कक्षा 10 विज्ञान (RBSE): 100 महत्वपूर्ण शब्दों की विस्तृत व्याख्या
बोर्ड परीक्षा के लिए कॉन्सेप्ट्स और विजुअल एड्स के साथ सम्पूर्ण स्टडी गाइड।
भाग 1: रसायन विज्ञान (Chemistry)
1. अभिकारक (Reactant)
वे रासायनिक पदार्थ जो किसी अभिक्रिया के आरंभ में लिए जाते हैं और आपस में क्रिया करके नया पदार्थ बनाते हैं। ये हमेशा रासायनिक समीकरण के बाईं ओर (LHS) लिखे जाते हैं।
[ पदार्थ A ] + [ पदार्थ B ] ➡️ ... (शुरुआती सामग्री)
2. उत्पाद (Product)
रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप बनने वाले नए पदार्थ। इनके गुण अभिकारकों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। ये समीकरण के दाईं ओर (RHS) लिखे जाते हैं।
... ➡️ [ नया पदार्थ C ] + [ नया पदार्थ D ] (अंतिम परिणाम)
3. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)
वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) आपस में जुड़कर केवल एक ही उत्पाद का निर्माण करते हैं।
A + B ➡️ AB (जुड़कर एक होना)
4. वियोजन/अपघटन (Decomposition)
यह संयोजन के विपरीत है। इसमें एक एकल अभिकारक (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत द्वारा) टूटकर दो या अधिक सरल उत्पादों में बदल जाता है।
AB ➡️ A + B (टूटकर अलग होना)
5. विस्थापन (Displacement)
ऐसी अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व, किसी कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के विलयन से हटाकर उसका स्थान ले लेता है।
A (ताकतवर) + BC ➡️ AC + B (कमजोर बाहर)
6. द्विविस्थापन (Double Displacement)
वह अभिक्रिया जिसमें दो अलग-अलग अभिकारकों के बीच आयनों (ions) का आदान-प्रदान होता है और अक्सर एक अविलेय अवक्षेप (precipitate) बनता है।
AB + CD ➡️ AD + CB (आयनों की अदला-बदली 🔄)
7. उपचयन (Oxidation)
किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का जुड़ना (वृद्धि) या हाइड्रोजन का निकलना (ह्रास)। इलेक्ट्रॉन के संदर्भ में, इलेक्ट्रॉनों का त्यागना उपचयन है।
पदार्थ + O₂ ↗️ (ऑक्सीजन जुड़ी)
8. अपचयन (Reduction)
किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का निकलना (ह्रास) या हाइड्रोजन का जुड़ना (वृद्धि)। इलेक्ट्रॉन के संदर्भ में, इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना अपचयन है।
पदार्थ - O₂ ↘️ (ऑक्सीजन निकली)
9. रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox)
ऐसी रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अभिकारक का उपचयन (ऑक्सीकरण) और दूसरे अभिकारक का अपचयन एक साथ होता है।
उपचयन (Ox) + अपचयन (Red) = रेडॉक्स
10. संक्षारण (Corrosion)
जब धातुएँ वायुमंडल की नमी, ऑक्सीजन या अम्लों के संपर्क में आती हैं, तो उनकी ऊपरी सतह धीरे-धीरे अवांछित यौगिकों में बदल कर नष्ट होने लगती है। (उदा. लोहे पर भूरी जंग)।
धातु + नमी/हवा ➡️ धातु ऑक्साइड (जंग 🛡️❌)
11. विकृतगंधिता (Rancidity)
तेल या वसायुक्त खाद्य पदार्थों का हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में आने पर उपचयन हो जाना, जिससे उनके स्वाद और गंध में खराब बदलाव आ जाता है।
तलीय भोजन + O₂ (समय) ➡️ खराब स्वाद/गंध 🤢
12. सूचक (Indicator)
वे रंजक या पदार्थ जो अम्लीय या क्षारीय माध्यम में अपना रंग (या गंध) बदल लेते हैं। इनका उपयोग यह जाँचने के लिए किया जाता है कि कोई पदार्थ अम्ल है या क्षारक।
अम्ल में रंग A 🔴 | क्षारक में रंग B 🔵
13. pH मान (pH Value)
किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता को मापने का एक पैमाना (0 से 14)। यह हाइड्रोजन आयन (H⁺) की सांद्रता दर्शाता है। 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय, 7 से अधिक क्षारीय।
0 (प्रबल अम्ल) ... 7 (उदासीन) ... 14 (प्रबल क्षारक)
14. उदासीनीकरण (Neutralization)
जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त (उदासीन) कर देते हैं और उत्पाद के रूप में लवण (Salt) और जल बनाते हैं।
अम्ल (H⁺) + क्षारक (OH⁻) ➡️ लवण + जल (H₂O)
15. क्रिस्टलन का जल (Water of Crystallization)
लवण के एक सूत्र इकाई में रासायनिक रूप से जुड़े हुए जल के अणुओं की एक निश्चित संख्या। यह लवण को क्रिस्टलीय रूप और कभी-कभी रंग प्रदान करता है। (उदा. CuSO₄·5H₂O)।
लवण का अणु • [H₂O]n (निश्चित जल अणु 💧)
16. आघातवर्ध्यता (Malleability)
धातुओं का वह विशिष्ट गुण जिसके कारण उन्हें हथौड़े से पीटकर बिना तोड़े पतली चादरों (sheets) में बदला जा सकता है। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य हैं।
धातु का टुकड़ा 🔨 ➡️ पतली चादर 📄
17. तन्यता (Ductility)
धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं। प्लैटिनम और सोना सबसे अधिक तन्य धातुएँ हैं।
धातु का टुकड़ा ↔️ खींचना ➡️ पतला तार ➰
18. उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxide)
ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकार का व्यवहार दर्शाते हैं। ये अम्ल और क्षारक दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं (जैसे: Al₂O₃, ZnO)।
अम्ल के साथ → क्षारक जैसा | क्षारक के साथ → अम्ल जैसा
19. एक्वा रेजिया (Aqua Regia)
यह सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) का 3:1 अनुपात में बना ताजा मिश्रण है। यह इतना प्रबल है कि सोने और प्लैटिनम जैसी अक्रिय धातुओं को भी गला सकता है।
3 भाग HCl + 1 भाग HNO₃ = 'अम्लराज' (सोना गलाने वाला)
20. सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)
धातुओं की एक सूची जिसमें उन्हें उनकी अभिक्रियाशीलता (reactivity) के अवरोही क्रम (घटते हुए क्रम) में व्यवस्थित किया गया है। सबसे क्रियाशील धातु सबसे ऊपर होती है।
K > Na > Ca > Mg ... > Au (सर्वाधिक से सबसे कम क्रियाशील)
21. आयनिक यौगिक (Ionic Compound)
वे यौगिक जो धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनते हैं। इनके बीच मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल होता है, इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
धातु (e⁻ दाता) ➡️ अधातु (e⁻ ग्राही) = [धन आयन][ऋण आयन]
22. भर्जन (Roasting)
सल्फाइड अयस्क (Sulfide ores) को वायु की उपस्थिति में गलनांक से नीचे उच्च ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया, जिससे वह धातु ऑक्साइड में बदल जाता है और सल्फर डाइऑक्साइड गैस बाहर निकलती है।
सल्फाइड अयस्क + वायु (O₂) 🔥 ➡️ धातु ऑक्साइड + SO₂
23. निस्तापन (Calcination)
कार्बोनेट अयस्क (Carbonate ores) को वायु की सीमित मात्रा या अनुपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करके धातु ऑक्साइड प्राप्त करने की प्रक्रिया। इसमें CO₂ गैस निकलती है।
कार्बोनेट अयस्क 🔥 (वायु सीमित) ➡️ धातु ऑक्साइड + CO₂
24. मिश्रधातु (Alloy)
दो या दो से अधिक धातुओं (या एक धातु और एक अधातु) का समांगी मिश्रण। इन्हें बनाकर धातुओं के गुणों में सुधार किया जाता है। (जैसे: पीतल = तांबा + जस्ता; कांसा = तांबा + टिन)।
धातु A + धातु B (पिघलाकर मिलाना) ➡️ मिश्रधातु (बेहतर गुण)
25. सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
जब दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (sharing) होती है, तो बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं। कार्बन के यौगिक मुख्य रूप से सहसंयोजी होते हैं।
परमाणु A • + • परमाणु B ➡️ A : B (साझेदारी)
26. अपररूप (Allotrope)
एक ही तत्व के वे भिन्न-भिन्न रूप जिनके भौतिक गुण (जैसे कठोरता, चालकता) अलग-अलग होते हैं, लेकिन रासायनिक गुण समान होते हैं। (जैसे: कार्बन के अपररूप - हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन)।
तत्व (उदा. कार्बन) ➡️ रूप 1 (हीरा 💎) / रूप 2 (ग्रेफाइट ✏️)
27. शृंखलन (Catenation)
कार्बन परमाणुओं का वह अद्वितीय गुण जिसके द्वारा वे आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखित श्रृंखलाएँ या वलय (rings) बना सकते हैं। इसी कारण कार्बन के लाखों यौगिक हैं।
C—C—C—C—C... (लंबी चेन बनाने की क्षमता)
28. संतृप्त/असंतृप्त यौगिक (Saturated/Unsaturated)
**संतृप्त:** जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध (single bond) होते हैं (जैसे ऐल्केन)।
**असंतृप्त:** जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि-आबंध (double bond) या त्रि-आबंध (triple bond) होता है (जैसे ऐल्कीन, ऐल्काइन)।
**असंतृप्त:** जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि-आबंध (double bond) या त्रि-आबंध (triple bond) होता है (जैसे ऐल्कीन, ऐल्काइन)।
संतृप्त: C—C | असंतृप्त: C=C या C≡C
29. प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group)
किसी कार्बन श्रृंखला में जुड़ा वह परमाणु या परमाणुओं का समूह जो उस यौगिक के विशिष्ट रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है। (जैसे: -OH एल्कोहल, -COOH कार्बोक्सिलिक अम्ल, -CHO एल्डिहाइड)।
कार्बन श्रृंखला — [ समूह ] (यह समूह गुण तय करेगा)
30. समजातीय श्रेणी (Homologous Series)
कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिसमें सभी सदस्यों का प्रकार्यात्मक समूह समान होता है और किन्हीं दो क्रमागत (लगातार) सदस्यों के अणुसूत्रों में -CH₂ का अंतर होता है।
CH₃OH, C₂H₅OH, C₃H₇OH... (अंतर = CH₂)
31. साबुनीकरण (Saponification)
जब किसी वसा या वनस्पति तेल (जो कि एस्टर होते हैं) को सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) जैसे क्षारक के साथ गर्म किया जाता है, तो साबुन और ग्लिसरॉल बनने की प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।
तेल/वसा + NaOH (क्षारक) 🔥 ➡️ साबुन 🧼 + ग्लिसरॉल
32. मिसेल (Micelle)
साबुन के अणुओं द्वारा पानी में बनाई गई एक गोलाकार संरचना। इसमें साबुन का जल-रागी सिरा बाहर की ओर और जल-विरागी (पूंछ) सिरा केंद्र में तेल की बूंद की ओर होता है। यह मैल को साफ करने में मदद करता है।
[ 🧼 मैल का कण 🧼 ] (साबुन के अणुओं से घिरा हुआ)
33. संयोजकता (Valency)
किसी तत्व के परमाणु की संयोजन क्षमता (combining capacity)। यह उस संख्या से निर्धारित होती है कि अपना अष्टक पूरा करने के लिए एक परमाणु कितने इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, त्यागता है या साझा करता है।
बंध बनाने की क्षमता = बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन पर निर्भर
भाग 2: जीव विज्ञान (Biology)
34. जैव प्रक्रम (Life Processes)
वे सभी आधारभूत क्रियाएं जो एक जीव को जीवित रखने और उसके शरीर के अनुरक्षण (maintenance) के लिए सामूहिक रूप से आवश्यक होती हैं। जैसे: पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन।
जीवित रहना = पोषण + श्वसन + वहन + उत्सर्जन ⚙️
35. स्वपोषी (Autotrophic)
वे जीव जो अकार्बनिक स्रोतों (CO₂ और जल) से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसके लिए उन्हें ऊर्जा स्रोत (जैसे सूर्य का प्रकाश) की आवश्यकता होती है। उदाहरण: सभी हरे पौधे और कुछ जीवाणु।
स्वयं भोजन बनाना (सूर्य प्रकाश की मदद से) ☀️🌱
36. विषमपोषी (Heterotrophic)
वे जीव जो अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वपोषी जीवों (पौधों) या अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। वे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। उदाहरण: सभी जंतु, मानव, कवक।
भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर (पौधे/जंतु खाना) 🦁🍄
37. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
वह प्रक्रिया जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित करके, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) को कार्बोहाइड्रेट (भोजन) में बदलते हैं और ऑक्सीजन गैस उप-उत्पाद के रूप में छोड़ते हैं।
CO₂ + H₂O + (प्रकाश/क्लोरोफिल) ➡️ ग्लूकोज (भोजन) + O₂ ⬆️
38. रंध्र (Stomata)
पौधों की पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले वे अतिसूक्ष्म छिद्र जो रक्षक कोशिकाओं (guard cells) से घिरे होते हैं। इनका मुख्य कार्य गैसों (CO₂ और O₂) का आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन करना है।
पत्ती की सतह पर छोटे द्वार 🚪 (गैस अंदर/बाहर)
39. वायवीय/अवायवीय श्वसन (Aerobic/Anaerobic Respiration)
**वायवीय:** ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, भोजन का पूर्ण विखंडन होता है और अधिक ऊर्जा (38 ATP) निकलती है।
**अवायवीय:** ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, अपूर्ण विखंडन होता है और बहुत कम ऊर्जा (2 ATP) निकलती है।
**अवायवीय:** ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, अपूर्ण विखंडन होता है और बहुत कम ऊर्जा (2 ATP) निकलती है।
वायवीय: O₂ के साथ (ज्यादा ऊर्जा) | अवायवीय: बिना O₂ (कम ऊर्जा)
40. एटीपी (ATP - Adenosine Triphosphate)
कोशिका के अंदर श्वसन के दौरान मुक्त हुई ऊर्जा इसी अणु के रूप में संचित होती है। जब कोशिका को ऊर्जा की जरूरत होती है, तो ATP टूटकर ऊर्जा देता है। इसे 'कोशिका की ऊर्जा मुद्रा' कहते हैं।
ATP = कोशिका का ऊर्जा का 'बैटरी' पैक 🔋
41. धमनी (Artery)
वे रुधिर वाहिकाएं जो ऑक्सीजन-युक्त (शुद्ध) रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। इनमें रक्त उच्च दाब पर बहता है, इसलिए इनकी दीवारें मोटी और लचीली होती हैं। (अपवाद: फुफ्फुस धमनी)।
हृदय ❤️ ➡️ शुद्ध रक्त ➡️ शरीर के अंग (मोटी दीवारें)
42. शिरा (Vein)
वे वाहिकाएं जो कार्बन डाइऑक्साइड-युक्त (अशुद्ध) रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों से वापस हृदय में लाती हैं। इनकी दीवारें पतली होती हैं और इनमें रक्त को उल्टा बहने से रोकने के लिए वाल्व होते हैं।
शरीर के अंग ➡️ अशुद्ध रक्त ➡️ हृदय ❤️ (वाल्व मौजूद)
43. जाइलम (Xylem)
पौधों में पाया जाने वाला एक जटिल संवहन ऊतक। इसका मुख्य कार्य जड़ों द्वारा अवशोषित जल और खनिज लवणों को पौधे के ऊपरी भागों (तने और पत्तियों) तक पहुँचाना है। जल का प्रवाह केवल ऊपर की ओर होता है।
जड़ें ➡️ 💧 जल + खनिज ➡️ ऊपर की ओर प्रवाह (एक दिशा)
44. फ्लोएम (Phloem)
पौधों का वह संवहन ऊतक जो पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने भोजन (शर्करा) को पौधे के अन्य सभी भागों (जड़, फल, फूल) तक पहुँचाता है। इसमें भोजन का प्रवाह ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में हो सकता है।
पत्तियां (भोजन बना) ↔️ फ्लोएम ↔️ पौधे के अन्य भाग (दो दिशा)
45. उत्सर्जन (Excretion)
शरीर में उपापचयी क्रियाओं (metabolic activities) के फलस्वरूप बनने वाले हानिकारक नाइट्रोजन-युक्त अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल) को शरीर से बाहर निकालने का जैव प्रक्रम।
शरीर की सफाई 🧹: हानिकारक कचरे को बाहर निकालना
46. नेफ्रॉन/वृक्काणु (Nephron)
यह वृक्क (Kidney) की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। प्रत्येक वृक्क में लाखों सूक्ष्म नेफ्रॉन होते हैं जो रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को छानकर मूत्र का निर्माण करते हैं।
रक्त ➡️ [नेफ्रॉन रूपी फिल्टर] ➡️ शुद्ध रक्त + मूत्र (अपशिष्ट)
47. अपोहन/डायलिसिस (Dialysis)
जब किसी व्यक्ति के वृक्क (Kidney) खराब हो जाते हैं, तो एक कृत्रिम मशीन (कृत्रिम वृक्क) का उपयोग करके उसके रक्त से नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया।
मशीन द्वारा रक्त की सफाई (जब गुर्दे काम न करें) 🏥
48. न्यूरॉन/तंत्रिका कोशिका (Neuron)
तंत्रिका तंत्र की सबसे लंबी कोशिका जो शरीर में सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक विद्युत आवेगों (electrical signals) के रूप में ले जाने का कार्य करती है। यह संदेशों का संचरण करती है।
सूचना (उद्दीपन) ➡️ ⚡ विद्युत संकेत ➡️ मस्तिष्क तक प्रसारण
49. प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)
प्रतिवर्ती क्रिया (अचानक होने वाली अनैच्छिक क्रिया, जैसे गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाना) के दौरान तंत्रिका आवेग द्वारा तय किया गया पूरा रास्ता। (ग्राही अंग → संवेदी तंत्रिका → मेरुरज्जु → प्रेरक तंत्रिका → पेशी)।
उद्दीपन ➡️ मेरुरज्जु (तत्काल निर्णय) ➡️ प्रतिक्रिया (हाथ हटाना)
50. अंतःस्रावी ग्रंथियां (Endocrine Glands)
ऐसी नलिकाविहीन ग्रंथियां जो अपने रासायनिक स्राव (हार्मोन) को सीधे रक्त प्रवाह में छोड़ती हैं, जो फिर लक्ष्य अंगों तक पहुँचते हैं। (उदाहरण: पीयूष ग्रंथि, थायरॉइड, अग्न्याशय)।
ग्रंथि ➡️ हार्मोन (सीधे रक्त में) ➡️ लक्ष्य अंग तक 🎯
51. हार्मोन (Hormone)
अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा बहुत कम मात्रा में स्रावित विशिष्ट रासायनिक संदेशवाहक, जो रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों की वृद्धि, विकास और क्रियाओं का नियंत्रण और समन्वय करते हैं।
शरीर के रासायनिक 'मैसेंजर' (संदेशवाहक) 📨
52. अनुवर्तन (Tropism)
पौधों के अंगों की किसी बाह्य उद्दीपन (जैसे प्रकाश, गुरुत्व, जल) की दिशा में होने वाली दिशात्मक गति। यदि गति उद्दीपन की ओर है तो धनात्मक, और विपरीत है तो ऋणात्मक अनुवर्तन कहलाता है।
पौधे की गति ➡️ उद्दीपन की दिशा में (जैसे प्रकाश की ओर मुड़ना 🌱)
53. विखंडन (Fission)
एककोशिकीय जीवों में अलैंगिक जनन की एक विधि जिसमें एक जनक जीव विभाजित होकर दो (द्विखंडन, जैसे अमीबा) या अधिक (बहुखंडन, जैसे प्लाज्मोडियम) संतति जीवों का निर्माण करता है।
एक जीव ➡️ टूटकर ➡️ दो या अधिक नए जीव
54. पुनर्जनन (Regeneration)
कुछ सरल प्राणियों (जैसे हाइड्रा, प्लेनेरिया) की वह क्षमता, जिसमें यदि उनका शरीर कई टुकड़ों में काट दिया जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर एक नया पूर्ण जीव बना लेता है।
कटा हुआ टुकड़ा ➡️ वापस पूरा जीव बन जाना 🐛
55. मुकुलन (Budding)
अलैंगिक जनन की विधि जिसमें जनक जीव के शरीर पर एक छोटा उभार (मुकुल/Bud) बनता है। यह विकसित होकर एक छोटा जीव बनता है और अंततः जनक से अलग होकर स्वतंत्र जीवन जीता है (जैसे: हाइड्रा, यीस्ट)।
जनक शरीर पर उभार (कली) ➡️ नया जीव ➡️ अलग होना
56. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
पौधों में जनन की वह अलैंगिक विधि जिसमें पौधे के कायिक भागों (जैसे जड़, तना, या पत्ती) से बिना बीज के नया पौधा विकसित किया जाता है। (उदाहरण: आलू, गुलाब, ब्रायोफिलम)।
पौधे का हिस्सा (जड़/तना/पत्ती) ➡️ नया पौधा 🌱 (बिना बीज)
57. परागण (Pollination)
पुष्प के पुंकेसर के परागकोश (anther) से परागकणों (pollen grains) का उसी पुष्प या दूसरे पुष्प के स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (stigma) तक स्थानांतरण की प्रक्रिया।
परागकण का सफर: परागकोश (नर) ➡️ वर्तिकाग्र (मादा) 🌸
58. निषेचन (Fertilization)
लैंगिक जनन में नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) के आपस में संलयन (मिलने) की प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है।
नर युग्मक + मादा युग्मक ➡️ युग्मनज (मिलन)
59. युग्मनज (Zygote)
निषेचन की प्रक्रिया के बाद बनने वाली पहली द्विगुणित (diploid) कोशिका। यह नए जीव के जीवन की शुरुआत है, जो आगे विभाजित होकर भ्रूण बनाता है।
निषेचन का उत्पाद = जीवन की पहली कोशिका 🥚
60. भ्रूण (Embryo)
युग्मनज (Zygote) के बार-बार कोशिका विभाजन और विभेदन से विकसित हो रही बहुकोशिकीय संरचना, जिसमें भविष्य के जीव के अंग बनने शुरू हो जाते हैं। यह गर्भाशय में विकसित होता है।
युग्मनज ➡️ विभाजन ➡️ विकसित हो रहा शिशु (भ्रूण) 👶
61. अपरा/प्लेसेंटा (Placenta)
गर्भावस्था के दौरान माँ के गर्भाशय की दीवार में विकसित एक विशेष तश्तरीनुमा ऊतक। यह माँ के रक्त से भ्रूण को पोषण (ग्लूकोज, ऑक्सीजन) प्रदान करता है और भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
माँ और शिशु के बीच का 'कनेक्शन' (पोषण सेतु) 🌉
62. आनुवंशिकता (Heredity)
माता-पिता (जनकों) से संतानों में शारीरिक या मानसिक लक्षणों (traits) का स्थानांतरण होने की प्रक्रिया। इसी कारण संतानें अपने माता-पिता से मिलती-जुलती हैं।
लक्षणों का एक पीढ़ी ➡️ दूसरी पीढ़ी में जाना 👨👩👧👦
63. जीन (Gene)
DNA का वह विशिष्ट क्रियात्मक खंड जो किसी विशेष प्रोटीन के निर्माण का निर्देश देता है। यह आनुवंशिकता की मूल इकाई है जो विशिष्ट लक्षणों को निर्धारित करती है।
DNA का टुकड़ा = लक्षणों का 'कोड' 🧬
64. प्रभावी/अप्रभावी लक्षण (Dominant/Recessive Traits)
**प्रभावी:** वह लक्षण जो F1 पीढ़ी (संकर) में स्वयं को प्रकट करता है (जैसे लंबापन)।
**अप्रभावी:** वह लक्षण जो प्रभावी जीन की उपस्थिति में छिपा रहता है और प्रकट नहीं होता (जैसे बौनापन)।
**अप्रभावी:** वह लक्षण जो प्रभावी जीन की उपस्थिति में छिपा रहता है और प्रकट नहीं होता (जैसे बौनापन)।
प्रभावी (दिखाई देने वाला) | अप्रभावी (छिपा हुआ)
65. समजात/समरूप अंग (Homologous/Analogous Organs)
**समजात:** उत्पत्ति व संरचना समान, लेकिन कार्य भिन्न (उदा. हमारा हाथ और कुत्ते का अग्रपाद)। यह अपसारी विकास दर्शाता है।
**समरूप:** कार्य समान, लेकिन उत्पत्ति व संरचना भिन्न (उदा. पक्षी और कीट के पंख)। यह अभिसारी विकास दर्शाता है।
**समरूप:** कार्य समान, लेकिन उत्पत्ति व संरचना भिन्न (उदा. पक्षी और कीट के पंख)। यह अभिसारी विकास दर्शाता है।
समजात: संरचना समान, काम अलग | समरूप: काम समान, संरचना अलग
66. जीवाश्म (Fossil)
लाखों वर्ष पूर्व जीवित जीवों (पौधे या जंतु) के चट्टानों या पृथ्वी की परतों में दबे हुए कठोर अवशेष, छाप या चिन्ह। ये जैव विकास के सीधे प्रमाण प्रदान करते हैं।
प्राचीन जीवों के पत्थर में दबे अवशेष 🦖🦴
भाग 3: भौतिक विज्ञान (Physics)
67. परावर्तन (Reflection)
जब प्रकाश की किरण किसी चमकदार और अपारदर्शी सतह (जैसे दर्पण) से टकराती है और वापस उसी माध्यम में लौट आती है। इस घटना में आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है।
आने वाली किरण ↘️ | सतह | ↗️ टकराकर लौटना
68. अपवर्तन (Refraction)
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम (जैसे हवा) से दूसरे पारदर्शी माध्यम (जैसे कांच या पानी) में तिरछी प्रवेश करती है, तो वह दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर अपने मूल रास्ते से मुड़ जाती है।
माध्यम 1 ↘️ (रास्ता बदला) ↘️ माध्यम 2
69. अवतल दर्पण/लेंस (Concave Mirror/Lens)
**अवतल दर्पण:** अंदर की ओर धँसा हुआ, यह किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है (अभिसारी)।
**अवतल लेंस:** बीच में पतला और किनारों पर मोटा, यह किरणों को फैलाता है (अपसारी)।
**अवतल लेंस:** बीच में पतला और किनारों पर मोटा, यह किरणों को फैलाता है (अपसारी)।
दर्पण: केंद्रित करना ) | लेंस: फैलाना )(
70. उत्तल दर्पण/लेंस (Convex Mirror/Lens)
**उत्तल दर्पण:** बाहर की ओर उभरा हुआ, यह किरणों को फैलाता है (अपसारी)। इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है।
**उत्तल लेंस:** बीच में मोटा और किनारों पर पतला, यह किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है (अभिसारी)।
**उत्तल लेंस:** बीच में मोटा और किनारों पर पतला, यह किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है (अभिसारी)।
दर्पण: फैलाना ( | लेंस: केंद्रित करना ()
71. मुख्य फोकस (Principal Focus)
दर्पण या लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणें, परावर्तन या अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष पर जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं, उसे मुख्य फोकस (F) कहते हैं।
समांतर किरणें ➡️ टकराने के बाद ➡️ फोकस बिंदु (F) पर मिलना
72. वक्रता केंद्र (Centre of Curvature)
गोलीय दर्पण (उत्तल या अवतल) जिस खोखले गोले का कटा हुआ भाग होता है, उस गोले के केंद्र को दर्पण का वक्रता केंद्र (C) कहते हैं।
उस गोले का केंद्र जिससे दर्पण बना है।
73. आवर्धन (Magnification)
लेंस या दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की ऊँचाई (h') और मूल बिंब (वस्तु) की ऊँचाई (h) के अनुपात को आवर्धन कहते हैं। यह बताता है कि प्रतिबिंब वस्तु से कितना गुना बड़ा या छोटा है। (m = h'/h)।
प्रतिबिंब का आकार / वस्तु का आकार
74. अपवर्तनांक (Refractive Index)
किन्हीं दो माध्यमों के लिए, निर्वात (या वायु) में प्रकाश की चाल और किसी अन्य माध्यम में प्रकाश की चाल का अनुपात। यह दर्शाता है कि वह माध्यम प्रकाश को कितना मोड़ सकता है।
n = (वायु में प्रकाश की चाल) / (माध्यम में प्रकाश की चाल)
75. लेंस की क्षमता (Power of Lens)
किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसारित (केंद्रित) या अपसारित (फैलाने) करने की मात्रा को उसकी क्षमता कहते हैं। यह लेंस की फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है, जब f मीटर में हो। (P = 1/f)।
किरणों को मोड़ने की ताकत। P = 1 / फोकस दूरी (मीटर में)
76. डायोप्टर (Dioptre)
यह लेंस की क्षमता का SI मात्रक है। इसे 'D' द्वारा दर्शाया जाता है। 1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो। (उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक, अवतल की ऋणात्मक होती है)।
क्षमता मापने की इकाई = D
77. समंजन क्षमता (Power of Accommodation)
मानव नेत्र के लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को पक्ष्माभी पेशियों की मदद से समायोजित (कम या ज्यादा) कर सकता है, ताकि निकट और दूर की वस्तुएं रेटिना पर स्पष्ट दिख सकें।
आँख के लेंस का खुद को 'फोकस' करने का गुण 👁️
78. निकट/दूर दृष्टि दोष (Myopia/Hypermetropia)
**निकट दृष्टि दोष:** पास का साफ दिखता है, दूर का नहीं। (निवारण: अवतल लेंस)।
**दूर दृष्टि दोष:** दूर का साफ दिखता है, पास का नहीं। (निवारण: उत्तल लेंस)।
**दूर दृष्टि दोष:** दूर का साफ दिखता है, पास का नहीं। (निवारण: उत्तल लेंस)।
निकट दोष में दूर धुंधला 👓 अवतल | दूर दोष में पास धुंधला 👓 उत्तल
79. वर्ण विक्षेपण (Dispersion)
जब श्वेत प्रकाश (जैसे सूर्य का प्रकाश) किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने सात अवयवी रंगों (VIBGYOR - बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) के स्पेक्ट्रम में विभक्त हो जाता है।
श्वेत प्रकाश ➡️ प्रिज्म ➡️ 🌈 सात रंग (इंद्रधनुष)
80. प्रकीर्णन (Scattering)
जब प्रकाश वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कणों (जैसे धूल, धुएं या वायु के अणुओं) से टकराता है, तो वह विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है। नीले रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है, इसलिए आकाश नीला दिखता है।
प्रकाश का कणों से टकराकर बिखर जाना 🌫️
81. विद्युत धारा (Electric Current)
किसी चालक में एकांक समय में प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश की मात्रा। सरल शब्दों में, यह आवेश (इलेक्ट्रॉनों) के प्रवाह की दर है। इसका SI मात्रक एम्पियर (A) है। (I = Q/t)।
आवेश का बहना (इलेक्ट्रॉनों की दौड़) ⚡
82. विभवांतर (Potential Difference)
विद्युत परिपथ में किन्हीं दो बिंदुओं के बीच एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य। यह 'वोल्टेज' है जो धारा को प्रवाहित करता है। मात्रक: वोल्ट (V)।
धारा को धक्का देने वाला 'प्रेशर' या 'वोल्टेज' 🔋
83. ओम का नियम (Ohm's Law)
यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं (जैसे ताप) स्थिर रहें, तो चालक के सिरों के बीच का विभवांतर (V), उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है।
V ∝ I या V = IR (R एक नियतांक है)
84. प्रतिरोध (Resistance)
किसी चालक तार का वह गुण जो उसमें बहने वाली विद्युत धारा के मार्ग में रुकावट या बाधा उत्पन्न करता है। इसका मात्रक ओम (Ω) है। यह चालक की लंबाई, मोटाई और पदार्थ पर निर्भर करता है।
धारा प्रवाह (I) ➡️ [रुकावट R] ➡️ कम धारा
85. प्रतिरोधकता (Resistivity)
किसी पदार्थ की धारा प्रवाह का विरोध करने की अंतर्निहित (स्वाभाविक) क्षमता। यह पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, उसकी लंबाई या मोटाई पर नहीं। मात्रक: ओम-मीटर (Ωm)।
पदार्थ का अपना 'गुण' जो धारा रोकता है (धातुओं में कम, कुचालकों में ज्यादा)।
86. श्रेणीक्रम/पार्श्वक्रम संयोजन (Series/Parallel)
**श्रेणीक्रम:** प्रतिरोधक एक सिरे से दूसरे सिरे तक जुड़े होते हैं। कुल प्रतिरोध बढ़ता है, धारा समान रहती है।
**पार्श्वक्रम (समांतर):** सभी प्रतिरोधक दो समान बिंदुओं के बीच जुड़े होते हैं। कुल प्रतिरोध घटता है, विभवांतर समान रहता है।
**पार्श्वक्रम (समांतर):** सभी प्रतिरोधक दो समान बिंदुओं के बीच जुड़े होते हैं। कुल प्रतिरोध घटता है, विभवांतर समान रहता है।
श्रेणी: R = R₁+R₂... | पार्श्व: 1/R = 1/R₁+1/R₂...
87. जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating)
जब किसी प्रतिरोधक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उत्पन्न ऊष्मा (H), उसमें प्रवाहित धारा के वर्ग (I²), प्रतिरोध (R) और समय (t) के समानुपाती होती है। (H = I²Rt)।
धारा बहने से तार का गर्म होना 🔥 (हीटर, प्रेस का सिद्धांत)
88. विद्युत शक्ति (Electric Power)
किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा के उपभुक्त (खर्च) होने की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। इसका SI मात्रक वाट (W) है। (P = V × I)।
ऊर्जा खर्च होने की स्पीड (जैसे 100W का बल्ब) 💡
89. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं (Magnetic Field Lines)
चुंबक के चारों ओर खींची गई वे काल्पनिक वक्र रेखाएं जो उस क्षेत्र में चुंबकीय बल की दिशा और प्रबलता को दर्शाती हैं। ये चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं।
[ N ध्रुव ] ➡️➡️➡️ रेखाएं ➡️➡️➡️ [ S ध्रुव ] 🧲
90. परिनालिका (Solenoid)
विद्युतरोधी तांबे के तार की बेलन की आकृति में पास-पास लिपटी हुई अनेक फेरों वाली कुंडली। जब इसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह एक छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
तार की कुंडली + धारा = इलेक्ट्रोमैग्नेट (विद्युत चुंबक)
91. फ्लेमिंग के नियम (Fleming's Rules)
**वाम हस्त नियम:** विद्युत मोटर में चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए।
**दक्षिण हस्त नियम:** विद्युत जनित्र (Generator) में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए।
**दक्षिण हस्त नियम:** विद्युत जनित्र (Generator) में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए।
बायां हाथ = मोटर (बल) | दायां हाथ = जनरेटर (धारा) ✋
92. विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)
वह परिघटना जिसमें जब किसी कुंडली से संबद्ध चुंबकीय क्षेत्र में समय के साथ परिवर्तन होता है (जैसे चुंबक को कुंडली के पास लाना), तो उस कुंडली में एक प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न हो जाती है।
बदलता चुंबकीय क्षेत्र ➡️ तार में बिजली पैदा होना ⚡
93. लघुपथन (Short Circuiting)
जब किसी कारणवश विद्युन्मय तार (Live/फेज) और उदासीन तार (Neutral) सीधे एक-दूसरे के संपर्क में आ जाते हैं, तो परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है और अत्यधिक धारा प्रवाहित होने लगती है, जिससे आग लग सकती है।
फेज और न्यूट्रल तार का आपस में भिड़ जाना 💥 (खतरा!)
भाग 4: पर्यावरण (Environment)
94. पारितंत्र (Ecosystem)
किसी विशिष्ट क्षेत्र में रहने वाले सभी सजीव घटक (पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव) और उनके निर्जीव वातावरण (मिट्टी, हवा, पानी, तापमान) के बीच की अन्योंयक्रिया से बना एक आत्मनिर्भर तंत्र। जैसे: तालाब, जंगल, खेत।
[ सजीव (जैव) ] 🔄 अंतःक्रिया 🔄 [ निर्जीव (अजैव) ] 🌍
95. खाद्य श्रृंखला (Food Chain)
पारितंत्र में जीवों का वह क्रम जिसमें भोजन (ऊर्जा) का स्थानांतरण एक जीव द्वारा दूसरे जीव को खाने से होता है। यह हमेशा उत्पादक (हरे पौधे) से शुरू होती है और उपभोक्ताओं तक जाती है।
घास (उत्पादक) ➡️ हिरण (शाकाहारी) ➡️ शेर (मांसाहारी) ⛓️
96. पोषी स्तर (Trophic Level)
खाद्य श्रृंखला का प्रत्येक चरण या सीढ़ी जहाँ ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। प्रथम पोषी स्तर पर हमेशा उत्पादक (पौधे) होते हैं, दूसरे पर प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी), और इसी तरह आगे।
स्तर 1 (पौधे) ➡️ स्तर 2 (शाकाहारी) ➡️ स्तर 3 (मांसाहारी) 📊
97. जैव आवर्धन (Biological Magnification)
खाद्य श्रृंखला में अजैव निम्नीकरणीय हानिकारक रसायनों (जैसे DDT, कीटनाशक) की सांद्रता का उत्तरोत्तर पोषी स्तरों में बढ़ते जाना। सर्वोच्च उपभोक्ता (जैसे मनुष्य) में यह सबसे अधिक होता है।
जहर की मात्रा: पौधे (कम) ➡️ ... ➡️ मनुष्य (सबसे ज्यादा) ☠️
98. ओजोन परत (Ozone Layer)
पृथ्वी के वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित ओजोन गैस (O₃) की एक सुरक्षात्मक परत। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरणों को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
पृथ्वी का 'सनस्क्रीन' या सुरक्षा कवच 🛡️ (UV किरणों से रक्षा)
99. जैव निम्नीकरणीय/अजैव निम्नीकरणीय (Biodegradable/Non-biodegradable)
**जैव निम्नीकरणीय:** वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, कवक) द्वारा सरल पदार्थों में अपघटित किए जा सकते हैं (जैसे कागज, सब्जी के छिलके)।
**अजैव निम्नीकरणीय:** वे पदार्थ जो अपघटित नहीं होते और पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं (जैसे प्लास्टिक, कांच)।
**अजैव निम्नीकरणीय:** वे पदार्थ जो अपघटित नहीं होते और पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं (जैसे प्लास्टिक, कांच)।
सड़ने वाला (खाद बनेगा) ✅ | न सड़ने वाला (कचरा बनेगा) ❌
100. संपोषित विकास (Sustainable Development)
विकास की वह अवधारणा जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को इस प्रकार पूरा किया जाता है कि भावी पीढ़ियों (आने वाली नस्लों) को अपनी आवश्यकताएं पूरी करने में कोई समझौता न करना पड़े। पर्यावरण की रक्षा इसका मुख्य उद्देश्य है।
वर्तमान जरूरतें ✅ + भविष्य की सुरक्षा ✅ = समझदारी भरा विकास 🌱
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