⚠ नवीनतम स्थिति — जुलाई 2026
समग्र शिक्षा का दूसरा चरण 31 मार्च 2026 को समाप्त होना था। केंद्र सरकार ने इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया है, ताकि राज्यों को धनराशि मिलती रहे जब तक NEP 2020 के अनुरूप संशोधित नया चरण केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृत नहीं हो जाता।[7] अर्थात् इस समय योजना विस्तारित अवधि में चल रही है — नई गाइडलाइन आने पर मानदंड बदल सकते हैं।
समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha, प्रचलित नाम समग्र शिक्षा अभियान) भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित छत्र-योजना है, जो पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक की समूची स्कूली शिक्षा को एक सतत इकाई मानकर वित्तपोषित करती है। यह योजना 2018–19 में तीन पुरानी योजनाओं — सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) और शिक्षक शिक्षा (TE) — को मिलाकर बनाई गई थी।[1]
योजना का दूसरा चरण (2021–22 से 2025–26) कुल ₹2,94,283.04 करोड़ के परिव्यय से स्वीकृत हुआ, जिसमें केंद्रांश ₹1,85,398.32 करोड़ है। यह देश के लगभग 11.6 लाख विद्यालयों, 15.6 करोड़ विद्यार्थियों और 57 लाख शिक्षकों को कवर करती है।[2]
राजस्थान में इस योजना का संचालन एकल राज्य क्रियान्वयन संस्था (SIS) के माध्यम से होता है, जिसका नेतृत्व राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त, समग्र शिक्षा राजस्थान करते हैं। यही अधिकारी राज्य में NEP 2020 क्रियान्वयन के नोडल अधिकारी भी हैं।[3]
| आरंभ | 2018–19 (CCEA स्वीकृति, अप्रैल 2018) |
| किन योजनाओं का विलय | SSA + RMSA + शिक्षक शिक्षा (TE) |
| कवरेज | पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 |
| द्वितीय चरण अवधि | 1 अप्रैल 2021 – 31 मार्च 2026 (6 माह विस्तारित) |
| कुल परिव्यय | ₹2,94,283.04 करोड़ |
| केंद्रांश | ₹1,85,398.32 करोड़ |
| विद्यालय / विद्यार्थी | 11.6 लाख / 15.6 करोड़ |
| शिक्षक | 57 लाख |
| संबद्ध लक्ष्य | सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG-4) |
| राजस्थान क्रियान्वयन | एकल राज्य क्रियान्वयन संस्था (SIS) |
- योजना क्यों बनी — तीन का एक होना
- विकास-यात्रा: 2001 से 2026 तक
- प्रशासनिक ढाँचा एवं धन-प्रवाह
- योजना के प्रमुख घटक
- NEP 2020 के बाद जोड़े गए प्रावधान
- राजस्थान में क्रियान्वयन
- विद्यालय स्तर पर अनुदान कैसे आता है
- चुनौतियाँ एवं आलोचना
- प्रधानाचार्य के लिए कार्य-सूची
- संक्षिप्ताक्षर शब्दावली
- सरकारी संपर्क
- प्रतियोगी परीक्षा दृष्टिकोण
- सामान्य प्रश्न
- सन्दर्भ
1. योजना क्यों बनी — तीन का एक होना
2018 से पहले स्कूली शिक्षा के लिए तीन अलग-अलग केंद्रीय योजनाएँ चलती थीं। तीनों की अपनी परियोजना अनुमोदन बोर्ड, अपने वित्तीय मानदंड, अपने रिपोर्टिंग प्रारूप और अपनी राज्य क्रियान्वयन संस्थाएँ थीं। कई राज्यों में एक ही भवन में तीन समानांतर तंत्र काम करते थे।[4]
केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) की उपसमिति ने इन तीनों के एकीकरण की सिफारिश की। केंद्रीय बजट 2018–19 में घोषणा हुई कि स्कूली शिक्षा को पूर्व-नर्सरी से कक्षा 12 तक बिना विभाजन के, समग्र रूप में देखा जाएगा। इसी आधार पर समग्र शिक्षा का जन्म हुआ।[1]
2. विकास-यात्रा: 2001 से 2026 तक
| वर्ष | घटनाक्रम |
|---|---|
| 2001 | सर्व शिक्षा अभियान आरंभ — प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण हेतु |
| 2009 | शिक्षा का अधिकार अधिनियम; SSA उसका मुख्य वित्तपोषण माध्यम बना |
| अप्रैल 2018 | CCEA द्वारा समग्र शिक्षा को स्वीकृति; तीन योजनाओं का विलय |
| 2018–19 | सभी राज्यों में क्रियान्वयन प्रारंभ |
| जुलाई 2020 | NEP 2020 आई; योजना को उसके अनुरूप पुनर्गठित करने की प्रक्रिया शुरू |
| 5 जुलाई 2021 | निपुण भारत मिशन का शुभारंभ — समग्र शिक्षा के अंतर्गत |
| अगस्त 2021 | द्वितीय चरण (समग्र शिक्षा 2.0) स्वीकृत — 2021–22 से 2025–26 |
| मार्च 2025 | राजस्थान की 2025–26 वार्षिक कार्य योजना हेतु PAB बैठक, नई दिल्ली |
| जून 2026 | योजना छह महीने के लिए विस्तारित — संशोधित चरण की प्रतीक्षा |
3. प्रशासनिक ढाँचा एवं धन-प्रवाह
यह समझना प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के लिए सर्वाधिक उपयोगी है — पैसा कहाँ से चलकर विद्यालय तक पहुँचता है, और किस स्तर पर कौन निर्णय लेता है।
| स्तर / निकाय | भूमिका |
|---|---|
| शासी परिषद (Governing Council) | केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता; वित्तीय एवं कार्यक्रम मानदंडों में संशोधन का अधिकार |
| परियोजना अनुमोदन बोर्ड (PAB) | सचिव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अध्यक्षता; राज्यों की वार्षिक कार्य योजना एवं बजट स्वीकृत करता है |
| तकनीकी सहायता समूह (TSG) | EdCIL में स्थित; तकनीकी सहायता |
| राज्य क्रियान्वयन संस्था (SIS) | प्रत्येक राज्य में एक ही संस्था; राजस्थान में इसका नेतृत्व राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त करते हैं |
| जिला / ब्लॉक इकाई | जिला परियोजना समन्वयक, ब्लॉक संदर्भ केंद्र (BRC), कनिष्ठ अभियंता (निर्माण कार्य हेतु) |
| विद्यालय स्तर | SMC (कक्षा 1–8) / SDMC (माध्यमिक) — अनुदान प्राप्ति एवं व्यय की जिम्मेदारी |
4. योजना के प्रमुख घटक
समग्र शिक्षा का बजट कई मदों में विभाजित होता है। नीचे प्रमुख हस्तक्षेप-क्षेत्र दिए गए हैं, जिनके अंतर्गत विद्यालयों को सहायता मिलती है।[2]
| घटक | इसमें क्या शामिल है |
|---|---|
| सार्वभौमिक पहुँच | नए विद्यालय/उन्नयन, आवासीय विद्यालय, परिवहन सुविधा, ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी |
| आधारभूत साक्षरता (FLN) | निपुण भारत मिशन, शिक्षण-अधिगम सामग्री, गतिविधि-आधारित शिक्षण |
| बालिका शिक्षा | कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (कक्षा 12 तक उन्नयन), बालिका छात्रावासों में स्वच्छता सुविधाएँ |
| समावेशी शिक्षा | दिव्यांग बच्चों हेतु सहायक उपकरण, विशेष शिक्षक, बाधा-रहित पहुँच |
| गुणवत्ता एवं नवाचार | राष्ट्रीय आविष्कार अभियान, विज्ञान/गणित प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय अनुदान |
| शिक्षक शिक्षा | DIET/CTE का सुदृढ़ीकरण, सेवाकालीन प्रशिक्षण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं हेतु मास्टर ट्रेनर |
| व्यावसायिक शिक्षा | कौशल विकास मंत्रालय के साथ अभिसरण; ITI एवं पॉलिटेक्निक की अवसंरचना का उपयोग |
| डिजिटल पहल | ICT प्रयोगशालाएँ, स्मार्ट कक्षाएँ, डिजिटल शिक्षण सामग्री |
| विद्यालय अनुदान | समग्र विद्यालय अनुदान, पुस्तकालय अनुदान, खेल अनुदान, रखरखाव अनुदान |
5. NEP 2020 के बाद जोड़े गए प्रावधान
2021 में स्वीकृत द्वितीय चरण में NEP 2020 की सिफारिशों के आधार पर कई नए हस्तक्षेप जोड़े गए। ये पहले के SSA/RMSA में नहीं थे।[2][5]
| नया प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| पूर्व-प्राथमिक का औपचारिकीकरण | सरकारी विद्यालयों में भी प्ले-स्कूल — यह पहली केंद्रीय योजना है जो विद्यालय-परिसर में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को स्पष्ट रूप से कवर करती है |
| निपुण भारत | 5 जुलाई 2021 को आरंभ; लक्ष्य — प्रत्येक बच्चा 2026–27 तक कक्षा 3 में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता प्राप्त करे |
| समग्र प्रगति पत्रक (HPC) | प्रत्येक विद्यार्थी के लिए — केवल अंक नहीं, समग्र विकास का चित्र |
| DBT के माध्यम से लाभ | बाल-केंद्रित सभी हस्तक्षेप क्रमशः सीधे विद्यार्थी को IT-आधारित मंच से |
| KGBV का कक्षा 12 तक उन्नयन | पहले ये कक्षा 8 तक सीमित थे |
| स्ट्रीम के स्थान पर विषय | उच्च माध्यमिक में कला/विज्ञान/वाणिज्य के कठोर विभाजन के स्थान पर नए विषय जोड़ने की सुविधा |
| बालिका छात्रावास सुविधाएँ | सभी बालिका छात्रावासों में इंसिनरेटर एवं सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन |
6. राजस्थान में क्रियान्वयन
राजस्थान में समग्र शिक्षा का संचालन एकल राज्य क्रियान्वयन संस्था द्वारा होता है। मार्च 2025 में 2025–26 की वार्षिक कार्य योजना हेतु PAB बैठक की पूर्व-तैयारी शिक्षा विभाग के शासन सचिव की अध्यक्षता में हुई, जिसमें राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त, वित्त सलाहकार तथा उपायुक्त सम्मिलित हुए। PAB की बैठक 18 मार्च 2025 को नई दिल्ली में शिक्षा सचिव, भारत सरकार की अध्यक्षता में आयोजित की गई।[3]
6.1 राजस्थान की विशिष्ट पहलें
जहाँ आबादी बिखरी है और ढाणियों में मानदंडों के अनुसार विद्यालय खोलना संभव नहीं, वहाँ 6–14 आयु वर्ग के बच्चों को निकटतम विद्यालय तक पहुँचाने के लिए परिवहन वाउचर दिया जाता है। राजस्थान में यह ग्रामीण क्षेत्र की कक्षा 1–8 के लिए सत्र 2017–18 से लागू है।[6]
पूर्व में संचालित विद्यालय अवलोकन कार्यक्रम को विस्तारित कर बनाया गया सघन सम्बलन कार्यक्रम। इसमें संभाग, जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर के अधिकारियों के लिए प्रतिमाह विद्यालय अवलोकन के मानदंड निर्धारित हैं।[6]
समग्र शिक्षा के अंतर्गत राजस्थान में सभी निर्माण कार्य समुदाय के सहयोग से कराए जाने का प्रावधान है। SMC/SDMC को निर्माण राशि अग्रिम दी जाती है, और ब्लॉक स्तर पर कार्यरत कनिष्ठ अभियंता तकनीकी मार्गदर्शन देते हैं। स्थानीय सामग्री एवं स्थापत्य विधाओं के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जाता है।[6]
29 मार्च 2025 को आरंभ मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान का नोडल कार्यालय भी समग्र शिक्षा का ही है। इसका अर्थ है कि MSRA की अधिकांश गतिविधियों का वित्तपोषण और निगरानी समग्र शिक्षा के तंत्र से होती है।
7. विद्यालय स्तर पर अनुदान कैसे आता है
यह खंड विशेष रूप से प्रधानाचार्यों एवं SMC सचिवों के लिए है। समग्र शिक्षा के अनुदान की प्रक्रिया में कुछ बिंदुओं पर सर्वाधिक आपत्तियाँ एवं ऑडिट प्रश्न उठते हैं।
| क्रम | चरण | ध्यान रखने योग्य |
|---|---|---|
| 1 | विद्यालय की माँग प्रविष्टि | शाला दर्पण पोर्टल पर समय-सीमा में प्रविष्टि; विलंब से पूरा वर्ष निकल जाता है |
| 2 | जिला/राज्य स्तर पर समेकन | यही AWP&B का आधार बनता है |
| 3 | PAB की स्वीकृति | स्वीकृत मद से भिन्न मद में व्यय नहीं किया जा सकता |
| 4 | SMC/SDMC खाते में राशि | संयुक्त खाता; कैशबुक अद्यतन रखना अनिवार्य |
| 5 | व्यय एवं अभिलेख | बिल-वाउचर, प्रस्ताव, फोटोग्राफ (निर्माण कार्य में) संरक्षित रखें |
| 6 | उपयोगिता प्रमाण-पत्र | प्रस्तुत न होने पर अगली किस्त रुक जाती है |
8. चुनौतियाँ एवं आलोचना
संतुलित समझ के लिए योजना की सीमाओं को जानना उतना ही आवश्यक है जितना उसकी उपलब्धियों को।
| चुनौती | विवरण |
|---|---|
| एक ही बजट, अनेक माँगें | छात्रवृत्ति, अवसंरचना, शिक्षक भर्ती और डिजिटल रोलआउट — सब एक ही आवंटन में समाहित[5] |
| व्यय की क्षमता | सूचना के अधिकार से प्राप्त एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के शिक्षा निदेशालय को 2024–25 में सामान्य शिक्षा हेतु ₹2,703.12 करोड़ का बजट मिला, किंतु व्यय ₹1,267.87 करोड़ ही हो सका — 50% से भी कम[8] |
| अनिश्चितता की अवधि | चरण समाप्ति के बाद छह माह का विस्तार दिया गया है; नए मानदंड आने तक राज्यों की दीर्घकालिक योजना बनाना कठिन[7] |
| प्रक्रियागत बोझ | पोर्टल प्रविष्टि, उपयोगिता प्रमाण-पत्र और अभिलेख-संधारण का बड़ा हिस्सा शिक्षकों पर आता है, जिससे शिक्षण-समय प्रभावित होता है |
| GDP का 6% लक्ष्य | शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय का यह लक्ष्य अब तक प्राप्त नहीं हुआ[5] |
9. प्रधानाचार्य के लिए कार्य-सूची
| कब | क्या करना है |
|---|---|
| सत्र आरंभ से पूर्व | शाला दर्पण पर पाठ्यपुस्तक एवं अन्य माँग प्रविष्टि; विद्यालय की अवसंरचना आवश्यकताएँ दर्ज करना |
| अनुदान प्राप्ति पर | SMC/SDMC की बैठक बुलाकर व्यय प्रस्ताव पारित कराना; कार्यवृत्त संधारित करना |
| व्यय के दौरान | प्रत्येक व्यय स्वीकृत मद के अनुरूप; कैशबुक प्रतिदिन अद्यतन; बिल-वाउचर क्रमबद्ध |
| निर्माण कार्य में | कनिष्ठ अभियंता से तकनीकी मार्गदर्शन लेना; कार्य के पहले/दौरान/बाद के फोटोग्राफ रखना |
| वर्ष के अंत में | उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर प्रस्तुत करना; शेष राशि की स्थिति स्पष्ट करना |
| स्थानांतरण पर | कैशबुक, शेष राशि एवं निर्माण कार्यों का लिखित चार्ज हस्तांतरण |
10. संक्षिप्ताक्षर शब्दावली
विभागीय आदेशों में ये संक्षिप्ताक्षर बार-बार आते हैं। परीक्षा में भी इन्हीं के पूर्ण रूप पूछे जाते हैं।
| संक्षेप | पूर्ण रूप | अर्थ |
|---|---|---|
| SSA | Sarva Shiksha Abhiyan | सर्व शिक्षा अभियान (2001) |
| RMSA | Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan | माध्यमिक शिक्षा हेतु |
| TE | Teacher Education | शिक्षक शिक्षा योजना |
| SIS | State Implementation Society | राज्य क्रियान्वयन संस्था |
| PAB | Project Approval Board | परियोजना अनुमोदन बोर्ड |
| AWP&B | Annual Work Plan & Budget | वार्षिक कार्य योजना एवं बजट |
| SMC | School Management Committee | विद्यालय प्रबंधन समिति |
| SDMC | School Development & Management Committee | विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति |
| FLN | Foundational Literacy & Numeracy | आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता |
| KGBV | Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya | कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय |
| DIET | District Institute of Education & Training | जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान |
| BRC | Block Resource Centre | ब्लॉक संदर्भ केंद्र |
| EdCIL | Educational Consultants India Limited | TSG का मेजबान संस्थान |
| HPC | Holistic Progress Card | समग्र प्रगति पत्रक |
11. सरकारी संपर्क
| समग्र शिक्षा (राष्ट्रीय) | samagra.education.gov.in |
| शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार | education.gov.in |
| शिक्षा विभाग, राजस्थान | education.rajasthan.gov.in |
| शाला दर्पण (विद्यालय पोर्टल) | rajshaladarpan.rajasthan.gov.in |
| RSCERT, उदयपुर | दूरभाष: 0294-2415171 | rscertudai.rajasthan.gov.in |
| जिला स्तर | जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एवं जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय |
12. प्रतियोगी परीक्षा दृष्टिकोण
समग्र शिक्षा से संबंधित प्रश्न REET, RPSC (व्याख्याता एवं द्वितीय श्रेणी), तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती, ग्राम सेवक तथा RAS की सामान्य अध्ययन में पूछे जाते हैं। सबसे अधिक पूछे जाने वाले बिंदु — विलय की तीन योजनाएँ, आरंभ वर्ष, कवरेज और निपुण भारत की तिथि।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1 समग्र शिक्षा में किन तीन योजनाओं का विलय किया गया?
(अ) SSA, RMSA, मध्याह्न भोजन (ब) SSA, RMSA, शिक्षक शिक्षा (स) SSA, RTE, DPEP (द) RMSA, TE, निपुण भारत
उत्तर: (ब) — सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा।[1]
प्र.2 समग्र शिक्षा के द्वितीय चरण का कुल परिव्यय कितना है?
(अ) ₹1,85,398 करोड़ (ब) ₹2,94,283 करोड़ (स) ₹37,010 करोड़ (द) ₹3,85,720 करोड़
उत्तर: (ब) — ₹2,94,283.04 करोड़, जिसमें केंद्रांश ₹1,85,398.32 करोड़ है। ध्यान दें कि विकल्प (अ) केंद्रांश है — यही सबसे आम भ्रम है।[2]
प्र.3 निपुण भारत मिशन कब आरंभ हुआ?
(अ) 29 जुलाई 2020 (ब) 5 जुलाई 2021 (स) 1 अप्रैल 2018 (द) 29 मार्च 2025
उत्तर: (ब) — समग्र शिक्षा के अंतर्गत। लक्ष्य: 2026–27 तक कक्षा 3 में FLN।[2]
प्र.4 राज्यों की वार्षिक कार्य योजना किस निकाय द्वारा स्वीकृत की जाती है?
(अ) शासी परिषद (ब) परियोजना अनुमोदन बोर्ड (PAB) (स) CABE (द) NCERT
उत्तर: (ब) — PAB की अध्यक्षता सचिव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग करते हैं।[4]
प्र.5 समग्र शिक्षा किस सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप है?
(अ) SDG-2 (ब) SDG-3 (स) SDG-4 (द) SDG-8
उत्तर: (स) — गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।[2]
प्र.6 समग्र शिक्षा का द्वितीय चरण कब समाप्त होना था?
(अ) 31 मार्च 2025 (ब) 31 मार्च 2026 (स) 31 दिसंबर 2026 (द) 31 मार्च 2027
उत्तर: (ब) — किंतु जून 2026 में इसे छह माह के लिए विस्तारित कर दिया गया।[7]
13. सामान्य प्रश्न
प्र. "समग्र शिक्षा" और "समग्र शिक्षा अभियान" — क्या ये अलग हैं?
नहीं। आधिकारिक नाम समग्र शिक्षा है; "अभियान" शब्द लोकप्रिय प्रयोग में जुड़ गया क्योंकि पूर्ववर्ती योजनाओं (सर्व शिक्षा अभियान) में यह शब्द था।
प्र. क्या सर्व शिक्षा अभियान अब भी चल रहा है?
एक अलग योजना के रूप में नहीं। 2018 में इसका समग्र शिक्षा में विलय हो गया। हाँ, SSA के अधिकांश हस्तक्षेप — जैसे प्रारंभिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण — अब समग्र शिक्षा के घटकों के रूप में जारी हैं।
प्र. योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी — क्या अब पैसा नहीं आएगा?
आएगा। केंद्र ने राज्यों को धनराशि की निरंतरता बनाए रखने के लिए योजना को छह महीने बढ़ा दिया है, जब तक NEP-अनुरूप संशोधित चरण को मंत्रिमंडल की स्वीकृति नहीं मिल जाती।[7] नए चरण की घोषणा पर मानदंड बदल सकते हैं — विभागीय परिपत्र देखते रहें।
प्र. समग्र शिक्षा और मध्याह्न भोजन क्या एक ही हैं?
नहीं। मध्याह्न भोजन अब पीएम पोषण के नाम से एक पृथक केंद्रीय योजना है। समग्र शिक्षा शैक्षिक अवसंरचना, गुणवत्ता एवं शिक्षक-संबंधी हस्तक्षेपों को कवर करती है।
प्र. निजी विद्यालयों को समग्र शिक्षा से अनुदान मिलता है?
नहीं। योजना सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त (aided) विद्यालयों को कवर करती है। निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालय इसके दायरे में नहीं आते — उनका संबंध RTE की 25% आरक्षित सीटों की प्रतिपूर्ति से है, जो अलग व्यवस्था है।
प्र. विद्यालय अनुदान किस खाते में आता है?
प्रारंभिक विद्यालयों में SMC के तथा माध्यमिक/उच्च माध्यमिक में SDMC के खाते में। खाता संयुक्त होता है और कैशबुक का संधारण अनिवार्य है।
प्र. स्वीकृत मद से अलग मद में खर्च कर सकते हैं?
नहीं। PAB द्वारा जिस मद में राशि स्वीकृत हुई है, व्यय उसी में होना चाहिए। मद-परिवर्तन ऑडिट आपत्ति का सबसे सामान्य कारण है। आवश्यकता हो तो पहले सक्षम स्तर से लिखित अनुमति लें।
प्र. उपयोगिता प्रमाण-पत्र न देने पर क्या होता है?
अगली किस्त रुक जाती है। चूँकि राज्य का आवंटन भी केंद्र को दी गई उपयोगिता रिपोर्ट पर निर्भर करता है, एक विद्यालय की देरी पूरे ब्लॉक की प्रगति को प्रभावित कर सकती है।
प्र. परिवहन वाउचर किसे मिलता है?
राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों के उन बच्चों को, जिनके निवास-स्थान (जैसे ढाणियों) के निकट मानदंडों के अनुसार विद्यालय संचालित करना संभव नहीं। यह 6–14 आयु वर्ग, कक्षा 1–8 के लिए है।[6]
प्र. समग्र शिक्षा का MSRA से क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान का नोडल कार्यालय समग्र शिक्षा ही है। दोनों प्रतिस्पर्धी नहीं, पूरक हैं — MSRA राज्य की रणनीति है, समग्र शिक्षा उसका मुख्य वित्तीय एवं प्रशासनिक आधार।
प्र. निपुण भारत अलग योजना है?
नहीं, यह समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित मिशन है। इसका लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा 2026–27 तक कक्षा 3 में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता प्राप्त कर ले।[2]
प्र. विद्यालय की माँग दर्ज कहाँ करें?
राजस्थान में शाला दर्पण पोर्टल पर। पाठ्यपुस्तक माँग, अवसंरचना आवश्यकताएँ और अन्य प्रविष्टियाँ निर्धारित समय-सीमा में करनी होती हैं — समय निकल जाने पर उस वर्ष का प्रावधान नहीं हो पाता।
यह भी देखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 — राजस्थान में क्रियान्वयन
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 — राजस्थान अनुपालन
- राजस्थान शिक्षा नीति 2024 — संपूर्ण मार्गदर्शिका
सन्दर्भ
- शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार — समग्र शिक्षा आधिकारिक पोर्टल,
samagra.education.gov.in. केंद्रीय बजट 2018–19 की घोषणा के आधार पर SSA, RMSA एवं शिक्षक शिक्षा का विलय; CCEA स्वीकृति अप्रैल 2018। - प्रेस सूचना ब्यूरो — "Cabinet approves continuation of Samagra Shiksha Scheme for School Education from 1st April 2021 to 31st March 2026", अगस्त 2021. परिव्यय ₹2,94,283.04 करोड़; केंद्रांश ₹1,85,398.32 करोड़; कवरेज 11.6 लाख विद्यालय, 15.6 करोड़ विद्यार्थी, 57 लाख शिक्षक; निपुण भारत 5 जुलाई 2021।
- "समग्र शिक्षा एवं पीएबी की वार्षिक कार्य योजना 2025-26 की तैयारी बैठक" — मार्च 2025. PAB बैठक 18 मार्च 2025, नई दिल्ली; शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार।
- शिक्षा मंत्रालय — एकीकृत योजना संबंधी राज्यों को पत्र (2018). शासी परिषद, परियोजना अनुमोदन बोर्ड, राज्य क्रियान्वयन संस्था एवं EdCIL स्थित TSG की संरचना।
- "Six Years of NEP 2020: The Gap Between Policy Design and Classroom Reality" — नीति विश्लेषण, जुलाई 2026. समग्र शिक्षा आवंटन ₹37,010 करोड़ (2024–25) एवं बहु-मद दबाव।
- समग्र शिक्षा राजस्थान — विद्यालय अनुदान, निर्माण कार्य में सामुदायिक सहभागिता, परिवहन वाउचर (2017–18 से) एवं शाला सम्बलन अभियान संबंधी विभागीय दिशा-निर्देश।
- "Centre extends Samagra Shiksha by six months ahead of revamp rollout" — बिज़नेस स्टैंडर्ड, 14 जून 2026. 31 मार्च 2026 की समाप्ति तिथि से छह माह का विस्तार; संशोधित NEP-अनुरूप चरण मंत्रिमंडल स्वीकृति की प्रतीक्षा में।
- सूचना का अधिकार के अंतर्गत प्राप्त जानकारी पर आधारित समाचार रिपोर्ट — शिक्षा निदेशालय, राजस्थान: 2024–25 में सामान्य शिक्षा हेतु ₹2,703.12 करोड़ बजट, व्यय ₹1,267.87 करोड़।
बाहरी कड़ियाँ
- समग्र शिक्षा —
samagra.education.gov.in - शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार —
education.gov.in - शिक्षा विभाग, राजस्थान —
education.rajasthan.gov.in - शाला दर्पण —
rajshaladarpan.rajasthan.gov.in - दीक्षा —
diksha.gov.in
अंतिम अद्यतन: 23 जुलाई 2026
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी दस्तावेज़ों एवं समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। योजना इस समय विस्तारित अवधि में है; संशोधित चरण की स्वीकृति के बाद प्रावधानों में परिवर्तन संभव है। किसी भी आधिकारिक कार्य से पूर्व संबंधित विभाग की नवीनतम अधिसूचना अवश्य देखें।


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