प्रकाश - परावर्तन तथा अपवर्तन
Light - Reflection and Refraction
1. परिचय - प्रकाश क्या है? (Introduction to Light)
1.1 प्रकाश के मूलभूत गुण
| गुण | विवरण | मान/उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रकृति | विद्युत चुंबकीय तरंग | दोहरी प्रकृति (तरंग + कण) |
| वेग (निर्वात में) | c = 3 × 10⁸ m/s | सबसे तीव्र गति |
| वेग (जल में) | 2.25 × 10⁸ m/s | निर्वात से धीमा |
| वेग (काँच में) | 2 × 10⁸ m/s | और भी धीमा |
| गमन | सीधी रेखा में | किरण पुंज |
| माध्यम | आवश्यक नहीं | निर्वात में भी चलता है |
| तरंगदैर्ध्य | 400-700 nm | दृश्य प्रकाश |
1.2 प्रकाश स्रोत के प्रकार
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वयं प्रदीप्त | स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करने वाले | सूर्य, तारे, बल्ब, मोमबत्ती |
| अप्रदीप्त | स्वयं प्रकाश नहीं देते | चंद्रमा, पृथ्वी, पुस्तक |
| बिंदु स्रोत | एक बिंदु से प्रकाश | तारे, दूर का बल्ब |
| विस्तृत स्रोत | बड़े क्षेत्र से प्रकाश | सूर्य, ट्यूबलाइट |
1.3 प्रकाश की किरण और किरण पुंज
• प्रकाश किरण (Light Ray): प्रकाश के गमन की दिशा को दर्शाने वाली सीधी रेखा
• किरण पुंज (Beam of Light): प्रकाश किरणों का समूह
• समांतर किरण पुंज: सभी किरणें समांतर (सूर्य का प्रकाश)
• अपसारी किरण पुंज: किरणें एक बिंदु से फैलती हैं
• अभिसारी किरण पुंज: किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं
2. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
2.1 परावर्तन संबंधी शब्दावली
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| आपतित किरण | दर्पण पर पड़ने वाली प्रकाश किरण |
| परावर्तित किरण | दर्पण से वापस लौटने वाली किरण |
| आपतन बिंदु | जहाँ आपतित किरण दर्पण से टकराती है |
| अभिलंब (Normal) | आपतन बिंदु पर दर्पण के लंबवत रेखा |
| आपतन कोण (∠i) | आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण |
| परावर्तन कोण (∠r) | परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण |
2.2 परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)
प्रथम नियम: आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।
2.3 परावर्तन के प्रकार
| प्रकार | सतह | परावर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| नियमित परावर्तन | चिकनी, समतल | समांतर किरणें समांतर ही रहती हैं | दर्पण, शांत जल |
| विसरित/अनियमित परावर्तन | खुरदरी, असमतल | किरणें विभिन्न दिशाओं में फैलती हैं | दीवार, कागज, लकड़ी |
3. गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)
3.1 गोलीय दर्पण के प्रकार
3.2 गोलीय दर्पण की शब्दावली
| शब्द | संकेत | परिभाषा |
|---|---|---|
| ध्रुव (Pole) | P | दर्पण की परावर्तक सतह का मध्य बिंदु |
| वक्रता केंद्र (Centre of Curvature) | C | उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण भाग है |
| वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature) | R | गोले की त्रिज्या (P से C की दूरी) |
| मुख्य अक्ष (Principal Axis) | - | P और C से गुजरने वाली सीधी रेखा |
| मुख्य फोकस (Principal Focus) | F | समांतर किरणों के अभिसरण/अपसरण का बिंदु |
| फोकस दूरी (Focal Length) | f | P से F की दूरी |
| द्वारक (Aperture) | - | दर्पण का प्रभावी व्यास |
वक्रता त्रिज्या = 2 × फोकस दूरी
3.3 अवतल और उत्तल दर्पण की तुलना
| आधार | अवतल दर्पण (Concave) | उत्तल दर्पण (Convex) |
|---|---|---|
| परावर्तक सतह | अंदर की ओर (गड्ढे जैसी) | बाहर की ओर (उभरी हुई) |
| फोकस | वास्तविक (दर्पण के सामने) | आभासी (दर्पण के पीछे) |
| किरणों का व्यवहार | अभिसारी (Converging) | अपसारी (Diverging) |
| प्रतिबिंब | वास्तविक या आभासी | सदैव आभासी |
| प्रतिबिंब का आकार | आवर्धित, समान या छोटा | सदैव छोटा |
| f और R का चिह्न | ऋणात्मक (-) | धनात्मक (+) |
| उपयोग | टॉर्च, हेडलाइट, शेविंग, दंत चिकित्सा | वाहनों के साइड मिरर, सुरक्षा दर्पण |
4. अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण (Image Formation by Concave Mirror)
4.1 किरण आरेख बनाने के नियम
1. मुख्य अक्ष के समांतर किरण → F से गुजरती है (अवतल) / F से आती प्रतीत होती है (उत्तल)
2. F से गुजरने वाली किरण → मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है
3. C से गुजरने वाली किरण → उसी पथ पर वापस लौटती है
4.2 अवतल दर्पण - प्रतिबिंब की स्थितियाँ (6 Cases)
4.3 अवतल दर्पण - प्रतिबिंब सारणी
| क्रम | बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|---|
| 1 | अनंत पर (∞) | F पर | वास्तविक, उलटा | अत्यंत छोटा (बिंदु) |
| 2 | C से परे | F और C के बीच | वास्तविक, उलटा | छोटा |
| 3 | C पर | C पर | वास्तविक, उलटा | समान आकार |
| 4 | C और F के बीच | C से परे | वास्तविक, उलटा | बड़ा |
| 5 | F पर | अनंत पर (∞) | वास्तविक, उलटा | अत्यधिक बड़ा |
| 6 | P और F के बीच | दर्पण के पीछे | आभासी, सीधा | बड़ा |
• बिंब C से परे → प्रतिबिंब F और C के बीच (और उलटा)
• बिंब F और C के बीच → प्रतिबिंब C से परे (और उलटा)
• केवल P और F के बीच बिंब रखने पर आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बनता है!
4.4 अवतल दर्पण के उपयोग
| उपयोग | कारण |
|---|---|
| टॉर्च, हेडलाइट, सर्चलाइट | F पर बल्ब रखने से समांतर किरण पुंज मिलता है |
| शेविंग दर्पण | P और F के बीच चेहरा रखने से बड़ा प्रतिबिंब |
| दंत चिकित्सा | दाँतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए |
| सोलर कुकर | सूर्य की किरणों को F पर केंद्रित करना |
| परावर्तक दूरदर्शी | दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब बनाना |
5. उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब (Image by Convex Mirror)
उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव:
- P और F के बीच (दर्पण के पीछे)
- आभासी (Virtual)
- सीधा (Erect)
- छोटा (Diminished)
5.1 उत्तल दर्पण के उपयोग
| उपयोग | कारण/लाभ |
|---|---|
| वाहनों के साइड मिरर | विस्तृत दृश्य क्षेत्र (wide field of view), छोटा सीधा प्रतिबिंब |
| सुरक्षा दर्पण (दुकानों में) | बड़े क्षेत्र की निगरानी संभव |
| ATM में | पीछे खड़े व्यक्तियों को देखना |
| सड़क के मोड़ पर | आने वाले वाहनों को देखना |
वाहनों के साइड मिरर पर यह चेतावनी इसलिए लिखी होती है क्योंकि उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब छोटा बनता है, जिससे वस्तु दूर प्रतीत होती है जबकि वह वास्तव में पास होती है।
7. दर्पण सूत्र एवं आवर्धन (Mirror Formula & Magnification)
जहाँ: v = प्रतिबिंब दूरी, u = बिंब दूरी, f = फोकस दूरी
जहाँ: m = आवर्धन, h' = प्रतिबिंब ऊँचाई, h = बिंब ऊँचाई
7.1 आवर्धन का अर्थ
| आवर्धन (m) का मान | प्रतिबिंब की प्रकृति | प्रतिबिंब का आकार |
|---|---|---|
| m > 1 | बड़ा प्रतिबिंब | बिंब से बड़ा |
| m = 1 | समान आकार | बिंब के बराबर |
| m < 1 | छोटा प्रतिबिंब | बिंब से छोटा |
| m = धनात्मक (+) | सीधा प्रतिबिंब | आभासी |
| m = ऋणात्मक (-) | उलटा प्रतिबिंब | वास्तविक |
8. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
8.1 अपवर्तन का कारण
अपवर्तन का मुख्य कारण विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल में अंतर है।
• विरल माध्यम (जैसे वायु) में प्रकाश तेज चलता है
• सघन माध्यम (जैसे काँच, जल) में प्रकाश धीमा चलता है
8.2 अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction)
प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): आपतन कोण की sine और अपवर्तन कोण की sine का अनुपात स्थिर होता है।
9. स्नेल का नियम और अपवर्तनांक (Snell's Law & Refractive Index)
n = c/v
c = निर्वात में वेग, v = माध्यम में वेग
n₂₁ = n₂/n₁ = v₁/v₂
माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का
9.1 विभिन्न माध्यमों के अपवर्तनांक
| माध्यम | अपवर्तनांक (n) | प्रकाश वेग (m/s) |
|---|---|---|
| निर्वात/वायु | 1.00 | 3 × 10⁸ |
| जल | 1.33 | 2.25 × 10⁸ |
| काँच (क्राउन) | 1.52 | 1.97 × 10⁸ |
| हीरा | 2.42 | 1.24 × 10⁸ |
| केरोसिन | 1.44 | 2.08 × 10⁸ |
| तारपीन का तेल | 1.47 | 2.04 × 10⁸ |
• अपवर्तनांक जितना अधिक, माध्यम उतना सघन (optically denser)
• अपवर्तनांक जितना अधिक, प्रकाश की चाल उतनी कम
• हीरे का अपवर्तनांक सबसे अधिक (2.42) इसलिए यह सबसे अधिक चमकता है
10. गोलीय लेंस (Spherical Lenses)
10.1 लेंस के प्रकार
10.2 लेंस की शब्दावली
| शब्द | संकेत | परिभाषा |
|---|---|---|
| प्रकाशिक केंद्र | O | लेंस का केंद्र बिंदु जहाँ से गुजरने वाली किरण सीधी निकलती है |
| मुख्य अक्ष | - | दोनों वक्रता केंद्रों से गुजरने वाली रेखा |
| मुख्य फोकस | F | समांतर किरणों के अभिसरण/अपसरण का बिंदु |
| फोकस दूरी | f | O से F की दूरी |
| द्वारक | - | लेंस का प्रभावी व्यास |
• F₁: बिंब की ओर का फोकस
• F₂: प्रतिबिंब की ओर का फोकस
• उत्तल लेंस में: F₂ वास्तविक, F₁ आभासी
• अवतल लेंस में: दोनों आभासी
10.3 उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर (∞) | F₂ पर | वास्तविक, उलटा | अत्यंत छोटा (बिंदु) |
| 2F₁ से परे | F₂ और 2F₂ के बीच | वास्तविक, उलटा | छोटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | वास्तविक, उलटा | समान |
| F₁ और 2F₁ के बीच | 2F₂ से परे | वास्तविक, उलटा | बड़ा |
| F₁ पर | अनंत पर (∞) | वास्तविक, उलटा | अत्यधिक बड़ा |
| O और F₁ के बीच | बिंब की ओर | आभासी, सीधा | बड़ा |
10.4 अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब
अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव:
- O और F₁ के बीच (लेंस की उसी ओर जिस ओर बिंब है)
- आभासी (Virtual)
- सीधा (Erect)
- छोटा (Diminished)
11. लेंस सूत्र (Lens Formula)
जहाँ: v = प्रतिबिंब दूरी, u = बिंब दूरी, f = फोकस दूरी
ध्यान दें: लेंस में m = v/u (दर्पण में m = -v/u)
| दर्पण | लेंस |
|---|---|
| 1/v + 1/u = 1/f | 1/v - 1/u = 1/f |
| m = -v/u | m = v/u |
12. लेंस की क्षमता (Power of Lens)
जहाँ: P = क्षमता (डायोप्टर, D), f = फोकस दूरी (मीटर में)
| लेंस | f का चिह्न | P का चिह्न | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| उत्तल लेंस | धनात्मक (+) | धनात्मक (+) | +2D, +3D |
| अवतल लेंस | ऋणात्मक (-) | ऋणात्मक (-) | -2D, -3D |
जब दो या अधिक लेंस सटाकर रखे जाएँ:
13. संख्यात्मक प्रश्न (Numerical Problems)
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। एक बिंब को दर्पण से 30 cm दूर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति और आवर्धन ज्ञात कीजिए।
दिया गया: f = -15 cm (अवतल दर्पण), u = -30 cm
दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f
1/v + 1/(-30) = 1/(-15)
1/v = -1/15 + 1/30 = (-2 + 1)/30 = -1/30
v = -30 cm
आवर्धन: m = -v/u = -(-30)/(-30) = -1
m = -1
उत्तर: प्रतिबिंब C पर (30 cm दूर), वास्तविक, उलटा, बिंब के बराबर आकार का।
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 20 cm है। एक 5 cm ऊँची वस्तु को लेंस से 30 cm दूर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति और ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
दिया गया: f = +20 cm (उत्तल), u = -30 cm, h = 5 cm
लेंस सूत्र: 1/v - 1/u = 1/f
1/v - 1/(-30) = 1/20
1/v + 1/30 = 1/20
1/v = 1/20 - 1/30 = (3 - 2)/60 = 1/60
v = +60 cm
आवर्धन: m = v/u = 60/(-30) = -2
h' = m × h = -2 × 5 = -10 cm
उत्तर: प्रतिबिंब लेंस से 60 cm दूर (दूसरी ओर), वास्तविक, उलटा, 10 cm ऊँचा।
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 25 cm है। इसकी क्षमता ज्ञात कीजिए।
दिया गया: f = 25 cm = 0.25 m
क्षमता: P = 1/f = 1/0.25 = +4 D
उत्तर: लेंस की क्षमता = +4 डायोप्टर
यदि प्रकाश की चाल निर्वात में 3 × 10⁸ m/s और काँच में 2 × 10⁸ m/s है, तो काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
दिया गया: c = 3 × 10⁸ m/s, v = 2 × 10⁸ m/s
अपवर्तनांक: n = c/v = (3 × 10⁸)/(2 × 10⁸) = 1.5
उत्तर: काँच का अपवर्तनांक = 1.5
+4D और -2D क्षमता के दो लेंस सटाकर रखे गए हैं। संयुक्त लेंस की क्षमता और फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
दिया गया: P₁ = +4D, P₂ = -2D
कुल क्षमता: P = P₁ + P₂ = +4 + (-2) = +2D
फोकस दूरी: f = 1/P = 1/2 = 0.5 m = 50 cm
उत्तर: संयुक्त क्षमता = +2D, फोकस दूरी = 50 cm (उत्तल लेंस जैसा व्यवहार)
14. बहुविकल्पीय प्रश्न (20 MCQs)
15. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
16. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 Marks)
(1) बिंब अनंत पर: प्रतिबिंब F पर, वास्तविक, उलटा, अत्यंत छोटा (बिंदु)।
(2) बिंब C से परे: प्रतिबिंब F और C के बीच, वास्तविक, उलटा, छोटा।
(3) बिंब C पर: प्रतिबिंब C पर ही, वास्तविक, उलटा, समान आकार।
(4) बिंब F और C के बीच: प्रतिबिंब C से परे, वास्तविक, उलटा, बड़ा।
(5) बिंब F पर: प्रतिबिंब अनंत पर, वास्तविक, उलटा, अत्यधिक बड़ा।
(6) बिंब P और F के बीच: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा, बड़ा।
[किरण आरेख के लिए ऊपर दिए गए SVG diagrams देखें]
जहाँ v = प्रतिबिंब दूरी, u = बिंब दूरी, f = फोकस दूरी
उदाहरण: एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है। एक बिंब 15 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब कहाँ बनेगा?
हल: f = -10 cm, u = -15 cm (चिह्न परिपाटी)
1/v + 1/(-15) = 1/(-10)
1/v = -1/10 + 1/15 = (-3 + 2)/30 = -1/30
v = -30 cm
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30 cm दूरी पर बनेगा (वास्तविक)।
अपवर्तन के नियम:
(1) प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दोनों माध्यमों के अंतरापृष्ठ पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
(2) द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): किन्हीं दो माध्यमों के लिए आपतन कोण की sine और अपवर्तन कोण की sine का अनुपात स्थिर होता है।
sin i / sin r = n₂₁ = स्थिरांक
यहाँ n₂₁ = माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का अपवर्तनांक
n₂₁ = n₂/n₁ = v₁/v₂
विशेष स्थितियाँ:
• जब प्रकाश विरल से सघन में जाए: अभिलंब की ओर मुड़ती है (∠r < ∠i)
• जब प्रकाश सघन से विरल में जाए: अभिलंब से दूर मुड़ती है (∠r > ∠i)
लेंस की क्षमता: किसी लेंस की प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता को लेंस की क्षमता कहते हैं।
सूत्र: P = 1/f (जहाँ f मीटर में)
मात्रक: डायोप्टर (D)
संयुक्त क्षमता: जब दो या अधिक लेंस सटाकर रखे जाएँ:
P = P₁ + P₂ + P₃ + ...
उदाहरण:
एक उत्तल लेंस (f₁ = 20 cm = 0.2 m) और अवतल लेंस (f₂ = -25 cm = -0.25 m) सटाकर रखे गए।
P₁ = 1/0.2 = +5D
P₂ = 1/(-0.25) = -4D
संयुक्त क्षमता P = +5 + (-4) = +1D
संयुक्त फोकस दूरी f = 1/P = 1/1 = 1 m = 100 cm
Quick Revision - सूत्र सारणी
| सूत्र | विवरण | इकाई |
|---|---|---|
| R = 2f | वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी संबंध | cm या m |
| 1/v + 1/u = 1/f | दर्पण सूत्र | cm या m |
| 1/v - 1/u = 1/f | लेंस सूत्र | cm या m |
| m = h'/h = -v/u | दर्पण में आवर्धन | कोई इकाई नहीं |
| m = h'/h = v/u | लेंस में आवर्धन | कोई इकाई नहीं |
| n = c/v | अपवर्तनांक | कोई इकाई नहीं |
| sin i / sin r = n | स्नेल का नियम | - |
| P = 1/f | लेंस की क्षमता | डायोप्टर (D) |
| P = P₁ + P₂ | संयुक्त क्षमता | डायोप्टर (D) |
