भारत का संविधान — सम्पूर्ण विश्वकोशीय गाइड (भाग 1) | प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, DPSP, कर्तव्य | UPSC RPSC RAS

📅 शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 📖 3-5 min read

भारत का संविधान

Constitution of India

इस लेख में भारत के संविधान का सम्पूर्ण विश्वकोशीय विवरण है। प्रत्येक अनुभाग में विस्तृत लेखों की कड़ियाँ (links) दी गई हैं — UPSC, RPSC, RAS, REET एवं समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह एक सम्पूर्ण संदर्भ ग्रन्थ है।
भारत का संविधान
Constitution of India
प्रकारसंप्रभु, लोकतांत्रिक, गणराज्य का लिखित संविधान
मूल शीर्षकThe Constitution of India
अधिकार क्षेत्रभारत गणराज्य
अंगीकृत26 नवम्बर 1949
प्रभावी26 जनवरी 1950
प्रणालीसंसदीय गणराज्य; संघीय ढाँचा
शाखाएँ3 — विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका
सदनद्विसदनीय (राज्य सभा + लोक सभा)
कार्यपालिका प्रमुखराष्ट्रपति (नाममात्र); प्रधानमंत्री (वास्तविक)
मूल अनुच्छेद395
वर्तमान अनुच्छेद470+ (संशोधनों सहित)
अनुसूचियाँमूलतः 8; वर्तमान में 12
मूल भाग22
भाषाहिन्दी एवं अंग्रेज़ी
संशोधन106 (दिसम्बर 2023 तक)
अन्तिम संशोधन106वाँ — महिला आरक्षण (नारी शक्ति वन्दन), 2023
संविधान सभा अध्यक्षडॉ. राजेन्द्र प्रसाद
प्रारूप समिति अध्यक्षडॉ. भीमराव अम्बेडकर
निर्माण अवधि2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन
खर्च₹63,96,729 (तत्कालीन)
मूल प्रतियाँहस्तलिखित; प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा द्वारा

भारत का संविधान (Constitution of India) विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान है, जो भारत गणराज्य के सर्वोच्च विधि (supreme law) के रूप में कार्य करता है। यह देश की राजनीतिक संरचना, शासन प्रणाली, नागरिकों के मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निदेशक तत्वों एवं मौलिक कर्तव्यों का निर्धारण करता है।

संविधान को संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया तथा 26 जनवरी 1950 को यह गणतंत्र दिवस के रूप में प्रभावी हुआ। इसने भारत शासन अधिनियम, 1935 को प्रतिस्थापित किया। अनुच्छेद 51A में वर्णित मौलिक कर्तव्यों के अनुसार प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों का सम्मान करे।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर, जिन्हें "भारतीय संविधान का जनक" कहा जाता है, ने संविधान के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। संविधान में ब्रिटिश, अमेरिकी, आयरिश, कनाडाई, ऑस्ट्रेलियाई, जर्मन, जापानी एवं दक्षिण अफ्रीकी संविधानों के सर्वोत्तम प्रावधानों का समावेश किया गया, जिससे यह एक अद्वितीय एवं व्यापक दस्तावेज़ बना।

विषय सूची
  1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    1. ब्रिटिश काल के अधिनियम
    2. संविधान की माँग
  2. संविधान सभा
    1. गठन एवं संरचना
    2. प्रमुख समितियाँ
    3. प्रारूप निर्माण प्रक्रिया
  3. प्रस्तावना
  4. संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
  5. मूल संरचना सिद्धान्त
  6. संविधान के भाग (Parts)
  7. अनुसूचियाँ (Schedules)
  8. मौलिक अधिकार (भाग III)
    1. समानता का अधिकार (अनु. 14–18)
    2. स्वतन्त्रता का अधिकार (अनु. 19–22)
    3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनु. 23–24)
    4. धार्मिक स्वतन्त्रता (अनु. 25–28)
    5. सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (अनु. 29–30)
    6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनु. 32)
  9. राज्य के नीति निदेशक तत्व (भाग IV)
  10. मौलिक कर्तव्य (भाग IV-A)
  11. संघीय कार्यपालिका
    1. राष्ट्रपति
    2. उपराष्ट्रपति
    3. प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद
  12. संसद
  13. न्यायपालिका
  14. राज्य सरकार
  15. पंचायती राज एवं स्थानीय शासन
  16. केन्द्र-राज्य सम्बन्ध
  17. आपातकालीन उपबन्ध
  18. निर्वाचन प्रणाली
  19. संविधान संशोधन
  20. नागरिकता
  21. विशेष अनुच्छेद (370, 371)
  22. संवैधानिक निकाय
  23. राजस्थान राजव्यवस्था
  24. प्रश्नोत्तरी एवं अभ्यास
  25. यह भी देखें
  26. सन्दर्भ एवं बाह्य कड़ियाँ

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय संविधान की जड़ें ब्रिटिश शासनकाल में हुए क्रमिक संवैधानिक विकास में मिलती हैं। 1600 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के आगमन से लेकर 1947 में स्वतन्त्रता प्राप्ति तक, भारत में शासन प्रणाली में अनेक परिवर्तन हुए जिन्होंने संविधान निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार की।

ब्रिटिश काल के प्रमुख अधिनियम

भारतीय संविधान पर सर्वाधिक प्रभाव भारत सरकार अधिनियम, 1935 का पड़ा, जिसे "भारतीय संविधान का जनक अधिनियम" भी कहा जाता है। वर्तमान संविधान का लगभग 70% भाग इसी अधिनियम से प्रेरित है।

वर्षअधिनियममुख्य प्रावधानसंवैधानिक महत्व
1773रेग्युलेटिंग एक्टबंगाल में गवर्नर जनरल; कलकत्ता उच्च न्यायालयप्रथम बार ब्रिटिश संसद ने भारत में शासन का नियमन किया
1784पिट्स इण्डिया एक्टबोर्ड ऑफ कंट्रोल; द्वैध शासनब्रिटिश सरकार का कम्पनी पर प्रत्यक्ष नियन्त्रण
1833चार्टर एक्टगवर्नर जनरल ऑफ इण्डिया; विधि आयोगकेन्द्रीकृत विधायी शक्ति; दास प्रथा उन्मूलन
1858भारत सरकार अधिनियमकम्पनी शासन समाप्त; ब्रिटिश क्राउन को सत्ताभारत सचिव एवं परिषद; वायसराय की उपाधि
1861भारतीय परिषद अधिनियमविधान परिषदों में भारतीयों का नामांकनविकेन्द्रीकरण की शुरुआत; पोर्टफोलियो प्रणाली
1892भारतीय परिषद अधिनियमअप्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआतबजट पर चर्चा का अधिकार
1909मार्ले-मिंटो सुधारपृथक निर्वाचन; मुस्लिम पृथक प्रतिनिधित्वसाम्प्रदायिक निर्वाचन की शुरुआत
1919मॉंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारद्वैध शासन (Dyarchy); प्रत्यक्ष निर्वाचनप्रान्तों में आंशिक उत्तरदायी सरकार
1935भारत सरकार अधिनियमप्रान्तीय स्वायत्तता; संघीय न्यायालय; तीन सूचियाँवर्तमान संविधान का प्रमुख स्रोत; 321 अनुच्छेद, 10 अनुसूचियाँ
1947भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियमभारत-पाक विभाजन; संविधान सभा को सम्प्रभुताअन्तरिम संविधान के रूप में 1935 अधिनियम लागू

संविधान की माँग

भारतीय संविधान की माँग का इतिहास भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ा है। 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने "स्वराज विधेयक" प्रस्तुत किया, जो भारतीयों द्वारा स्वशासन की प्रथम लिखित माँग थी। 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में नेहरू रिपोर्ट ने भारत के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया। इसमें मौलिक अधिकार, उत्तरदायी सरकार एवं डोमिनियन स्टेटस की माँग की गई। 1929 में लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ, और अन्ततः 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के अधीन संविधान सभा का गठन हुआ।

संविधान सभा

गठन एवं संरचना

संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के अन्तर्गत हुआ। इसकी कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई, जिसमें 296 सदस्य ब्रिटिश प्रान्तों से, 93 सदस्य देशी रियासतों से होने थे। विभाजन के पश्चात् कुल सदस्य संख्या 299 रह गई। सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई, जिसमें डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 11 दिसम्बर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।

13 दिसम्बर 1946 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने "उद्देश्य प्रस्ताव" (Objective Resolution) प्रस्तुत किया, जो संविधान के दर्शन एवं प्रस्तावना का आधार बना।

प्रमुख समितियाँ

समितिअध्यक्षकार्य
प्रारूप समिति (Drafting Committee)डॉ. भीमराव अम्बेडकरसंविधान का प्रारूप तैयार करना (7 सदस्य)
संघ शक्ति समितिपं. जवाहरलाल नेहरूकेन्द्र-राज्य शक्ति विभाजन
मौलिक अधिकार समितिसरदार वल्लभभाई पटेलमौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक अधिकार
प्रान्तीय संविधान समितिसरदार वल्लभभाई पटेलप्रान्तों का संविधान
संघ संविधान समितिपं. जवाहरलाल नेहरूसंघीय संविधान
कार्य संचालन समितिडॉ. के.एम. मुंशीसभा की कार्यवाही का संचालन
झण्डा समितिडॉ. राजेन्द्र प्रसादराष्ट्रीय ध्वज का डिज़ाइन

प्रारूप निर्माण प्रक्रिया

संविधान के प्रारूप पर कुल 11 सत्रों में विचार-विमर्श हुआ, 165 दिन बैठकें हुईं, जिनमें से 114 दिन प्रारूप पर चर्चा को समर्पित थे। कुल 7,635 संशोधन प्रस्तावित किये गए, जिनमें से 2,473 पर वास्तविक चर्चा हुई। अन्ततः 26 नवम्बर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया। इस दिन को भारत में "संविधान दिवस" के रूप में मनाया जाता है।

संविधान पर 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षर किये। मूल संविधान प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने कलम से सुलेख (calligraphy) में लिखा, तथा इसके प्रत्येक पृष्ठ को शान्तिनिकेतन के कलाकारों ने सज्जित किया।

प्रस्तावना (Preamble)

"हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पन्थनिरपेक्ष, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बन्धुता बढ़ाने के लिए — दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई. को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।" — भारत के संविधान की प्रस्तावना

प्रस्तावना को "संविधान की कुंजी" (Key to the Constitution) एवं "संविधान की आत्मा" कहा जाता है। इसमें संविधान के मूलभूत दर्शन — न्याय, स्वतन्त्रता, समता एवं बन्धुता — समाहित हैं।

प्रस्तावना के प्रमुख शब्द

शब्दअर्थ एवं विवरणस्रोत/संशोधन
सम्प्रभु (Sovereign)भारत किसी बाह्य शक्ति के अधीन नहीं; आन्तरिक एवं बाह्य मामलों में सर्वोच्चमूल प्रस्तावना (1950)
समाजवादी (Socialist)आर्थिक न्याय एवं सम्पत्ति का समान वितरण; मिश्रित अर्थव्यवस्था42वाँ संशोधन (1976)
पन्थनिरपेक्ष (Secular)राज्य का कोई राजधर्म नहीं; सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार42वाँ संशोधन (1976)
लोकतन्त्रात्मक (Democratic)जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासनमूल प्रस्तावना (1950)
गणराज्य (Republic)राज्य प्रमुख निर्वाचित (वंशानुगत नहीं)मूल प्रस्तावना (1950)
अखण्डता (Integrity)राष्ट्र की क्षेत्रीय अखण्डता एवं एकता42वाँ संशोधन (1976)

महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय: केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है, किन्तु इसे न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता। यह संविधान की व्याख्या में सहायक है।

संविधान की प्रमुख विशेषताएँ

भारतीय संविधान में विश्व के अनेक संविधानों की सर्वोत्तम विशेषताओं का समावेश है, जो इसे अद्वितीय बनाती हैं:

विशेषताविवरण
विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधानमूलतः 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ, 22 भाग; संशोधनों के बाद 470+ अनुच्छेद, 12 अनुसूचियाँ, 25 भाग
कठोर एवं लचीले का समन्वयअनुच्छेद 368: कुछ उपबन्ध साधारण बहुमत से, कुछ विशेष बहुमत से, कुछ राज्यों की सहमति से संशोधनीय
संघीय ढाँचा, एकात्मक प्रवृत्तिसामान्य काल में संघीय; आपातकाल में एकात्मक; मजबूत केन्द्र
संसदीय शासन प्रणालीब्रिटिश मॉडल; राष्ट्रपति नाममात्र, प्रधानमंत्री वास्तविक प्रमुख
एकल नागरिकतासंघीय ढाँचे के बावजूद केवल भारतीय नागरिकता
स्वतन्त्र एवं एकीकृत न्यायपालिकासर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर; उच्च एवं अधीनस्थ न्यायालय
मौलिक अधिकार एवं नीति निदेशक तत्वभाग III एवं भाग IV — न्यायसंगत एवं गैर-न्यायसंगत अधिकार
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार18 वर्ष (मूलतः 21 वर्ष; 61वें संशोधन, 1989 से 18 वर्ष)
धर्मनिरपेक्षताराज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं; सभी धर्मों को समान सम्मान
त्रि-स्तरीय सरकारकेन्द्र, राज्य एवं स्थानीय स्वशासन (73वाँ-74वाँ संशोधन)

विभिन्न देशों से लिये गए प्रावधान

देशउधार लिये गए प्रावधान
🇬🇧 ब्रिटेनसंसदीय प्रणाली, विधि का शासन, एकल नागरिकता, द्विसदनीय विधानमण्डल, कैबिनेट प्रणाली, संसदीय विशेषाधिकार
🇺🇸 अमेरिकामौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरवलोकन, राष्ट्रपति का निर्वाचन, स्वतन्त्र न्यायपालिका, उपराष्ट्रपति
🇮🇪 आयरलैंडनीति निदेशक तत्व, राष्ट्रपति के निर्वाचन की विधि, राज्य सभा में 12 मनोनीत सदस्य
🇨🇦 कनाडासंघीय ढाँचा (मजबूत केन्द्र), अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र में, राज्यपाल की नियुक्ति
🇦🇺 ऑस्ट्रेलियासमवर्ती सूची, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक, व्यापार की स्वतन्त्रता
🇩🇪 जर्मनीआपातकालीन उपबन्ध, मौलिक अधिकारों का निलम्बन
🇷🇺 रूस (तत्कालीन सोवियत संघ)मौलिक कर्तव्य, प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय
🇯🇵 जापानविधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (अनुच्छेद 21)
🇿🇦 दक्षिण अफ्रीकासंविधान संशोधन की प्रक्रिया, राज्य सभा के सदस्यों का निर्वाचन
🇫🇷 फ्रांसगणराज्य, प्रस्तावना में स्वतन्त्रता, समता एवं बन्धुता

मूल संरचना सिद्धान्त (Basic Structure Doctrine)

केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने निर्धारित किया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, किन्तु उसकी "मूल संरचना" को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती। यह सिद्धान्त भारतीय संवैधानिक विधिशास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।

मूल संरचना के तत्व (विभिन्न निर्णयों में स्थापित):

तत्वस्थापित करने वाला निर्णय
संविधान की सर्वोच्चताकेशवानन्द भारती (1973)
विधि का शासनइंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975)
शक्ति पृथक्करणकेशवानन्द भारती (1973)
न्यायिक पुनरवलोकनमिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)
मौलिक अधिकारमिनर्वा मिल्स (1980)
धर्मनिरपेक्षताएस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)
संघवादकेशवानन्द भारती (1973)
गणराज्यात्मक स्वरूपकेशवानन्द भारती (1973)
स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनावइंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975)
संविधान संशोधन की सीमित शक्तिकेशवानन्द भारती (1973)

संविधान के भाग (Parts of the Constitution)

भारतीय संविधान को 25 भागों (Parts) में विभाजित किया गया है, जो संविधान के विभिन्न पक्षों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करते हैं:

भागविषयअनुच्छेदविस्तृत लेख
Iसंघ और उसका राज्यक्षेत्र1–4
IIनागरिकता5–11नागरिकता और अधिकार
IIIमौलिक अधिकार12–35मौलिक अधिकार (अनु. 12–35)
IVनीति निदेशक तत्व36–51DPSP (अनु. 36–51)
IV-Aमौलिक कर्तव्य51-Aमौलिक कर्तव्य (अनु. 51A)
Vसंघ (कार्यपालिका, संसद, विधायी शक्तियाँ, न्यायपालिका)52–151संघीय कार्यपालिका
VIराज्य (राज्यपाल, विधानमण्डल, उच्च न्यायालय)152–237राज्य कार्यपालिका
VIIप्रथम अनुसूची के B भाग के राज्य (निरसित)238भाग VII विवरण
VIIIकेन्द्रशासित प्रदेश239–242केन्द्रशासित प्रदेश
IXपंचायतें243–243Oपंचायत राज व्यवस्था
IX-Aनगरपालिकाएँ243P–243ZGनगरपालिका (Urban Local Bodies)
IX-Bसहकारी समितियाँ243ZH–243ZTसहकारी समितियाँ
Xअनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र244–244Aअनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र
XIसंघ-राज्य सम्बन्ध245–263केन्द्र-राज्य सम्बन्ध
XIIवित्त, सम्पत्ति, संविदा264–300Aवित्त एवं सम्पत्ति
XIIIव्यापार, वाणिज्य301–307व्यापार एवं वाणिज्य
XIVसंघ एवं राज्य के अधीन सेवाएँ308–323लोक सेवाएँ
XIV-Aन्यायाधिकरण323A–323Bन्यायाधिकरण (Tribunals)
XVनिर्वाचन324–329Aचुनाव (Elections)
XVIविशेष वर्गों हेतु प्रावधान330–342Aअनुसूचित जाति/जनजाति प्रावधान
XVIIराजभाषा343–351राजभाषा (Official Language)
XVIIIआपातकालीन उपबन्ध352–360आपातकालीन उपबन्ध
XIXविविध361–367विविध उपबन्ध
XXसंविधान संशोधन368संविधान संशोधन
XXIअस्थायी, संक्रमणकालीन प्रावधान369–392अस्थायी प्रावधान
XXIIसंक्षिप्त नाम, प्रारम्भ393–395संक्षिप्त नाम एवं प्रारम्भ

अनुसूचियाँ (Schedules)

अनु.विषयसम्बन्धित अनुच्छेदविवरण
1राज्य एवं केन्द्रशासित प्रदेश1 एवं 428 राज्य + 8 केन्द्रशासित प्रदेश
2वेतन, भत्ते, पेंशन59, 65, 75 आदिराष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीश आदि
3शपथ एवं प्रतिज्ञान75, 99, 124 आदिपदाधिकारियों की शपथ के प्रारूप
4राज्य सभा में स्थानों का आवंटन4(1) एवं 80(2)राज्यवार सीटों का विभाजन
5अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन244(1)जनजातीय क्षेत्रों की शासन व्यवस्था
6असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम244(2) एवं 275(1)पूर्वोत्तर जनजातीय क्षेत्र प्रशासन
7तीन सूचियाँ246संघ सूची (100), राज्य सूची (61), समवर्ती सूची (52)
8भाषाएँ344(1) एवं 35122 भाषाएँ (मूलतः 14; 92वें संशोधन से 22)
9भूमि सुधार अधिनियम31-Bन्यायिक समीक्षा से संरक्षित (1951 में जोड़ी गई)
10दल-बदल विरोधी कानून102(2), 191(2)52वें संशोधन (1985) से जोड़ी गई
11पंचायत की शक्तियाँ243-G73वें संशोधन (1992) से; 29 विषय
12नगरपालिका की शक्तियाँ243-W74वें संशोधन (1992) से; 18 विषय

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) — भाग III

संविधान का भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) भारतीय नागरिकों को छह प्रकार के मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ये अधिकार अमेरिकी संविधान के "बिल ऑफ राइट्स" से प्रेरित हैं और न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (justiciable) हैं। मूलतः सात अधिकार थे; 44वें संशोधन (1978) ने सम्पत्ति के अधिकार (अनु. 31) को हटाकर इसे विधिक अधिकार (अनु. 300-A) बना दिया।

1. समानता का अधिकार (Right to Equality) — अनुच्छेद 14–18

अनुच्छेदविषयविस्तृत लेख
14विधि के समक्ष समता — राज्य किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। "युक्तियुक्त वर्गीकरण" (Reasonable Classification) अनुमत है।अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार
15भेदभाव का निषेध — धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव निषिद्ध। राज्य अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं एवं बालकों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है।अनुच्छेद 15: भेदभाव का निषेध
16लोक नियोजन में अवसर की समता — सरकारी नौकरी में समान अवसर; पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अनुमत।अनुच्छेद 16: रोजगार में समानता
17अस्पृश्यता का उन्मूलन — छुआछूत दण्डनीय अपराध; नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता उन्मूलन
18उपाधियों का अन्त — सैनिक या शैक्षणिक उपाधि के अतिरिक्त कोई उपाधि नहीं; विदेशी उपाधि राष्ट्रपति की अनुमति सेअनुच्छेद 18: उपाधियों का उन्मूलन

2. स्वतन्त्रता का अधिकार (Right to Freedom) — अनुच्छेद 19–22

अनुच्छेदविषयविस्तृत लेख
19छह स्वतन्त्रताएँ — (a) वाक् एवं अभिव्यक्ति, (b) सम्मेलन, (c) संगम/संघ, (d) संचरण, (e) निवास, (g) वृत्ति/व्यापार। प्रेस की स्वतन्त्रता 19(1)(a) में निहित। सभी स्वतन्त्रताएँ "युक्तियुक्त निर्बन्धनों" के अधीन हैं।अनुच्छेद 19: स्वतन्त्रता के अधिकार
20अपराधों के लिए दोषसिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण — (1) कार्योत्तर विधि नहीं, (2) दोहरा दण्ड नहीं, (3) आत्म-अभिशंसन से संरक्षणअनुच्छेद 20: दोषसिद्धि से संरक्षण
21प्राण एवं दैहिक स्वतन्त्रता — "किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतन्त्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा।" सर्वाधिक विस्तृत व्याख्या वाला अनुच्छेद — गरिमा, निजता, स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण सभी इसमें सम्मिलित।अनुच्छेद 21: जीवन एवं स्वतन्त्रता
21-Aशिक्षा का अधिकार — 6 से 14 वर्ष के बालकों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (86वाँ संशोधन, 2002; RTE अधिनियम 2009)अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार
22गिरफ्तारी एवं निरोध से संरक्षण — कारण बताना, 24 घण्टे में मजिस्ट्रेट, विधिक सहायता का अधिकार; निवारक निरोध की सीमाएँअनुच्छेद 22: गिरफ्तारी से संरक्षण

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right Against Exploitation) — अनुच्छेद 23–24

अनुच्छेदविषयविस्तृत लेख
23मानव तस्करी एवं बलात श्रम का निषेध — बेगार, बन्धुआ मज़दूरी, मानव दुर्व्यापार निषिद्धअनुच्छेद 23: मानव तस्करी निषेध
24बाल श्रम का निषेध — 14 वर्ष से कम आयु के बालक कारखानों/खानों/खतरनाक कार्य में नहींअनुच्छेद 24: बाल श्रम निषेध

4. धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) — अनुच्छेद 25–28

अनुच्छेदविषयविस्तृत लेख
25अन्तःकरण, धर्म के अबाध आचरण एवं प्रचार की स्वतन्त्रताअनुच्छेद 25
26धार्मिक कार्यों के प्रबन्ध की स्वतन्त्रताअनुच्छेद 26
27धर्म विशेष की अभिवृद्धि हेतु कर-मुक्तिअनुच्छेद 27
28शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा से स्वतन्त्रताअनुच्छेद 28

5. सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार (Cultural & Educational Rights) — अनुच्छेद 29–30

अनुच्छेदविषयविस्तृत लेख
29अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि एवं संस्कृति का संरक्षणअनुच्छेद 29
30अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित करने एवं प्रशासित करने का अधिकारअनुच्छेद 30

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) — अनुच्छेद 32

डॉ. अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को "संविधान की आत्मा एवं हृदय" कहा। यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) में जाने का अधिकार देता है।

पाँच प्रकार की रिटें (Writs):

रिटअर्थप्रयोजन
बन्दी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)"शरीर प्रस्तुत करो"अवैध गिरफ्तारी/निरोध के विरुद्ध; व्यक्ति को न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश
परमादेश (Mandamus)"हम आदेश देते हैं"लोक अधिकारी को अपना कर्तव्य निभाने का आदेश
प्रतिषेध (Prohibition)"मना करना"अधीनस्थ न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य करने से रोकना
उत्प्रेषण (Certiorari)"प्रमाणित करना"अधीनस्थ न्यायालय/अधिकरण के निर्णय को उच्चतर न्यायालय में भेजना
अधिकार पृच्छा (Quo Warranto)"किस अधिकार से?"किसी व्यक्ति से पूछना कि वह किस अधिकार से लोक पद धारण कर रहा है

राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles) — भाग IV

नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36–51) आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं। ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, किन्तु शासन के मूलभूत सिद्धान्त हैं और विधि निर्माण में राज्य का मार्गदर्शन करते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

श्रेणीप्रकृतिअनुच्छेदउदाहरण
समाजवादीसामाजिक-आर्थिक न्याय38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47समान कार्य के लिए समान वेतन (39d), ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहन (43)
गांधीवादीगांधीजी के सिद्धान्तों पर आधारित40, 43, 46, 47, 48ग्राम पंचायत (40), कुटीर उद्योग (43), मद्यनिषेध (47), गो-वध निषेध (48)
उदारवादी-बौद्धिकउदार राजनीतिक विचारधारा44, 45, 48A, 49, 50, 51समान नागरिक संहिता (44), न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण (50), अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति (51)
मौलिक अधिकार बनाम नीति निदेशक तत्व: मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकार एवं DPSP परस्पर पूरक हैं, एक-दूसरे के विरोधी नहीं। दोनों में सन्तुलन संविधान की मूल संरचना है।

मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) — भाग IV-A

मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन (1976) द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर जोड़े गए। मूलतः 10 कर्तव्य थे; 86वें संशोधन (2002) ने 11वाँ कर्तव्य (6–14 वर्ष के बालकों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना) जोड़ा। ये सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित हैं।

अनुच्छेद 51A के अनुसार भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह:

क्र.कर्तव्य (संक्षेप में)
(a)संविधान का पालन करे; राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगान का आदर करे
(b)स्वतन्त्रता संग्राम के आदर्शों का पालन करे
(c)भारत की सम्प्रभुता, एकता एवं अखण्डता की रक्षा करे
(d)देश की रक्षा करे एवं राष्ट्र सेवा करे
(e)समरसता एवं स्त्रियों की गरिमा के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करे
(f)मिश्रित संस्कृति की समृद्ध विरासत का संरक्षण करे
(g)प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन करे
(h)वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद, ज्ञानार्जन की भावना विकसित करे
(i)सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा करे; हिंसा से दूर रहे
(j)व्यक्तिगत एवं सामूहिक श्रेष्ठता के लिए प्रयत्न करे
(k)6–14 वर्ष के बालकों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए (86वाँ संशोधन)

— भाग 1 समाप्त —

प्रस्तावना · संविधान सभा · मौलिक अधिकार · DPSP · मौलिक कर्तव्य

भाग 2 पढ़ें: संघीय कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका, आपातकाल, संशोधन, MCQ अभ्यास →

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