नियम 26, 26क, 26ख, 26ग एवं 26घ : वेतन नियतन
Rule 26, 26A, 26B, 26C & 26D — Fixation of Pay
विषय-सूची
- नियम 26 — परिवीक्षाधीन-प्रशिक्षणार्थी का वेतन नियतन
- नियम 26क (26A) — पदोन्नति पर वेतन नियतन
- स्पष्टीकरण 16.9.2022 — रिव्यू DPC एवं वसूली
- नियम 26ख (26B) — विशेष वेतन का संरक्षण
- नियम 26ग (26C) — कार्यदत्त कर्मचारी
- नियम 26घ (26D) — अत्यावश्यक अस्थायी नियुक्ति
- पे-लेवल के प्रथम सेल की तालिका
- व्याख्या — सरल भाषा में
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- संदर्भ
किसी परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने पर पद के पे-मैट्रिक्स में लेवल (प्रथम सेल) में न्यूनतम वेतन अनुज्ञात किया जायेगा :
परन्तु ऐसा सरकारी कर्मचारी, जो पहले ही राज्य सरकार की नियमित सेवा में है, यदि अन्य समान या उच्चतर पद पर नियुक्त किया जाता है और उसने पूर्व पद के लेवल में वेतन आहरित करने का विकल्प दिया है, तो परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने पर, उसका वेतन परिवीक्षा-प्रशिक्षण अवधि के दौरान पूर्व पद पर देय वेतन वृद्धियों सहित, नये पद के लेवल के पे-मैट्रिक्स में समान सेल में — और यदि समान सेल नहीं हो तो अगले सेल में — नियत किया जायेगा।
परन्तु यह और कि ऐसा सरकारी कर्मचारी, जो पहले ही राज्य सरकार की नियमित सेवा में है, यदि निचले पद पर परिवीक्षाधीन-प्रशिक्षणार्थी के रूप में नियुक्त किया जाता है और उसने पूर्व पद के वेतनमान में वेतन आहरित करने का विकल्प दिया है, तो परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने पर उसका वेतन नये पद के पे-मैट्रिक्स में लेवल में नियत किया जायेगा जिसका वह तब हकदार होता जब पूर्व पद पर की गयी सेवा अवधि को नये पद पर की गयी सेवा के रूप में गिन लिया जाता — बशर्ते कि नियत वेतन पूर्व पद पर आहरित अंतिम वेतन तक परिसीमित होगा।
परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति, जिसकी राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1958 में यथा-परिभाषित राज्य सेवा के प्रारंभिक पद से उच्चतर किसी ऐसे पद पर सीधी भर्ती की गयी है जिसके लिए शैक्षणिक/वृत्तिक अर्हताओं के अतिरिक्त कुछ अनुभव विहित किया गया है, एक वर्ष की परिवीक्षा पर रहेगा और उसे पद के पे-मैट्रिक्स में लेवल (प्रथम सेल) में न्यूनतम वेतन अनुज्ञात किया जायेगा।
परन्तु यह और कि ऐसा सरकारी कर्मचारी जो पहले ही राज्य सरकार की नियमित सेवा में है, यदि सीधी भर्ती द्वारा राज्य सेवा के प्रारंभिक पद से उच्चतर पद पर एक वर्ष की परिवीक्षा पर नियुक्त किया जाता है और उसके द्वारा आहरित अंतिम वेतन नये पद के लिए विहित प्रवेश-वेतन से अधिक है, तो उसका वेतन पूर्व पद के वेतन के प्रति-निर्देश से नये पद के पे-मैट्रिक्स में लेवल में समान सेल पर — और यदि समान सेल नहीं हो तो अगले उच्चतर सेल में — नियत किया जायेगा।
परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति, जो पहले ही भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों (जिनमें भारत सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों की संस्थाएं भी सम्मिलित हैं) की नियमित सेवा में है, पूर्व नियोजक के अधीन धारित अंतिम पद से उच्चतर पद पर और राज्य सेवा के प्रारम्भिक पद से उच्चतर पद पर 'परिवीक्षा' पर नियुक्त किया जाता है और उसके द्वारा आहरित अंतिम वेतन नये पद के लिए विहित प्रवेश-वेतन से अधिक है, तो उसका वेतन पूर्व पद के वेतन के प्रति निर्देश से नये पद के पे-मैट्रिक्स में लेवल में समान सेल पर — और यदि समान सेल नहीं हो तो अगले उच्चतर सेल में — नियत किया जायेगा।
(2) ऐसे सरकारी कर्मचारी का वेतन-नियतन जो अर्जेण्ट-अस्थायी आधार पर नियुक्त किया गया हो और जिसकी सेवाएं रालोसेआ के माध्यम से या सुसंगत सेवा नियमों में विहित चयन समिति द्वारा चयन पर विनियमित की गयी है — अर्जेन्ट अस्थायी आधार पर कार्यरत सरकारी कर्मचारी रालोसेआ के माध्यम से या सुसंगत सेवा नियमों के अधीन चयन समिति द्वारा चयन होने पर नये सिरे से परिवीक्षाधीन-प्रशिक्षणार्थी के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो उसे परिवीक्षा-प्रशिक्षण के दौरान नियत पारिश्रमिक अनुज्ञात किया जाता है और परिवीक्षा-प्रशिक्षण की अवधि पूरी होने पर पद के प्रवेश-वेतन का हकदार होगा।
(3) जब नये पद पर नियुक्ति राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 20(क) या राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 38(1)(ख) के अधीन सरकारी कर्मचारी के अनुरोध पर की जाती है, तो वेतन पद के पे-मैट्रिक्स में लेवल में समान सेल में — और यदि समान सेल नहीं हो तो निचले सेल में — नियत किया जायेगा।
स्पष्टीकरण : यदि परिवीक्षाधीन के रूप में / परिवीक्षा पर सेवारत कोई सरकारी कर्मचारी परिवीक्षा की विहित अवधि के समाधानप्रद रूप से पूर्ण होने से पूर्व नये पद पर नियुक्त किया जाता है, तो पुराने पद पर की गयी सेवा की अवधि नये पद पर इस प्रयोजनार्थ नहीं गिनी जायेगी।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(4) विवि (नियम)/2017-I, दिनांक 30.10.2017 द्वारा प्रतिस्थापित, दिनांक 1.1.2016 से प्रभावी।
@ वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(4) विवि (नियम)/2017, दिनांक 9.12.2017 द्वारा '1.10.2017' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
पुनरीक्षित वेतन संरचना में एक लेवल से दूसरे लेवल में पदोन्नति के मामले में वेतन-नियतन निम्नलिखित रीति से किया जायेगा, अर्थात् :—
(1) जब किसी सरकारी कर्मचारी को, अर्जेण्ट अस्थायी आधार को छोड़कर, उसकी सेवा, संवर्ग या विभाग में पदोन्नति की नियमित पंक्ति में किसी पद पर पदोन्नत किया जाता है, तो उच्चतर पद के पे-मैट्रिक्स में वेतन लेवल में उसका प्रारंभिक वेतन — उसके द्वारा निचले पद पर आहरित वास्तविक वेतन में उस स्टेज, जिस पर ऐसा वेतन आहरित किया जाता है, पर एक वेतन वृद्धि द्वारा बढ़ाने से आये नोशनल वेतन से अगली ऊपर की स्टेज पर नियत किया जायेगा।
(2) चालू वर्ष की डीपीसी में पदोन्नति पर सरकारी कर्मचारी का वेतन-नियतन —
(i) जहाँ चालू वर्ष की डीपीसी की गयी है और सरकारी कर्मचारी को उच्चतर पद पर पदोन्नत किया गया है, वहाँ पूर्व वर्ष से आगे लाये गये पद के संबंध में डीपीसी वर्ष के 1 अप्रैल से, या रिक्ति जिसके प्रति चयन किया गया है उसकी तारीख से, यथास्थिति, उच्चतर पद पर काल्पनिक आधार पर वेतन-नियतन किया जा सकेगा। वास्तविक फायदे की हकदारी सेवारत कर्मचारी द्वारा पदोन्नति-पद का कार्यभार संभालने की तारीख से संदेय होगी।
(ii) जहाँ चालू वर्ष की डीपीसी की गयी है किन्तु पदोन्नति आदेश जारी होने से पूर्व पदोन्नत कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाता है, वहाँ उसके वेतन का काल्पनिक नियतन — पूर्व वर्ष से आगे लाये गये पद के संबंध में डीपीसी वर्ष के 1 अप्रैल से, या रिक्ति जिसके प्रति चयन किया गया है उसकी तारीख से, या यदि पद की रिक्ति की वास्तविक तारीख का पता लगाना संभव नहीं हो तो सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की तारीख से, यथास्थिति, किया जा सकेगा।
(iii) यदि डीपीसी चालू वर्ष में हुई है और पदोन्नति आदेश अगले वर्ष में जारी किया गया है, तो पदोन्नति पद पर वेतन-नियतन — पूर्व वर्ष से आगे लाये गये पद के संबंध में डीपीसी के 1 अप्रैल से, या रिक्ति जिसके प्रति चयन किया गया है उसकी तारीख से, या यदि पद की रिक्ति की तारीख का पता लगाना संभव नहीं हो तो डीपीसी वर्ष के 31 मार्च को, यथास्थिति, काल्पनिक वेतन-नियतन किया जायेगा; और वास्तविक संदाय पदोन्नति-पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से किया जायेगा।
यदि पदोन्नति वार्षिक वेतनवृद्धि की तारीख को की गयी है, तो उस स्थिति में प्रथम वेतनवृद्धि निचले पद पर अनुज्ञात की जायेगी और तत्पश्चात् उच्चतर पद पर पदोन्नति पर वेतन-नियतन किया जायेगा।
यदि कोई सरकारी कर्मचारी उसी लेवल में एसीपी (ACP) की स्वीकृति के पश्चात् उच्चतर पद पर पदोन्नत किया जाता है, तो उच्चतर पद पर कोई और वेतन-नियतन नहीं किया जायेगा।
(5) पदोन्नति पर वेतन-नियतन के पश्चात् वेतनवृद्धि की अगली तारीख वर्ष की 1 जुलाई होगी।
अधिसूचना सं. एफ. 1(4) विवि (नियम)/2017-I, दिनांक 30.10.2017 द्वारा प्रतिस्थापित, दिनांक 1.1.2016 से प्रभावी।
@ अधिसूचना सं. एफ. 1(4) विवि (नियम)/2017, दिनांक 9.12.2017 द्वारा '1.10.2017' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
उप-नियम (1) — अधिसूचना सं. एफ. 1(4) विवि (नियम)/2017-I, दिनांक 26.7.2023 द्वारा प्रतिस्थापित, 1.1.2016 से प्रभावी।
स्पष्टीकरण सं. एफ. 1(8) विवि/नियम/2018, दिनांक 16.9.2022
यह प्रश्न स्पष्टीकरण हेतु उठाया गया था कि DPC के माध्यम से पदोन्नति पर किसी सरकारी कर्मचारी को — पूर्ववर्ती पदोन्नति की तारीख से लेकर बाद के वर्ष(वर्षों) की रिव्यू DPC से हुई अगली पदोन्नति की तारीख तक की अवधि में — किया गया भुगतान वसूली योग्य है या नहीं।
मामले पर विचार किया गया है और यह स्पष्ट किया जाता है कि चूँकि सम्बन्धित कर्मचारी ने बाद के वर्ष(वर्षों) की रिव्यू DPC से अगली पदोन्नति से पूर्व उच्चतर पद के कर्तव्यों का वास्तव में निर्वहन किया है, अतः उच्चतर पद का पहले किया गया भुगतान वसूली योग्य नहीं होगा।
तथापि यह भी स्पष्ट किया जाता है कि बाद के वर्ष(वर्षों) की रिव्यू DPC से हुई अगली पदोन्नति पर राजस्थान सेवा नियम के नियम 26A के अधीन वेतन नियतन — रिव्यू DPC से पदोन्नति की तारीख से तुरन्त पूर्व देय निचले पद के वेतन के सन्दर्भ में किया जाएगा।
इन नियमों में कुछ उल्लेख होते हुए भी, जहाँ एक राज्य कर्मचारी ने नियम 7(31)(क) के अनुसार उच्चतर दायित्वों अथवा विशेष प्रकार के कठिन कार्यों को सम्पादित करने के कारण निरन्तर न्यूनतम दो वर्ष तक विशेष वेतन प्राप्त किया है — यदि वह उसके द्वारा धारित पद के दायित्वों से अधिक महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य एवं दायित्वों वाले पद पर पदोन्नत/नियुक्त हो जाता है तथा उसका पूर्व पद का वेतन एवं विशेष वेतन दोनों मिलाकर पदोन्नति/नियुक्ति वाले पद के निर्धारित वेतन से अधिक रहता हो — तो वह अन्तर उसे व्यक्तिगत-वेतन के रूप में स्वीकृत कर दिया जायेगा, पर भविष्य में उसे देय वार्षिक वेतन-वृद्धि के लाभों में अन्तर्लीन (एब्जार्ब) कर दिया जावेगा।
यह संशोधन दिनांक 1 सितम्बर, 1961 से प्रभावी समझा जावेगा।
वित्त विभाग की अधिसूचना संख्या एफ. 1(20) वि.वि.ए. (नियम)/61, दिनांक 30.8.1962 द्वारा अन्तःस्थापित एवं 1.9.1961 से प्रभावी।
राजस्थान सेवा नियमों के नियम 26ख के अनुसार, 1.9.1961 को या उसके पश्चात् किसी उच्चतर पद पर पदोन्नति/नियुक्ति पर वेतन निर्धारण में सरकारी कर्मचारी को प्राप्त विशेष वेतन को भी गिना जायेगा, यदि उसने नियम 7(31)(क) के अधीन ऐसा विशेष वेतन न्यूनतम दो वर्ष तक निरन्तर प्राप्त किया हो।
एक प्रश्न उठाया गया है कि क्या निरन्तर दो वर्ष की अवधि की गणना में कर्मचारी द्वारा उपभोग किये गये अवकाशों की अवधि को भी सम्मिलित किया जायेगा।
मामले की जाँच कर ली गई है तथा यह स्पष्ट किया जाता है कि नियम 26ख में वर्णित दो वर्ष की अवधि में अधिकारी द्वारा उपभोग किये गये सभी अवकाशों की अवधि सम्मिलित की जाएगी — यदि नियुक्ति अधिकारी द्वारा यह प्रमाणित कर दिया जाये कि वह अधिकारी लगातार विशेष वेतन प्राप्त करता रहता, यदि अवकाश पर प्रस्थान नहीं करता।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(20) वि.वि./(नियम)/61-II, दिनांक 20.7.1963 द्वारा अन्तःस्थापित।
वित्त विभाग को एक ऐसा मामला प्राप्त हुआ है जिसमें एक अधिकारी अपनी पदोन्नति से पूर्व विशेष वेतन प्राप्त कर रहा था। उसने दो वर्ष से अन्यून अवधि के लिये विशेष वेतन उठाया था, किन्तु उक्त अवधि में विशेष वेतन की दरों में परिवर्तन हो गया था। एक प्रश्न उत्पन्न किया गया कि कौन-सी दर (संशोधित अथवा पूर्व की) नियम 26ख के प्रयोजनार्थ वेतन में सम्मिलित की जाये।
मामले की जाँच कर ली गई है तथा यह स्पष्ट किया जाता है कि पदोन्नति से तुरन्त पूर्व प्राप्त विशेष वेतन वाली दर ही नियम 26ख के प्रयोजनार्थ सम्मिलित की जानी चाहिये।
वित्त विभाग के ज्ञापन सं. एफ. 1(90) विवि (व्यय-नियम)/66, दिनांक 23.12.1966 द्वारा अन्तःस्थापित।
राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवा नियम, 1963 के नियम 27 के प्रावधानों के अनुसार, लेखा लिपिकों के पदों से लेखाकारों के पदों पर पदोन्नति होने पर उनके द्वारा प्राप्त किए जा रहे 10/- रुपये मासिक विशेष वेतन को आरक्षित करने सम्बन्धी प्रश्न कुछ समय पूर्व से सरकार के विचाराधीन रहा है।
प्रश्न पर विचार कर लिया गया है तथा यह निर्णय किया गया है कि उन लेखा लिपिकों द्वारा — जो लेखाकार अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर उक्त नियमों के अनुसार लेखाकारों के पदों पर नियुक्त किए जाते हैं — प्राप्त किये जा रहे 10/- रूपये मासिक विशेष-वेतन को काल्पनिक रूप से वेतन ही समझा जाये। किन्तु शर्त यह है कि इस प्रकार से परिकलित वेतन (लेखा-लिपिक का वेतन और विशेष-वेतन) लेखा लिपिक के पद के वेतनमान की किसी स्टेज के समान न हो, तो ऐसा परिकलित वेतन लेखा लिपिक के पद के वेतनमान में उच्चतर स्तर पर निश्चित किया जायेगा।
लेखाकार के पद पर पदोन्नति होने पर वेतन का निर्धारण — उपरोक्त अनुच्छेद 2 में दर्शाये गये तरीके से वेतन में विशेष वेतन को शामिल कर जो वेतन आयेगा, उसके आधार पर नियम 26क के प्रावधानों के अनुसार किया जायेगा।
यह आज्ञा दिनांक 1 जनवरी, 1967 से प्रभावी होती है।
उपरोक्त अनुच्छेद (2) व (3) में उल्लिखित निर्णय उस लेखा-लिपिक पर लागू नहीं होगा जो लेखाकार प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् नियुक्त हुआ है।
वित्त विभाग के ज्ञापन सं. एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/68, दिनांक 18.7.1968 द्वारा अन्तःस्थापित।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/68, दिनांक 18.7.1968 के अनुच्छेद 2 और 3 के अनुसार ऐसे लेखा लिपिकों द्वारा — जो लेखाकारों की अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर लेखाकार के पद पर पदोन्नत हुए हैं — प्राप्त किये जा रहे वेतन और 10/- रुपये के विशेष वेतन पर लेखाकार के पद पर वेतन नियत करने के प्रयोजनार्थ विचार किया जाना है।
उक्त अपवाद के संदर्भ में एक प्रश्न यह उत्पन्न किया गया कि उन वाणिज्यिक लेखा लिपिकों को, जो लेखाकारों की अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर लेखाकारों के पदों पर पदोन्नत हुए हैं, उनके विशेष-वेतन को किस तरह समझा जाए।
मामले पर विचार कर लिया गया है तथा यह निर्णय किया गया है कि यद्यपि वाणिज्यिक लेखा लिपिक को 15/- रुपये मासिक विशेष-वेतन मिलता है, फिर भी उक्त अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर लेखाकार के पद पर वेतन निर्धारण के प्रयोजनों के लिए केवल 10/- रुपये विशेष-वेतन को ही वेतन के रूप में माना जायेगा; तथा तदनुसार उपरोक्त आज्ञा के प्रावधान वाणिज्यिक लेखा लिपिकों के मामलों में भी लागू होंगे। यह आदेश दिनांक 1 जनवरी, 1967 से लागू होंगे।
यह आज्ञा उन वाणिज्यिक लेखालिपिकों पर लागू नहीं होगी जो वाणिज्यिक लेखाकारों के रूप में नियुक्त/पदोन्नत हुए हैं, तथा जो लेखाकार प्रतियोगी परीक्षा को उत्तीर्ण कर लेखाकारों के पदों पर नियुक्त हुए हैं।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(29) वि.वि.(नियम)/68, दिनांक 15.5.1969 द्वारा अन्तःस्थापित।
वित्त विभाग के ज्ञापन सं. एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/68, दिनांक 18.7.1968 और 15.5.1969 के अधीन लेखा लिपिकों / वाणिज्यिक लेखा लिपिकों द्वारा प्राप्त किये जा रहे 10/- रुपये के विशेष वेतन को — ऐसे लेखा लिपिकों/वाणिज्यिक लेखा लिपिकों के संबंध में जो लेखाकार अर्हता परीक्षा पास करने पर 1.1.1967 को या इसके पश्चात् पदोन्नत किये गये हैं — वेतन नियत करते समय विचार में लिये जाने का आदेश दिया गया था।
राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवा नियम, 1963 के नियम 27 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसार लेखाकार अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 1.1.1967 के पूर्व लेखाकार के रूप में पदोन्नत हुए लेखा लिपिकों/वाणिज्यिक लेखा लिपिकों द्वारा यह अभ्यावेदन किया गया है कि पूर्वोक्त आदेश को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाये ताकि उनको भी वेतन नियतन का ऐसा ही फायदा मिल सके।
मामले पर विचार किया गया है और यह निश्चय किया गया है कि ऐसे लेखालिपिकों/वाणिज्य लेखालिपिकों के मामलों में जिन्होंने लेखाकार अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और जिन्हें 1 जनवरी, 1967 के पूर्व लेखाकार के पद पर पदोन्नत कर दिया था — राजस्थान सेवा नियमों के नियम 32 को वहाँ व्यक्तिगत मामलों में लागू किया जा सकता है, जहाँ यह ज्ञात हो कि एक ऐसी स्थिति आ गई है जहाँ लेखाकार द्वारा प्राप्त किया गया वेतन, उस वेतन एवं विशेष-वेतन से कम हो जाता है जो लेखालिपिक एवं वाणिज्यिक लेखालिपिक के रूप में यदि वह रहता तो प्राप्त करता।
ऐसे मामले वित्त विभाग को समुचित कार्यवाही हेतु निर्धारित प्रणाली के माध्यम से भेजे जावें।
यह आज्ञा उस लेखालिपिक/वाणिज्यिक लेखालिपिक पर लागू नहीं होगी जो लेखाकार प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर लेखाकार/वाणिज्य लेखाकार के पद पर नियुक्त/पदोन्नत हुये हैं।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या 1(29) वि.वि.(नियम)/68, दिनांक 24.7.1971 द्वारा अन्तःस्थापित।
वित्त विभाग के आदेश संख्या एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/68, दिनांक 24.7.1971 के अधीन यह विनिश्चित किया गया था कि ऐसे लेखा लिपिक/वाणिज्यिक लेखा लिपिक के मामले में, जो लेखाकार अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 1.1.1967 से पूर्व लेखाकार के रूप में पदोन्नत किये गये, राजस्थान सेवा नियमों के नियम 32 के उपबंधों को वहाँ व्यक्तिगत मामलों में लागू किया जा सकता है जहाँ यह ज्ञात हो कि ऐसी स्थिति आ गयी है जहाँ लेखाकार द्वारा प्राप्त किया गया वेतन, उस वेतन एवं विशेष वेतन से कम हो जाता है जो लेखालिपिक एवं वाणिज्यिक लेखालिपिक के रूप में यदि वह रहता तो प्राप्त करता।
राज्यपाल महोदय ने मुख्य लेखा अधिकारी, राजस्थान, जयपुर को ऐसे समस्त लेखाकारों के वेतन पुनः निर्धारण करने की शक्तियां — राजस्थान सेवा नियमों के नियम 32 के प्रावधानों को व्यक्तिगत मामले में निम्न अंकित सीमाओं के अनुसार लागू करने के अधिकार दिये हैं, जो उपरोक्त आदेशों द्वारा व्यावृत होते हैं :—
जहाँ लेखालिपिक के रूप में देय वेतन तथा विशेष वेतन, लेखाकार के रूप में देय वेतन तथा व्यक्तिगत वेतन (यदि कोई हो) से अधिक हो, तो लेखाकार का वेतन उसे लेखालिपिक के रूप में देय वेतन तथा विशेष वेतन की राशि से ऊपर के आगामी स्तर पर पुनः निर्धारित किया जायेगा। समस्त मामलों में जहाँ इन आज्ञाओं के अनुसार वेतन के पुनः निर्धारण की अनुमति दी जाती है, तो सम्बन्धित व्यक्ति को सेवा नियम 31 के अनुसार वेतन के पुनः निर्धारण की तारीख से, वेतन-वृद्धि की अवधि पूर्ण करने पर ही, आगामी वेतन-वृद्धि देय होगी।
वित्त विभाग की आज्ञा क्रमांक एफ. 1(29) वि.वि./नियम/68, दिनांक 5.1.1973 द्वारा जोड़ा गया।
एक कार्यदत्त (वर्क-चार्ज्ड) कर्मचारी जो एक विभाग में अर्धस्थायी अथवा स्थायी रूप से कार्य करते हुए निर्धारित वेतनमान में वेतन आहरित कर रहा हो — वह कार्यदत्त कर्मचारी, सुसंगत नियुक्ति नियमों के आधार पर कार्यदत्त पदों के नियमित विभागीय पदों में परिवर्तित हो जाने के कारण, उसी के विभाग में अथवा अन्य विभाग में ऐसे पद पर सीधी भर्ती के आधार पर उसी वेतनमान में आमेलित (एब्जार्ब्ड) / नियुक्त किये जाने पर — उसका वेतन उसी स्तर/दर पर नियत किया जावेगा जो वह कार्यदत्त कर्मचारी के रूप में प्राप्त कर रहा था। ऐसे मामलों में कर्मचारी की वेतन वृद्धि की तारीख नहीं बदलेगी।
1. इस अधिसूचना के जारी होने की तारीख को विचाराधीन मामले भी इस नियम के अनुसार निपटाये जायें।
2. जो प्राधिकारी ऐसे प्रकरण में संस्थाई नियुक्ति करने को सक्षम हों, वे ही इस नियम के प्रावधान के अनुसार वेतन निर्धारण आदेश जारी कर सकेंगे। ऐसे आदेश जारी करने से पूर्व प्रकरण की जाँच राजस्थान लेखा सेवा के ऐसे अधिकारी से करावेंगे जो लेखाधिकारी के पद से कम स्तर का नहीं होगा।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(32) वि.वि. (ग्रुप-2)/79, दिनांक 16.8.1994 द्वारा निविष्ट।
अत्यावश्यक अस्थायी आधार (urgent temporary basis) पर नियुक्ति/पदोन्नति के मामले में वेतन नियतन निम्नानुसार किया जाएगा :—
(a) अंतिम आहरित वेतन तथा अंतिम पद पर देय भत्ते — अर्थात् DA, HRA एवं CCA, यदि अनुज्ञेय हों।
(b) राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 के अधीन पद के पे-लेवल के प्रथम सेल की राशि के बराबर नियत पारिश्रमिक — बिना DA, HRA एवं CCA जैसे किसी भत्ते के।
— इन दोनों में से जो अधिक हो।
अधिसूचना सं. एफ. 1(5) विवि/नियम/2014, दिनांक 30.8.2024 द्वारा अन्तःस्थापित, तुरन्त प्रभाव से प्रवृत्त।
पे-लेवल के प्रथम सेल की राशि — RCS (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017
| लेवल | प्रथम सेल | लेवल | प्रथम सेल | लेवल | प्रथम सेल | लेवल | प्रथम सेल |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| L-1 | 17700 | L-7 | 22400 | L-13 | 53100 | L-19 | 79900 |
| L-2 | 17900 | L-8 | 26300 | L-14 | 56100 | L-20 | 88900 |
| L-3 | 18200 | L-9 | 28700 | L-15 | 60700 | L-21 | 123100 |
| L-4 | 19200 | L-10 | 33800 | L-16 | 67300 | L-22 | 129700 |
| L-5 | 20800 | L-11 | 37800 | L-17 | 71000 | L-23 | 145800 |
| L-6 | 21500 | L-12 | 44300 | L-18 | 75300 | L-24 | 148800 |
राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 26C के नीचे नया नियम 26D — अत्यावश्यक अस्थाई आधार (UTB) पर नियुक्ति/पदोन्नति पर वेतन निर्धारण के संबंध में — इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 30.08.2024 के द्वारा जोड़ा गया है।
वित्त विभाग के संज्ञान में आया है कि कतिपय विभागों द्वारा सीधी भर्ती से प्रोबेशनरी ट्रेनी के रूप में नियुक्त कर्मचारियों को प्रोबेशनर ट्रेनी अवधि में देय पारिश्रमिक को उक्त अधिसूचना दिनांक 30.08.2024 में वर्णित दरों के अनुसार संशोधित कर दिया गया है — जबकि उक्त पारिश्रमिक दरें अत्यावश्यक अस्थाई आधार पर नियुक्त किये जाने वाले कार्मिकों को ही देय हैं।
सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम 2017 की अनुसूची-IV में वर्णित दर पर नियत पारिश्रमिक देय है। उक्त अनुसूची-IV में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
अतः यह स्पष्ट किया जाता है कि वित्त (नियम) विभाग की अधिसूचना दिनांक 30.08.2024 में नियम 26D(b) के नीचे अंकित तालिका के अनुसार देय नियत पारिश्रमिक अत्यावश्यक अस्थाई आधार (UTB) पर नियुक्ति पर वेतन निर्धारण के लिए प्रभावी है। परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी (probationer trainee) के नियत पारिश्रमिक निर्धारण के लिए उक्त अधिसूचना के प्रावधान लागू नहीं हैं।
अतः प्रोबेशनर ट्रेनी को देय नियत पारिश्रमिक को उक्त अधिसूचना दिनांक 30.08.2024 में वर्णित दरों पर नियम-विरुद्ध संशोधन के संबंध में की गई कार्यवाही को अविलम्ब प्रत्याहारित किया जावे, तथा नियम-विरुद्ध की गई कार्यवाही के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित कर की गई कार्यवाही से अवगत करवाया जाना सुनिश्चित करावें।
व्याख्या — सरल भाषा में
पदोन्नति पर वेतन कैसे बनता है — तीन कदम
नियम 26क(1) का सूत्र इतना ही है :
- निचले पद पर आप जो वास्तविक वेतन ले रहे हैं, उसे देखिए।
- उसी स्टेज पर एक वेतन वृद्धि जोड़िए — यह "नोशनल वेतन" बनता है।
- उच्चतर पद के लेवल में उस नोशनल वेतन से अगली ऊपर की स्टेज पर वेतन नियत हो जाएगा।
DPC के तीन मामले
| स्थिति | काल्पनिक नियतन किस तारीख से | वास्तविक भुगतान |
|---|---|---|
| DPC हुई, पदोन्नति भी हुई | DPC वर्ष की 1 अप्रैल, या रिक्ति की तारीख | कार्यभार संभालने की तारीख से |
| DPC हुई, पर आदेश से पहले सेवानिवृत्ति | 1 अप्रैल / रिक्ति की तारीख; पता न चले तो सेवानिवृत्ति की तारीख | — |
| DPC इस वर्ष, आदेश अगले वर्ष | 1 अप्रैल / रिक्ति की तारीख; पता न चले तो DPC वर्ष की 31 मार्च | कार्यभार ग्रहण की तारीख से |
दो नियम जो अक्सर काम आते हैं
वेतनवृद्धि की तारीख पर पदोन्नति — यदि दोनों एक ही दिन पड़ें, तो पहले निचले पद पर वेतनवृद्धि लगेगी, फिर उस बढ़े हुए वेतन पर पदोन्नति का नियतन होगा। क्रम उलटा करने पर कर्मचारी को नुकसान होता, इसलिए यह प्रावधान रखा गया।
ACP के बाद पदोन्नति — यदि उसी लेवल में ACP मिल चुका है और फिर उसी लेवल के उच्चतर पद पर पदोन्नति होती है, तो दुबारा वेतन नियतन नहीं होगा। लाभ एक ही बार मिलेगा।
अगली वेतनवृद्धि — 1 जुलाई
पदोन्नति पर वेतन नियतन के बाद अगली वेतनवृद्धि वर्ष की 1 जुलाई को मिलेगी। यानी पदोन्नति चाहे किसी भी माह हो, वेतनवृद्धि की तारीख 1 जुलाई पर आ जाती है।
रिव्यू DPC — वसूली का डर नहीं
16.9.2022 का स्पष्टीकरण व्यावहारिक रूप से बहुत राहत देने वाला है। यदि किसी को पहले पदोन्नति मिली और बाद में रिव्यू DPC से दुबारा पदोन्नति हुई, तो बीच की अवधि का भुगतान वापस नहीं लिया जाएगा — क्योंकि कर्मचारी ने उस अवधि में उच्चतर पद का काम वास्तव में किया है।
पर एक शर्त भी है — रिव्यू DPC वाली पदोन्नति पर नियतन निचले पद के उस वेतन से होगा जो रिव्यू DPC की तारीख से तुरन्त पूर्व देय था, न कि पहले वाली पदोन्नति के वेतन से।
नियम 26D की तालिका — एक आम भूल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संदर्भ
- राजस्थान सेवा नियम — वित्त विभाग, राजस्थान सरकार (PDF)
- वित्त विभाग, राजस्थान सरकार — आधिकारिक वेबसाइट
- राजस्थान सरकार — rajasthan.gov.in


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