राजस्थान सेवा नियम 1951 खण्ड I भाग 1 | अध्याय 1 लागू होने की सीमा एवं अध्याय 2 परिभाषाएँ

📅 रविवार, 26 जुलाई 2026 📖 पूरा लेख
राजस्थान सेवा नियम 1951 खण्ड I भाग 1 | अध्याय 1 लागू होने की सीमा एवं अध्याय 2 परिभाषाएँ
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राजस्थान सेवा नियम 1951 · खण्ड I · भाग 1
अध्याय 1 : लागू होने की सीमा एवं अध्याय 2 : परिभाषाएँ

नियम 1 से 7 तक — सम्पूर्ण मूल पाठ, टिप्पणियों, स्पष्टीकरणों, निर्देशनों एवं राजस्थान सरकार के निर्णयों सहित, संशोधन आदेश की संख्या एवं दिनांक के साथ

राजस्थान सेवा नियम दो खण्डों में प्रकाशित हैं — खण्ड I तथा खण्ड II। यह पृष्ठ खण्ड I के भाग 1 का सम्पूर्ण संग्रह है। इसमें दो अध्याय आते हैं — अध्याय 1 (लागू होने की सीमा) जिसमें नियम 1 से 6 तक हैं, और अध्याय 2 (परिभाषाएँ) जिसमें केवल नियम 7 है।

प्रत्येक लेख में पहले मूल नियम ज्यों-का-त्यों दिया गया है — फिर उससे जुड़ी टिप्पणियाँ, स्पष्टीकरण, निर्देशन और सरकार के निर्णय, और अन्त में सरल भाषा में व्याख्या। कोई सारांश नहीं, कोई नोट्स नहीं — पूरा पाठ।

✓ खण्ड I का भाग 1 पूर्ण — दोनों अध्यायों के सभी नियम (1, 2, 3, 4, 4क, 4ख, 5, 6 एवं 7) प्रकाशित हैं।
अध्याय 1 · लागू होने की सीमा
नियमविषय
1 संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ संहिता का नाम एवं 1 अप्रैल 1951 से प्रवृत्त होना; अवकाश पर रहे कर्मचारियों हेतु टिप्पणी
2 लागू होने की सीमा तीन श्रेणियाँ जिन पर लागू; नौ श्रेणियाँ अपवाद; संविदा सेवा की पेंशन गणना; सरकार के पाँच निर्णय
3 वित्त विभाग की सहमति लिया जाना परामर्श बिना शक्ति का प्रयोग या प्रत्यायोजन नहीं; भेजे जाने योग्य दो श्रेणियाँ; तीन अनिवार्य शर्तें
4 परिवर्तित या संशोधित करने की शक्ति शिथिलता की शक्ति; 16.7.1955 की अधिसूचना; प्रक्रिया के चार चरण; 1967–69 की काल्पनिक सेवा
4क नियमों में संशोधन करने का राज्यपाल का अन्तर्निहित अधिकार वेतन, अवकाश एवं पेंशन पर कौन-सा नियम कब लागू; पेंशन योग्यता पर भूतलक्षी प्रभाव की रोक
4ख पुनर्विलोकन (रिव्यू) करने की शक्ति 90 दिन की सीमा; पुनर्विलोकन के तीन आधार; फायदा प्रत्याहरण से पूर्व सुनवाई अनिवार्य
5 अधिकारों / शक्तियों का प्रदत्तीकरण प्रदत्तीकरण के दो अपवाद; लोपित नियम संख्याएँ; प्रदत्त शक्तियों का भूतलक्षी प्रयोग
6 व्याख्या व्याख्या का अधिकार राजस्थान के राज्यपाल के पास सुरक्षित
अध्याय 2 · परिभाषाएँ
नियमविषय
7 परिभाषाएँ आयु, शिक्षार्थी, संवर्ग, सक्षम प्राधिकारी, कर्त्तव्य, शुल्क, पदाधिकार, वेतन, अवकाश, परिवीक्षाधीन, स्थानापन्न सहित सभी परिभाषाएँ — लेख में परिभाषा-सूचकांक भी है
खण्ड I का भाग 1 यहीं समाप्त होता है। भाग 2, अध्याय 3 (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम 8 से प्रारम्भ होता है — वह तैयार होने पर उसका अपना संग्रह-पृष्ठ बनेगा।

RSR का ढाँचा — खण्ड, भाग एवं अध्याय

राजस्थान सेवा नियम की मूल पुस्तिका में सामग्री तीन स्तरों पर बँटी है — सबसे ऊपर खण्ड (Volume), उसके भीतर भाग, और उसके भीतर अध्याय। नियम इन्हीं अध्यायों में क्रमवार चलते हैं।

स्तरविवरण
खण्डसबसे बड़ी इकाई। RSR दो खण्डों में प्रकाशित है — खण्ड I एवं खण्ड II
भागप्रत्येक खण्ड के भीतर की उप-इकाई। यह पृष्ठ खण्ड I के भाग 1 का है
अध्यायप्रत्येक भाग के भीतर विषय-वार विभाजन। भाग 1 में दो अध्याय हैं
नियमअध्यायों के भीतर क्रमवार, तथा उनके नीचे टिप्पणी, स्पष्टीकरण, निर्देशन एवं सरकार के निर्णय

भाग 1 पूरे खण्ड I में सबसे छोटा है, किन्तु सबसे बुनियादी — इसके बिना आगे का कोई नियम पढ़ा नहीं जा सकता, क्योंकि दायरा और शब्दार्थ दोनों यहीं तय होते हैं।

अध्यायशीर्षकनियमयह क्या तय करता है
1लागू होने की सीमा1 से 6संहिता की पहचान, दायरा, वित्त विभाग की भूमिका, शिथिलता, पुनर्विलोकन, प्रदत्तीकरण एवं व्याख्या
2परिभाषाएँ7आगे के सभी नियमों में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों का अर्थ
ध्यान दें: कुछ स्रोतों में अध्याय 1 को "सामान्य परिचय" लिखा मिलता है, और RSR के प्रवृत्त होने की तारीख 23 मार्च 1951 बताई जाती है। दोनों ठीक नहीं हैं। मूल पुस्तिका की विषय-सूची में अध्याय 1 का शीर्षक "लागू होने की सीमा" है, और नियम 1 स्वयं कहता है कि ये नियम 1 अप्रैल 1951 से प्रवृत्त होंगे — 23 मार्च 1951 अधिसूचना जारी होने की तारीख है।

विषय से नियम खोजें

यदि आपको नियम संख्या नहीं, विषय पता है — तो नीचे की तालिका सीधे उसी हिस्से पर ले जाएगी।

आप क्या खोज रहे हैंकहाँ मिलेगा
क्या घर से दफ़्तर की यात्रा ड्यूटी है?नियम 7(8) — कर्त्तव्य
निर्वाचन ड्यूटी में दुर्घटना — मुआवज़े का आधारनियम 7(8) — 14.12.2012 का आदेश
जन्म तिथि में संशोधन कब तक माँगा जा सकता हैनियम 7(1) — आयु
जन्म तिथि ज्ञात न हो तो क्या मानी जाएगीनियम 7(1) — टिप्पणी 1
मंज़ूर किया गया फायदा वापस लेने से पहले सुनवाईनियम 4ख — सरकार का निर्णय
पदाधिकार (लियन) क्या हैनियम 7(17)
प्रोबेशनर और प्रोबेशन-पर का अन्तरनियम 7(30) — अंकेक्षण निर्देशन
परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी की अवधिनियम 7(30क)
प्रशिक्षण कब कर्त्तव्य माना जाएगानियम 7(8) — निर्णय 3
माह और दिन की गणना कैसे करेंनियम 7(20) — तीन दृष्टान्त
वेतन में क्या-क्या गिना जाता हैनियम 7(24)
प्रेक्टिस-बन्दी भत्ता किन प्रयोजनों में वेतन हैनियम 7(24) — टिप्पणी 3
शुल्क और मानदेय में अन्तरनियम 7(9) एवं 7(13)
'अवकाश' में कौन-कौन से अवकाश आते हैंनियम 7(15)
स्थायी, अस्थायी और सावधि पद का अन्तरनियम 7(26), 7(35), 7(36)
राजपत्रित अधिकारी कौन होता हैनियम 7(10ए)
संविदा सेवा पेंशन में कैसे जुड़ेगीनियम 2(iii)(ख) — 7% ब्याज
ये नियम किन पर लागू नहीं होतेनियम 2 — दूसरा परन्तुक
नियम में शिथिलता कैसे माँगी जाती हैनियम 4 — स्पष्टीकरण
वेतन/अवकाश/पेंशन पर कौन-सा नियम लागू होगानियम 4क
कोई फाइल वित्त विभाग को कब भेजी जाएनियम 3 — सरकार का निर्देश

पढ़ने का सुझाया क्रम

नियम 1 से शुरू करना सहज लगता है — पर व्यवहार में यह क्रम अधिक काम आता है :

  1. नियम 7 — परिभाषाएँ पर एक नज़र डाल लें। पूरा पढ़ने की ज़रूरत नहीं, बस देख लें कि कौन-से शब्द कहाँ परिभाषित हैं। आगे हर नियम इन्हीं शब्दों में लिखा है।
  2. नियम 2 — यह देखने के लिए कि आप स्वयं इन नियमों के दायरे में आते हैं या नहीं।
  3. नियम 1 एवं नियम 3 — संहिता की पहचान और वित्त विभाग की भूमिका।
  4. नियम 4, 4क, 4ख — जब कोई नियम आपके मामले में कठिनाई पैदा करे, या कोई पुराना आदेश बदलवाना हो, तो यहीं से रास्ता निकलता है।
  5. नियम 5 एवं 6 — किस अधिकारी के पास कौन-सी शक्ति है, और अर्थ पर विवाद हो तो कौन तय करेगा।
एक सुझाव: कोई भी नियम पढ़ते समय उसके नीचे दी गई पाद-टिप्पणियाँ ज़रूर देखें। उनमें उस संशोधन आदेश की संख्या और दिनांक होती है जिससे वह प्रावधान जुड़ा या बदला। विभागीय पत्रावली या न्यायालय में यही सन्दर्भ काम आता है — केवल नियम का पाठ पर्याप्त नहीं होता।

इन लेखों में क्या-क्या मिलेगा

हर लेख एक ही ढाँचे पर बना है, ताकि आप जानते रहें कि क्या कहाँ मिलेगा :

  • मूल नियम का सम्पूर्ण पाठ — सभी खण्ड, उप-खण्ड एवं परन्तुक सहित, बिना काट-छाँट के
  • टिप्पणी — नियम के नीचे दी गई आधिकारिक टिप्पणियाँ
  • स्पष्टीकरण एवं निर्देशन — वित्त विभाग के परिपत्र एवं कार्यालय ज्ञापन
  • राजस्थान सरकार के निर्णय — क्रम से, पूरे पाठ में
  • पाद-टिप्पणियाँ — प्रत्येक संशोधन की आदेश संख्या एवं दिनांक
  • व्याख्या — सरल भाषा में, व्यावहारिक उदाहरणों के साथ
  • सारांश तालिका एवं प्रश्नोत्तर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: राजस्थान सेवा नियम के खण्ड I भाग 1 में कौन-कौन से अध्याय हैं?
दो अध्याय। अध्याय 1 — लागू होने की सीमा, जिसमें नियम 1, 2, 3, 4, 4क, 4ख, 5 एवं 6 हैं। अध्याय 2 — परिभाषाएँ, जिसमें केवल नियम 7 है। खण्ड I का भाग 1 यहीं समाप्त हो जाता है; भाग 2 अध्याय 3 (सेवा की सामान्य शर्तें) से नियम 8 के साथ प्रारम्भ होता है।
प्रश्न 2: अध्याय 1 का आधिकारिक नाम क्या है?
लागू होने की सीमा। कुछ स्थानों पर इसे "सामान्य परिचय" लिखा मिलता है, किन्तु वित्त विभाग द्वारा प्रकाशित मूल नियम-पुस्तिका की विषय-सूची में अध्याय 1 का शीर्षक "लागू होने की सीमा" ही है।
प्रश्न 3: राजस्थान सेवा नियम कब से प्रवृत्त हुए?
1 अप्रैल 1951 से। 23 मार्च 1951 अधिसूचना जारी होने की तारीख है, प्रवृत्त होने की नहीं। नियम 1 में स्पष्ट लिखा है कि ये नियम 1 अप्रैल 1951 से प्रवृत्त होंगे।
प्रश्न 4: किसी शब्द का अर्थ RSR में कहाँ मिलेगा?
नियम 7 में, जो अध्याय 2 का एकमात्र नियम है। इसमें आयु, कर्त्तव्य, वेतन, अवकाश, पदाधिकार, संवर्ग, स्थानापन्न, परिवीक्षाधीन सहित सभी तकनीकी शब्दों की परिभाषाएँ दी गई हैं। उस लेख में ऊपर एक परिभाषा-सूचकांक भी है, जहाँ से सीधे अपनी परिभाषा पर पहुँचा जा सकता है।
प्रश्न 5: नियम 4क और 4ख अलग लेख में क्यों नहीं हैं?
क्योंकि तीनों एक ही विषय के विस्तार हैं — नियमों में शिथिलता, संशोधन और पुनर्विलोकन की शक्ति। अलग करने पर पाठक को तीन जगह जाना पड़ता और सन्दर्भ टूटता। उस लेख में तीनों भाग अलग-अलग शीर्षक-पट्टियों से चिह्नित हैं और सूचकांक से सीधे पहुँचा जा सकता है।
प्रश्न 6: क्या इन लेखों में मूल नियम का पूरा पाठ दिया गया है?
हाँ। प्रत्येक लेख में पहले मूल नियम का सम्पूर्ण पाठ दिया गया है, उसके बाद उससे जुड़ी टिप्पणियाँ, स्पष्टीकरण, निर्देशन तथा राजस्थान सरकार के निर्णय — संशोधन आदेश की संख्या एवं दिनांक सहित।
प्रश्न 7: क्या यह सामग्री विधिक कार्यवाही में प्रयोग की जा सकती है?
यह सामग्री अध्ययन एवं सन्दर्भ हेतु है। किसी भी विधिक अथवा प्रशासनिक कार्यवाही में वित्त विभाग द्वारा प्रकाशित मूल नियम-पुस्तिका तथा नवीनतम संशोधन ही प्रामाणिक होंगे। प्रत्येक लेख में आदेश संख्या एवं दिनांक इसीलिए दिये गये हैं, ताकि आप मूल आदेश तक पहुँच सकें।

संदर्भ

✍️ लेखक: सुरेंद्र सिंह चौहान
पूर्व शिक्षा अधिकारी, राजस्थान · 1991–2025 · शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्रशासन · परिचय
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