भारत का संविधान
Constitution of India
| प्रकार | संप्रभु, लोकतांत्रिक, गणराज्य का लिखित संविधान |
|---|---|
| मूल शीर्षक | The Constitution of India |
| अधिकार क्षेत्र | भारत गणराज्य |
| अंगीकृत | 26 नवम्बर 1949 |
| प्रभावी | 26 जनवरी 1950 |
| प्रणाली | संसदीय गणराज्य; संघीय ढाँचा |
| शाखाएँ | 3 — विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका |
| सदन | द्विसदनीय (राज्य सभा + लोक सभा) |
| कार्यपालिका प्रमुख | राष्ट्रपति (नाममात्र); प्रधानमंत्री (वास्तविक) |
| मूल अनुच्छेद | 395 |
| वर्तमान अनुच्छेद | 470+ (संशोधनों सहित) |
| अनुसूचियाँ | मूलतः 8; वर्तमान में 12 |
| मूल भाग | 22 |
| भाषा | हिन्दी एवं अंग्रेज़ी |
| संशोधन | 106 (दिसम्बर 2023 तक) |
| अन्तिम संशोधन | 106वाँ — महिला आरक्षण (नारी शक्ति वन्दन), 2023 |
| संविधान सभा अध्यक्ष | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
| प्रारूप समिति अध्यक्ष | डॉ. भीमराव अम्बेडकर |
| निर्माण अवधि | 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन |
| खर्च | ₹63,96,729 (तत्कालीन) |
| मूल प्रतियाँ | हस्तलिखित; प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा द्वारा |
भारत का संविधान (Constitution of India) विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान है, जो भारत गणराज्य के सर्वोच्च विधि (supreme law) के रूप में कार्य करता है। यह देश की राजनीतिक संरचना, शासन प्रणाली, नागरिकों के मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निदेशक तत्वों एवं मौलिक कर्तव्यों का निर्धारण करता है।
संविधान को संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया तथा 26 जनवरी 1950 को यह गणतंत्र दिवस के रूप में प्रभावी हुआ। इसने भारत शासन अधिनियम, 1935 को प्रतिस्थापित किया। अनुच्छेद 51A में वर्णित मौलिक कर्तव्यों के अनुसार प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों का सम्मान करे।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर, जिन्हें "भारतीय संविधान का जनक" कहा जाता है, ने संविधान के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। संविधान में ब्रिटिश, अमेरिकी, आयरिश, कनाडाई, ऑस्ट्रेलियाई, जर्मन, जापानी एवं दक्षिण अफ्रीकी संविधानों के सर्वोत्तम प्रावधानों का समावेश किया गया, जिससे यह एक अद्वितीय एवं व्यापक दस्तावेज़ बना।
विषय सूची
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- संविधान सभा
- प्रस्तावना
- संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
- मूल संरचना सिद्धान्त
- संविधान के भाग (Parts)
- अनुसूचियाँ (Schedules)
- मौलिक अधिकार (भाग III)
- राज्य के नीति निदेशक तत्व (भाग IV)
- मौलिक कर्तव्य (भाग IV-A)
- संघीय कार्यपालिका
- संसद
- न्यायपालिका
- राज्य सरकार
- पंचायती राज एवं स्थानीय शासन
- केन्द्र-राज्य सम्बन्ध
- आपातकालीन उपबन्ध
- निर्वाचन प्रणाली
- संविधान संशोधन
- नागरिकता
- विशेष अनुच्छेद (370, 371)
- संवैधानिक निकाय
- राजस्थान राजव्यवस्था
- प्रश्नोत्तरी एवं अभ्यास
- यह भी देखें
- सन्दर्भ एवं बाह्य कड़ियाँ
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान की जड़ें ब्रिटिश शासनकाल में हुए क्रमिक संवैधानिक विकास में मिलती हैं। 1600 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के आगमन से लेकर 1947 में स्वतन्त्रता प्राप्ति तक, भारत में शासन प्रणाली में अनेक परिवर्तन हुए जिन्होंने संविधान निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार की।
ब्रिटिश काल के प्रमुख अधिनियम
भारतीय संविधान पर सर्वाधिक प्रभाव भारत सरकार अधिनियम, 1935 का पड़ा, जिसे "भारतीय संविधान का जनक अधिनियम" भी कहा जाता है। वर्तमान संविधान का लगभग 70% भाग इसी अधिनियम से प्रेरित है।
| वर्ष | अधिनियम | मुख्य प्रावधान | संवैधानिक महत्व |
|---|---|---|---|
| 1773 | रेग्युलेटिंग एक्ट | बंगाल में गवर्नर जनरल; कलकत्ता उच्च न्यायालय | प्रथम बार ब्रिटिश संसद ने भारत में शासन का नियमन किया |
| 1784 | पिट्स इण्डिया एक्ट | बोर्ड ऑफ कंट्रोल; द्वैध शासन | ब्रिटिश सरकार का कम्पनी पर प्रत्यक्ष नियन्त्रण |
| 1833 | चार्टर एक्ट | गवर्नर जनरल ऑफ इण्डिया; विधि आयोग | केन्द्रीकृत विधायी शक्ति; दास प्रथा उन्मूलन |
| 1858 | भारत सरकार अधिनियम | कम्पनी शासन समाप्त; ब्रिटिश क्राउन को सत्ता | भारत सचिव एवं परिषद; वायसराय की उपाधि |
| 1861 | भारतीय परिषद अधिनियम | विधान परिषदों में भारतीयों का नामांकन | विकेन्द्रीकरण की शुरुआत; पोर्टफोलियो प्रणाली |
| 1892 | भारतीय परिषद अधिनियम | अप्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआत | बजट पर चर्चा का अधिकार |
| 1909 | मार्ले-मिंटो सुधार | पृथक निर्वाचन; मुस्लिम पृथक प्रतिनिधित्व | साम्प्रदायिक निर्वाचन की शुरुआत |
| 1919 | मॉंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार | द्वैध शासन (Dyarchy); प्रत्यक्ष निर्वाचन | प्रान्तों में आंशिक उत्तरदायी सरकार |
| 1935 | भारत सरकार अधिनियम | प्रान्तीय स्वायत्तता; संघीय न्यायालय; तीन सूचियाँ | वर्तमान संविधान का प्रमुख स्रोत; 321 अनुच्छेद, 10 अनुसूचियाँ |
| 1947 | भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम | भारत-पाक विभाजन; संविधान सभा को सम्प्रभुता | अन्तरिम संविधान के रूप में 1935 अधिनियम लागू |
संविधान की माँग
भारतीय संविधान की माँग का इतिहास भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ा है। 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने "स्वराज विधेयक" प्रस्तुत किया, जो भारतीयों द्वारा स्वशासन की प्रथम लिखित माँग थी। 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में नेहरू रिपोर्ट ने भारत के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया। इसमें मौलिक अधिकार, उत्तरदायी सरकार एवं डोमिनियन स्टेटस की माँग की गई। 1929 में लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ, और अन्ततः 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के अधीन संविधान सभा का गठन हुआ।
संविधान सभा
गठन एवं संरचना
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के अन्तर्गत हुआ। इसकी कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई, जिसमें 296 सदस्य ब्रिटिश प्रान्तों से, 93 सदस्य देशी रियासतों से होने थे। विभाजन के पश्चात् कुल सदस्य संख्या 299 रह गई। सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई, जिसमें डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 11 दिसम्बर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
13 दिसम्बर 1946 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने "उद्देश्य प्रस्ताव" (Objective Resolution) प्रस्तुत किया, जो संविधान के दर्शन एवं प्रस्तावना का आधार बना।
प्रमुख समितियाँ
| समिति | अध्यक्ष | कार्य |
|---|---|---|
| प्रारूप समिति (Drafting Committee) | डॉ. भीमराव अम्बेडकर | संविधान का प्रारूप तैयार करना (7 सदस्य) |
| संघ शक्ति समिति | पं. जवाहरलाल नेहरू | केन्द्र-राज्य शक्ति विभाजन |
| मौलिक अधिकार समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल | मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक अधिकार |
| प्रान्तीय संविधान समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल | प्रान्तों का संविधान |
| संघ संविधान समिति | पं. जवाहरलाल नेहरू | संघीय संविधान |
| कार्य संचालन समिति | डॉ. के.एम. मुंशी | सभा की कार्यवाही का संचालन |
| झण्डा समिति | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद | राष्ट्रीय ध्वज का डिज़ाइन |
प्रारूप निर्माण प्रक्रिया
संविधान के प्रारूप पर कुल 11 सत्रों में विचार-विमर्श हुआ, 165 दिन बैठकें हुईं, जिनमें से 114 दिन प्रारूप पर चर्चा को समर्पित थे। कुल 7,635 संशोधन प्रस्तावित किये गए, जिनमें से 2,473 पर वास्तविक चर्चा हुई। अन्ततः 26 नवम्बर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया। इस दिन को भारत में "संविधान दिवस" के रूप में मनाया जाता है।
संविधान पर 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षर किये। मूल संविधान प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने कलम से सुलेख (calligraphy) में लिखा, तथा इसके प्रत्येक पृष्ठ को शान्तिनिकेतन के कलाकारों ने सज्जित किया।
प्रस्तावना (Preamble)
प्रस्तावना को "संविधान की कुंजी" (Key to the Constitution) एवं "संविधान की आत्मा" कहा जाता है। इसमें संविधान के मूलभूत दर्शन — न्याय, स्वतन्त्रता, समता एवं बन्धुता — समाहित हैं।
प्रस्तावना के प्रमुख शब्द
| शब्द | अर्थ एवं विवरण | स्रोत/संशोधन |
|---|---|---|
| सम्प्रभु (Sovereign) | भारत किसी बाह्य शक्ति के अधीन नहीं; आन्तरिक एवं बाह्य मामलों में सर्वोच्च | मूल प्रस्तावना (1950) |
| समाजवादी (Socialist) | आर्थिक न्याय एवं सम्पत्ति का समान वितरण; मिश्रित अर्थव्यवस्था | 42वाँ संशोधन (1976) |
| पन्थनिरपेक्ष (Secular) | राज्य का कोई राजधर्म नहीं; सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार | 42वाँ संशोधन (1976) |
| लोकतन्त्रात्मक (Democratic) | जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन | मूल प्रस्तावना (1950) |
| गणराज्य (Republic) | राज्य प्रमुख निर्वाचित (वंशानुगत नहीं) | मूल प्रस्तावना (1950) |
| अखण्डता (Integrity) | राष्ट्र की क्षेत्रीय अखण्डता एवं एकता | 42वाँ संशोधन (1976) |
महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय: केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है, किन्तु इसे न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता। यह संविधान की व्याख्या में सहायक है।
संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
भारतीय संविधान में विश्व के अनेक संविधानों की सर्वोत्तम विशेषताओं का समावेश है, जो इसे अद्वितीय बनाती हैं:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान | मूलतः 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ, 22 भाग; संशोधनों के बाद 470+ अनुच्छेद, 12 अनुसूचियाँ, 25 भाग |
| कठोर एवं लचीले का समन्वय | अनुच्छेद 368: कुछ उपबन्ध साधारण बहुमत से, कुछ विशेष बहुमत से, कुछ राज्यों की सहमति से संशोधनीय |
| संघीय ढाँचा, एकात्मक प्रवृत्ति | सामान्य काल में संघीय; आपातकाल में एकात्मक; मजबूत केन्द्र |
| संसदीय शासन प्रणाली | ब्रिटिश मॉडल; राष्ट्रपति नाममात्र, प्रधानमंत्री वास्तविक प्रमुख |
| एकल नागरिकता | संघीय ढाँचे के बावजूद केवल भारतीय नागरिकता |
| स्वतन्त्र एवं एकीकृत न्यायपालिका | सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर; उच्च एवं अधीनस्थ न्यायालय |
| मौलिक अधिकार एवं नीति निदेशक तत्व | भाग III एवं भाग IV — न्यायसंगत एवं गैर-न्यायसंगत अधिकार |
| सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार | 18 वर्ष (मूलतः 21 वर्ष; 61वें संशोधन, 1989 से 18 वर्ष) |
| धर्मनिरपेक्षता | राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं; सभी धर्मों को समान सम्मान |
| त्रि-स्तरीय सरकार | केन्द्र, राज्य एवं स्थानीय स्वशासन (73वाँ-74वाँ संशोधन) |
विभिन्न देशों से लिये गए प्रावधान
| देश | उधार लिये गए प्रावधान |
|---|---|
| 🇬🇧 ब्रिटेन | संसदीय प्रणाली, विधि का शासन, एकल नागरिकता, द्विसदनीय विधानमण्डल, कैबिनेट प्रणाली, संसदीय विशेषाधिकार |
| 🇺🇸 अमेरिका | मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरवलोकन, राष्ट्रपति का निर्वाचन, स्वतन्त्र न्यायपालिका, उपराष्ट्रपति |
| 🇮🇪 आयरलैंड | नीति निदेशक तत्व, राष्ट्रपति के निर्वाचन की विधि, राज्य सभा में 12 मनोनीत सदस्य |
| 🇨🇦 कनाडा | संघीय ढाँचा (मजबूत केन्द्र), अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र में, राज्यपाल की नियुक्ति |
| 🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक, व्यापार की स्वतन्त्रता |
| 🇩🇪 जर्मनी | आपातकालीन उपबन्ध, मौलिक अधिकारों का निलम्बन |
| 🇷🇺 रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) | मौलिक कर्तव्य, प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय |
| 🇯🇵 जापान | विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (अनुच्छेद 21) |
| 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका | संविधान संशोधन की प्रक्रिया, राज्य सभा के सदस्यों का निर्वाचन |
| 🇫🇷 फ्रांस | गणराज्य, प्रस्तावना में स्वतन्त्रता, समता एवं बन्धुता |
मूल संरचना सिद्धान्त (Basic Structure Doctrine)
केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने निर्धारित किया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, किन्तु उसकी "मूल संरचना" को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। यह सिद्धान्त भारतीय संवैधानिक विधिशास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
मूल संरचना के तत्व (विभिन्न निर्णयों में स्थापित):
| तत्व | स्थापित करने वाला निर्णय |
|---|---|
| संविधान की सर्वोच्चता | केशवानन्द भारती (1973) |
| विधि का शासन | इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975) |
| शक्ति पृथक्करण | केशवानन्द भारती (1973) |
| न्यायिक पुनरवलोकन | मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) |
| मौलिक अधिकार | मिनर्वा मिल्स (1980) |
| धर्मनिरपेक्षता | एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) |
| संघवाद | केशवानन्द भारती (1973) |
| गणराज्यात्मक स्वरूप | केशवानन्द भारती (1973) |
| स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव | इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975) |
| संविधान संशोधन की सीमित शक्ति | केशवानन्द भारती (1973) |
संविधान के भाग (Parts of the Constitution)
भारतीय संविधान को 25 भागों (Parts) में विभाजित किया गया है, जो संविधान के विभिन्न पक्षों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करते हैं:
| भाग | विषय | अनुच्छेद | विस्तृत लेख |
|---|---|---|---|
| I | संघ और उसका राज्यक्षेत्र | 1–4 | — |
| II | नागरिकता | 5–11 | नागरिकता और अधिकार |
| III | मौलिक अधिकार | 12–35 | मौलिक अधिकार (अनु. 12–35) |
| IV | नीति निदेशक तत्व | 36–51 | DPSP (अनु. 36–51) |
| IV-A | मौलिक कर्तव्य | 51-A | मौलिक कर्तव्य (अनु. 51A) |
| V | संघ (कार्यपालिका, संसद, विधायी शक्तियाँ, न्यायपालिका) | 52–151 | संघीय कार्यपालिका |
| VI | राज्य (राज्यपाल, विधानमण्डल, उच्च न्यायालय) | 152–237 | राज्य कार्यपालिका |
| VII | प्रथम अनुसूची के B भाग के राज्य (निरसित) | 238 | भाग VII विवरण |
| VIII | केन्द्रशासित प्रदेश | 239–242 | केन्द्रशासित प्रदेश |
| IX | पंचायतें | 243–243O | पंचायत राज व्यवस्था |
| IX-A | नगरपालिकाएँ | 243P–243ZG | नगरपालिका (Urban Local Bodies) |
| IX-B | सहकारी समितियाँ | 243ZH–243ZT | सहकारी समितियाँ |
| X | अनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र | 244–244A | अनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र |
| XI | संघ-राज्य सम्बन्ध | 245–263 | केन्द्र-राज्य सम्बन्ध |
| XII | वित्त, सम्पत्ति, संविदा | 264–300A | वित्त एवं सम्पत्ति |
| XIII | व्यापार, वाणिज्य | 301–307 | व्यापार एवं वाणिज्य |
| XIV | संघ एवं राज्य के अधीन सेवाएँ | 308–323 | लोक सेवाएँ |
| XIV-A | न्यायाधिकरण | 323A–323B | न्यायाधिकरण (Tribunals) |
| XV | निर्वाचन | 324–329A | चुनाव (Elections) |
| XVI | विशेष वर्गों हेतु प्रावधान | 330–342A | अनुसूचित जाति/जनजाति प्रावधान |
| XVII | राजभाषा | 343–351 | राजभाषा (Official Language) |
| XVIII | आपातकालीन उपबन्ध | 352–360 | आपातकालीन उपबन्ध |
| XIX | विविध | 361–367 | विविध उपबन्ध |
| XX | संविधान संशोधन | 368 | संविधान संशोधन |
| XXI | अस्थायी, संक्रमणकालीन प्रावधान | 369–392 | अस्थायी प्रावधान |
| XXII | संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ | 393–395 | संक्षिप्त नाम एवं प्रारम्भ |
अनुसूचियाँ (Schedules)
| अनु. | विषय | सम्बन्धित अनुच्छेद | विवरण |
|---|---|---|---|
| 1 | राज्य एवं केन्द्रशासित प्रदेश | 1 एवं 4 | 28 राज्य + 8 केन्द्रशासित प्रदेश |
| 2 | वेतन, भत्ते, पेंशन | 59, 65, 75 आदि | राष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीश आदि |
| 3 | शपथ एवं प्रतिज्ञान | 75, 99, 124 आदि | पदाधिकारियों की शपथ के प्रारूप |
| 4 | राज्य सभा में स्थानों का आवंटन | 4(1) एवं 80(2) | राज्यवार सीटों का विभाजन |
| 5 | अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन | 244(1) | जनजातीय क्षेत्रों की शासन व्यवस्था |
| 6 | असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम | 244(2) एवं 275(1) | पूर्वोत्तर जनजातीय क्षेत्र प्रशासन |
| 7 | तीन सूचियाँ | 246 | संघ सूची (100), राज्य सूची (61), समवर्ती सूची (52) |
| 8 | भाषाएँ | 344(1) एवं 351 | 22 भाषाएँ (मूलतः 14; 92वें संशोधन से 22) |
| 9 | भूमि सुधार अधिनियम | 31-B | न्यायिक समीक्षा से संरक्षित (1951 में जोड़ी गई) |
| 10 | दल-बदल विरोधी कानून | 102(2), 191(2) | 52वें संशोधन (1985) से जोड़ी गई |
| 11 | पंचायत की शक्तियाँ | 243-G | 73वें संशोधन (1992) से; 29 विषय |
| 12 | नगरपालिका की शक्तियाँ | 243-W | 74वें संशोधन (1992) से; 18 विषय |
मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) — भाग III
संविधान का भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) भारतीय नागरिकों को छह प्रकार के मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ये अधिकार अमेरिकी संविधान के "बिल ऑफ राइट्स" से प्रेरित हैं और न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (justiciable) हैं। मूलतः सात अधिकार थे; 44वें संशोधन (1978) ने सम्पत्ति के अधिकार (अनु. 31) को हटाकर इसे विधिक अधिकार (अनु. 300-A) बना दिया।
1. समानता का अधिकार (Right to Equality) — अनुच्छेद 14–18
| अनुच्छेद | विषय | विस्तृत लेख |
|---|---|---|
| 14 | विधि के समक्ष समता — राज्य किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। "युक्तियुक्त वर्गीकरण" (Reasonable Classification) अनुमत है। | अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार |
| 15 | भेदभाव का निषेध — धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव निषिद्ध। राज्य अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं एवं बालकों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है। | अनुच्छेद 15: भेदभाव का निषेध |
| 16 | लोक नियोजन में अवसर की समता — सरकारी नौकरी में समान अवसर; पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अनुमत। | अनुच्छेद 16: रोजगार में समानता |
| 17 | अस्पृश्यता का उन्मूलन — छुआछूत दण्डनीय अपराध; नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 | अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता उन्मूलन |
| 18 | उपाधियों का अन्त — सैनिक या शैक्षणिक उपाधि के अतिरिक्त कोई उपाधि नहीं; विदेशी उपाधि राष्ट्रपति की अनुमति से | अनुच्छेद 18: उपाधियों का उन्मूलन |
2. स्वतन्त्रता का अधिकार (Right to Freedom) — अनुच्छेद 19–22
| अनुच्छेद | विषय | विस्तृत लेख |
|---|---|---|
| 19 | छह स्वतन्त्रताएँ — (a) वाक् एवं अभिव्यक्ति, (b) सम्मेलन, (c) संगम/संघ, (d) संचरण, (e) निवास, (g) वृत्ति/व्यापार। प्रेस की स्वतन्त्रता 19(1)(a) में निहित। सभी स्वतन्त्रताएँ "युक्तियुक्त निर्बन्धनों" के अधीन हैं। | अनुच्छेद 19: स्वतन्त्रता के अधिकार |
| 20 | अपराधों के लिए दोषसिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण — (1) कार्योत्तर विधि नहीं, (2) दोहरा दण्ड नहीं, (3) आत्म-अभिशंसन से संरक्षण | अनुच्छेद 20: दोषसिद्धि से संरक्षण |
| 21 | प्राण एवं दैहिक स्वतन्त्रता — "किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतन्त्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा।" सर्वाधिक विस्तृत व्याख्या वाला अनुच्छेद — गरिमा, निजता, स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण सभी इसमें सम्मिलित। | अनुच्छेद 21: जीवन एवं स्वतन्त्रता |
| 21-A | शिक्षा का अधिकार — 6 से 14 वर्ष के बालकों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (86वाँ संशोधन, 2002; RTE अधिनियम 2009) | अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार |
| 22 | गिरफ्तारी एवं निरोध से संरक्षण — कारण बताना, 24 घण्टे में मजिस्ट्रेट, विधिक सहायता का अधिकार; निवारक निरोध की सीमाएँ | अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी से संरक्षण |
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation) — अनुच्छेद 23–24
| अनुच्छेद | विषय | विस्तृत लेख |
|---|---|---|
| 23 | मानव तस्करी एवं बलात श्रम का निषेध — बेगार, बन्धुआ मज़दूरी, मानव दुर्व्यापार निषिद्ध | अनुच्छेद 23: मानव तस्करी निषेध |
| 24 | बाल श्रम का निषेध — 14 वर्ष से कम आयु के बालक कारखानों/खानों/खतरनाक कार्य में नहीं | अनुच्छेद 24: बाल श्रम निषेध |
4. धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) — अनुच्छेद 25–28
| अनुच्छेद | विषय | विस्तृत लेख |
|---|---|---|
| 25 | अन्तःकरण, धर्म के अबाध आचरण एवं प्रचार की स्वतन्त्रता | अनुच्छेद 25 |
| 26 | धार्मिक कार्यों के प्रबन्ध की स्वतन्त्रता | अनुच्छेद 26 |
| 27 | धर्म विशेष की अभिवृद्धि हेतु कर-मुक्ति | अनुच्छेद 27 |
| 28 | शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा से स्वतन्त्रता | अनुच्छेद 28 |
5. सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (Cultural & Educational Rights) — अनुच्छेद 29–30
| अनुच्छेद | विषय | विस्तृत लेख |
|---|---|---|
| 29 | अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि एवं संस्कृति का संरक्षण | अनुच्छेद 29 |
| 30 | अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित करने एवं प्रशासित करने का अधिकार | अनुच्छेद 30 |
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) — अनुच्छेद 32
डॉ. अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को "संविधान की आत्मा एवं हृदय" कहा। यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) में जाने का अधिकार देता है।
पाँच प्रकार की रिटें (Writs):
| रिट | अर्थ | प्रयोजन |
|---|---|---|
| बन्दी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) | "शरीर प्रस्तुत करो" | अवैध गिरफ्तारी/निरोध के विरुद्ध; व्यक्ति को न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश |
| परमादेश (Mandamus) | "हम आदेश देते हैं" | लोक अधिकारी को अपना कर्तव्य निभाने का आदेश |
| प्रतिषेध (Prohibition) | "मना करना" | अधीनस्थ न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य करने से रोकना |
| उत्प्रेषण (Certiorari) | "प्रमाणित करना" | अधीनस्थ न्यायालय/अधिकरण के निर्णय को उच्चतर न्यायालय में भेजना |
| अधिकार पृच्छा (Quo Warranto) | "किस अधिकार से?" | किसी व्यक्ति से पूछना कि वह किस अधिकार से लोक पद धारण कर रहा है |
राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles) — भाग IV
नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36–51) आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं। ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, किन्तु शासन के मूलभूत सिद्धान्त हैं और विधि निर्माण में राज्य का मार्गदर्शन करते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
| श्रेणी | प्रकृति | अनुच्छेद | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| समाजवादी | सामाजिक-आर्थिक न्याय | 38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47 | समान कार्य के लिए समान वेतन (39d), ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहन (43) |
| गांधीवादी | गांधीजी के सिद्धान्तों पर आधारित | 40, 43, 46, 47, 48 | ग्राम पंचायत (40), कुटीर उद्योग (43), मद्यनिषेध (47), गो-वध निषेध (48) |
| उदारवादी-बौद्धिक | उदार राजनीतिक विचारधारा | 44, 45, 48A, 49, 50, 51 | समान नागरिक संहिता (44), न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण (50), अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति (51) |
मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) — भाग IV-A
मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन (1976) द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर जोड़े गए। मूलतः 10 कर्तव्य थे; 86वें संशोधन (2002) ने 11वाँ कर्तव्य (6–14 वर्ष के बालकों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना) जोड़ा। ये सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित हैं।
अनुच्छेद 51A के अनुसार भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह:
| क्र. | कर्तव्य (संक्षेप में) |
|---|---|
| (a) | संविधान का पालन करे; राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का आदर करे |
| (b) | स्वतन्त्रता संग्राम के आदर्शों का पालन करे |
| (c) | भारत की सम्प्रभुता, एकता एवं अखण्डता की रक्षा करे |
| (d) | देश की रक्षा करे एवं राष्ट्र सेवा करे |
| (e) | समरसता एवं स्त्रियों की गरिमा के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करे |
| (f) | मिश्रित संस्कृति की समृद्ध विरासत का संरक्षण करे |
| (g) | प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन करे |
| (h) | वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद, ज्ञानार्जन की भावना विकसित करे |
| (i) | सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा करे; हिंसा से दूर रहे |
| (j) | व्यक्तिगत एवं सामूहिक श्रेष्ठता के लिए प्रयत्न करे |
| (k) | 6–14 वर्ष के बालकों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए (86वाँ संशोधन) |
— भाग 1 समाप्त —
प्रस्तावना · संविधान सभा · मौलिक अधिकार · DPSP · मौलिक कर्तव्य
→ भाग 2 पढ़ें: संघीय कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका, आपातकाल, संशोधन, MCQ अभ्यास →
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| मूल सिद्धान्त | प्रस्तावना · मूल संरचना · संरचना एवं विशेषताएँ · ऐतिहासिक पृष्ठभूमि |
|---|---|
| अधिकार एवं कर्तव्य | मौलिक अधिकार · नीति निदेशक तत्व · मौलिक कर्तव्य |
| संघीय शासन | राष्ट्रपति · प्रधानमंत्री · संसद · न्यायपालिका |
| राज्य एवं स्थानीय | राज्य सरकार · पंचायती राज · नगरपालिका |
| विशेष विषय | आपातकाल · संशोधन · निर्वाचन · अनु. 370 · अनु. 371 |
| MCQ अभ्यास | Set 5 · Set 4 · Set 3 · Set 2 · FR MCQs · Amendments MCQs · राजस्थान Polity 100 |
📘 भारत का संविधान — Complete Guide Series
- Part 1: संविधान का परिचय, निर्माण और विशेषताएँ
- Part 2: प्रस्तावना, मूल अधिकार, कर्तव्य और राज्य के नीति निर्देशक तत्व
यह श्रृंखला बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।


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