भारत का संविधान — भाग 2
Constitution of India — Part 2: Union Executive to MCQ Practice
पार्ट 1 अवश्य पढ़े
विषय सूची — भाग 2
संघीय कार्यपालिका (Union Executive)
भारत में संसदीय शासन प्रणाली है जिसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद सम्मिलित हैं। अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा, और अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी।
राष्ट्रपति (President of India)
| संवैधानिक स्थिति | राज्य का प्रमुख (नाममात्र कार्यपालिका) |
|---|---|
| अनुच्छेद | 52–62 |
| निर्वाचन | अप्रत्यक्ष; निर्वाचक मण्डल (Electoral College) |
| निर्वाचक मण्डल | संसद के दोनों सदनों + राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (पुनर्निर्वाचन सम्भव) |
| योग्यता | भारतीय नागरिक, 35+ वर्ष, लोक सभा सदस्यता हेतु योग्य |
| महाभियोग | अनुच्छेद 61; संविधान के अतिक्रमण पर |
| शपथ | सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा |
राष्ट्रपति की शक्तियाँ संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में वर्णित हैं:
| शक्ति का प्रकार | विवरण | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| कार्यपालिका शक्तियाँ | प्रधानमंत्री, न्यायाधीश, राज्यपाल, CAG, अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति; सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति | 53, 74, 75, 76, 124, 155, 217 |
| विधायी शक्तियाँ | संसद का सत्र बुलाना/सत्रावसान; लोक सभा भंग करना; अध्यादेश; राज्य सभा में 12 सदस्य मनोनीत | 85, 86, 87, 108, 111, 123 |
| न्यायिक शक्तियाँ | क्षमादान, लघुकरण, विराम, परिहार (अनु. 72); सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श (अनु. 143) | 72, 143 |
| आपातकालीन शक्तियाँ | राष्ट्रीय आपातकाल (352), राष्ट्रपति शासन (356), वित्तीय आपातकाल (360) | 352, 356, 360 |
| वीटो शक्तियाँ | आत्यन्तिक वीटो (रोक रखना), निलम्बनकारी वीटो (पुनर्विचार), जेबी वीटो (कोई कार्रवाई न करना) | 111 |
उपराष्ट्रपति (Vice President)
उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63–71) भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। इसका निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (निर्वाचित + मनोनीत) से मिलकर बने निर्वाचक मण्डल द्वारा होता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, त्यागपत्र, मृत्यु या महाभियोग की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है (अधिकतम 6 माह)।
प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद (Prime Minister & Council of Ministers)
प्रधानमंत्री (अनुच्छेद 74–75) भारत सरकार का वास्तविक प्रमुख है। अनुच्छेद 74(1) के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी। 42वें संशोधन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा (44वें संशोधन ने पुनर्विचार का अधिकार दिया, किन्तु पुनः प्राप्त सलाह बाध्यकारी)।
| पद | भूमिका | संख्या सीमा |
|---|---|---|
| कैबिनेट मंत्री | नीति-निर्माण; कैबिनेट बैठकों में भागीदारी | कुल मंत्रियों की संख्या लोक सभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं (91वाँ संशोधन, 2003) |
| राज्य मंत्री | स्वतन्त्र प्रभार या कैबिनेट मंत्री के अधीन | |
| उपमंत्री | कैबिनेट/राज्य मंत्री की सहायता |
सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3)): मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी है। व्यक्तिगत उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(2)): प्रत्येक मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है।
संसद (Parliament)
भारतीय संसद (अनुच्छेद 79) तीन अंगों से मिलकर बनती है: राष्ट्रपति, राज्य सभा (उच्च सदन) एवं लोक सभा (निम्न सदन)।
| विषय | राज्य सभा (Council of States) | लोक सभा (House of the People) |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 80 | 81 |
| अधिकतम सदस्य | 250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत) | 552 (530 राज्य + 20 केन्द्रशासित + 2 मनोनीत आंग्ल-भारतीय*) |
| वर्तमान सदस्य | 245 | 543 |
| निर्वाचन | अप्रत्यक्ष; राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा | प्रत्यक्ष; सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार |
| कार्यकाल | स्थायी सदन; 1/3 सदस्य प्रत्येक 2 वर्ष में सेवानिवृत्त | 5 वर्ष (शीघ्र विघटन सम्भव) |
| न्यूनतम आयु | 30 वर्ष | 25 वर्ष |
| पीठासीन अधिकारी | सभापति (उपराष्ट्रपति) एवं उपसभापति | अध्यक्ष (Speaker) एवं उपाध्यक्ष |
| विशेष शक्ति | राज्य सूची पर कानून बनाने का प्राधिकार (अनु. 249) | धन विधेयक केवल लोक सभा में पुरःस्थापित |
*104वें संशोधन (2020) से आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त
विधेयक प्रक्रिया (Legislative Process)
भारतीय संसद में विधेयक तीन प्रकार के होते हैं: साधारण विधेयक (किसी भी सदन में प्रस्तुत), धन विधेयक (अनुच्छेद 110; केवल लोक सभा में), एवं संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368)। प्रत्येक विधेयक तीन वाचन (readings) से गुजरता है — प्रथम वाचन (परिचय), द्वितीय वाचन (समिति चर्चा एवं खण्डवार विचार), तृतीय वाचन (मतदान)। दोनों सदनों से पारित होने के पश्चात् विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा जाता है।
संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108): साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है। अभी तक केवल तीन बार संयुक्त बैठक हुई है — दहेज निषेध विधेयक (1961), बैंकिंग सेवा आयोग विधेयक (1978), और आतंकवाद निवारण विधेयक (2002)।
न्यायपालिका (Judiciary)
भारत में एकीकृत एवं स्वतन्त्र न्यायपालिका है जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) है। यह अमेरिकी एवं ब्रिटिश दोनों मॉडलों का मिश्रण है — न्यायिक पुनरवलोकन (Judicial Review) अमेरिका से तथा विधि का शासन (Rule of Law) ब्रिटेन से लिया गया।
| विषय | सर्वोच्च न्यायालय | उच्च न्यायालय | अधीनस्थ न्यायालय |
|---|---|---|---|
| अनुच्छेद | 124–147 | 214–232 | 233–237 |
| स्थापना | 28 जनवरी 1950, दिल्ली | प्रत्येक राज्य/समूह हेतु | जिला स्तर |
| न्यायाधीश संख्या | 1 CJI + 33 अन्य = 34 | राज्यानुसार भिन्न | — |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति; कॉलेजियम की सिफारिश | राष्ट्रपति; CJI + राज्यपाल से परामर्श | राज्यपाल; उच्च न्यायालय से परामर्श |
| योग्यता | भारतीय नागरिक; HC न्यायाधीश 5+ वर्ष या HC अधिवक्ता 10+ वर्ष | भारतीय नागरिक; जिला न्यायाधीश 10+ वर्ष या HC अधिवक्ता 10+ वर्ष | — |
| कार्यकाल | 65 वर्ष की आयु तक | 62 वर्ष की आयु तक | — |
| अधिकार क्षेत्र | मूल, अपीलीय, सलाहकारी, रिट (अनु. 32) | मूल, अपीलीय, रिट (अनु. 226), अधीक्षण (अनु. 227) | जिला स्तरीय |
न्यायिक पुनरवलोकन (Judicial Review) भारतीय संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग है। सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय किसी भी विधि या कार्यपालिका आदेश को संविधान के विरुद्ध घोषित कर सकते हैं। जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा ने न्यायपालिका को न्यायिक सक्रियता का एक शक्तिशाली उपकरण दिया है।
राज्य सरकार (State Government)
संविधान का भाग VI (अनुच्छेद 152–237) राज्य सरकार की संरचना का वर्णन करता है। राज्य स्तर पर शासन प्रणाली केन्द्र के समानान्तर है — राज्यपाल (नाममात्र प्रमुख), मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद (वास्तविक कार्यपालिका), विधानमण्डल एवं उच्च न्यायालय।
| पद/संस्था | केन्द्र में समकक्ष | अनुच्छेद | विशेषता |
|---|---|---|---|
| राज्यपाल | राष्ट्रपति | 153–162 | राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त (निर्वाचित नहीं); 5 वर्ष; राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त |
| मुख्यमंत्री | प्रधानमंत्री | 163–167 | बहुमत दल का नेता; वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख |
| विधान सभा | लोक सभा | 170 | प्रत्यक्ष निर्वाचन; 60–500 सदस्य; 5 वर्ष |
| विधान परिषद | राज्य सभा | 171 | केवल 6 राज्यों में; 1/3 विधान सभा से, 1/3 स्थानीय निकाय, 1/12 शिक्षक, 1/12 स्नातक, 1/6 राज्यपाल मनोनीत |
| उच्च न्यायालय | सर्वोच्च न्यायालय | 214–232 | 25 उच्च न्यायालय; मूल एवं अपीलीय क्षेत्राधिकार |
राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ: विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना, राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन (5वीं/6ठी अनुसूची), एवं असम में जनजातीय क्षेत्र परिषद। राज्यपाल पद को लेकर केन्द्र-राज्य विवाद सदैव चर्चा का विषय रहा है।
पंचायती राज एवं स्थानीय शासन
73वें संशोधन (1992) ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया (भाग IX, अनुच्छेद 243–243O)। 74वें संशोधन (1992) ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक मान्यता दी (भाग IX-A, अनुच्छेद 243P–243ZG)। ये दोनों संशोधन 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुए।
पंचायती राज — त्रि-स्तरीय संरचना
| स्तर | संस्था | क्षेत्र | प्रमुख |
|---|---|---|---|
| ग्राम स्तर | ग्राम पंचायत | गाँव/गाँवों का समूह | सरपंच |
| खण्ड स्तर | पंचायत समिति | विकास खण्ड (Block) | प्रधान |
| जिला स्तर | जिला परिषद | जिला | जिला प्रमुख |
प्रमुख प्रावधान: SC/ST के लिए जनसंख्या अनुपात में आरक्षण (अनु. 243D); महिलाओं के लिए कम-से-कम 1/3 आरक्षण; 5 वर्ष का कार्यकाल; राज्य वित्त आयोग (अनु. 243I); राज्य निर्वाचन आयोग (अनु. 243K); 11वीं अनुसूची में 29 विषय। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की तैयारियाँ इसी संवैधानिक ढाँचे के अन्तर्गत हो रही हैं।
केन्द्र-राज्य सम्बन्ध (Centre-State Relations)
संविधान का भाग XI (अनुच्छेद 245–263) केन्द्र-राज्य सम्बन्धों को तीन आयामों में विभाजित करता है:
| आयाम | अनुच्छेद | मुख्य बिन्दु |
|---|---|---|
| विधायी सम्बन्ध | 245–255 | तीन सूचियाँ (7वीं अनुसूची): संघ सूची (100 विषय — रक्षा, विदेश, मुद्रा), राज्य सूची (61 विषय — पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि), समवर्ती सूची (52 विषय — शिक्षा, वन, श्रम); टकराव पर केन्द्रीय विधि प्रबल; अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र में (अनु. 248) |
| प्रशासनिक सम्बन्ध | 256–263 | केन्द्र के निर्देशों का पालन (अनु. 256); अखिल भारतीय सेवाएँ (अनु. 312); अन्तर्राज्य परिषद (अनु. 263) |
| वित्तीय सम्बन्ध | 268–293 | करों का विभाजन; अनुदान (अनु. 275); वित्त आयोग (अनु. 280); GST परिषद (अनु. 279A — 101वाँ संशोधन) |
सरकारिया आयोग (1983) एवं पुंछी आयोग (2007) ने केन्द्र-राज्य सम्बन्धों पर महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं, जिनमें सहकारी संघवाद को बल देने पर जोर दिया गया।
आपातकालीन उपबन्ध (Emergency Provisions)
संविधान का भाग XVIII (अनुच्छेद 352–360) तीन प्रकार के आपातकाल का प्रावधान करता है, जो जर्मन संविधान (वाइमर) से प्रेरित हैं:
| प्रकार | अनुच्छेद | आधार | घोषणा | प्रभाव | अनुमोदन |
|---|---|---|---|---|---|
| राष्ट्रीय आपातकाल | 352 | युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह (मूलतः "आन्तरिक अशान्ति"; 44वें संशोधन से परिवर्तित) | राष्ट्रपति; मंत्रिमण्डल की लिखित सिफारिश | मौलिक अधिकार (अनु. 19) स्वतः निलम्बित; अनु. 20–21 कभी निलम्बित नहीं (44वाँ संशोधन) | 1 माह में संसद; विशेष बहुमत; 6-6 माह विस्तार |
| राष्ट्रपति शासन | 356 | राज्य में संवैधानिक तन्त्र की विफलता | राष्ट्रपति; राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्यथा | राज्य सरकार भंग/निलम्बित; राज्य की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में; विधानसभा भंग/निलम्बित | 2 माह में संसद; अधिकतम 3 वर्ष (6-6 माह विस्तार) |
| वित्तीय आपातकाल | 360 | भारत की वित्तीय स्थिरता/प्रत्यय को खतरा | राष्ट्रपति | सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कटौती; राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति नियन्त्रण | 2 माह में संसद |
ऐतिहासिक तथ्य: भारत में राष्ट्रीय आपातकाल तीन बार घोषित हुआ — 1962 (चीन युद्ध), 1971 (पाक युद्ध), एवं 1975 (आन्तरिक अशान्ति; 25 जून 1975 — 21 मार्च 1977)। राष्ट्रपति शासन 100 से अधिक बार लगाया गया। वित्तीय आपातकाल आज तक कभी घोषित नहीं हुआ।
एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) निर्णय ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक पुनरवलोकन के अधीन है, और धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल संरचना है।
निर्वाचन प्रणाली (Electoral System)
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) एक स्वतन्त्र संवैधानिक निकाय है (अनुच्छेद 324) जो स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है। इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं दो अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| निर्वाचन प्रणाली | लोक सभा/विधान सभा: सर्वाधिक मत प्राप्त व्यक्ति विजयी (FPTP); राज्य सभा/राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति: एकल संक्रमणीय मत (STV) — आनुपातिक प्रतिनिधित्व |
| मतदान आयु | 18 वर्ष (61वाँ संशोधन, 1989) |
| चुनाव चिह्न | निर्वाचन आयोग द्वारा आवंटित; राष्ट्रीय/राज्यीय/पंजीकृत दल |
| आचार संहिता | चुनाव घोषणा से मतगणना तक लागू |
| EVM एवं VVPAT | इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन; पेपर ट्रेल सत्यापन |
| NOTA | "इनमें से कोई नहीं" — 2013 से (PUCL बनाम भारत संघ) |
| दल-बदल विरोधी कानून | 10वीं अनुसूची; 52वाँ संशोधन (1985); 91वें संशोधन (2003) ने 1/3 विभाजन प्रावधान समाप्त किया |
मतदाता पंजीकरण एवं निर्वाचक नामावली संशोधन के लिए प्ररूप-1 (नाम जोड़ना), प्ररूप-2 (नाम हटाना) एवं प्ररूप-3 (विवरण संशोधन) का प्रयोग होता है।
संविधान संशोधन (Constitutional Amendment)
अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित करता है। भारतीय संविधान न तो पूर्णतः कठोर है और न ही पूर्णतः लचीला — यह दोनों का मिश्रण है:
| संशोधन की विधि | प्रक्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| साधारण बहुमत (अनु. 368 के बाहर) | संसद का साधारण बहुमत | नये राज्य का निर्माण (अनु. 2–3), नागरिकता (अनु. 11), राज्य सभा में प्रतिनिधित्व (अनु. 169) |
| विशेष बहुमत | प्रत्येक सदन में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 + कुल सदस्यता का बहुमत | मौलिक अधिकार, DPSP, अधिकांश संशोधन |
| विशेष बहुमत + राज्य अनुसमर्थन | विशेष बहुमत + कम-से-कम आधे राज्यों की विधान सभाओं की सहमति | राष्ट्रपति निर्वाचन (अनु. 54), SC/HC (अनु. 124/214), शक्ति विभाजन (7वीं अनुसूची), संशोधन प्रक्रिया (अनु. 368 स्वयं) |
UPSC की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण संशोधन
| संशोधन | वर्ष | विषय |
|---|---|---|
| 1st | 1951 | 9वीं अनुसूची; मौलिक अधिकारों पर युक्तियुक्त प्रतिबन्ध; भूमि सुधार |
| 7th | 1956 | राज्य पुनर्गठन; A/B/C/D श्रेणी समाप्त |
| 24th | 1971 | संसद की संविधान संशोधन शक्ति स्पष्ट; राष्ट्रपति की अनुमति अनिवार्य |
| 42nd | 1976 | "मिनी संविधान"; समाजवादी, पन्थनिरपेक्ष, अखण्डता जोड़े; मौलिक कर्तव्य; DPSP को FR पर वरीयता |
| 44th | 1978 | 42वें में सुधार; सम्पत्ति मौलिक अधिकार से हटाया; आन्तरिक अशान्ति → सशस्त्र विद्रोह; अनु. 20–21 आपातकाल में भी संरक्षित |
| 52nd | 1985 | दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) |
| 61st | 1989 | मतदान आयु 21 → 18 वर्ष |
| 73rd | 1992 | पंचायती राज संवैधानिक दर्जा (भाग IX, 11वीं अनुसूची) |
| 74th | 1992 | नगरपालिका संवैधानिक दर्जा (भाग IX-A, 12वीं अनुसूची) |
| 86th | 2002 | अनुच्छेद 21-A शिक्षा का मौलिक अधिकार; 11वाँ मौलिक कर्तव्य |
| 91st | 2003 | मंत्रिपरिषद 15% सीमा; 1/3 दल-बदल छूट समाप्त |
| 97th | 2011 | सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा (भाग IX-B) |
| 99th | 2014 | NJAC (राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग) — सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित |
| 101st | 2016 | GST; अनुच्छेद 246A; GST परिषद (अनु. 279A) |
| 103rd | 2019 | आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण |
| 104th | 2020 | SC/ST आरक्षण 10 वर्ष विस्तार; आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त |
| 106th | 2023 | नारी शक्ति वन्दन अधिनियम — लोक सभा/विधान सभा में महिलाओं को 1/3 आरक्षण |
नागरिकता (Citizenship)
संविधान का भाग II (अनुच्छेद 5–11) नागरिकता का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता से सम्बन्धित विधि बनाने का अधिकार देता है, जिसके अन्तर्गत नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया गया। भारत में एकल नागरिकता है — अर्थात् कोई राज्य नागरिकता नहीं, केवल भारतीय नागरिकता।
नागरिकता प्राप्ति के पाँच आधार: जन्म, वंशानुक्रम, पंजीकरण, देशीयकरण (Naturalisation), एवं भूभाग समाविष्ट होने पर। नागरिकता की समाप्ति: स्वैच्छिक त्याग, अन्य देश की नागरिकता ग्रहण, या सरकार द्वारा वंचित करने पर (कपट, अनिष्ठा, शत्रु देश से व्यापार आदि)। OCI (Overseas Citizen of India) कार्ड प्रवासी भारतीयों को सीमित अधिकार प्रदान करता है।
विशेष अनुच्छेद (370, 371)
अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश (C.O. 272) एवं संसदीय प्रस्ताव द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया तथा जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केन्द्रशासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) एवं लद्दाख (बिना विधानसभा) — में विभाजित किया। 11 दिसम्बर 2023 को सर्वोच्च न्यायालय की 5 न्यायाधीशों की पीठ ने इस निर्णय को संवैधानिक घोषित किया।
अनुच्छेद 371 (371 से 371-J) विभिन्न राज्यों को विशेष प्रावधान प्रदान करता है — महाराष्ट्र-गुजरात (371), नागालैण्ड (371A), असम (371B), मणिपुर (371C), आन्ध्र प्रदेश/तेलंगाना (371D-E), सिक्किम (371F), मिज़ोरम (371G), अरुणाचल (371H), गोवा (371I), कर्नाटक (371J)।
संवैधानिक एवं वैधानिक निकाय
| निकाय | अनुच्छेद | अध्यक्ष/प्रमुख की नियुक्ति | मुख्य कार्य |
|---|---|---|---|
| निर्वाचन आयोग | 324 | राष्ट्रपति | स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव |
| संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) | 315–323 | राष्ट्रपति | अखिल भारतीय सेवा भर्ती |
| राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC आदि) | 315–323 | राज्यपाल | राज्य सेवा भर्ती |
| वित्त आयोग | 280 | राष्ट्रपति | केन्द्र-राज्य कर विभाजन; अनुदान |
| नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) | 148–151 | राष्ट्रपति | सरकारी लेखा परीक्षा; "सार्वजनिक कोष का संरक्षक" |
| अटॉर्नी जनरल | 76 | राष्ट्रपति | सरकार का प्रमुख विधि अधिकारी |
| राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग | 338 | राष्ट्रपति | SC अधिकारों की निगरानी |
| राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग | 338-A | राष्ट्रपति | ST अधिकारों की निगरानी |
| राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग | 338-B | राष्ट्रपति | OBC कल्याण |
| अन्तर्राज्य परिषद | 263 | प्रधानमंत्री | केन्द्र-राज्य समन्वय |
| GST परिषद | 279A | केन्द्रीय वित्त मंत्री | GST दरें एवं नीति |
राजस्थान राजव्यवस्था
राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजव्यवस्था संविधान के भाग VI के अनुसार संगठित है:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| विधान सभा | 200 सदस्य (एकसदनीय); 5 वर्ष कार्यकाल |
| जिले | 50 (2023 पुनर्गठन के बाद) |
| संभाग | 10 (2023 से) |
| लोक सभा सीटें | 25 |
| राज्य सभा सीटें | 10 |
| पंचायती राज | त्रि-स्तरीय; राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 |
| उच्च न्यायालय | राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर (खण्डपीठ: जयपुर) |
| लोकायुक्त | राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 |
राजस्थान OBC आरक्षण, छात्रवृत्ति योजनाएँ, एवं अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से संवैधानिक प्रावधानों को लागू कर रहा है।
प्रश्नोत्तरी एवं अभ्यास (Practice & MCQs)
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संवैधानिक विषय
अधिकार एवं सामाजिक न्याय
संवैधानिक मूल्य एवं राष्ट्रीय प्रतीक
संवैधानिक संशोधन — विशेष अध्ययन
सन्दर्भ एवं बाह्य कड़ियाँ
| स्रोत | विवरण |
|---|---|
| भारत का संविधान (मूल पाठ) | legislative.gov.in — विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार |
| M. Laxmikanth — Indian Polity | UPSC प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु सर्वाधिक लोकप्रिय पाठ्यपुस्तक |
| D.D. Basu — Introduction to the Constitution of India | संविधान विधि का प्रामाणिक ग्रन्थ |
| Subhash Kashyap — Our Constitution | संविधान का सरल एवं सुबोध विवरण |
| Granville Austin — The Indian Constitution: Cornerstone of a Nation | संविधान निर्माण का ऐतिहासिक विश्लेषण |
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| मूल सिद्धान्त | प्रस्तावना · मूल संरचना · संरचना एवं विशेषताएँ · ऐतिहासिक पृष्ठभूमि |
|---|---|
| अधिकार एवं कर्तव्य | मौलिक अधिकार · नीति निदेशक तत्व · मौलिक कर्तव्य · अनु. 14 · अनु. 19 · अनु. 21 · अनु. 32 |
| संघीय शासन | राष्ट्रपति · प्रधानमंत्री · संसद · न्यायपालिका |
| राज्य एवं स्थानीय | राज्य सरकार · पंचायती राज · नगरपालिका · तीन सूचियाँ |
| विशेष विषय | आपातकाल · संशोधन · निर्वाचन · नागरिकता · अनु. 370 · अनु. 371 |
| MCQ अभ्यास | Set 5 · Set 4 · Set 3 · Set 2 · FR MCQs · Amendments MCQs · राजस्थान 100 |
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📘 भारत का संविधान — Complete Guide Series
- Part 1: संविधान का परिचय, निर्माण और विशेषताएँ
- Part 2: प्रस्तावना, मूल अधिकार, कर्तव्य और राज्य के नीति निर्देशक तत्व
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