भूमंडलीकृत विश्व का बनना Class 10 | Global World RBSE 2025

📅 गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 📖 3-5 min read
भूमंडलीकृत विश्व का बनना Class 10 Notes | Making of Global World RBSE NCERT 2025
📚 कक्षा 10 इतिहास • अध्याय 3

भूमंडलीकृत विश्व का बनना

The Making of a Global World | RBSE · NCERT · CBSE Board 2025

भूमंडलीकृत विश्व का बनना (The Making of a Global World) एक ऐसा अध्याय है जो हमें बताता है कि आज का यह जुड़ा हुआ विश्व कैसे बना। वैश्वीकरण (Globalization) कोई नई घटना नहीं है - यह हज़ारों वर्षों की प्रक्रिया है जिसमें व्यापार, प्रवास, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से दुनिया के विभिन्न हिस्से एक-दूसरे से जुड़े।

इस अध्याय में हम रेशम मार्ग (Silk Route) से लेकर ब्रेटन वुड्स संस्थानों तक की यात्रा करेंगे। हम देखेंगे कि कैसे उपनिवेशवाद ने विश्व अर्थव्यवस्था को आकार दिया, गिरमिटिया मज़दूरों की दर्दनाक कहानी, महामंदी (Great Depression) का विनाशकारी प्रभाव, और आधुनिक वैश्विक संस्थाओं का उदय।

3000 BCE
सिंधु-मेसोपोटामिया व्यापार
1929
महामंदी की शुरुआत
1944
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन
50%+
1929-34 में व्यापार गिरावट

1. आधुनिक युग से पहले (Pre-Modern World)

वैश्वीकरण (Globalization) की परिभाषा: वैश्वीकरण एक आर्थिक प्रणाली है जिसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, और श्रम का एक देश से दूसरे देश में स्वतंत्र रूप से आवागमन होता है। यह विश्व के विभिन्न हिस्सों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ता है।

आधुनिक युग से पहले भी विश्व के विभिन्न क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। यात्रियों, व्यापारियों, पुजारियों और तीर्थयात्रियों ने हज़ारों वर्षों से विशाल दूरियाँ तय कीं। वे अपने साथ ले गए:

  • 📦 वस्तुएँ: रेशम, मसाले, सोना, चाँदी
  • 💰 धन: मुद्राएँ और बहुमूल्य धातुएँ
  • 💡 विचार: धर्म, दर्शन, विज्ञान
  • 🔧 कौशल: तकनीक और शिल्प
  • 🦠 रोगाणु: बीमारियाँ (चेचक, प्लेग)

तीन प्रकार के प्रवाह (Three Types of Flows)

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमय तीन प्रकार के "प्रवाहों" से होता है:

🏭 व्यापार प्रवाह
वस्तुओं का आदान-प्रदान
👷 श्रम प्रवाह
मज़दूरों का प्रवास
💰 पूँजी प्रवाह
निवेश और ऋण
📌 3000 ईसा पूर्व: प्रारंभिक व्यापार

सिंधु घाटी सभ्यता का मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) के साथ सक्रिय तटीय व्यापार था। सिंधु की मुहरें मेसोपोटामिया में पाई गई हैं, जो इस प्राचीन व्यापार का प्रमाण हैं।

2. रेशम मार्ग: विश्व को जोड़ने वाला मार्ग (Silk Route)

🗺️ रेशम मार्ग का मानचित्र (Silk Route Map)
चीन भारत फारस/अरब यूरोप अफ्रीका 🐫 स्थल मार्ग (Land Route) ⛵ समुद्री मार्ग (Sea Route) 🧵 रेशम (Silk) 🏺 चीनी मिट्टी (Pottery) 🌶️ मसाले (Spices) 👗 कपड़े (Textiles) 🥇 सोना-चाँदी 📿 गहने ━━ स्थल मार्ग ━━ समुद्री मार्ग
रेशम मार्ग (Silk Route): यह प्राचीन व्यापार मार्गों का एक नेटवर्क था जो चीन को भूमध्य सागर से जोड़ता था। इसका नाम चीनी रेशम के नाम पर पड़ा जो इस मार्ग का प्रमुख व्यापारिक उत्पाद था।

रेशम मार्ग के प्रमुख तथ्य

रेशम मार्ग - विस्तृत जानकारी
विवरणजानकारी
समय कालदूसरी शताब्दी ई.पू. से 15वीं शताब्दी तक
कुल लंबाईलगभग 6,400 किमी (4,000 मील)
मुख्य वस्तुएँरेशम, मसाले, सोना, चाँदी, कीमती पत्थर, कपड़े
जुड़े क्षेत्रचीन, भारत, फारस, अरब, यूनान, इटली, अफ्रीका
धर्मों का प्रसारबौद्ध धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म

रेशम मार्ग से होने वाला व्यापार

🌏 पूर्व से पश्चिम
  • 🧵 चीनी रेशम (Silk)
  • 🏺 चीनी मिट्टी के बर्तन (Pottery)
  • 🌶️ भारतीय मसाले
  • 👗 सूती कपड़े
  • 💎 कीमती पत्थर
🌍 पश्चिम से पूर्व
  • 🥇 सोना-चाँदी
  • 🍷 शराब
  • 🐎 घोड़े
  • 📿 गहने
  • 🪙 सिक्के
📝 परीक्षा में याद रखें
  • रेशम मार्ग सिर्फ एक मार्ग नहीं, बल्कि मार्गों का नेटवर्क था
  • यह जमीन और समुद्र दोनों से होकर गुज़रता था
  • इस मार्ग से सिर्फ वस्तुएँ नहीं, विचार और धर्म भी फैले
  • चीन से रेशम और भारत से मसाले प्रमुख निर्यात थे

3. भोजन की यात्रा: स्पैगेटी और आलू (Food Travels)

आज हम जो खाद्य पदार्थ खाते हैं, उनमें से कई सैकड़ों वर्ष पहले भारत में नहीं थे। आलू, टमाटर, मक्का, मिर्च जैसी चीज़ें अमेरिका से आई हैं!

खाद्य पदार्थों का वैश्विक प्रसार

🌽 खाद्य पदार्थों की उत्पत्ति और प्रसार
खाद्य पदार्थमूल स्थानभारत में आगमनप्रभाव
🥔 आलू (Potato) दक्षिण अमेरिका (पेरू) 16वीं-17वीं शताब्दी आज भारत का प्रमुख खाद्य
🍅 टमाटर (Tomato) मेक्सिको/मध्य अमेरिका 16वीं शताब्दी भारतीय सब्ज़ियों का अभिन्न अंग
🌽 मक्का (Maize/Corn) मेक्सिको 16वीं शताब्दी पशुओं का चारा, मक्के की रोटी
🌶️ मिर्च (Chilli) मध्य अमेरिका 16वीं शताब्दी भारतीय खाने की पहचान!
🥜 मूँगफली (Peanut) दक्षिण अमेरिका 16वीं शताब्दी तेल और स्नैक्स
कॉफ़ी (Coffee) इथियोपिया (अफ्रीका) 17वीं शताब्दी दक्षिण भारत में खेती
🍵 चाय (Tea) चीन 19वीं शताब्दी (व्यापक) भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक

⚠️ रोचक तथ्य: क्या आप जानते हैं कि 500 साल पहले भारत में न आलू था, न टमाटर, न मिर्च! ये सब कोलंबस द्वारा 1492 में अमेरिका की खोज के बाद यूरोप और फिर एशिया पहुँचे।

विजय, रोग और व्यापार

जब यूरोपीय लोग अमेरिका पहुँचे, तो उनके साथ चेचक (Smallpox) जैसी बीमारियाँ भी गईं। अमेरिका के मूल निवासियों (Native Americans) में इन बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता नहीं थी। परिणामस्वरूप:

  • लाखों मूल निवासियों की मृत्यु हुई
  • स्पेनिश विजेताओं के लिए विजय आसान हो गई
  • यूरोप को अमेरिका की सोने-चाँदी की खानों पर नियंत्रण मिला
  • यूरोप का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा

4. उन्नीसवीं शताब्दी (1815-1914): विश्व अर्थव्यवस्था का उदय

19वीं शताब्दी में विश्व अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आए। औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोप, विशेषकर ब्रिटेन, विश्व का आर्थिक केंद्र बन गया।

कॉर्न लॉ (Corn Laws) और उनका प्रभाव

कॉर्न लॉ: ब्रिटेन में बड़े भू-स्वामियों के दबाव में लगाए गए कानून जो अनाज के आयात पर प्रतिबंध लगाते थे ताकि घरेलू कीमतें ऊँची बनी रहें।

कॉर्न लॉ समाप्ति के प्रभाव:

  1. ब्रिटेन में खाद्य पदार्थ सस्ते हो गए
  2. ब्रिटिश किसान आयातित अनाज से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाए
  3. ब्रिटेन में खेती का क्षेत्रफल घटा
  4. लाखों लोग बेरोज़गार होकर शहरों या विदेश गए
  5. रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया से अनाज का आयात बढ़ा

तकनीक की भूमिका

🔧 19वीं सदी की प्रमुख तकनीकी प्रगति
तकनीकवर्षप्रभाव
रेलवे1830s सेभूमि परिवहन में क्रांति; आंतरिक व्यापार में वृद्धि
स्टीमशिप1840s सेसमुद्री व्यापार तेज़ और सस्ता; माल ढुलाई आसान
टेलीग्राफ1840sसंचार में क्रांति; व्यापारिक सूचनाओं का तेज़ आदान-प्रदान
रेफ्रिजरेटेड शिप1870sखराब होने वाले खाद्य पदार्थों (मांस, फल) का लंबी दूरी का व्यापार संभव
📌 18वीं सदी तक भारत और चीन

18वीं सदी तक भारत और चीन दुनिया के सबसे धनी देश थे। वैश्विक GDP में इनकी हिस्सेदारी 50% से अधिक थी। लेकिन 15वीं सदी से चीन ने अपने आप को बाहरी दुनिया से अलग कर लिया, और औपनिवेशिक शोषण ने भारत को कमज़ोर कर दिया।

5. उपनिवेशवाद और वैश्विक व्यापार (Colonialism & Global Trade)

19वीं सदी के अंत तक यूरोपीय शक्तियों ने दुनिया के बड़े हिस्से पर अपना उपनिवेश (Colony) स्थापित कर लिया था। इसने विश्व अर्थव्यवस्था को मूलभूत रूप से बदल दिया।

रिंडरपेस्ट (Rinderpest) - अफ्रीका में मवेशी प्लेग

रिंडरपेस्ट: यह एक घातक मवेशी रोग था जो 1890s में अफ्रीका में फैला। यह रोग ब्रिटिश एशिया से आयातित मवेशियों के साथ आया था।

रिंडरपेस्ट का प्रभाव:

  • अफ्रीका के 90% से अधिक मवेशी मर गए
  • अफ्रीकी लोगों की आजीविका नष्ट हो गई
  • यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया
  • अफ्रीकियों को श्रम बाज़ार में धकेल दिया गया
  • यूरोपीय खनन और बागान उद्योगों को सस्ता श्रम मिला
🔄 औपनिवेशिक व्यापार व्यवस्था (Colonial Trade System)
उपनिवेश (भारत, अफ्रीका) कच्चा माल, श्रम ब्रिटेन/यूरोप (औद्योगिक केंद्र) निर्मित वस्तुएँ 🌾 कच्चा माल, कपास, जूट 👔 कपड़े, मशीनें, हथियार 👷 श्रम प्रवास (गिरमिटिया)

भारतीय व्यापार और उपनिवेशवाद

भारत की व्यापारिक स्थिति में बदलाव
पहलूउपनिवेशवाद से पहलेउपनिवेशवाद के बाद
निर्यात सूती कपड़े, रेशम, मसाले (तैयार वस्तुएँ) कच्चा माल - कपास, जूट, नील, अफ़ीम
आयात सोना-चाँदी, कीमती वस्तुएँ ब्रिटिश निर्मित कपड़े, मशीनें
व्यापार संतुलन अनुकूल (Favorable) प्रतिकूल (Unfavorable)
उद्योग फलता-फूलता हथकरघा उद्योग हथकरघा नष्ट, कारीगर बेरोज़गार

6. गिरमिटिया श्रम: नई दासता (Indentured Labour)

गिरमिटिया मज़दूर (Indentured Labourers): ये वे मज़दूर थे जो एक अनुबंध (Contract/Agreement) पर हस्ताक्षर करके विदेश जाते थे। "गिरमिट" शब्द अंग्रेज़ी के "Agreement" का अपभ्रंश है। इन्हें 5 वर्षों के लिए बागानों में काम करना होता था।

गिरमिटिया मज़दूरों की उत्पत्ति

1834 में ब्रिटेन द्वारा दास प्रथा (Slavery) समाप्त करने के बाद बागानों में मज़दूरों की कमी हो गई। इसलिए भारत, चीन और अन्य देशों से सस्ते मज़दूर लाए गए।

भारत से गिरमिटिया प्रवास के प्रमुख क्षेत्र

🗺️ गिरमिटिया श्रमिकों का प्रवास मार्ग
भारत बिहार, UP, तमिलनाडु कैरेबियन त्रिनिदाद, गुयाना मॉरीशस फ़िजी दक्षिण अफ्रीका सीलोन मलाया प्रमुख स्रोत क्षेत्र: • पूर्वी UP, बिहार • मध्य भारत, तमिलनाडु

गिरमिटिया मज़दूरों की स्थिति

पहलूविवरण
अनुबंध अवधिआमतौर पर 5 वर्ष
कार्यगन्ना, चाय, कॉफ़ी, रबर के बागान; खदानें
वेतनबहुत कम; वादे से भी कम
रहने की स्थितिअत्यंत खराब; झोपड़ियाँ, बीमारियाँ
स्वतंत्रतानहीं के बराबर; "नई दासता"
धोखाधड़ीगंतव्य, काम, और परिस्थितियों के बारे में झूठी जानकारी

गिरमिटिया प्रवास के कारण

  • 📉 गरीबी और कर्ज़: किसान कर्ज़ में डूबे थे
  • 🏭 कुटीर उद्योगों का पतन: हथकरघा बंद, बेरोज़गारी
  • 🌾 ज़मीन से बेदखली: ज़मींदारों का शोषण
  • 🤥 भर्तीदारों (Recruiters) का धोखा: झूठे वादे
  • 😰 सामाजिक उत्पीड़न: जातिगत भेदभाव से बचने की इच्छा
📌 महत्वपूर्ण तथ्य

महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में गिरमिटिया मज़दूरों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उनका प्रसिद्ध सत्याग्रह आंदोलन यहीं से शुरू हुआ।

📝 परीक्षा के लिए याद रखें
  • गिरमिटिया = Agreement का अपभ्रंश
  • प्रमुख स्रोत: बिहार, पूर्वी UP, तमिलनाडु
  • प्रमुख गंतव्य: मॉरीशस, त्रिनिदाद, फ़िजी, सूरीनाम
  • इसे "नई दासता" (New System of Slavery) कहा गया

7. दो विश्वयुद्धों के बीच की अर्थव्यवस्था (1918-1939)

प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) ने विश्व अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुँचाया। युद्ध के बाद की अवधि आर्थिक अस्थिरता और अंततः महामंदी की ओर ले गई।

युद्ध का आर्थिक प्रभाव

90 लाख+
सैनिकों की मृत्यु
2 करोड़+
घायल
$186B
युद्ध की लागत
4 साल
युद्ध की अवधि

युद्धोत्तर समस्याएँ

  • 🏭 औद्योगिक उत्पादन में कमी: कारखाने युद्ध सामग्री बनाने में लगे थे
  • 💰 कर्ज़ का बोझ: यूरोपीय देशों ने अमेरिका से भारी कर्ज़ लिया
  • 👷 बेरोज़गारी: लौटे सैनिकों के लिए काम नहीं
  • 📈 मुद्रास्फीति: जर्मनी में अत्यधिक मुद्रास्फीति

बड़े पैमाने पर उत्पादन: हेनरी फोर्ड और असेंबली लाइन

🚗 हेनरी फोर्ड की असेंबली लाइन

हेनरी फोर्ड ने 1913 में असेंबली लाइन (Assembly Line) पद्धति शुरू की। इसमें:

  • कन्वेयर बेल्ट पर कार चलती थी
  • हर मज़दूर एक ही काम करता था
  • उत्पादन समय 12 घंटे से 1.5 घंटे हो गया
  • Model T कार की कीमत आधी हो गई
  • आम लोग भी कार खरीद सकते थे
विश्व की आरक्षित मुद्रा £ पाउंड ₣ फ्रैंक ¥ येन निश्चित दर निश्चित दर निश्चित दर

ब्रेटन वुड्स प्रणाली की प्रमुख बातें

  • 💵 डॉलर = आरक्षित मुद्रा: अमेरिकी डॉलर विश्व की मुख्य मुद्रा बना
  • 🥇 सोने से जुड़ाव: $35 = 1 औंस सोना (Gold Standard)
  • 📊 निश्चित विनिमय दर: सभी मुद्राएँ डॉलर से जुड़ीं
  • 🇺🇸 अमेरिकी प्रभुत्व: IMF और World Bank में अमेरिका का वीटो

G-77: विकासशील देशों का समूह

G-77: 1964 में स्थापित विकासशील देशों का समूह। मूल रूप से 77 देश, अब 134+ सदस्य। यह ब्रेटन वुड्स संस्थाओं की नीतियों के विरोध में बना - जो विकासशील देशों के हितों की अनदेखी करती थीं।
📝 परीक्षा के लिए याद रखें
  • ब्रेटन वुड्स सम्मेलन: जुलाई 1944, न्यू हैम्पशायर (USA)
  • IMF: मुद्रा स्थिरता, अल्पकालिक ऋण
  • World Bank: विकास परियोजनाएँ, दीर्घकालिक ऋण
  • G-77: 1964, विकासशील देशों का समूह
  • ब्रेटन वुड्स का अंत: 1971 (निक्सन ने डॉलर-सोना संबंध तोड़ा)

10. आधुनिक वैश्वीकरण (Modern Globalization)

1970s के बाद विश्व अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आए। ब्रेटन वुड्स प्रणाली समाप्त हुई और नए वैश्वीकरण का युग शुरू हुआ।

वैश्वीकरण के चरण

चरणकालविशेषताएँ
प्रथम वैश्वीकरण 1870-1914 साम्राज्यवाद, रेलवे, स्टीमशिप, श्रम प्रवास
अवरोध काल 1914-1945 विश्वयुद्ध, महामंदी, संरक्षणवाद
द्वितीय वैश्वीकरण 1945-1970s ब्रेटन वुड्स, विकास का स्वर्णिम युग
तृतीय वैश्वीकरण 1980s-वर्तमान IT क्रांति, MNCs, WTO, इंटरनेट

आधुनिक वैश्वीकरण की विशेषताएँ

  • 🏢 बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs): एशिया में उत्पादन स्थानांतरित
  • 💻 IT क्रांति: इंटरनेट, सॉफ्टवेयर, BPO
  • 🌐 WTO: 1995 में स्थापित, व्यापार नियामक
  • 📱 संचार क्रांति: मोबाइल, सोशल मीडिया
  • ✈️ तेज़ परिवहन: वायु यात्रा सस्ती और सुलभ

⚠️ वैश्वीकरण की चुनौतियाँ: असमानता बढ़ना, रोज़गार का विस्थापन, पर्यावरण क्षति, सांस्कृतिक समरूपता, विकासशील देशों का शोषण।

11. महत्वपूर्ण तिथियाँ (Important Dates)

3000 BCE
सिंधु-मेसोपोटामिया व्यापार
प्राचीनतम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
200 BCE - 1400 CE
रेशम मार्ग का स्वर्णिम काल
चीन से भूमध्यसागर तक व्यापार
1492
कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज
नई दुनिया से खाद्य पदार्थों का आगमन
1834
ब्रिटेन में दास प्रथा समाप्त
गिरमिटिया श्रम की शुरुआत
1890s
अफ्रीका में रिंडरपेस्ट
90% मवेशियों की मृत्यु
1913
हेनरी फोर्ड की असेंबली लाइन
बड़े पैमाने पर उत्पादन की शुरुआत
1914-1918
प्रथम विश्व युद्ध
वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका
29 अक्टूबर 1929
वॉल स्ट्रीट क्रैश (Black Tuesday)
महामंदी की शुरुआत
1939-1945
द्वितीय विश्व युद्ध
विश्व व्यवस्था का पुनर्गठन
जुलाई 1944
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन
IMF और World Bank की स्थापना
1964
G-77 का गठन
विकासशील देशों का समूह
1971
ब्रेटन वुड्स प्रणाली का अंत
निक्सन ने डॉलर-सोना संबंध तोड़ा
1995
WTO की स्थापना
विश्व व्यापार संगठन

12. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) - Board Exam 2025

1. रेशम मार्ग (Silk Route) किन क्षेत्रों को जोड़ता था?
(A) भारत से अमेरिका
(B) चीन से भूमध्यसागर ✓
(C) अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया
(D) जापान से ब्रिटेन
2. आलू (Potato) का मूल स्थान कौन सा है?
(A) भारत
(B) चीन
(C) दक्षिण अमेरिका ✓
(D) अफ्रीका
3. "गिरमिटिया" शब्द किस अंग्रेज़ी शब्द से बना है?
(A) Government
(B) Agreement ✓
(C) Grammar
(D) Guarantee
4. महामंदी (Great Depression) की शुरुआत कब हुई?
(A) 1919
(B) 1925
(C) 1929 ✓
(D) 1935
5. ब्रेटन वुड्स सम्मेलन कब हुआ?
(A) 1942
(B) 1944 ✓
(C) 1945
(D) 1947
6. IMF का पूरा नाम क्या है?
(A) Indian Monetary Fund
(B) International Monetary Fund ✓
(C) International Money Federation
(D) Indian Money Fund
7. रिंडरपेस्ट (Rinderpest) क्या था?
(A) मनुष्यों की बीमारी
(B) मवेशियों की बीमारी ✓
(C) फसलों की बीमारी
(D) पक्षियों की बीमारी
8. हेनरी फोर्ड ने असेंबली लाइन कब शुरू की?
(A) 1903
(B) 1913 ✓
(C) 1923
(D) 1933
9. G-77 का गठन कब हुआ?
(A) 1954
(B) 1964 ✓
(C) 1974
(D) 1977
10. महामंदी के दौरान भारत में गेहूँ की कीमतें कितनी गिरीं?
(A) 25%
(B) 50% ✓
(C) 75%
(D) 90%
11. गिरमिटिया मज़दूर मुख्यतः भारत के किन क्षेत्रों से गए?
(A) पंजाब, राजस्थान
(B) बिहार, पूर्वी UP, तमिलनाडु ✓
(C) गुजरात, महाराष्ट्र
(D) केरल, कर्नाटक
12. ब्रेटन वुड्स प्रणाली में $35 में कितना सोना मिलता था?
(A) 1 औंस ✓
(B) 2 औंस
(C) 10 ग्राम
(D) 100 ग्राम
13. 18वीं सदी तक विश्व के सबसे धनी देश कौन से थे?
(A) ब्रिटेन और फ्रांस
(B) भारत और चीन ✓
(C) अमेरिका और जर्मनी
(D) स्पेन और पुर्तगाल
14. WTO की स्थापना कब हुई?
(A) 1985
(B) 1990
(C) 1995 ✓
(D) 2000
15. ब्रेटन वुड्स प्रणाली का अंत कब हुआ?
(A) 1965
(B) 1971 ✓
(C) 1980
(D) 1991

13. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

📝 परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्न

प्रश्न 1: रेशम मार्ग का वर्णन करें और बताएँ कि इसने विश्व को कैसे जोड़ा?

उत्तर बिंदु: परिभाषा → चीन से भूमध्यसागर → जमीन और समुद्री मार्ग → व्यापारिक वस्तुएँ (रेशम, मसाले) → धर्मों का प्रसार (बौद्ध, इस्लाम) → सांस्कृतिक आदान-प्रदान

प्रश्न 2: गिरमिटिया श्रम व्यवस्था क्या थी? इसके कारण और प्रभाव बताइए।

उत्तर बिंदु: परिभाषा (Agreement) → दास प्रथा समाप्ति के बाद → भारत से प्रवास → कारण (गरीबी, कर्ज़, धोखा) → गंतव्य (मॉरीशस, फ़िजी) → "नई दासता"

प्रश्न 3: महामंदी के कारण और विश्व पर इसके प्रभाव का वर्णन करें।

उत्तर बिंदु: 1929 वॉल स्ट्रीट क्रैश → कारण (सट्टेबाज़ी, अतिउत्पादन, बैंक पतन) → प्रभाव (बेरोज़गारी, व्यापार गिरा) → भारत पर प्रभाव (कृषि कीमतें 50% गिरीं) → राजनीतिक प्रभाव (हिटलर का उदय)

प्रश्न 4: ब्रेटन वुड्स संस्थाओं का वर्णन करें और G-77 की भूमिका बताइए।

उत्तर बिंदु: 1944 सम्मेलन → IMF (मुद्रा स्थिरता) → World Bank (विकास) → निश्चित विनिमय दर → G-77 (1964, विकासशील देशों का समूह) → ब्रेटन वुड्स की आलोचना

प्रश्न 5: उपनिवेशवाद ने विश्व अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर बिंदु: यूरोपीय साम्राज्य → कच्चे माल का शोषण → भारत का व्यापार बदला → रिंडरपेस्ट (अफ्रीका) → श्रम प्रवास → असमान विकास

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कक्षा 10 इतिहास, अध्याय 3: भूमंडलीकृत विश्व का बनना | RBSE · NCERT · CBSE Board 2025

अंतिम अपडेट: जनवरी 2025 | संस्करण: 2.0 (World-Class Edition)

यह लेख शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। सभी तथ्य NCERT/RBSE पाठ्यक्रम और प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित हैं।