कार्मिकों के मूल अभिलेख साथ-साथ देखने आवश्यक हैं।

1. कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार देने का मूल नियम

कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया अस्थायी प्रबंध है। इसका उद्देश्य प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति में प्रवेश, परीक्षा, अवकाश, शाला दर्पण, पत्राचार, अभिलेख, विद्यालय सुरक्षा, वित्तीय कार्य तथा दैनिक प्रशासन को बाधित होने से बचाना है।

प्रभार देते समय सबसे पहले यह देखा जाना चाहिए कि विद्यालय में प्रधानाचार्य के बाद विभाग द्वारा निर्धारित अगला पदाधिकारी कौन है। वर्तमान पद-संरचना में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नियमित उप-प्रधानाचार्य पदस्थ है तो प्रधानाचार्य के पद रिक्त अथवा अनुपस्थित होने पर उसे प्राथमिकता प्राप्त होगी।

उप-प्रधानाचार्य का पद रिक्त हो, पद स्वीकृत नहीं हो, संबंधित उप-प्रधानाचार्य भी अनुपस्थित हो अथवा विद्यालय में कोई नियमित उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध नहीं हो, तब वरिष्ठतम पात्र व्याख्याता का निर्धारण किया जाता है।

ध्यान दें: “वरिष्ठतम व्याख्याता” कोई अलग पदनाम नहीं है। इसका अर्थ विद्यालय में कार्यरत व्याख्याताओं में संवर्गीय रूप से सबसे वरिष्ठ व्याख्याता है।

2. कार्यवाहक प्रभार का सामान्य पदानुक्रम

क्रम विद्यालय में उपलब्ध अधिकारी प्रभार की सामान्य स्थिति
1 नियमित प्रधानाचार्य विद्यालय के नियमित संस्थाप्रधान और प्रशासनिक उत्तरदायी अधिकारी।
2 नियमित उप-प्रधानाचार्य प्रधानाचार्य का पद रिक्त अथवा प्रधानाचार्य अवकाश/यात्रा पर होने पर कार्यवाहक प्रधानाचार्य का दायित्व।
3 वरिष्ठतम पात्र व्याख्याता जब नियमित उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध न हो, तब वरिष्ठता का परीक्षण कर लिखित आदेश से प्रभार।
4 अगला वरिष्ठ उपलब्ध व्याख्याता वरिष्ठतम व्याख्याता के दीर्घ अवकाश, निलंबन, अनधिकृत अनुपस्थिति अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुपलब्ध माने जाने पर कारण दर्ज कर व्यवस्था।
यह पदानुक्रम सामान्य मार्गदर्शन है। किसी विशेष विद्यालय, योजना, मॉडल स्कूल, आवासीय विद्यालय, संस्कृत शिक्षा, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग अथवा अन्य प्रशासनिक इकाई के लिए जारी विशेष आदेश को प्राथमिकता दी जाएगी।

3. नियमित उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध हो तो किसे प्रभार मिलेगा?

राजस्थान सरकार, शिक्षा विभाग द्वारा उप-प्रधानाचार्य पद के कार्य एवं दायित्व निर्धारित करने वाले दिनांक 22 जुलाई 2022 के आदेश में यह दायित्व दिया गया कि प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति—पद रिक्त होने, अवकाश पर रहने अथवा यात्रा पर होने—की स्थिति में उप-प्रधानाचार्य कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में विद्यालय संचालन के समस्त दायित्वों का निर्वहन करेगा।

इसलिए जिस विद्यालय में नियमित उप-प्रधानाचार्य पदस्थ और कार्यरत है, वहां किसी व्याख्याता की आयु, सेवा अवधि अथवा व्याख्याता वरिष्ठता के आधार पर उप-प्रधानाचार्य को पीछे नहीं किया जाना चाहिए। उप-प्रधानाचार्य का पद व्याख्याता से उच्च पद है और आदेश में उसे प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का स्पष्ट दायित्व प्रदान किया गया है।

उदाहरण:
विद्यालय में एक उप-प्रधानाचार्य तथा पांच व्याख्याता कार्यरत हैं। इनमें किसी व्याख्याता की कुल सरकारी सेवा उप-प्रधानाचार्य से अधिक है। फिर भी प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति में कार्यवाहक प्रभार नियमित उप-प्रधानाचार्य को मिलेगा, क्योंकि पदानुक्रम में उप-प्रधानाचार्य उच्च पद है।

4. उप-प्रधानाचार्य नहीं हो तो वरिष्ठतम व्याख्याता को प्रभार

राजस्थान शिक्षा नियम संहिता में संकलित विभागीय निर्णय क्रमांक एफ.7(27) शिक्षा/ग्रुप-2/81, दिनांक 26 जुलाई 1982 में विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा कार्यभार हस्तांतरण की व्यवस्था दी गई है। उच्च माध्यमिक विद्यालय के संदर्भ में निर्धारित उच्चतर अधिकारी उपलब्ध न होने पर वरिष्ठतम स्कूल व्याख्याता को कार्यभार सौंपने का उल्लेख मिलता है।

इस पुराने विभागीय निर्णय को वर्तमान पद-संरचना के साथ पढ़ना होगा। वर्ष 2022 के बाद जिन विद्यालयों में उप-प्रधानाचार्य पदस्थ हैं, वहां पहले उप-प्रधानाचार्य का दायित्व लागू होगा। जहां उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध नहीं है, वहां वरिष्ठतम पात्र व्याख्याता की पहचान कर प्रभार दिया जाना विभागीय व्यवस्था के अनुरूप है।

महत्वपूर्ण सावधानी: वर्ष 1982 का निर्णय पुराने प्रकाशित संकलन में उपलब्ध है। किसी न्यायालयीन, वेतन, अनुशासनात्मक अथवा वित्तीय विवाद वाले मामले में इसकी प्रमाणित प्रति तथा बाद में जारी संशोधनों/विशेष आदेशों की पुष्टि सक्षम विभागीय कार्यालय से कराना उचित है।

5. वरिष्ठतम व्याख्याता कैसे निर्धारित किया जाएगा?

वरिष्ठतम व्याख्याता का निर्धारण राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम, 2021 के वरिष्ठता संबंधी प्रावधानों, संबंधित नियुक्ति या पदोन्नति आदेश और विभाग द्वारा जारी अंतिम वरिष्ठता सूची के आधार पर किया जाना चाहिए।

5.1 नियमित चयन के बाद पद पर नियुक्ति

नियम 36 का मूल सिद्धांत यह है कि सेवा के संवर्ग में सम्मिलित पद पर नियुक्त व्यक्तियों की वरिष्ठता नियमित चयन के बाद उस पद पर नियुक्ति की तारीख से निर्धारित होती है। तदर्थ अथवा अर्जेंट अस्थायी व्यवस्था को नियमित चयन के समान नहीं माना जाता।

5.2 पहले चयन और बाद के चयन का अंतर

अलग-अलग नियमित चयन में चयनित कार्मिकों के बीच सामान्यतः पहले चयन में चयनित व्यक्ति बाद के चयन में चयनित व्यक्ति से वरिष्ठ होगा। केवल बाद के चयन में कम मेरिट क्रमांक होने से वह पहले चयन वाले कार्मिक से वरिष्ठ नहीं हो जाता।

उदाहरण:
व्याख्याता ‘अ’ का नियमित चयन वर्ष 2021-22 और व्याख्याता ‘ब’ का चयन वर्ष 2022-23 है। ऐसी स्थिति में सामान्यतः पहले चयन वर्ष वाला व्याख्याता ‘अ’ वरिष्ठ होगा, भले ही ‘ब’ की वर्तमान विद्यालय में कार्यग्रहण तारीख पहले हो।

5.3 एक ही DPC में पदोन्नत व्याख्याता

यदि दो या अधिक कार्मिक एक ही DPC और एक ही चयन में व्याख्याता पद पर पदोन्नत हुए हैं, तो उनकी पारस्परिक वरिष्ठता सामान्यतः अगली निम्न श्रेणी में विद्यमान वरिष्ठता क्रम के अनुसार बनी रहती है।

उदाहरण के लिए दो वरिष्ठ अध्यापकों को एक ही DPC वर्ष में व्याख्याता पद पर पदोन्नत किया गया हो, तो वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग की अंतिम वरिष्ठता सूची में जो पहले था, उसकी पारस्परिक वरिष्ठता व्याख्याता पद पर भी सामान्यतः पहले रहेगी—जब तक किसी विशेष चयन आदेश, रिव्यू DPC अथवा संशोधित वरिष्ठता सूची में अलग स्थिति न हो।

5.4 एक ही सीधी भर्ती चयन के अभ्यर्थी

एक ही सीधी भर्ती चयन से नियुक्त व्याख्याताओं की वरिष्ठता संबंधित चयन सूची, सेवा नियम, नियुक्ति आदेश और निर्धारित अवधि में कार्यग्रहण की शर्तों के अनुसार देखी जाएगी। RPSC मेरिट क्रमांक और विभागीय संवर्गीय वरिष्ठता क्रमांक को एक ही मान लेना उचित नहीं है।

5.5 रिव्यू DPC और नोटशनल वरिष्ठता

किसी कार्मिक का नाम मूल DPC में छूट जाने पर बाद में रिव्यू DPC हो सकती है। रिव्यू DPC का आदेश बाद में जारी होने के बावजूद संबंधित कार्मिक को पूर्व चयन वर्ष से नोटशनल पदोन्नति अथवा वरिष्ठता प्रदान की जा सकती है।

इसलिए केवल पदोन्नति आदेश जारी होने की तारीख देखकर किसी कार्मिक को कनिष्ठ मानना सुरक्षित नहीं है। आदेश में दी गई प्रभावी तिथि, चयन वर्ष और संशोधित वरिष्ठता क्रम देखना आवश्यक है।

5.6 स्थानांतरण और वरिष्ठता त्याग

कुछ परिस्थितियों में स्वयं के अनुरोध पर अन्य नियुक्ति प्राधिकारी, रेंज, मंडल अथवा वरिष्ठता इकाई में स्थानांतरण होने पर कार्मिक को नई इकाई में नीचे वरिष्ठता दी जा सकती है। इसलिए स्थानांतरण आदेश की शर्तों को देखे बिना केवल पुरानी वरिष्ठता सूची के आधार पर प्रभार नहीं दिया जाना चाहिए।

5.7 अंतिम वरिष्ठता सूची का महत्व

उपलब्ध होने पर विभाग द्वारा जारी नवीनतम अंतिम वरिष्ठता सूची सबसे महत्वपूर्ण अभिलेख है। अनंतिम वरिष्ठता सूची पर आपत्तियां लंबित हो सकती हैं। अंतिम सूची के बाद भी रिव्यू DPC, न्यायालयीय आदेश या संशोधित सूची जारी हुई हो तो नवीनतम प्रभावी आदेश देखा जाएगा।

सुरक्षित नियम:
वरिष्ठता तय करने के लिए नियुक्ति आदेश, DPC चयन वर्ष, प्रभावी पदोन्नति तिथि, अंतिम वरिष्ठता सूची और बाद के संशोधन—इन सभी का मिलान करें।

6. कौन-से तथ्य अकेले वरिष्ठता तय नहीं करते?

तथ्य क्या अकेले निर्णायक है? कारण
वर्तमान विद्यालय में पहले कार्यग्रहण नहीं यह केवल वर्तमान पदस्थापन स्थल पर आने की तारीख है, संवर्गीय वरिष्ठता नहीं।
कुल सरकारी सेवा नहीं कुल सेवा और व्याख्याता संवर्ग की वरिष्ठता अलग विषय हो सकते हैं।
आयु में बड़ा होना नहीं आयु सामान्यतः सेवा वरिष्ठता का स्थान नहीं लेती।
उच्च शैक्षणिक योग्यता नहीं अतिरिक्त डिग्री अपने आप संवर्गीय वरिष्ठता नहीं बदलती।
अलग-अलग विषयों के मेरिट क्रमांक नहीं अलग विषय या चयन सूची के क्रमांक आपस में तुलनीय नहीं हो सकते।
पहले भी प्रभारी रह चुका होना नहीं पूर्व अस्थायी प्रभार भविष्य की स्थायी वरिष्ठता नहीं बनाता।
स्थानीय सहमति नहीं कार्मिकों की सहमति सेवा नियम और सक्षम अधिकारी के आदेश का विकल्प नहीं है।

7. विभिन्न परिस्थितियों में किसे प्रभार मिलेगा?

स्थिति 1: नियमित उप-प्रधानाचार्य कार्यरत है

प्रधानाचार्य के पद रिक्त अथवा अनुपस्थित होने पर नियमित उप-प्रधानाचार्य कार्यवाहक प्रधानाचार्य का दायित्व निभाएगा। व्याख्याताओं की आपसी वरिष्ठता देखने की आवश्यकता सामान्यतः नहीं होगी।

स्थिति 2: उप-प्रधानाचार्य का पद रिक्त है

विद्यालय में पदस्थ सभी नियमित व्याख्याताओं की संवर्गीय वरिष्ठता का परीक्षण कर वरिष्ठतम उपलब्ध और पात्र व्याख्याता को सक्षम अधिकारी द्वारा लिखित प्रभार दिया जाएगा।

स्थिति 3: वरिष्ठतम व्याख्याता विद्यालय में बाद में आया है

स्थानांतरण के कारण विद्यालय में बाद में कार्यग्रहण करने मात्र से उसकी मूल संवर्गीय वरिष्ठता समाप्त नहीं होती। यदि वह अंतिम वरिष्ठता सूची में वरिष्ठ है तो सामान्यतः उसी का दावा पहले रहेगा।

स्थिति 4: वरिष्ठतम व्याख्याता अवकाश पर है

अल्पकालीन अवकाश में स्थानीय व्यवस्था की अवधि और सक्षम अधिकारी का आदेश देखा जाएगा। दीर्घ अवकाश अथवा वास्तविक अनुपलब्धता में कारण दर्ज करते हुए अगले वरिष्ठ उपलब्ध व्याख्याता को अस्थायी प्रभार दिया जा सकता है। वरिष्ठ कार्मिक के लौटने पर आदेश का पुनरीक्षण किया जाना चाहिए।

स्थिति 5: वरिष्ठतम व्याख्याता प्रभार लेने से मना करता है

मौखिक असहमति पर्याप्त नहीं है। संबंधित कार्मिक से लिखित निवेदन या असमर्थता ली जानी चाहिए और सक्षम अधिकारी कारणों पर निर्णय करे। किसी कार्मिक के मना करने से उसकी वरिष्ठता स्वतः समाप्त नहीं होती, लेकिन विद्यालय संचालन के लिए अगले वरिष्ठ को लिखित आदेश दिया जा सकता है।

स्थिति 6: वरिष्ठता सूची विवादित है

अनंतिम सूची, रिव्यू DPC, चयन वर्ष परिवर्तन अथवा न्यायालयीय प्रकरण लंबित होने पर संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी से लिखित मार्गदर्शन लिया जाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर अनुमान के आधार पर वित्तीय प्रभार देना विवाद उत्पन्न कर सकता है।

स्थिति 7: एक कार्मिक सीधी भर्ती और दूसरा पदोन्नत है

ऐसी स्थिति में नियम 36 के लागू प्रावधान, नियुक्ति वर्ष, नियमित चयन, विभागीय वरिष्ठता सूची तथा सीधी भर्ती-पदोन्नति के निर्धारित क्रम का परीक्षण किया जाएगा। केवल पहली सरकारी नियुक्ति की तारीख से निर्णय नहीं होगा।

स्थिति 8: किसी कार्मिक की रिव्यू DPC हुई है

रिव्यू DPC आदेश में दी गई चयन वर्ष और नोटशनल वरिष्ठता प्रभावी होगी। बाद में जारी आदेश का अर्थ यह नहीं कि कार्मिक हर स्थिति में बाद के चयन का है।

8. कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार देने की सही कार्यालयीय प्रक्रिया

  1. रिक्ति या अनुपस्थिति की स्थिति स्पष्ट करें— प्रधानाचार्य का पद रिक्त है, स्थानांतरण हुआ है, सेवानिवृत्ति हुई है अथवा प्रधानाचार्य अवकाश/यात्रा पर हैं।
  2. उप-प्रधानाचार्य की उपलब्धता जांचें— नियमित उप-प्रधानाचार्य पदस्थ और कार्यरत है तो उसे प्राथमिकता दी जाए।
  3. सभी व्याख्याताओं की सूची बनाएं— नाम, विषय, नियुक्ति का प्रकार, DPC वर्ष, नियमित चयन तिथि, पदोन्नति की प्रभावी तिथि और वरिष्ठता क्रमांक दर्ज करें।
  4. मूल आदेश देखें— केवल शाला दर्पण या मौखिक जानकारी पर निर्भर न रहें। नियुक्ति, पदोन्नति, पदस्थापन और कार्यग्रहण आदेश की प्रतियां देखें।
  5. अंतिम वरिष्ठता सूची से मिलान करें— संबंधित संवर्ग की नवीनतम अंतिम वरिष्ठता सूची का पृष्ठ रिकॉर्ड में संलग्न करें।
  6. रिव्यू DPC एवं संशोधन जांचें— चयन वर्ष परिवर्तन, नोटशनल वरिष्ठता, न्यायालयीय आदेश अथवा संशोधित सूची का परीक्षण करें।
  7. स्थानांतरण की शर्त देखें— स्वयं के अनुरोध पर स्थानांतरण में वरिष्ठता नीचे रखने या वरिष्ठता त्याग की शर्त तो नहीं है।
  8. कारणयुक्त टिप्पणी तैयार करें— किस नियम और किस वरिष्ठता सूची के आधार पर संबंधित कार्मिक को वरिष्ठ माना गया, इसका स्पष्ट उल्लेख करें।
  9. सक्षम अधिकारी से लिखित आदेश जारी कराएं— प्रभार की अवधि, प्रशासनिक दायित्व और वित्तीय शक्तियों की स्थिति स्पष्ट हो।
  10. कार्यभार हस्तांतरण रिपोर्ट तैयार करें— अभिलेख, रोकड़, स्टॉक, चाबियां, डिजिटल लॉगिन, परीक्षा सामग्री और लंबित प्रकरणों का विवरण दिया जाए।
प्रभार आदेश की पत्रावली में वरिष्ठता निर्धारित करने वाले दस्तावेज संलग्न रखना भविष्य के ऑडिट, शिकायत और न्यायालयीय विवाद से बचाता है।

कार्यालय को जांचने योग्य दस्तावेजों की सूची

  • प्रधानाचार्य की रिक्ति/अवकाश/स्थानांतरण/सेवानिवृत्ति संबंधी आदेश।
  • उप-प्रधानाचार्य का पदस्थापन एवं वर्तमान उपलब्धता।
  • व्याख्याताओं के मूल नियुक्ति या पदोन्नति आदेश।
  • DPC चयन वर्ष तथा नियमित चयन की प्रभावी तिथि।
  • व्याख्याता संवर्ग की अंतिम वरिष्ठता सूची।
  • एक ही DPC होने पर अगली निम्न श्रेणी की वरिष्ठता सूची।
  • रिव्यू DPC अथवा चयन वर्ष परिवर्तन आदेश।
  • नोटशनल पदोन्नति एवं संशोधित वरिष्ठता आदेश।
  • स्थानांतरण आदेश और वरिष्ठता संबंधी शर्त।
  • लंबित न्यायालयीय या अधिकरण आदेश, यदि कोई हो।
  • संबंधित कार्मिक की वर्तमान ड्यूटी एवं उपलब्धता।

9. कार्यवाहक प्रभार, पदोन्नति और वित्तीय शक्तियों में अंतर

कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार मिलना नियमित प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति नहीं है। यह विद्यालय संचालन के लिए अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है।

विषय सामान्य स्थिति
नियमित पदोन्नति केवल सक्षम चयन/DPC और नियमित पदस्थापन आदेश से होती है।
कार्यवाहक प्रभार अस्थायी प्रशासनिक जिम्मेदारी है; नियमित पदोन्नति नहीं।
उच्च पद की वरिष्ठता केवल कार्यवाहक रहने से प्रधानाचार्य संवर्ग में वरिष्ठता प्राप्त नहीं होती।
उच्च पद का वेतन स्वतः देय नहीं होता; लागू वित्तीय नियम और स्वीकृत आदेश देखा जाएगा।
DDO/आहरण-वितरण शक्ति अलग सक्षम आदेश, कोषालय/IFMS मैपिंग अथवा विभागीय प्राधिकरण आवश्यक हो सकता है।
स्थानांतरण/नियुक्ति अधिकार सिर्फ वही शक्तियां प्रयोग की जा सकती हैं जो नियम या आदेश से प्रदान हों।
केवल “प्रभारी प्रधानाचार्य” लिखे स्थानीय पत्र के आधार पर बैंक, कोषालय, वेतन बिल अथवा बड़े वित्तीय निर्णय करना सुरक्षित नहीं है। आदेश में वित्तीय और DDO शक्तियों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

कार्यभार हस्तांतरण में क्या-क्या दिया जाना चाहिए?

  • विद्यालय की मुख्य चाबियां और सुरक्षित अलमारियों का विवरण।
  • रोकड़ पुस्तिका, बैंक पासबुक और अप्रयुक्त चेक का विवरण।
  • स्टॉक रजिस्टर, डेड स्टॉक और प्रयोगशाला सामग्री।
  • सेवा पुस्तिकाएं, व्यक्तिगत पत्रावलियां और अवकाश अभिलेख।
  • शाला दर्पण, परीक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य पोर्टल की अधिकृत व्यवस्था।
  • बोर्ड परीक्षा और गोपनीय सामग्री की स्थिति।
  • SDMC/SMC अभिलेख तथा लंबित प्रस्ताव।
  • निर्माण कार्य, बजट और उपयोगिता प्रमाण-पत्र की स्थिति।
  • लंबित न्यायालयीय, शिकायत और अनुशासनात्मक प्रकरण।
  • कार्मिकों की उपस्थिति, अवकाश और रिक्त पदों का विवरण।

10. कार्यवाहक प्रधानाचार्य प्रभार का नमूना कार्यालय आदेश

कार्यालय __________________________

कार्यालय आदेश

राजकीय __________________________ विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद रिक्त होने/प्रधानाचार्य के दिनांक __________ से दिनांक __________ तक अवकाश/यात्रा पर रहने के कारण विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित किया जाना आवश्यक है।

विद्यालय में पदस्थ अधिकारियों एवं व्याख्याताओं के पदस्थापन आदेश, नियमित चयन की प्रभावी तिथि, संबंधित अंतिम वरिष्ठता सूची, लागू सेवा नियम तथा विभागीय निर्देशों का परीक्षण किया गया।

अभिलेखों के अनुसार श्री/श्रीमती __________________________, पद __________________, विषय __________________, वरिष्ठता क्रमांक __________________ विद्यालय में उपलब्ध पात्र कार्मिकों में वरिष्ठतम/निर्धारित उच्चतर पदाधिकारी हैं।

अतः श्री/श्रीमती __________________________ को अपने मूल पद के कार्यों के साथ-साथ दिनांक __________ से आगामी आदेश/नियमित प्रधानाचार्य के कार्यग्रहण/प्रधानाचार्य के अवकाश से लौटने तक कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार सौंपा जाता है।

यह व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी और प्रशासनिक है। इससे संबंधित कार्मिक को नियमित पदोन्नति, प्रधानाचार्य संवर्ग में वरिष्ठता अथवा उच्च पद के वेतन का स्वतः अधिकार प्राप्त नहीं होगा। वित्तीय एवं आहरण-वितरण शक्तियां पृथक सक्षम स्वीकृति और लागू नियमों के अधीन रहेंगी।

किसी संशोधित वरिष्ठता सूची, रिव्यू DPC, न्यायालयीय आदेश अथवा विभागीय निर्देश के कारण तथ्य परिवर्तित पाए जाने पर यह आदेश पुनरीक्षण योग्य होगा।

हस्ताक्षर __________________
नाम ______________________
पदनाम एवं सक्षम प्राधिकारी
दिनांक ___________________

वरिष्ठता विवाद होने पर अभ्यावेदन का नमूना

सेवा में,
जिला शिक्षा अधिकारी/मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी/सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी
जिला __________________

विषय: कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार संवर्गीय वरिष्ठता एवं विभागीय आदेशों के अनुसार दिए जाने के संबंध में।

महोदय/महोदया,

निवेदन है कि राजकीय __________________ विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है/प्रधानाचार्य अनुपस्थित हैं। विद्यालय में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार दिए जाने के संबंध में वरिष्ठता का प्रश्न उत्पन्न हुआ है।

अतः अनुरोध है कि विद्यालय में पदस्थ कार्मिकों के मूल नियुक्ति एवं पदोन्नति आदेश, DPC चयन वर्ष, नियमित चयन की प्रभावी तिथि, अंतिम वरिष्ठता सूची, रिव्यू DPC/चयन वर्ष परिवर्तन आदेश तथा स्थानांतरण की शर्तों का परीक्षण कर कारणयुक्त लिखित निर्णय जारी किया जाए।

अंतिम निर्णय होने तक केवल वर्तमान विद्यालय में कार्यग्रहण की तारीख, आयु अथवा कुल सरकारी सेवा के आधार पर किसी कनिष्ठ कार्मिक को प्रभार नहीं दिया जाए तथा वित्तीय शक्तियों के प्रयोग के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश प्रदान किए जाएं।

संलग्नक: नियुक्ति/पदोन्नति आदेश, कार्यग्रहण रिपोर्ट, वरिष्ठता सूची का संबंधित पृष्ठ, स्थानांतरण आदेश, रिव्यू DPC आदेश एवं संबंधित नियमों की प्रति।

भवदीय
नाम ______________________
पद _______________________
विद्यालय __________________
दिनांक ____________________

11. संबंधित तीन महत्वपूर्ण आदेश एवं नियम

नीचे तीनों महत्वपूर्ण दस्तावेज लेख में ही पढ़ने के लिए एम्बेड किए गए हैं। मोबाइल में PDF दिखाई न देने पर प्रत्येक बॉक्स के नीचे दिए गए बटन से दस्तावेज को नए टैब में खोला जा सकता है।

दस्तावेज–1: उप-प्रधानाचार्य पद के कार्य एवं दायित्व, दिनांक 22 जुलाई 2022

PDF को नए टैब में खोलें

दस्तावेज–2: कार्यभार हस्तांतरण संबंधी विभागीय निर्णय, दिनांक 26 जुलाई 1982

यह दस्तावेज राजस्थान शिक्षा नियम संहिता खंड–2 के पुराने अभिलेखीय संकलन में उपलब्ध है। संबंधित कार्यभार हस्तांतरण निर्णय संकलन के लगभग PDF पृष्ठ 147 के आसपास देखा जा सकता है।

मूल अभिलेखीय संकलन खोलें

दस्तावेज–3: राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम, 2021

वरिष्ठता संबंधी नियम 36 को देखने के लिए PDF के लगभग पृष्ठ 35 से संबंधित भाग पढ़ें। किसी प्रकरण में नियमावली के नवीनतम संशोधन भी अवश्य जांचें।

नियम 36 के पृष्ठ खोलें पूर्ण आधिकारिक नियमावली खोलें

कार्मिक विभाग के Updated Service Rules पृष्ठ पर नवीनतम संशोधन जांचें

12. सामान्य प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1: प्रधानाचार्य अनुपस्थित हो और उप-प्रधानाचार्य कार्यरत हो तो क्या वरिष्ठ व्याख्याता प्रभार ले सकता है?

सामान्यतः नहीं। दिनांक 22 जुलाई 2022 के कार्य-दायित्व आदेश के अनुसार उप-प्रधानाचार्य प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का दायित्व निभाएगा।

प्रश्न 2: उप-प्रधानाचार्य नहीं हो तो किसे प्रभार मिलेगा?

विद्यालय में पदस्थ संवर्गीय रूप से वरिष्ठतम उपलब्ध और पात्र व्याख्याता को सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश से प्रभार दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 3: वर्तमान विद्यालय में पहले कार्यग्रहण करने वाला व्याख्याता वरिष्ठ होगा?

आवश्यक नहीं। विद्यालय में कार्यग्रहण की तारीख मूल संवर्गीय वरिष्ठता को स्वतः नहीं बदलती।

प्रश्न 4: सरकारी सेवा में सबसे पहले नियुक्त व्यक्ति को ही प्रभार मिलेगा?

कुल सरकारी सेवा अकेली निर्णायक नहीं है। व्याख्याता पद की नियमित चयन तिथि, DPC वर्ष और अंतिम संवर्गीय वरिष्ठता सूची देखी जाएगी।

प्रश्न 5: एक ही DPC में पदोन्नत व्याख्याताओं में वरिष्ठ कौन होगा?

सामान्यतः अगली निम्न श्रेणी में जो वरिष्ठ था, उसकी पारस्परिक वरिष्ठता पदोन्नति के बाद भी सुरक्षित रहती है, जब तक किसी विशेष आदेश में अलग व्यवस्था न हो।

प्रश्न 6: कम मेरिट क्रमांक वाला हमेशा वरिष्ठ होगा?

नहीं। पहले यह देखना होगा कि क्रमांक किस सूची, विषय, संवर्ग और चयन का है। अलग-अलग सूचियों के क्रमांक सीधे नहीं मिलाए जा सकते।

प्रश्न 7: रिव्यू DPC का आदेश बाद में जारी हुआ हो तो कार्मिक कनिष्ठ होगा?

आवश्यक नहीं। रिव्यू DPC से पूर्व चयन वर्ष की नोटशनल वरिष्ठता प्रदान की जा सकती है। आदेश की प्रभावी तिथि देखी जाएगी।

प्रश्न 8: वरिष्ठतम व्याख्याता प्रभार लेने से मना कर दे तो क्या होगा?

लिखित असमर्थता लेकर सक्षम अधिकारी कारणों पर निर्णय करेगा। विद्यालय संचालन के लिए अगले वरिष्ठ उपलब्ध कार्मिक को लिखित आदेश दिया जा सकता है।

प्रश्न 9: कार्यवाहक प्रधानाचार्य को प्रधानाचार्य पद का वेतन मिलेगा?

केवल कार्यवाहक प्रभार मिलने से उच्च पद का वेतन स्वतः देय नहीं होता। संबंधित वित्तीय नियम और सक्षम स्वीकृति देखी जाएगी।

प्रश्न 10: क्या कार्यवाहक प्रधानाचार्य स्वतः DDO बन जाता है?

आवश्यक नहीं। DDO और वित्तीय शक्तियों के लिए पृथक विभागीय आदेश, प्राधिकरण या IFMS/कोषालय मैपिंग अपेक्षित हो सकती है।

प्रश्न 11: क्या मौखिक आदेश से प्रभार लिया जा सकता है?

विद्यालय की दैनिक तात्कालिक व्यवस्था अलग विषय हो सकती है, लेकिन नियमित प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के लिए लिखित आदेश लेना सुरक्षित और आवश्यक है।

प्रश्न 12: दो व्याख्याताओं की वरिष्ठता पर विवाद हो तो क्या करें?

DPC आदेश, अंतिम वरिष्ठता सूची, अगली निम्न श्रेणी की वरिष्ठता, रिव्यू DPC और स्थानांतरण की शर्तों सहित सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी से कारणयुक्त लिखित निर्णय मांगा जाए।

13. अंतिम निष्कर्ष

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार देने का निर्णय व्यक्तिगत सुविधा अथवा स्थानीय सहमति से नहीं किया जाना चाहिए।

  1. प्रधानाचार्य के बाद नियमित उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध है तो वही कार्यवाहक प्रधानाचार्य का दायित्व निभाएगा।
  2. उप-प्रधानाचार्य उपलब्ध नहीं होने पर संवर्गीय रूप से वरिष्ठतम पात्र व्याख्याता को प्रभार दिया जाएगा।
  3. वरिष्ठता का निर्धारण नियमित चयन, DPC वर्ष, प्रभावी नियुक्ति तिथि, अंतिम वरिष्ठता सूची, रिव्यू DPC और स्थानांतरण की शर्तों से होगा।
  4. वर्तमान विद्यालय में पहले कार्यग्रहण, कुल सरकारी सेवा, आयु अथवा अलग-अलग मेरिट क्रमांक अकेले निर्णायक नहीं हैं।
  5. प्रभार सक्षम अधिकारी के कारणयुक्त लिखित आदेश से दिया जाना चाहिए।
  6. कार्यवाहक प्रभार नियमित पदोन्नति, प्रधानाचार्य संवर्ग की वरिष्ठता, उच्च वेतन अथवा DDO शक्तियां स्वतः प्रदान नहीं करता।
अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध विभागीय आदेशों और सेवा नियमों को सरल भाषा में समझाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी व्यक्तिगत सेवा-विवाद, वित्तीय अधिकार, न्यायालयीन प्रकरण या वरिष्ठता निर्धारण में मूल आदेश, नवीनतम संशोधन, प्रमाणित वरिष्ठता सूची और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय को अंतिम आधार माना जाए।

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