आनुवंशिकता एवं जैव विकास (Heredity and Evolution)
RBSE/CBSE कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय 9 | NCERT Based Notes 2024-25
1. परिचय (Introduction)
हम देखते हैं कि संतान अपने जनकों से मिलती-जुलती होती है, फिर भी कुछ भिन्नताएँ होती हैं। जनकों से संतान में गुणों का स्थानांतरण आनुवंशिकता कहलाता है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाले परिवर्तन जैव विकास कहलाते हैं।
📘 विभिन्नता (Variation): एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले अंतर को विभिन्नता कहते हैं।
1.1 महत्वपूर्ण शब्दावली
| शब्द (Term) | हिंदी अर्थ | परिभाषा |
|---|---|---|
| Gene (जीन) | जीन | DNA का वह खंड जो किसी लक्षण की सूचना रखता है |
| Chromosome | गुणसूत्र | DNA और प्रोटीन से बनी धागेनुमा संरचना |
| Allele | युग्मविकल्पी | एक जीन के दो या अधिक रूप |
| Dominant | प्रभावी | जो लक्षण F1 में प्रकट हो |
| Recessive | अप्रभावी | जो लक्षण F1 में छिपा रहे |
| Genotype | जीनप्ररूप | जीव का आनुवंशिक संगठन (जैसे TT, Tt) |
| Phenotype | लक्षणप्ररूप | जीव का दिखाई देने वाला लक्षण (जैसे लंबा) |
| Homozygous | समयुग्मजी | दोनों जीन समान (TT या tt) |
| Heterozygous | विषमयुग्मजी | दोनों जीन भिन्न (Tt) |
2. आनुवंशिकता (Heredity)
2.1 लक्षणों की वंशागति
जीवों में लक्षण जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं। प्रत्येक लक्षण के लिए दो जीन होते हैं - एक पिता से और एक माता से। ये जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं।
• मानव में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं
• 22 जोड़े = समजात गुणसूत्र (Autosomes)
• 1 जोड़ा = लिंग गुणसूत्र (Sex chromosomes)
• पुरुष = XY, महिला = XX
2.2 विभिन्नताओं के प्रकार
| प्रकार | विवरण | वंशागत | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कायिक विभिन्नता | वातावरण के कारण | नहीं | शरीर का भार, त्वचा का रंग |
| जननिक विभिन्नता | जीन परिवर्तन से | हाँ | आँखों का रंग, रक्त समूह |
3. मेंडल के प्रयोग (Mendel's Experiments)
3.1 ग्रेगर जॉन मेंडल (1822-1884)
मेंडल को "आनुवंशिकी का जनक" कहा जाता है। उन्होंने ऑस्ट्रिया के एक मठ में मटर के पौधों (Pisum sativum) पर 7 वर्षों (1856-1863) तक प्रयोग किए।
• एक वर्षीय पौधा (जल्दी परिणाम)
• स्पष्ट विपरीत लक्षण
• स्व-परागण आसान
• पर-परागण भी संभव
• बड़ी संख्या में बीज
• आसानी से उगाया जा सकता है
3.2 मेंडल द्वारा चुने गए 7 लक्षण
| क्र. | लक्षण | प्रभावी | अप्रभावी |
|---|---|---|---|
| 1 | तने की लंबाई | लंबा (T) | बौना (t) |
| 2 | बीज का आकार | गोल (R) | झुर्रीदार (r) |
| 3 | बीज का रंग | पीला (Y) | हरा (y) |
| 4 | फूल का रंग | बैंगनी | सफेद |
| 5 | फली का आकार | फूला हुआ | संकुचित |
| 6 | फली का रंग | हरा | पीला |
| 7 | फूल की स्थिति | अक्षीय | शीर्षस्थ |
3.3 एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross)
जब दो जीवों को एक लक्षण के आधार पर संकरित किया जाए तो इसे एकसंकर संकरण कहते हैं।
F1 पीढ़ी: सभी Tt (100% लंबे) - केवल प्रभावी लक्षण
F2 पीढ़ी:
• जीनप्ररूप अनुपात: 1 TT : 2 Tt : 1 tt (1:2:1)
• लक्षणप्ररूप अनुपात: 3 लंबे : 1 बौना (3:1)
3.4 द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross)
जब दो जीवों को दो लक्षणों के आधार पर संकरित किया जाए।
F1 पीढ़ी: RrYy (सभी गोल पीले)
F1 × F1: RrYy × RrYy
F2 पीढ़ी अनुपात:
9 गोल पीले : 3 गोल हरे : 3 झुर्रीदार पीले : 1 झुर्रीदार हरा
(9:3:3:1)
4. मेंडल के नियम (Mendel's Laws)
4.1 प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)
4.2 पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)
इसे "जीवों की शुद्धता का नियम" भी कहते हैं।
4.3 स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)
यह नियम द्विसंकर संकरण पर आधारित है।
• F2 में 3:1 अनुपात = एकसंकर संकरण
• F2 में 9:3:3:1 अनुपात = द्विसंकर संकरण
• F1 में 100% प्रभावी लक्षण
5. लिंग निर्धारण (Sex Determination)
5.1 मानव में लिंग निर्धारण
मानव में लिंग निर्धारण लिंग गुणसूत्रों द्वारा होता है। पुरुष में XY और महिला में XX गुणसूत्र होते हैं।
• माता (XX) के युग्मक: सभी X (100%)
• पिता (XY) के युग्मक: 50% X + 50% Y
• X शुक्राणु + X अंडाणु = XX = लड़की
• Y शुक्राणु + X अंडाणु = XY = लड़का
⚡ निष्कर्ष: संतान का लिंग पिता के गुणसूत्र पर निर्भर करता है!
5.2 विभिन्न जीवों में लिंग निर्धारण
| जीव | नर | मादा | निर्धारण |
|---|---|---|---|
| मानव, स्तनधारी | XY | XX | पिता द्वारा |
| पक्षी | ZZ | ZW | माता द्वारा |
| टिड्डा, तिलचट्टा | XO | XX | पिता द्वारा |
| मधुमक्खी | n (16) | 2n (32) | निषेचन द्वारा |
6. जैव विकास (Evolution)
6.1 जैव विकास क्या है?
6.2 डार्विन का प्राकृतिक वरण सिद्धांत
चार्ल्स डार्विन (1809-1882) ने 1859 में "On the Origin of Species" पुस्तक प्रकाशित की।
1. अत्यधिक उत्पादन: जीव अपनी आवश्यकता से अधिक संतान उत्पन्न करते हैं
2. जीवन संघर्ष: भोजन, आवास के लिए प्रतिस्पर्धा
3. विभिन्नताएँ: एक ही प्रजाति में अंतर होते हैं
4. योग्यतम की उत्तरजीविता: अनुकूल विभिन्नता वाले जीवित रहते हैं
5. प्राकृतिक चयन: प्रकृति अनुकूल लक्षणों का चयन करती है
6.3 अर्जित और आनुवंशिक लक्षण
| अर्जित लक्षण | आनुवंशिक लक्षण |
|---|---|
| जीवनकाल में प्राप्त | जन्म से प्राप्त |
| वंशागत नहीं होते | वंशागत होते हैं |
| जनन कोशिकाओं के DNA में परिवर्तन नहीं | DNA में परिवर्तन होता है |
| उदाहरण: पेशियों का विकास | उदाहरण: आँखों का रंग |
7. जैव विकास के प्रमाण (Evidences of Evolution)
7.1 समजात अंग (Homologous Organs)
उदाहरण: मनुष्य का हाथ, व्हेल का फ्लिपर, चमगादड़ का पंख, घोड़े की टाँग
समजात अंग अपसारी विकास (Divergent Evolution) दर्शाते हैं - एक पूर्वज से विभिन्न रूपों का विकास।
7.2 समवृत्ति अंग (Analogous Organs)
उदाहरण: पक्षी का पंख और कीट का पंख
समवृत्ति अंग अभिसारी विकास (Convergent Evolution) दर्शाते हैं।
7.3 समजात व समवृत्ति अंगों की तुलना
| आधार | समजात अंग | समवृत्ति अंग |
|---|---|---|
| उत्पत्ति | समान | भिन्न |
| मूल संरचना | समान | भिन्न |
| कार्य | भिन्न | समान |
| विकास प्रकार | अपसारी | अभिसारी |
| उदाहरण | मानव हाथ, व्हेल फ्लिपर | पक्षी पंख, कीट पंख |
7.4 जीवाश्म (Fossils)
जीवाश्म की आयु निर्धारण विधियाँ:
- सापेक्ष विधि: जीवाश्म जितना गहराई में, उतना पुराना
- रेडियोकार्बन डेटिंग (C-14): कार्बन के समस्थानिक द्वारा आयु निर्धारण
• आर्कियोप्टेरिक्स: सरीसृप और पक्षी के बीच की कड़ी
• यह दर्शाता है कि पक्षी सरीसृपों से विकसित हुए
7.5 अवशेषी अंग (Vestigial Organs)
वे अंग जो पूर्वजों में क्रियाशील थे लेकिन वर्तमान में अक्रियाशील हैं:
- मानव में: अपेंडिक्स, कर्णपल्लव की पेशियाँ, अक्ल दाढ़, पुच्छ कशेरुक
- व्हेल में: पश्चपाद की अस्थियाँ
8. जातिउद्भवन (Speciation)
8.1 जातिउद्भवन क्या है?
8.2 जातिउद्भवन के कारण
| कारक | विवरण |
|---|---|
| भौगोलिक पृथक्करण | पर्वत, नदी, समुद्र द्वारा अलगाव |
| जननिक विचलन | छोटी जनसंख्या में जीन आवृत्ति परिवर्तन |
| प्राकृतिक वरण | भिन्न वातावरण में भिन्न चयन |
| उत्परिवर्तन | DNA में अचानक परिवर्तन |
जब दो जनसंख्याओं के बीच जीनों का आदान-प्रदान होता है तो जातिउद्भवन नहीं होता।
जब जीन प्रवाह रुक जाता है तो नई जातियाँ बन सकती हैं।
9. मानव विकास (Human Evolution)
9.1 मानव विकास का क्रम
ड्रायोपिथेकस (वनमानुष) → रामापिथेकस → ऑस्ट्रेलोपिथेकस → होमो हेबिलिस → होमो इरेक्टस → होमो सेपियंस (आधुनिक मानव)
समय: लगभग 1.5 करोड़ वर्ष पहले से वर्तमान तक
9.2 मानव विकास के चरण
| प्रजाति | काल | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| ड्रायोपिथेकस | 1.5 करोड़ वर्ष | वृक्षों पर रहने वाला, वनमानुष जैसा |
| रामापिथेकस | 1.4 करोड़ वर्ष | भारत में जीवाश्म, अर्ध-सीधा चलना |
| ऑस्ट्रेलोपिथेकस | 50 लाख वर्ष | अफ्रीका में, सीधा चलना, छोटा मस्तिष्क |
| होमो हेबिलिस | 20 लाख वर्ष | पत्थर के औजार, मांस खाना |
| होमो इरेक्टस | 15 लाख वर्ष | आग का उपयोग, शिकार करना |
| होमो सेपियंस | 2 लाख वर्ष | आधुनिक मानव, बड़ा मस्तिष्क |
• मानव अफ्रीका में विकसित हुआ
• सभी मानव जातियाँ एक ही प्रजाति "होमो सेपियंस" से हैं
• त्वचा का रंग केवल जलवायु अनुकूलन है
10. महत्वपूर्ण आरेख
1. एकसंकर संकरण का चेकर बोर्ड
2. द्विसंकर संकरण (9:3:3:1)
3. लिंग निर्धारण का चेकर बोर्ड
4. समजात अंगों का चित्र (अग्रपाद)
5. मानव विकास की श्रृंखला
6. जातिउद्भवन का प्रवाह चित्र
11. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
12. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
13. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
(1) P पीढ़ी: शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधों का संकरण कराया।
(2) F1 पीढ़ी: सभी पौधे लंबे (Tt) प्राप्त हुए। इससे स्पष्ट हुआ कि लंबा लक्षण प्रभावी और बौना अप्रभावी है।
(3) F2 पीढ़ी: F1 पौधों का स्व-परागण कराया।
Tt × Tt = TT : Tt : Tt : tt
लक्षणप्ररूप अनुपात: 3 लंबे : 1 बौना
जीनप्ररूप अनुपात: 1 TT : 2 Tt : 1 tt
(4) निष्कर्ष: इससे प्रभाविता और पृथक्करण के नियम सिद्ध हुए।
(1) गुणसूत्र: मानव में 46 गुणसूत्र होते हैं - 44 समजात और 2 लिंग गुणसूत्र।
(2) महिला (XX): दोनों लिंग गुणसूत्र X होते हैं। अंडाणु में सदैव X गुणसूत्र होता है।
(3) पुरुष (XY): एक X और एक Y गुणसूत्र। शुक्राणु में 50% X और 50% Y होते हैं।
(4) निषेचन:
- X (शुक्राणु) + X (अंडाणु) = XX = लड़की
- Y (शुक्राणु) + X (अंडाणु) = XY = लड़का
(5) निष्कर्ष: संतान का लिंग पिता के शुक्राणु में उपस्थित गुणसूत्र (X या Y) पर निर्भर करता है।
(1) समजात अंग: भिन्न जीवों में समान उत्पत्ति वाले अंग (जैसे मानव हाथ, व्हेल फ्लिपर, चमगादड़ पंख) सामान्य पूर्वज दर्शाते हैं।
(2) समवृत्ति अंग: समान कार्य वाले भिन्न उत्पत्ति के अंग (पक्षी और कीट के पंख) समान वातावरण में अनुकूलन दर्शाते हैं।
(3) जीवाश्म: आर्कियोप्टेरिक्स जैसे जीवाश्म सरीसृप और पक्षी के बीच की कड़ी हैं।
(4) अवशेषी अंग: अपेंडिक्स, पुच्छ कशेरुक जैसे अक्रियाशील अंग पूर्वजों से विरासत हैं।
(5) भ्रूण विकास: विभिन्न कशेरुकियों के भ्रूण प्रारंभ में समान दिखते हैं।
(1) प्रभाविता का नियम: जब दो विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध जीवों का संकरण होता है तो F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण प्रकट होता है।
(2) पृथक्करण का नियम (जीवों की शुद्धता का नियम): युग्मक निर्माण के समय युग्मविकल्पी पृथक हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में केवल एक युग्मविकल्पी जाता है। F2 में 3:1 अनुपात इसे सिद्ध करता है।
(3) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम: दो या अधिक लक्षणों की वंशागति स्वतंत्र होती है। द्विसंकर संकरण में 9:3:3:1 अनुपात इसे सिद्ध करता है।
Quick Revision Table
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| आनुवंशिकी के जनक | ग्रेगर जॉन मेंडल |
| मेंडल का पौधा | मटर (Pisum sativum) |
| एकसंकर संकरण अनुपात | F2 में 3:1 |
| द्विसंकर संकरण अनुपात | F2 में 9:3:3:1 |
| मानव गुणसूत्र | 46 (23 जोड़े) |
| पुरुष लिंग गुणसूत्र | XY |
| महिला लिंग गुणसूत्र | XX |
| लिंग निर्धारण | पिता द्वारा |
| विकास सिद्धांत | चार्ल्स डार्विन (प्राकृतिक वरण) |
| समजात अंग उदाहरण | मानव हाथ, व्हेल फ्लिपर |
| समवृत्ति अंग उदाहरण | पक्षी पंख, कीट पंख |
| योजक कड़ी जीवाश्म | आर्कियोप्टेरिक्स (सरीसृप-पक्षी) |
| जीवाश्म आयु विधि | कार्बन-14 डेटिंग |
| आधुनिक मानव | होमो सेपियंस |
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