राजस्थान सेवा नियम 1951 · खण्ड I · भाग 1
अध्याय 1 : लागू होने की सीमा एवं अध्याय 2 : परिभाषाएँ
राजस्थान सेवा नियम दो खण्डों में प्रकाशित हैं — खण्ड I तथा खण्ड II। यह पृष्ठ खण्ड I के भाग 1 का सम्पूर्ण संग्रह है। इसमें दो अध्याय आते हैं — अध्याय 1 (लागू होने की सीमा) जिसमें नियम 1 से 6 तक हैं, और अध्याय 2 (परिभाषाएँ) जिसमें केवल नियम 7 है।
प्रत्येक लेख में पहले मूल नियम ज्यों-का-त्यों दिया गया है — फिर उससे जुड़ी टिप्पणियाँ, स्पष्टीकरण, निर्देशन और सरकार के निर्णय, और अन्त में सरल भाषा में व्याख्या। कोई सारांश नहीं, कोई नोट्स नहीं — पूरा पाठ।
| नियम | विषय |
|---|---|
| 1 | संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ संहिता का नाम एवं 1 अप्रैल 1951 से प्रवृत्त होना; अवकाश पर रहे कर्मचारियों हेतु टिप्पणी |
| 2 | लागू होने की सीमा तीन श्रेणियाँ जिन पर लागू; नौ श्रेणियाँ अपवाद; संविदा सेवा की पेंशन गणना; सरकार के पाँच निर्णय |
| 3 | वित्त विभाग की सहमति लिया जाना परामर्श बिना शक्ति का प्रयोग या प्रत्यायोजन नहीं; भेजे जाने योग्य दो श्रेणियाँ; तीन अनिवार्य शर्तें |
| 4 | परिवर्तित या संशोधित करने की शक्ति शिथिलता की शक्ति; 16.7.1955 की अधिसूचना; प्रक्रिया के चार चरण; 1967–69 की काल्पनिक सेवा |
| 4क | नियमों में संशोधन करने का राज्यपाल का अन्तर्निहित अधिकार वेतन, अवकाश एवं पेंशन पर कौन-सा नियम कब लागू; पेंशन योग्यता पर भूतलक्षी प्रभाव की रोक |
| 4ख | पुनर्विलोकन (रिव्यू) करने की शक्ति 90 दिन की सीमा; पुनर्विलोकन के तीन आधार; फायदा प्रत्याहरण से पूर्व सुनवाई अनिवार्य |
| 5 | अधिकारों / शक्तियों का प्रदत्तीकरण प्रदत्तीकरण के दो अपवाद; लोपित नियम संख्याएँ; प्रदत्त शक्तियों का भूतलक्षी प्रयोग |
| 6 | व्याख्या व्याख्या का अधिकार राजस्थान के राज्यपाल के पास सुरक्षित |
| नियम | विषय |
|---|---|
| 7 | परिभाषाएँ आयु, शिक्षार्थी, संवर्ग, सक्षम प्राधिकारी, कर्त्तव्य, शुल्क, पदाधिकार, वेतन, अवकाश, परिवीक्षाधीन, स्थानापन्न सहित सभी परिभाषाएँ — लेख में परिभाषा-सूचकांक भी है |
RSR का ढाँचा — खण्ड, भाग एवं अध्याय
राजस्थान सेवा नियम की मूल पुस्तिका में सामग्री तीन स्तरों पर बँटी है — सबसे ऊपर खण्ड (Volume), उसके भीतर भाग, और उसके भीतर अध्याय। नियम इन्हीं अध्यायों में क्रमवार चलते हैं।
| स्तर | विवरण |
|---|---|
| खण्ड | सबसे बड़ी इकाई। RSR दो खण्डों में प्रकाशित है — खण्ड I एवं खण्ड II |
| भाग | प्रत्येक खण्ड के भीतर की उप-इकाई। यह पृष्ठ खण्ड I के भाग 1 का है |
| अध्याय | प्रत्येक भाग के भीतर विषय-वार विभाजन। भाग 1 में दो अध्याय हैं |
| नियम | अध्यायों के भीतर क्रमवार, तथा उनके नीचे टिप्पणी, स्पष्टीकरण, निर्देशन एवं सरकार के निर्णय |
भाग 1 पूरे खण्ड I में सबसे छोटा है, किन्तु सबसे बुनियादी — इसके बिना आगे का कोई नियम पढ़ा नहीं जा सकता, क्योंकि दायरा और शब्दार्थ दोनों यहीं तय होते हैं।
| अध्याय | शीर्षक | नियम | यह क्या तय करता है |
|---|---|---|---|
| 1 | लागू होने की सीमा | 1 से 6 | संहिता की पहचान, दायरा, वित्त विभाग की भूमिका, शिथिलता, पुनर्विलोकन, प्रदत्तीकरण एवं व्याख्या |
| 2 | परिभाषाएँ | 7 | आगे के सभी नियमों में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों का अर्थ |
विषय से नियम खोजें
यदि आपको नियम संख्या नहीं, विषय पता है — तो नीचे की तालिका सीधे उसी हिस्से पर ले जाएगी।
| आप क्या खोज रहे हैं | कहाँ मिलेगा |
|---|---|
| क्या घर से दफ़्तर की यात्रा ड्यूटी है? | नियम 7(8) — कर्त्तव्य |
| निर्वाचन ड्यूटी में दुर्घटना — मुआवज़े का आधार | नियम 7(8) — 14.12.2012 का आदेश |
| जन्म तिथि में संशोधन कब तक माँगा जा सकता है | नियम 7(1) — आयु |
| जन्म तिथि ज्ञात न हो तो क्या मानी जाएगी | नियम 7(1) — टिप्पणी 1 |
| मंज़ूर किया गया फायदा वापस लेने से पहले सुनवाई | नियम 4ख — सरकार का निर्णय |
| पदाधिकार (लियन) क्या है | नियम 7(17) |
| प्रोबेशनर और प्रोबेशन-पर का अन्तर | नियम 7(30) — अंकेक्षण निर्देशन |
| परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी की अवधि | नियम 7(30क) |
| प्रशिक्षण कब कर्त्तव्य माना जाएगा | नियम 7(8) — निर्णय 3 |
| माह और दिन की गणना कैसे करें | नियम 7(20) — तीन दृष्टान्त |
| वेतन में क्या-क्या गिना जाता है | नियम 7(24) |
| प्रेक्टिस-बन्दी भत्ता किन प्रयोजनों में वेतन है | नियम 7(24) — टिप्पणी 3 |
| शुल्क और मानदेय में अन्तर | नियम 7(9) एवं 7(13) |
| 'अवकाश' में कौन-कौन से अवकाश आते हैं | नियम 7(15) |
| स्थायी, अस्थायी और सावधि पद का अन्तर | नियम 7(26), 7(35), 7(36) |
| राजपत्रित अधिकारी कौन होता है | नियम 7(10ए) |
| संविदा सेवा पेंशन में कैसे जुड़ेगी | नियम 2(iii)(ख) — 7% ब्याज |
| ये नियम किन पर लागू नहीं होते | नियम 2 — दूसरा परन्तुक |
| नियम में शिथिलता कैसे माँगी जाती है | नियम 4 — स्पष्टीकरण |
| वेतन/अवकाश/पेंशन पर कौन-सा नियम लागू होगा | नियम 4क |
| कोई फाइल वित्त विभाग को कब भेजी जाए | नियम 3 — सरकार का निर्देश |
पढ़ने का सुझाया क्रम
नियम 1 से शुरू करना सहज लगता है — पर व्यवहार में यह क्रम अधिक काम आता है :
- नियम 7 — परिभाषाएँ पर एक नज़र डाल लें। पूरा पढ़ने की ज़रूरत नहीं, बस देख लें कि कौन-से शब्द कहाँ परिभाषित हैं। आगे हर नियम इन्हीं शब्दों में लिखा है।
- नियम 2 — यह देखने के लिए कि आप स्वयं इन नियमों के दायरे में आते हैं या नहीं।
- नियम 1 एवं नियम 3 — संहिता की पहचान और वित्त विभाग की भूमिका।
- नियम 4, 4क, 4ख — जब कोई नियम आपके मामले में कठिनाई पैदा करे, या कोई पुराना आदेश बदलवाना हो, तो यहीं से रास्ता निकलता है।
- नियम 5 एवं 6 — किस अधिकारी के पास कौन-सी शक्ति है, और अर्थ पर विवाद हो तो कौन तय करेगा।
इन लेखों में क्या-क्या मिलेगा
हर लेख एक ही ढाँचे पर बना है, ताकि आप जानते रहें कि क्या कहाँ मिलेगा :
- मूल नियम का सम्पूर्ण पाठ — सभी खण्ड, उप-खण्ड एवं परन्तुक सहित, बिना काट-छाँट के
- टिप्पणी — नियम के नीचे दी गई आधिकारिक टिप्पणियाँ
- स्पष्टीकरण एवं निर्देशन — वित्त विभाग के परिपत्र एवं कार्यालय ज्ञापन
- राजस्थान सरकार के निर्णय — क्रम से, पूरे पाठ में
- पाद-टिप्पणियाँ — प्रत्येक संशोधन की आदेश संख्या एवं दिनांक
- व्याख्या — सरल भाषा में, व्यावहारिक उदाहरणों के साथ
- सारांश तालिका एवं प्रश्नोत्तर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संदर्भ
- राजस्थान सेवा नियम — वित्त विभाग, राजस्थान सरकार (PDF)
- भारतीय संविधान, अनुच्छेद 309 — Indian Kanoon
- वित्त विभाग, राजस्थान सरकार — आधिकारिक वेबसाइट
- राजस्थान सरकार — rajasthan.gov.in


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