नियम 8 एवं 8क : परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी तथा प्रथम नियुक्ति के समय आयु
विषय-सूची
- नियम 8 — मूल पाठ
- टिप्पणी — भर्ती प्रक्रिया के छह मामले
- परन्तुक — MBBS चिकित्सा अधिकारी
- परन्तुक — उच्चतर पद पर एक वर्ष की परिवीक्षा
- ज्ञापन 16.3.2015 — वेतन संरक्षण
- नियम 8क — मूल पाठ एवं अपवाद
- आयु से जुड़े निर्णय (1, 2, 3, 4, 13)
- निर्णय 5 — नाम एवं उपनाम परिवर्तन
- अधिक आयु की नियुक्तियाँ (निर्णय 6, 7, 8, 10, 11, 14, 15, 16)
- जन्म तिथि से जुड़े निर्णय (9, 12, 17)
- राजस्थान सरकार का निर्देश — अनुशासनात्मक कार्यवाही
- व्याख्या — सरल भाषा में
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- संदर्भ
किसी नियम में किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, सरकारी सेवा में 20.1.2006 को या इसके पश्चात् की सभी नियुक्तियाँ 2 वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी के रूप में की जायेंगी, और परिवीक्षा प्रशिक्षण की अवधि के दौरान उसको ऐसी दरों पर नियत पारिश्रमिक संदत्त किया जायेगा जो समय-समय पर सरकार द्वारा विहित की जायें।
परिवीक्षा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने के पश्चात् उसको पद के वेतनमान में न्यूनतम वेतन अनुज्ञात किया जायेगा, और परिवीक्षा प्रशिक्षण की अवधि को वार्षिक वेतन वृद्धि की स्वीकृति के लिए नहीं गिना जायेगा।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(2) विवि/नियम/2006, दिनांक 13.3.2006 द्वारा अन्तःस्थापित किया गया, 20.1.2006 से प्रभावी।
टिप्पणी — जहाँ भर्ती की प्रक्रिया पहले ही प्रारंभ हो चुकी हो
उन मामलों में, जिनमें भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ हो गयी है, रा.लो.से.आ. / भर्ती प्राधिकारी द्वारा निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जायेगा :
(i) जहाँ भर्ती का अनुरोध पहले ही रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी को जा चुका है किन्तु रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी को अभी विज्ञापन जारी करना है या आवेदन करने की अंतिम तारीख अभी नहीं निकली है — प्रशासनिक विभाग रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी को यह सुनिश्चित करने का अनुरोध कर सकेगा कि विज्ञापन संशोधन के अनुसार जारी किया जाये। उन मामलों में जिनमें विज्ञापन जारी कर दिया गया है किन्तु आवेदन करने की अंतिम तारीख अभी नहीं निकली है — ऐसे मामलों में रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी दोनों को, विज्ञापन और पत्रों द्वारा, आवेदकों को संशोधित नियम के बारे में सूचना देनी चाहिए और उसको प्रस्तावित परीक्षा से पूर्ण प्रतिदाय (आवेदन फीस का प्रतिदाय) आधार पर, प्रत्याहरण का विकल्प प्रस्थापित करना चाहिए, यदि वह ऐसा चाहे।
(ii) उस मामले में, जहाँ भर्ती का अनुरोध रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी को जा चुका है और विज्ञापन भी जारी किया जा चुका है, और अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन करने की अंतिम तारीख निकल चुकी है — ऐसे मामलों में रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी दोनों को, विज्ञापन और पत्रों द्वारा, आवेदकों को संशोधित नियम के बारे में सूचना देनी चाहिए और उसको प्रस्तावित परीक्षा से, पूर्ण प्रतिदाय (आवेदन फीस का प्रतिदाय) आधार पर, प्रत्याहरण का विकल्प प्रस्थापित करना चाहिए, यदि वह ऐसा चाहे।
(iii) जहाँ रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी ने लिखित परीक्षा पहले ही ले ली हो किन्तु साक्षात्कार नहीं किये हों — रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी को साक्षात्कार देने वालों को परिवर्तित नियमों के बारे में लिखित सूचना देनी चाहिए और स्वयं के साक्षात्कार से पूर्व, पद के अभ्यर्थी बने रहने के लिए उपसंजात होने की अपनी इच्छा की लिखित स्वीकृति प्राप्त करनी चाहिए।
(iv) जहाँ रा.लो.से.आ./भर्ती प्राधिकारी ने साक्षात्कार कर लिया है और नियुक्ति प्राधिकारी को सिफारिशें कर दी हैं — नियुक्ति पत्र जारी करने से पूर्व, नियुक्ति प्राधिकारी को अभ्यर्थियों को परिवर्तित नियमों के बारे में सूचित करना चाहिए और अंतिम नियुक्ति पत्र जारी करने से पूर्व, नये नियमों के अधीन नियुक्त किये जाने के लिए उसकी सहमति प्राप्त करनी चाहिए।
(v) जहाँ नियुक्ति-पत्र पहले ही जारी (कार्मिक विभाग की अधिसूचना दिनांक 20.01.2006 के जारी होने से पूर्व) किये जा चुके हों — वहाँ नियुक्तियाँ पुराने नियमों के अधीन की जानी होंगी।
(vi) जहाँ भर्ती की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो गयी थी और नियुक्ति पत्र, न्यायालय के रोक-आदेशों के कारण या किसी भी अन्य न्यायोचित कारणों से कुछ चयनीत अभ्यर्थियों को छोड़कर 20.1.2006 से पूर्व जारी कर दिये गये थे — वहाँ ऐसे शेष चयनीत अभ्यर्थी 20.1.2006 से पूर्व प्रवृत्त विभिन्न नियमों के उपबंधों द्वारा शासित होंगे।
उप-खण्ड (vi) — अधिसूचना सं. एफ. 1(2) विवि (नियम)/2006, दिनांक 13.2.2007 द्वारा अन्तःस्थापित, 20.1.2006 से प्रभावी।
परन्तुक — MBBS चिकित्सा अधिकारियों हेतु एक वर्ष
परन्तु राजस्थान चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा के चिकित्सा अधिकारी, राजस्थान चिकित्सा सेवा (महाविद्यालय शाखा) के वरिष्ठ निदर्शक एवं सहायक आचार्य के मामले में — जिनके पास एमबीबीएस की उपाधि है और जिन्होंने एक वर्ष की इन्टर्नशिप की है — परिवीक्षा प्रशिक्षण की अवधि दो वर्ष के बजाय एक वर्ष होगी।
अधिसूचना सं. एफ. 1(2) वित्त/नियम/2006, दिनांक 3.7.2014 द्वारा प्रतिस्थापित, तुरन्त प्रभाव से प्रवृत्त।
राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 8 का परन्तुक समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 03.07.2014 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है, जिसमें ऐसे वरिष्ठ निदर्शक और सहायक आचार्य की परिवीक्षाधीन प्रशिक्षण की अवधि — जिनके पास एमबीबीएस की उपाधि है और जिन्होंने एक वर्ष की इन्टर्नशिप की है — दो वर्ष के बजाय घटाकर एक वर्ष की गयी है।
ऐसे वरिष्ठ निदर्शक और राजस्थान चिकित्सा सेवा (महाविद्यालय शाखा) के सहायक आचार्य के बारे में, जिन्होंने परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु के रूप में 03.07.2014 को एक वर्ष या उससे अधिक पूरा कर लिया है किन्तु परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु के रूप में दो वर्ष पूरे नहीं किये हैं, कुछ स्पष्टीकरण चाहे गये हैं।
मामले की परीक्षा की गयी है और यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसे मामलों में परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु अवधि 03.07.2014 अर्थात् अधिसूचना की तारीख को पूरी की हुई समझी जायेगी।
परन्तुक — उच्चतर पद पर एक वर्ष की परिवीक्षा
परन्तु यह और कि सरकार वहाँ राज्य सेवा के प्रवेश पद से उच्चतर पद विनिर्दिष्ट कर सकेगी जहाँ सीधी भर्ती सुसंगत राज्य सेवा नियमों के उपबंधों के अनुसार अनुज्ञेय है और जहाँ शैक्षिक और वृत्तिक अर्हताओं के अलावा विनिर्दिष्ट अनुभव शर्त भी विहित की जाती है — जिस पर नियुक्ति 'परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु' के स्थान पर एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए 'परिवीक्षा' पर की जायेगी।
अधिसूचना सं. एफ. 12(6) वित्त/नियम/2005, दिनांक 23.9.2014 द्वारा अन्तःस्थापित, तुरन्त प्रभाव से प्रवृत्त।
ज्ञापन संख्या एफ. 12(6) वित्त/नियम/2005 पार्ट-II, दिनांक 16.3.2015
अधोहस्ताक्षरी को राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 8 में वित्त विभाग की अधिसूचना सं. 12(6) एफडी/रूल्स/2005 दिनांक 23.9.2014 द्वारा किये गये संशोधन की ओर ध्यान आकृष्ट करने का निदेश प्राप्त हुआ है। संशोधित उपबंधों के अनुसार राज्य सेवा के प्रविष्टि पद की अपेक्षा उच्चतर पद पर जहाँ सीधी भर्ती सुसंगत राज्य सेवा नियमों के उपबंधों के अनुसार की जाती है और जहाँ शैक्षिक और वृत्तिक अर्हताओं के अतिरिक्त विनिर्दिष्ट अनुभव शर्त भी विहित है, जिस पर नियुक्ति 23.09.2014 को या उसके पश्चात् 2 वर्ष के लिए "परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु" के बजाय "परिवीक्षाधीन" के रूप में एक वर्ष के लिए की जाती है।
राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतनमान) नियम, 2008 के नियम 22 में — सरकारी सेवकों और ऐसे व्यक्तियों के, जो केन्द्रीय सरकार / अन्य राज्य सरकारों, जिनमें भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों की संस्थाएं सम्मिलित हैं, की नियमित सेवा में पहले से हैं और जो राज्य सेवा के प्रारंभिक पद की अपेक्षा उच्चतर पद पर ऊपर पैरा में निर्दिष्ट उपबंध के अनुसार सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त किये गये हैं — वेतन स्थिरीकरण और वेतन के संरक्षण के लिए वित्त विभाग की अधिसूचना सं. 12(6) एफडी/रूल्स/2005 दिनांक 23.09.2014 द्वारा नये परंतुक अन्तःस्थापित किये गये हैं, जो 23.09.2014 से प्रभावी हैं।
कुछ विभागों ने ऐसे सरकारी सेवकों पर — जिन्हें राज्य सेवा के प्रारंभिक पद की अपेक्षा उच्चतर पद पर सीधी भर्ती द्वारा 23.09.2014 के पूर्व परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु के रूप में नियुक्त किया गया था किन्तु जिन्होंने अधिसूचना जारी होने की तारीख अर्थात् 23.09.2014 को परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु की कालावधि पूरी नहीं की है — उपबंधों के लागू होने के संबंध में स्पष्टीकरण के लिए मुद्दे उठाये हैं।
मामले की परीक्षा की गयी है और यह स्पष्ट किया जाता है कि :—
(i) ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 23.09.2014 के जारी होने के पूर्व राज्य सेवा के प्रारंभिक पद की अपेक्षा सीधी भर्ती द्वारा उच्चतर पद पर 'परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु' के रूप में नियुक्त किया गया था — 23.09.2014 से एक वर्ष के लिए "परिवीक्षाधीन" के रूप में माना जायेगा, बशर्ते संबंधित कर्मचारी को कोई आपत्ति नहीं हो।
(ii) ऐसे "परिवीक्षाधीनों" को वेतन वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 12(6)/एफडी/रूल्स/2005 के उपबंधों के अनुसार 23.09.2014 से अनुज्ञेय होगा।
(iii) ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें "परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु" के रूप में 23.09.2014 के पूर्व नियुक्त किया गया है और जिन्होंने 23.09.2014 को "परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु" की कालावधि पूरी नहीं की है, और जो राज्य सरकार / केन्द्रीय सरकार / अन्य राज्य सरकारों (जिनमें भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों की संस्थाएं सम्मिलित हैं) की नियमित सेवा में थे और जो राज्य सेवा के प्रारंभिक पदों की अपेक्षा सीधी भर्ती द्वारा उच्चतर पद पर सुसंगत राज्य सेवा के उपबंधों के अनुसार नियुक्त किये गये हैं और जहाँ शैक्षिक और वृत्तिक अर्हताओं के अतिरिक्त विनिर्दिष्ट अनुभव शर्त भी विहित है — परिवीक्षाधीन के रूप में नियुक्ति पर यथा आहरित अंतिम वेतन के संरक्षण के उपबंध वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 12(6) एफडी/रूल्स/2005 दिनांक 23.09.2014 के अनुसार अनुज्ञेय होंगे।
(1) जब तक किसी पद या पदों की श्रेणी पर नियुक्ति से सम्बन्धित सेवा नियम में अथवा इस सम्बन्धी आज्ञाओं में अन्यथा कुछ अंकित नहीं किया गया हो, तो राज्य सेवा में प्रविष्ट होने की न्यूनतम एवं अधिकतम आयु सीमा क्रमशः 16 वर्ष एवं 40 वर्ष होगी।
नियम 8क — आदेश सं. एफ. 7क(29) वि.वि. क (नियम)/60, दिनांक 6.5.1961 द्वारा प्रतिस्थापित; अधिसूचना सं. एफ. 1(2) विवि/नियम/2006, दिनांक 13.3.2006 द्वारा पुनःसंख्यांकित, 20.1.2006 से प्रभावी।
उप-नियम (1) — अधिसूचना सं. एफ. 1(27) वि.वि./ग्रुप-2/78, दिनांक 24.1.1979 द्वारा उप-नियम (1) के रूप में पुनर्संख्यांकित।
"40 वर्ष" — अधिसूचना सं. एफ. 1(5) वि.वि./नियम/2016, दिनांक 13.3.2018 द्वारा "35 वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित, तुरन्त प्रवृत्त। ("35 वर्ष" स्वयं अधिसूचना सं. एफ. 1(6) वि.वि./नियम/98, दिनांक 24.5.2004 द्वारा "33 वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित था।)
1. अल्प वयस्कों अथवा ऐसे व्यक्तियों को जो 18 वर्ष की आयु के नहीं हों, ऐसे पदों पर नियुक्त नहीं करना चाहिये जिनके लिए प्रतिभूति (Security) लिया जाना आवश्यक हो।
2. किसी विशेष पद/सेवा पर नियुक्ति सम्बन्धी नियमों में जब तक अन्यथा उल्लेख नहीं हो, महिलाओं के लिए राजकीय सेवा में प्रवेश पाने की अधिकतम आयु 42 वर्ष होगी।
3. जो 1.1.1999 के पश्चात् अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे, वे दो वर्ष अर्थात् 24.5.2004 से 23.5.2006 तक राजकीय सेवा में भर्ती के पात्र होंगे।
"42 वर्ष" — अधिसूचना सं. एफ. 1(6) वि.वि./नियम/98, दिनांक 24.5.2004 द्वारा "40 वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
अपवाद 3 — अधिसूचना सं. एफ. 1(6) वि.वि./नियम/98, दिनांक 24.5.2004 द्वारा अन्तःस्थापित।
राजस्थान सरकार के निर्णय — आयु से सम्बन्धित
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को राज्य सरकार के नियंत्रण में आने वाले विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित आयु की अधिकतम सीमा में 5 वर्ष की छूट (शिथिलता) दी जायेगी।
आदेश सं. डी. 5403/एफ. 1(103) वि.वि./नियम/56, दिनांक 14.11.1956 द्वारा अन्तःस्थापित।
जागीरदारों (जागीरदारों के पुत्रों सहित) के मामले में, जिनके पास जीवन निर्वाह के लिए कोई जागीर नहीं रह गयी थी, जो जागीरों के पुनर्ग्रहण के बाद अन्य बातों में उनके उपयुक्त पाये जाने पर राजकीय सेवा में लिये गये हों — उनकी आयु 40 वर्ष तक मानी जा सकती है। यह रियायत पाँच वर्ष की अवधि तक रहेगी। इस रियायत को 31.12.1963 तक बढ़ाया जा सकेगा।
आदेश सं. डी. 8215/एफ. 1(149) वि.वि./नियम/56, दिनांक 14.12.1956 द्वारा अन्तःस्थापित; बढ़ाया गया — आदेश सं. एफ. 1(20) वि.वि.(क) नियम/61, दिनांक 19.7.1962 द्वारा।
अधिक आयु के व्यक्तियों की नियुक्ति के अवसरों को न्यूनतम करने की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है कि नई नियुक्ति के सभी आदेशों में कर्मचारी की जन्म तारीख का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
सं. 1647/58/एफ. 1ए(12) वि.वि.(क) नियम/57, दिनांक 15.5.1958 द्वारा जोड़ा गया।
यह आज्ञा दी जाती है कि राजस्थान सरकार के नियन्त्रण में विभिन्न पदों पर, भारतीय सेनाओं के आरक्षित (रिजर्विस्ट) जवानों की नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 50 वर्ष होगी।
आदेश सं. एफ. 7क(29) वि.वि.-क (नियम)/60, दिनांक 31.3.1961 द्वारा अन्तःस्थापित किया गया।
राज्यपाल महोदय ने देवस्थान विभाग के पुजारियों के पद पर नियुक्ति की अधिकतम आयु 35 वर्ष करने का आदेश दिया है।
वित्त विभाग के आदेश सं. एफ. 1(42) विवि (नियम)/71, दिनांक 9.7.1971 द्वारा अन्तःस्थापित।
निर्णय 5 — नाम एवं उपनाम परिवर्तन की प्रक्रिया
राज्य कर्मचारी के नाम में परिवर्तन करने के सम्बन्ध में कोई निश्चित प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। इस प्रश्न पर विचार कर यह निर्णय लिया गया कि राज्य कर्मचारी जो नया नाम रखना चाहता है अथवा अपने वर्तमान नाम में कोई परिवर्तन/संशोधन करना चाहता है, तो अपने वर्तमान नाम में परिवर्तन करने का एक बन्ध-पत्र भरकर उसे औपचारिक रूप से परिवर्तन करना चाहिए।
बन्ध-पत्र आदि के भरने में कोई सन्देह न रहे, इसके लिए यह वांछनीय है कि वह साक्षियों द्वारा — विशेष रूप से उन व्यक्तियों द्वारा जो उस कार्यालयाध्यक्ष की जानकारी में हों, जिसमें वह कर्मचारी सेवा कर रहा है — प्रमाणित होना चाहिये। बन्ध-पत्र के प्रपत्र का एक प्रारूप नीचे दिया गया है।
बन्ध-पत्र का प्रकाशन किसी लोकप्रिय स्थानीय समाचार पत्र तथा राजपत्र में किया जायेगा। दोनों मामलों में कर्मचारी द्वारा प्रकाशन अपने स्वयं के व्यय पर कराया जायेगा। राजस्थान राजपत्र में विज्ञापन के प्रकाशन के लिये कर्मचारी को राजकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, जयपुर के अधीक्षक से सम्पर्क करने को कहा जायेगा।
उपर्युक्त अनुच्छेद में वर्णित औपचारिकताओं की अनुपालना के पश्चात्, तथा कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत की गई साक्षियों की सन्तोषजनक साक्ष्य (एवीडेन्स) एवं बन्ध-पत्र आदि का निष्पादन होने के पश्चात् ही नया नाम रखने या वर्तमान नाम में परिवर्तन करने की शासकीय स्वीकृति दी जायेगी, तथा सरकारी अभिलेखों में तदनुसार प्रविष्टियों में आवश्यक संशोधन किया जायेगा। सम्बन्धित बन्ध-पत्र आदि की सही प्रतिलिपियाँ कर्मचारी की व्यक्तिगत-पत्रावली में रखी जायेंगी तथा महालेखाकार को भी सूचित कर दिया जायेगा।
ज्ञापन सं. एफ. 1(12) वि.वि./(व्यय नियम)/67, दिनांक 10.4.1967 द्वारा अन्तःस्थापित किया गया।
नाम / उपनाम परिवर्तन करने का बन्ध-पत्र
इस बन्ध-पत्र द्वारा मैं, निम्न हस्ताक्षरकर्त्ता क.ख.ग. (नया नाम), जो अभी इससे पूर्व क.ग. (पुराना नाम) कहलाता था, एवं जो …………… (सम्बन्धित कर्मचारी द्वारा उस समय धारित किये गये पद का नाम) के रूप में …………… (स्थान) जहाँ सरकार के विभाग में नियुक्त हो, पर नियुक्त था — एतद् द्वारा :—
1. मैं स्वयं तथा मेरी पत्नी, सन्तान तथा दूसरे की सन्तान जो पूर्णतया मेरे पर आश्रित है, मेरे पूर्व नाम क.ग. / उपनाम ग (केवल) को त्यागता हूँ तथा उसके स्थान पर उसी तारीख से नया नाम / नया उपनाम क.ख.ग. ग्रहण करता हूँ; एवं इसलिए मैं, मेरी पत्नी, सन्तान तथा दूसरों की सन्तान इसके पश्चात् मेरे पूर्व के उपनाम ख.ग. से नहीं जाने जायें तथा नहीं पहचाने जायें, अपितु ग्रहण किये गये उपनाम द्वारा जाने जायें।
2. मेरे उक्त निर्णय की साक्षता के लिए घोषणा करता हूँ कि मैं एतद् पश्चात् सभी समय निजी एवं अथवा सार्वजनिक सभी अभिलेखों में, बन्ध-पत्र एवं प्रलेखों एवं समस्त कार्यवाहियों/व्यवहारों एवं लेन-देनों तथा सभी अवसरों पर अपने पूर्व नाम क.ख.ग. तथा उपनाम ख.ग. के स्थान पर एवं उसके परिवर्तन में क.ग. नाम के रूप में तथा ग (केवल) उपनाम के रूप में प्रयुक्त करूँगा तथा हस्ताक्षर करूँगा।
3. स्पष्टतः एतद् द्वारा सभी समय सभी व्यक्तियों को मुझे, मेरी पत्नी, मेरी सन्तान तथा दूसरों की सन्तान को तदनुसार नया रखा गया नाम क.ख.ग. उपनाम ख.ग. के नाम से सम्बोधित करने के लिये प्राधिकृत करता हूँ तथा उसके लिये निवेदन करता हूँ।
इसकी साक्षी में मैंने अपने पूर्व नाम क.ग. एवं नया नाम क.ख.ग. का वर्णन किया तथा दिनांक …………… को अपने हस्ताक्षर किये हैं।
क.ख.ग. के हस्ताक्षर · पूर्वनाम द्वारा निम्नलिखित की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गये : (1) …………… (2) ……………
सरकारी कर्मचारियों के नाम के परिवर्तन की प्रक्रिया वित्त विभाग के ज्ञापन सं. एफ. 1(12) एफडी(ईआर)/67 दिनांक 10.04.1967 द्वारा अधिकथित की गयी है। वैवाहिक स्थिति के कारण महिला सरकारी कर्मचारी के उपनाम के परिवर्तन की प्रक्रिया के सरलीकरण के बारे में मामले की परीक्षा की गयी है और यह विनिश्चय किया गया है कि किसी महिला सरकारी कर्मचारी के उपनाम के परिवर्धन / परिवर्तन / हटाने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाये :—
I. किसी महिला सरकारी कर्मचारी के विवाह / पुनर्विवाह के कारण केवल उपनाम में परिवर्धन / परिवर्तन :
इस प्रयोजनार्थ निम्नलिखित अध्यपेक्षाओं की पूर्ति की जाये :—
- (i) यदि कोई सरकारी कर्मचारी परिवर्तन करना चाहती है तो उसे अपने नियुक्ति प्राधिकारी को अपने विवाह की औपचारिक सूचना देनी चाहिए और अपने उपनाम में परिवर्तन के लिए अनुरोध करना चाहिए।
- (ii) सेवा पुस्तिका में आवश्यक प्रविष्टियाँ करने के लिए पति की विशिष्टियाँ दी जाये।
II. महिला सरकारी कर्मचारी के तलाक / विवाह विच्छेद या पति की मृत्यु पर उपनाम को हटाना या विवाह से पहले के उपनाम का प्रत्यावर्तन :
- (i) वैवाहिक स्थिति में परिवर्तन के बारे में नियुक्ति प्राधिकारी को सूचना, और
- (ii) अपने विवाह से पहले के उपनाम के प्रत्यावर्तन के लिए औपचारिक अनुरोध।
उक्त मद I और II के लिए कोई विहित प्ररूप नहीं है। महिला सरकारी कर्मचारी के उपनाम के परिवर्तन / हटाये जाने की अनुज्ञा नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा दी जायेगी।
अधिक आयु की नियुक्तियों से जुड़े निर्णय
महालेखाकार राजस्थान ने सूचित किया है कि 7.4.1949 से 5.5.1961 के दौरान की गयी अधिक आयु की नियुक्तियों को नियमित करने के अभाव में सेवानिवृत्ति के प्रकरणों को अन्तिम रूप से निपटाने में पर्याप्त विलम्ब हो जाता है।
मामले पर विचार किया गया है और यह आज्ञा दी जाती है कि — क्योंकि नियुक्ति प्राधिकारी नियम एवं आज्ञाओं से परिचित नहीं थे एवं राजस्थान राज्य के पुनर्गठन के पूर्व सेवाओं के विलीनीकरण की प्रक्रिया में नियमों की अज्ञानता के कारण उनके द्वारा अधिक आयु पर नियुक्तियाँ की गई थीं — अतः दिनांक 7 अप्रेल 1949 से दिनांक 31 मार्च 1953 तक, जबकि विलीनीकरण का बहुत-सा कार्य हो चुका था, की अवधि में अधिक आयु पर की गई नियुक्तियों को इस आज्ञा के अधीन सरकार की स्वीकृति प्राप्त की हुई मानी जायेगी।
दिनांक 31 मार्च 1953 के बाद से दिनांक 5 मई 1961 तक अधिक आयु पर की गई सभी नियुक्तियों के मामलों में — कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने की प्रतीक्षा किये बिना ही सक्षम-प्राधिकारी द्वारा जाँच की जानी चाहिए, तथा ऐसे समस्त मामलों को सरकार के पास (प्रशासनिक विभागों को) नियमित करने हेतु, अधिक आयु पर नियुक्ति करने के कारण एवं औचित्यों का स्पष्टीकरण करते हुए, भेजे जाने चाहिए। ऐसे मामलों में जहाँ प्रशासनिक विभाग इस बात से सन्तुष्ट हो कि अधिक आयु की नियुक्ति न्यायोचित थी, तो वह विभाग ऐसी नियुक्ति को नियमित करने के लिए वित्त विभाग की सहमति प्राप्त करेगा।
वित्त विभाग के आदेश सं. एफ. 1(78) विवि (व्यय नियम)/62-I, दिनांक 29.4.1967 द्वारा अन्तःस्थापित किया गया।
वित्त विभाग में समय-समय पर विघटित जिला बोर्डों के कर्मचारियों के मामले प्रस्तुत किये जाते हैं जिनमें उनकी अधिक आयु (overage) में की गई नियुक्ति को नियमित करने हेतु वित्त विभाग की स्वीकृति मांगी जाती है। चूँकि अधिक आयु में नियुक्ति अविघटित जिला बोर्डों द्वारा की गई थी और वे विघटित हो चुके हैं, अतः ऐसी अधिक आयु की नियुक्तियों के कारण मालूम करना संभव प्रतीत नहीं होता है।
इस मामले पर विचार करने के उपरान्त आदेश दिया जाता है कि ऐसे समस्त मामलों को, जिनमें कि जिला बोर्डों के कर्मचारियों की अधिक आयु में नियुक्ति हुई और जिन्हें जिला बोर्डों के विघटित हो जाने के कारण राज्य सेवा में लिया गया — इनकी नियुक्ति नियमित मानी जावे।
वित्त विभाग की एफ. 1(13) वि.वि. (नियम)/68, दिनांक 21.5.1968 द्वारा अन्तःस्थापित किया गया।
प्रायः ऐसा देखने में आता है कि विभिन्न नियुक्ति अधिकारियों द्वारा राजस्थान सेवा नियमों में अंकित सीमा से अधिक के व्यक्तियों/महिलाओं की नियुक्ति कर ली जाती है और इसके पश्चात् ऐसी अनियमित नियुक्तियों को नियमित करने के लिए राज्य सरकार को लिखा जाता है।
इस समस्या का समाधान करने हेतु निर्देश दिए जाते हैं कि भविष्य में नये नियुक्त कर्मचारियों के प्रथम वेतन के बिल के साथ नियुक्ति आज्ञा पत्र कोषाधिकारी देखेंगे व यह ध्यान में रखेंगे कि उक्त नियुक्ति आज्ञा पत्र में कर्मचारी की जन्म तिथि अंकित है। यदि जन्म तिथि के अनुसार उक्त कर्मचारी की नियुक्ति अनियमित है व सेवा में रखने योग्य आयु से बाहर है, तो उसका वेतन पारित नहीं किया जावेगा। ऐसे कर्मचारी राज्य सेवा में नहीं रह सकेंगे तथा उनका चढ़ा हुआ वेतन का भुगतान नियुक्ति अधिकारी स्वयं अपने द्वारा करेंगे।
यह निर्देश उन कर्मचारियों की नियुक्ति के सम्बन्ध में लागू नहीं होंगे जिनकी नियुक्ति लोक सेवा आयोग द्वारा या सम्बन्धित सेवा नियमों के अन्तर्गत अधिक आयु में की गई हो।
विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ समस्त नियुक्तिकर्ता अधिकारियों को कृपया सूचित कर दें कि निर्धारित आयु से अधिक आयु के व्यक्तियों की नियुक्ति भविष्य में नहीं की जावे। यदि निर्धारित आयु सीमा से अधिक आयु में नियुक्ति सम्बन्धित सेवा नियमों के अन्तर्गत की गई है तो इसका उल्लेख स्पष्ट रूप से नियुक्ति आज्ञा-पत्र में किया जावेगा, ताकि जिला कोषाधिकारी को वेतन बिल पारित करने या न करने में कठिनाई नहीं हो।
वित्त विभाग की एफ. 1(16) वि.वि. (नियम)/68, दिनांक 16.7.1968 द्वारा अन्तःस्थापित; परिपत्र सं. एफ. 1(16) विवि (नियम)/68, दिनांक 21.9.1968।
राजस्थान सेवा नियम 8 के प्रावधानों के अनुसार राजकीय सेवा में प्रविष्टि की न्यूनतम एवं अधिकतम आयु 16 वर्ष एवं 25 वर्ष है। कर्मचारियों की कम आयु में की गई नियुक्तियों को नियमित करने के मामले सरकार के ध्यान में लाये गये हैं। ये नियुक्तियाँ राजस्थान में विलीन हुए देशी राज्यों की सरकारों अथवा राजस्थान के पुनर्गठन के पूर्व के राज्यों द्वारा की गई थी।
मामले पर विचार कर यह आदेश दिया जाता है कि राज्य में विलीन हुए देशी-राज्यों अथवा राजस्थान के पुनर्गठन से पूर्व के राज्यों द्वारा कम-आयु में की गई नियुक्तियों के मामलों में इस आदेश के अनुसार राजकीय स्वीकृति दी हुई मानी जानी चाहिए।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(61) विवि (नियम)/69, दिनांक 30.3.1970 द्वारा अन्तःस्थापित।
(1) वित्त विभाग के आदेश सं. एफ. 1(78) वित्त विभाग (व्यय-नियम)/62-I दिनांक 29 अप्रैल 1967 द्वारा दिनांक 31 मार्च 1953 तक की गई अधिक आयु की नियुक्तियों को नियमित किया गया था। वित्त विभाग के ध्यान में आया है कि राजस्थान सेवा नियम 8 में निर्धारित आयु सीमा का अतिक्रमण करते हुए नियुक्ति प्राधिकारियों ने दिनांक 1 अप्रेल 1953 के पश्चात् भी अधिक आयु वालों की नियुक्तियाँ जारी रखीं। सरकार इस प्रकार की अनियमितताओं को बहुत गम्भीर मानती है और निम्न आदेश दिये जाते हैं :
(2) जो कर्मचारी 1 जुलाई 1967 को या उसके पूर्व सेवानिवृत्त हो गये हैं एवं जिनकी नियुक्ति के लिये आयु का नियमन राजस्थान सेवा नियमों के अन्तर्गत होता है — इन नियमों में निर्धारित नियुक्तियों की अधिकतम आयु सीमा को शिथिल करते हुए नियुक्ति प्राधिकारियों को, अधिक आयु वालों की नियुक्तियों को नियमित करने के अधिकार एतद् द्वारा दिये जाते हैं।
(3)(i) सचिवालय के मन्त्रालयिक कर्मचारी वर्ग को छोड़कर, और पैरा (2) में निर्दिष्ट से भिन्न, अन्य मंत्रालयिक और अधीनस्थ सेवा से सम्बन्धित वे समस्त अधिक आयु की नियुक्तियाँ जो अन्य मन्त्रालयिक सेवा अथवा अधीनस्थ सेवा में दिनांक 1.4.1953 से 31.10.1956 तक की गई हैं, को इन आज्ञाओं के अन्तर्गत नियमित किया समझा जायेगा।
(3)(ii) राज्य कर्मचारी जो उप-पैरा (i) में उल्लिखित श्रेणी में आते हैं एवं जिनकी अधिक आयु में नियुक्तियाँ 1 नवम्बर 1956 को या इसके पश्चात् की गई हैं, को नियमित करने के लिए वित्त (व्यय) विभाग दिनांक 30 जून 1970 तक विचार करेगा। अतः ऐसे सभी प्रकरणों को 30 जून 1970 तक निम्न अंकित सूचनाओं के साथ वित्त (व्यय) विभाग को नियमित करने के लिये भिजवा दिये जाने चाहिये :
- (क) नियुक्ति प्राधिकारी का नाम।
- (ख) अधिक आयु पर नियुक्ति करने के कारण।
- (ग) ऐसे नियुक्ति-प्राधिकारी के विरुद्ध यदि कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई हो तो उसका विस्तृत विवरण।
(4) नियुक्ति विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(21) नियुक्ति (क-2)/62, दिनांक 8 जुलाई 1963 द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सेवा नियम प्रकाशित किये गये थे। समस्त नियुक्ति अधिकारियों को चेतावनी दी जाती है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्तियाँ इन नियमों के प्रावधानों के अनुसार की जानी चाहिये। उपर्युक्त अनुच्छेद 2 में उल्लिखित बातों को छोड़ते हुए अधिक आयु की नियुक्तियाँ, जो इन आदेशों के प्रसारित होने के पूर्व की गई हैं, के बारे में निम्नांकित आज्ञाएँ दी जाती हैं :
- (i) जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति 8 जुलाई 1963 के पूर्व में की गई है एवं जिनकी आयु नियुक्ति के समय 30 वर्ष की थी, के अधिक आयु में नियुक्तियों को इन आज्ञाओं के अन्तर्गत नियमित किया हुआ समझा जाये।
- (ii) जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति 30 वर्ष की आयु के पश्चात् तथा दिनांक 8 जुलाई 1963 के पूर्व की गई है और जिनकी मृत्यु हो गई है — उनकी अधिक आयु की नियुक्तियों का नियमन विभागाध्यक्ष द्वारा, जहाँ आवश्यक हो नियुक्ति प्राधिकारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के पश्चात् एवं नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा को शिथिल करते हुए किया जायेगा।
- (iii) चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जो 30 वर्ष की आयु के पश्चात् 8 जुलाई 1963 के पूर्व नियुक्त किये गये और राज्य सेवा में 1 दिसम्बर 1969 के पूर्व सेवानिवृत्त कर दिये गये हों — तो उनके प्रकरण वित्त (व्यय) विभाग को अनुच्छेद 3(ii) द्वारा वांछित सूचनाओं के साथ 30 जून 1970 तक नियमित करने के लिए भेज दिये जाने चाहिये।
- (iv) चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जो 8 जुलाई 1963 के पूर्व तथा 30 वर्ष की आयु के पश्चात् नियुक्त किये गये हों एवं राज्य सेवा में अभी कार्यरत हैं — के मामले वित्त (व्यय) विभाग को उपर्युक्त अनुच्छेद 3(ii) द्वारा वांछित सूचनाओं के साथ दिनांक 30 जून 1970 तक नियमित करने के लिए भिजवा दिये जाने चाहिये। इस तारीख के बाद जो मामले वित्त विभाग में भेजे जायेंगे उन पर विचार नहीं किया जायेगा।
- (v) 8 जुलाई 1963 के बाद नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की अधिक आयु की नियुक्तियों के मामले नियुक्ति (क) विभाग को भेजे जायेंगे।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(61) विवि (नियम)/69, दिनांक 30.3.1970 द्वारा अन्तःस्थापित।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(61) (नियम)/69, दिनांक 30 मार्च 1970 के अनुसार अधिक आयु की नियुक्तियों के सभी मामले 30 जून 1970 तक वित्त विभाग/नियुक्ति विभाग को नियमितीकरण हेतु निर्दिष्ट किये जाने अपेक्षित थे। सरकार के ध्यान में आया है कि उक्त आदेश जारी होने के उपरान्त भी नियुक्ति प्राधिकारियों ने अधिक आयु की नियुक्तियाँ करना जारी रखा है।
सरकार ने इसे गम्भीरता से देखा है और समस्त नियुक्ति प्राधिकारियों पर प्रभाव डाला जाता है कि वे इस प्रकार के सभी नियम-विपरीत वाले मामले, जिनमें 31 मार्च 1972 से पूर्व अधिक आयु की नियुक्तियाँ की गई हों, उन समस्त मामलों को प्रशासनिक विभागों को 30.9.1972 तक भिजवा दिये जाने चाहिये, जो ऐसे मामलों को वित्त (व्यय) विभाग / नियुक्ति विभाग, जैसी भी स्थिति हो, की सहमति से नियमित करा लें। उक्त तारीख के बाद प्रस्तुत होने वाले मामलों पर कार्मिक/वित्त विभाग विचार नहीं करेगा।
जब इस प्रकार की अधिक आयु की नियुक्तियों के विषयों को नियमित करने के प्रस्ताव प्रस्तुत किये जायें तो नियुक्ति प्राधिकारी निश्चित रूप से उनके साथ नियमों का उल्लंघन करके की गई नियुक्तियों के बारे में अपना स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत करेंगे।
वित्त विभाग के ज्ञापन सं. एफ. 1(29) विवि (नियम)/72, दिनांक 20.6.1972 द्वारा जोड़ा गया।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/72, दिनांक 20.6.1972 के अनुसार अधिक आयु की नियुक्तियों के सभी मामले वित्त विभाग की सहमति से 30 सितम्बर 1972 तक नियमित करा लेने की अपेक्षा की गयी थी। सरकार के ध्यान में आया है कि उक्त आदेश जारी हो जाने के बावजूद भी अधिक आयु की नियुक्तियों के नियमितीकरण के मामले वित्त विभाग में उक्त तारीख के पश्चात् भी प्राप्त हो रहे हैं।
सरकार ने इसे गम्भीरता से लिया है और सभी नियुक्ति प्राधिकारियों को व्यादिष्ट किया जाता है कि राज्य कर्मचारियों के अधिक आयु की अनियमित नियुक्तियाँ जो 31.3.1972 तक की गई हों, के ऐसे सभी मामले सम्बन्धित प्रशासनिक विभाग को भेजे जाने चाहिए, जो उनको वित्त (व्यय अनुभाग) / नियुक्ति विभाग, यथास्थिति, की सहमति से 31 मार्च 1973 तक नियमित करवा सकेंगे। 31.3.1973 के पश्चात् प्राप्त मामलों पर वित्त विभाग / नियुक्ति विभाग द्वारा विचार नहीं किया जायेगा।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/72, दिनांक 5.1.1973 द्वारा जोड़ा गया।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/72, दिनांक 5 जनवरी 1973 द्वारा अधिक आयु की नियुक्तियों के समस्त मामले वित्त विभाग की सहमति से नियमित कराने के लिए 31 मार्च 1973 तक प्रस्तुत किये जाने थे। सरकार के ध्यान में पुनः यह आया है कि उक्त आज्ञा के उपरान्त भी अधिक आयु में नियुक्तियों के मामले निर्धारित तारीख के बाद भी वित्त विभाग में भेजे जा रहे हैं।
सरकार ने इसे बड़ी गम्भीरता से देखा है और अब समस्त नियुक्ति-प्राधिकारियों को चेतावनी दी जाती है कि ऐसे अधिक आयु की नियुक्ति के अनियमित मामले जो 31 मार्च 1972 तक किये गये हैं, को अपने प्रशासनिक विभागों को प्रस्तुत कर दें, जो उनको वित्त (व्यय) विभाग / कार्मिक विभाग से नियमित करा लें।
दिनांक 31 मार्च 1972 के पश्चात् अधिक आयु की नियुक्ति के मामलों को वित्त विभाग नियमित नहीं करेगा, और ऐसे मामले यदि बाद में प्रस्तुत किये जायेंगे तो उन्हें सरसरी तौर पर ही देखकर अस्वीकृत कर दिये जायेंगे।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(29) वि.वि. (नियम)/72, दिनांक 25.5.1973 द्वारा जोड़ा गया।
जन्म तिथि से जुड़े निर्णय
राज्य सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया है कि राज्य कर्मचारी राज्य सेवा में रहते हुए मैट्रिक या अन्य समकक्ष परीक्षा पास करते हैं जिसके प्रमाण-पत्र में जन्म तिथि अंकित होती है, और वे परीक्षा पास करने के पश्चात् उस प्रमाण-पत्र के आधार पर सेवा पुस्तिका में पूर्व अंकित जन्म तिथि — जो प्रथम नियुक्ति के समय अंकित की गई थी — बदलवाने का प्रयत्न करते हैं।
इस समस्या का समाधान करने हेतु निर्देश दिये जाते हैं कि ऐसे कर्मचारी जो राज्य सेवा में रहते हुए मैट्रिक या अन्य समकक्ष परीक्षा पास करें जिसके प्रमाण-पत्र में जन्म तिथि अंकित होती है — उनकी सेवा पुस्तिका में पूर्व अंकित जन्म तिथि उक्त प्रमाण-पत्र के आधार पर नहीं बदली जावे।
वित्त विभाग के आदेश सं. एफ. 1(15) विवि (नियम)/69, दिनांक 17.4.1969 द्वारा अन्तःस्थापित।
वित्त विभाग के परिपत्र सं. प. 1(16) वित्त (नियम)/68, दिनांक 16.7.1968 द्वारा यह निर्देश दिया गया था कि विभागाध्यक्ष/नियुक्तिकर्ता अधिकारी राज्य सेवा में नई नियुक्ति करते समय नियुक्ति आज्ञा पत्र में अनिवार्य रूप से कर्मचारी की जन्म-तिथि अंकित करेंगे, तथा जिला कोषाधिकारी सम्बद्ध कर्मचारी के प्रथम वेतन बिल को ध्यानपूर्वक देखेंगे कि उक्त कर्मचारी की नियुक्ति-पत्र में जन्म-तिथि अंकित है, और वह नियमानुसार है अथवा योग्य आयु के बाहर है। नियमित आयु में दी गई नियुक्ति का ही वेतन वे पारित करेंगे।
प्रायः ऐसा देखने में आया है कि नियुक्तिकर्ता अधिकारी नियुक्ति आज्ञा-पत्र में जन्म तिथि का उल्लेख नहीं करते, और किन्हीं मामलों में जिला कोषाधिकारियों ने भी प्रथम वेतन बिल इस तथ्य की जाँच किये बिना ही पारित कर दिए हैं।
निर्धारित आयु से कम आयु में की गई नियुक्तियाँ अथवा अधिक आयु की नियुक्तियाँ नियमानुकूल नहीं हैं, और उनको नियमित किए जाने के लिए बाद में विभागाध्यक्ष प्रस्ताव करते हैं, अथवा कर्मचारी के पेन्शन के कागजात पूरे कराते समय ऐसे तथ्य सामने लाये जाते हैं जो अनेकों कठिनाइयाँ उत्पन्न करती हैं।
अतः समस्त विभागाध्यक्षों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे निर्देशों का कड़ाई से पालन करेंगे। यह भी निर्देश दिया जाता है कि विभागाध्यक्ष अपने आंतरिक लेखा जाँच दलों तथा अधीनस्थ लेखाधिकारियों को निर्देश दें कि अपने निरीक्षण के समय ऐसे मामलों की भी जाँच करें और इस सम्बन्ध में हुई अनियमितताओं को वित्त विभाग के ध्यान में लावें। विभागाध्यक्ष इन निर्देशों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों में भी पहुँचा दें।
जिला कोषाध्यक्ष उक्त निर्देशों का कृपया ठीक ढंग से पालन करें। इस सम्बन्ध में पाई गई अनियमितताओं को राज्य सरकार गम्भीर मानती है।
वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(16) विवि (नियम)/68, दिनांक 23.7.1970 द्वारा अन्तःस्थापित।
सरकारी सेवा में प्रवेश करने की न्यूनतम और अधिकतम आयु, सरकार के अधीन सेवा या पद पर भर्ती को शासित करने वाले सरकारी नियमों या आदेशों में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, राजस्थान सेवा नियमों के नियम 8 के अधीन विहित की गयी है। नियुक्ति प्राधिकारियों द्वारा अक्सर इन उपबन्धों का उल्लंघन किया जाता है और वे अधिक आयु की नियुक्तियाँ करते रहते हैं। ऐसी अधिक आयु की नियुक्तियाँ पेन्शन केसों को अन्तिम रूप देते समय सरकार के ध्यान में लायी जाती हैं। सरकार के पास ऐसे प्रत्येक मामले को नियमित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता, क्योंकि पेन्शन केस को निपटाया जाना होता है। नियमितीकरण की इस प्रक्रिया से पेन्शन केसों के निपटारे में काफी विलम्ब हो जाता है।
इस मामले पर विचार किया गया है और यह निर्णय किया गया है कि अधिक आयु की नियुक्तियों के मामलों को सामान्य आज्ञाओं द्वारा नियमित करने के आदेश जारी नहीं होने पर भी सेवा-निवृत्ति के मामलों को अन्तिम रूप से निपटा दिया जाए एवं अंकेक्षण में मान लिया जाये। यह आदेश सेवा-निवृत्ति के अन्तिम रूप से निपटारे एवं सेवा-निवृत्ति के पश्चात् अधिक आयु की नियुक्तियों के मामलों को नियमित करने की आवश्यकताओं को समाप्त नहीं करता है।
सरकार ने इस प्रकार की कमियों तथा नियमों की पालना में की गई अनियमितताओं को गम्भीरता से लिया है। अतः नियुक्ति अधिकारियों को पुनः कहा जाता है कि वे प्रथम नियुक्ति की आयु से सम्बन्धित नियमों की अवहेलना करके नियुक्तियाँ नहीं करें। राजकीय आज्ञाओं में राज्य सेवा में प्रथम नियुक्ति करते समय, नियुक्ति पत्र में उसकी जन्म तारीख का अवश्य उल्लेख किया जाना चाहिये।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या एफ. 1(77) वि.वि. (ग्रुप-2)/69, दिनांक 15.9.1975 द्वारा अन्तःस्थापित किया गया।
(क) एक व्यक्ति के सम्बन्ध में जो 1.1.1979 को राज्य सेवा में था — सेवा पुस्तिका / सेवा विवरणिका में अंकित जन्म दिनांक ही राज्य सरकार द्वारा स्वीकार की जायेगी, चाहे उसका आधार कुछ भी हो। इस प्रकार अंकित एवं स्वीकृत जन्म तारीख को बाद में — राजस्थान सेवा नियमों के नियम 8क(2)(ख) के उपबन्धों के अनुसार जन्म तारीख के साक्ष्य के रूप में स्वीकार किये गये किसी अभिलेख के आधार पर के सिवाय, और वित्त विभाग के पूर्व अनुमोदन के बिना — परिवर्तित नहीं किया जायेगा।
(ख)(i) उस व्यक्ति के सम्बन्ध में जो राज्य सरकार की सेवा में 1.1.1979 अथवा उसके पश्चात् नियुक्त किया जाता है — इस नियम के प्रयोजनार्थ उसकी जन्म दिनांक का निर्धारण, उसके द्वारा प्रस्तुत उच्च / माध्यमिक / उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रमाण-पत्र अथवा किसी भी शिक्षा मण्डल द्वारा जारी किये गये प्रमाण-पत्र में अंकित जन्म दिनांक के आधार पर किया जायेगा — यदि राजकीय सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक / माध्यमिक / उच्चतर माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण रखी गई हो, अथवा ऐसा डिप्लोमा या प्रमाण-पत्र रखा गया हो जिसे सरकार ने उक्त परीक्षाओं के समकक्ष अथवा उनसे उच्च मान लिया हो।
(ख)(ii) उच्च / माध्यमिक / उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र अथवा किसी शिक्षा मण्डल द्वारा जारी प्रमाण-पत्र में अंकित जन्म-दिनांक का उल्लेख, व्यक्ति को राज्य सेवा में नियुक्त करने वाले सक्षम अधिकारी द्वारा प्रसारित नियुक्ति आज्ञा में किया जायेगा।
(ख)(iii) जहाँ राज्य सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिये न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माध्यमिक / सीनियर माध्यमिक अथवा इसके समकक्ष से भी कम (नीचे) निर्धारित हुई हो — वहाँ सम्बन्धित कर्मचारी के जन्म दिनांक का निर्धारण, विद्यालय या जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किये गये प्रमाण-पत्र के प्रति-निर्देश से किया जायेगा।
(ग) जब एक कार्य-दत्त (वर्क-चार्ज्ड) कर्मचारी, जिसे राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर कार्य-दत्त पदों को नियमित पदों के बदल दिये जाने के कारण नियुक्त किया जाये — तो उसके सम्बन्ध में जन्म दिनांक वह स्वीकार किया जायेगा जो कार्य-दत्त पद पर कार्य करते समय बनायी गयी उसकी सेवा पुस्तिका / सेवा विवरणिका में अंकित होगा, तथा इसमें परिवर्तन / संशोधन नहीं किया जायेगा।
खण्ड (2) — वित्त विभाग की अधिसूचना संख्या एफ. 1(2) विवि/नियम/2004, दिनांक 30.4.2007 द्वारा प्रतिस्थापित।
उप-खण्ड (ख)(iii) — वित्त विभाग की अधिसूचना सं. एफ. 1(8) वित्त/नियम/2015, दिनांक 28.9.2017 द्वारा प्रतिस्थापित, तुरन्त प्रभावी।
राजस्थान सरकार का निर्देश — जन्म दिनांक में परिवर्तन
वित्त विभाग का परिपत्र सं. प. (27) वित्त/ग्रुप-2/78, दिनांक 22.5.1996
वित्त विभाग के यह ध्यान में आया है कि कतिपय मामलों में प्रशासनिक विभागों / विभागाध्यक्षों / कार्यालयाध्यक्षों द्वारा कर्मचारियों / अधिकारियों की सेवा पुस्तिकाओं में अंकित जन्म दिनांक में काट-छाँट कर परिवर्तन कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में इन कर्मचारियों / अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने पर पेंशन विभाग द्वारा आपत्ति की जाती है, क्योंकि सेवा पुस्तिका में एक बार अंकित जन्म दिनांक में परिवर्तन कार्मिक विभाग एवं वित्त विभाग की सहमति बिना नहीं किया जा सकता है।
अतः समस्त प्रशासनिक विभागों / विभागाध्यक्षों को यह निर्देश दिये जाते हैं कि भविष्य में किसी भी अधिकारी / कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में अंकित जन्म दिनांक में परिवर्तन बिना वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग की पूर्वानुमति से नहीं किया जाये। विभागाध्यक्ष इस आशय के निर्देश उनके अधीनस्थ कार्यालयाध्यक्षों को भी देवें। बिना सक्षम स्वीकृति के जन्म दिनांक में परिवर्तन करने के लिए सम्बन्धित दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
व्याख्या — सरल भाषा में
नियम 8 — नई नियुक्ति का ढाँचा
20 जनवरी 2006 के बाद राजस्थान में हर नई सरकारी नियुक्ति दो वर्ष के परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी के रूप में होती है। इन दो वर्षों में वेतनमान नहीं मिलता — केवल नियत पारिश्रमिक मिलता है, जिसकी दर सरकार समय-समय पर तय करती है।
दो वर्ष पूरे होने पर पद के वेतनमान का न्यूनतम वेतन शुरू होता है। और एक कड़ी बात — ये दो वर्ष वार्षिक वेतन वृद्धि में नहीं गिने जाते।
दो अपवाद — जहाँ एक वर्ष ही है
| किसके लिए | अवधि | किस रूप में |
|---|---|---|
| MBBS + एक वर्ष इन्टर्नशिप वाले चिकित्सा अधिकारी, वरिष्ठ निदर्शक, सहायक आचार्य | 1 वर्ष | परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु |
| राज्य सेवा के प्रवेश पद से उच्चतर पद, जहाँ अनुभव शर्त भी विहित हो | 1 वर्ष | परिवीक्षाधीन (23.9.2014 से) |
दूसरा अपवाद व्यावहारिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण है। इसमें व्यक्ति प्रशिक्षु नहीं, बल्कि परिवीक्षाधीन होता है — और यदि वह पहले से राज्य/केन्द्र/अन्य राज्य सरकार की नियमित सेवा में था, तो उसे अंतिम आहरित वेतन का संरक्षण मिलता है।
नियम बदलने पर पुराने आवेदकों के अधिकार
टिप्पणी के छह उप-खण्ड एक ही सिद्धान्त पर टिके हैं — नियम बीच में बदल जाए तो अभ्यर्थी को बताया जाए, और निकलने का रास्ता दिया जाए।
| भर्ती किस चरण पर है | क्या करना होगा |
|---|---|
| विज्ञापन जारी नहीं हुआ / अंतिम तारीख नहीं निकली | संशोधन के अनुसार विज्ञापन; सूचना + पूर्ण फीस वापसी सहित हटने का विकल्प |
| अंतिम तारीख निकल चुकी | वही — सूचना + फीस वापसी सहित विकल्प |
| लिखित परीक्षा हो गई, साक्षात्कार बाकी | लिखित सूचना + अभ्यर्थी बने रहने की लिखित स्वीकृति |
| साक्षात्कार हो गया, सिफारिश भेज दी | नियुक्ति पत्र से पूर्व सूचना + सहमति |
| नियुक्ति पत्र 20.1.2006 से पूर्व जारी | पुराने नियम ही लागू |
| प्रक्रिया पूरी, कुछ को न्यायालय आदेश से पत्र नहीं मिला | वे भी 20.1.2006 से पूर्व के नियमों से शासित |
नियम 8क — आयु की परतें
| श्रेणी | अधिकतम आयु | आधार |
|---|---|---|
| सामान्य | 40 वर्ष | नियम 8क(1), 13.3.2018 से |
| महिला | 42 वर्ष | अपवाद 2, 24.5.2004 से |
| अनुसूचित जाति / जनजाति | +5 वर्ष की छूट | निर्णय 1 |
| भारतीय सेनाओं के रिजर्विस्ट | 50 वर्ष | निर्णय 4 |
| देवस्थान विभाग पुजारी | 35 वर्ष | निर्णय 13 |
| न्यूनतम (सभी के लिए) | 16 वर्ष | नियम 8क(1) |
पर एक शर्त हमेशा याद रखें — ये सीमाएँ तभी लागू होती हैं जब सम्बन्धित सेवा नियम या आज्ञाओं में कुछ और न लिखा हो। अधिकांश भर्तियों में उनके अपने सेवा नियम अलग आयु तय करते हैं, और वही चलती है।
जन्म तिथि — तीन अलग स्थितियाँ
| स्थिति | जन्म तिथि किससे तय होगी |
|---|---|
| 1.1.1979 को सेवा में था | सेवा पुस्तिका में जो अंकित है, वही — आधार चाहे कुछ भी रहा हो |
| 1.1.1979 या उसके बाद नियुक्त, योग्यता मैट्रिक या ऊपर | बोर्ड / विद्यालय प्रमाण-पत्र; नियुक्ति आज्ञा में उल्लेख अनिवार्य |
| योग्यता माध्यमिक से भी कम | विद्यालय या जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 का प्रमाण-पत्र |
| कार्य-दत्त से नियमित हुआ | कार्य-दत्त सेवा पुस्तिका वाली तिथि — परिवर्तन नहीं |
नाम बदलना बनाम उपनाम बदलना
| पूरा नाम बदलना | विवाह पर उपनाम बदलना | |
|---|---|---|
| आधार | ज्ञापन 10.4.1967 | ज्ञापन 15.2.2018 |
| बन्ध-पत्र | आवश्यक | आवश्यक नहीं |
| साक्षी | आवश्यक | आवश्यक नहीं |
| समाचार पत्र में प्रकाशन | आवश्यक, स्वयं के व्यय पर | आवश्यक नहीं |
| राजपत्र में प्रकाशन | आवश्यक, स्वयं के व्यय पर | आवश्यक नहीं |
| क्या चाहिए | पूरी औपचारिकता | नियुक्ति प्राधिकारी को सूचना + अनुरोध |
| स्वीकृति कौन देगा | शासकीय स्वीकृति | नियुक्ति प्राधिकारी |
2018 का ज्ञापन महिला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है — विवाह, पुनर्विवाह, तलाक या पति की मृत्यु के बाद उपनाम जोड़ना, बदलना या हटाना अब केवल सूचना और अनुरोध से हो जाता है। न बन्ध-पत्र, न राजपत्र, न कोई निर्धारित फॉर्म।
अधिक आयु वाले पुराने निर्णय — आज किस काम के
निर्णय 6, 7, 10, 11, 14, 15, 16 — ये सब 1949 से 1973 के दौर के हैं और अपनी समय-सीमाएँ पूरी कर चुके हैं। 31 मार्च 1972 के बाद की अधिक आयु नियुक्तियों को वित्त विभाग नियमित नहीं करता (निर्णय 16)।
किन्तु तीन बातें आज भी जीवित हैं :
- निर्णय 8 — अधिक आयु में नियुक्ति पर कोषाधिकारी वेतन पारित नहीं करेगा, और चढ़ा हुआ वेतन नियुक्ति अधिकारी स्वयं भरेगा।
- निर्णय 12 — नियुक्ति आज्ञा-पत्र में जन्म तिथि अनिवार्य, और कोषाधिकारी प्रथम वेतन बिल पर जाँच करेगा।
- निर्णय 17(1) — पेंशन प्रकरण केवल इस कारण न अटकें कि नियमितीकरण का आदेश नहीं आया — सेवानिवृत्ति के मामले अन्तिम रूप से निपटा दिये जाएँ और अंकेक्षण में मान लिये जाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संदर्भ
- राजस्थान सेवा नियम — वित्त विभाग, राजस्थान सरकार (PDF)
- वित्त विभाग, राजस्थान सरकार — आधिकारिक वेबसाइट
- राजस्थान सरकार — rajasthan.gov.in


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