भारत का संविधान — सम्पूर्ण विश्वकोशीय गाइड (भाग 2) | राष्ट्रपति, संसद, न्यायपालिका, आपातकाल, संशोधन | UPSC RPSC

📅 शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 📖 3-5 min read

भारत का संविधान — भाग 2

Constitution of India — Part 2: Union Executive to MCQ Practice

यह भारत का संविधान विश्वकोशीय लेख का द्वितीय भाग है। इसमें संघीय कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका, राज्य सरकार, आपातकालीन उपबन्ध, संशोधन, निर्वाचन प्रणाली एवं MCQ अभ्यास सम्मिलित है।
विषय सूची — भाग 2
  1. संघीय कार्यपालिका
    1. राष्ट्रपति
    2. उपराष्ट्रपति
    3. प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद
  2. संसद
  3. न्यायपालिका
  4. राज्य सरकार
  5. पंचायती राज एवं स्थानीय शासन
  6. केन्द्र-राज्य सम्बन्ध
  7. आपातकालीन उपबन्ध
  8. निर्वाचन प्रणाली
  9. संविधान संशोधन
  10. नागरिकता
  11. विशेष अनुच्छेद (370, 371)
  12. संवैधानिक निकाय
  13. राजस्थान राजव्यवस्था
  14. प्रश्नोत्तरी एवं अभ्यास
  15. यह भी देखें
  16. सन्दर्भ एवं बाह्य कड़ियाँ

संघीय कार्यपालिका (Union Executive)

भारत में संसदीय शासन प्रणाली है जिसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है। संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद सम्मिलित हैं। अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा, और अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी।

राष्ट्रपति (President of India)

भारत का राष्ट्रपति
संवैधानिक स्थितिराज्य का प्रमुख (नाममात्र कार्यपालिका)
अनुच्छेद52–62
निर्वाचनअप्रत्यक्ष; निर्वाचक मण्डल (Electoral College)
निर्वाचक मण्डलसंसद के दोनों सदनों + राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य
कार्यकाल5 वर्ष (पुनर्निर्वाचन सम्भव)
योग्यताभारतीय नागरिक, 35+ वर्ष, लोक सभा सदस्यता हेतु योग्य
महाभियोगअनुच्छेद 61; संविधान के अतिक्रमण पर
शपथसर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा

राष्ट्रपति की शक्तियाँ संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में वर्णित हैं:

शक्ति का प्रकारविवरणअनुच्छेद
कार्यपालिका शक्तियाँप्रधानमंत्री, न्यायाधीश, राज्यपाल, CAG, अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति; सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति53, 74, 75, 76, 124, 155, 217
विधायी शक्तियाँसंसद का सत्र बुलाना/सत्रावसान; लोक सभा भंग करना; अध्यादेश; राज्य सभा में 12 सदस्य मनोनीत85, 86, 87, 108, 111, 123
न्यायिक शक्तियाँक्षमादान, लघुकरण, विराम, परिहार (अनु. 72); सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श (अनु. 143)72, 143
आपातकालीन शक्तियाँराष्ट्रीय आपातकाल (352), राष्ट्रपति शासन (356), वित्तीय आपातकाल (360)352, 356, 360
वीटो शक्तियाँआत्यन्तिक वीटो (रोक रखना), निलम्बनकारी वीटो (पुनर्विचार), जेबी वीटो (कोई कार्रवाई न करना)111

उपराष्ट्रपति (Vice President)

उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63–71) भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। इसका निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (निर्वाचित + मनोनीत) से मिलकर बने निर्वाचक मण्डल द्वारा होता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, त्यागपत्र, मृत्यु या महाभियोग की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है (अधिकतम 6 माह)।

प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद (Prime Minister & Council of Ministers)

प्रधानमंत्री (अनुच्छेद 74–75) भारत सरकार का वास्तविक प्रमुख है। अनुच्छेद 74(1) के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता एवं सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी। 42वें संशोधन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा (44वें संशोधन ने पुनर्विचार का अधिकार दिया, किन्तु पुनः प्राप्त सलाह बाध्यकारी)।

पदभूमिकासंख्या सीमा
कैबिनेट मंत्रीनीति-निर्माण; कैबिनेट बैठकों में भागीदारीकुल मंत्रियों की संख्या लोक सभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं (91वाँ संशोधन, 2003)
राज्य मंत्रीस्वतन्त्र प्रभार या कैबिनेट मंत्री के अधीन
उपमंत्रीकैबिनेट/राज्य मंत्री की सहायता

सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3)): मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी है। व्यक्तिगत उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(2)): प्रत्येक मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है।

संसद (Parliament)

भारतीय संसद (अनुच्छेद 79) तीन अंगों से मिलकर बनती है: राष्ट्रपति, राज्य सभा (उच्च सदन) एवं लोक सभा (निम्न सदन)

विषयराज्य सभा (Council of States)लोक सभा (House of the People)
अनुच्छेद8081
अधिकतम सदस्य250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत)552 (530 राज्य + 20 केन्द्रशासित + 2 मनोनीत आंग्ल-भारतीय*)
वर्तमान सदस्य245543
निर्वाचनअप्रत्यक्ष; राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वाराप्रत्यक्ष; सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
कार्यकालस्थायी सदन; 1/3 सदस्य प्रत्येक 2 वर्ष में सेवानिवृत्त5 वर्ष (शीघ्र विघटन सम्भव)
न्यूनतम आयु30 वर्ष25 वर्ष
पीठासीन अधिकारीसभापति (उपराष्ट्रपति) एवं उपसभापतिअध्यक्ष (Speaker) एवं उपाध्यक्ष
विशेष शक्तिराज्य सूची पर कानून बनाने का प्राधिकार (अनु. 249)धन विधेयक केवल लोक सभा में पुरःस्थापित

*104वें संशोधन (2020) से आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त

विधेयक प्रक्रिया (Legislative Process)

भारतीय संसद में विधेयक तीन प्रकार के होते हैं: साधारण विधेयक (किसी भी सदन में प्रस्तुत), धन विधेयक (अनुच्छेद 110; केवल लोक सभा में), एवं संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368)। प्रत्येक विधेयक तीन वाचन (readings) से गुजरता है — प्रथम वाचन (परिचय), द्वितीय वाचन (समिति चर्चा एवं खण्डवार विचार), तृतीय वाचन (मतदान)। दोनों सदनों से पारित होने के पश्चात् विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा जाता है।

संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108): साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है। अभी तक केवल तीन बार संयुक्त बैठक हुई है — दहेज निषेध विधेयक (1961), बैंकिंग सेवा आयोग विधेयक (1978), और आतंकवाद निवारण विधेयक (2002)।

न्यायपालिका (Judiciary)

भारत में एकीकृत एवं स्वतन्त्र न्यायपालिका है जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) है। यह अमेरिकी एवं ब्रिटिश दोनों मॉडलों का मिश्रण है — न्यायिक पुनरवलोकन (Judicial Review) अमेरिका से तथा विधि का शासन (Rule of Law) ब्रिटेन से लिया गया।

विषयसर्वोच्च न्यायालयउच्च न्यायालयअधीनस्थ न्यायालय
अनुच्छेद124–147214–232233–237
स्थापना28 जनवरी 1950, दिल्लीप्रत्येक राज्य/समूह हेतुजिला स्तर
न्यायाधीश संख्या1 CJI + 33 अन्य = 34राज्यानुसार भिन्न
नियुक्तिराष्ट्रपति; कॉलेजियम की सिफारिशराष्ट्रपति; CJI + राज्यपाल से परामर्शराज्यपाल; उच्च न्यायालय से परामर्श
योग्यताभारतीय नागरिक; HC न्यायाधीश 5+ वर्ष या HC अधिवक्ता 10+ वर्षभारतीय नागरिक; जिला न्यायाधीश 10+ वर्ष या HC अधिवक्ता 10+ वर्ष
कार्यकाल65 वर्ष की आयु तक62 वर्ष की आयु तक
अधिकार क्षेत्रमूल, अपीलीय, सलाहकारी, रिट (अनु. 32)मूल, अपीलीय, रिट (अनु. 226), अधीक्षण (अनु. 227)जिला स्तरीय

न्यायिक पुनरवलोकन (Judicial Review) भारतीय संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग है। सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय किसी भी विधि या कार्यपालिका आदेश को संविधान के विरुद्ध घोषित कर सकते हैं। जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा ने न्यायपालिका को न्यायिक सक्रियता का एक शक्तिशाली उपकरण दिया है।

राज्य सरकार (State Government)

संविधान का भाग VI (अनुच्छेद 152–237) राज्य सरकार की संरचना का वर्णन करता है। राज्य स्तर पर शासन प्रणाली केन्द्र के समानान्तर है — राज्यपाल (नाममात्र प्रमुख), मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद (वास्तविक कार्यपालिका), विधानमण्डल एवं उच्च न्यायालय

पद/संस्थाकेन्द्र में समकक्षअनुच्छेदविशेषता
राज्यपालराष्ट्रपति153–162राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त (निर्वाचित नहीं); 5 वर्ष; राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त
मुख्यमंत्रीप्रधानमंत्री163–167बहुमत दल का नेता; वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख
विधान सभालोक सभा170प्रत्यक्ष निर्वाचन; 60–500 सदस्य; 5 वर्ष
विधान परिषदराज्य सभा171केवल 6 राज्यों में; 1/3 विधान सभा से, 1/3 स्थानीय निकाय, 1/12 शिक्षक, 1/12 स्नातक, 1/6 राज्यपाल मनोनीत
उच्च न्यायालयसर्वोच्च न्यायालय214–23225 उच्च न्यायालय; मूल एवं अपीलीय क्षेत्राधिकार

राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ: विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना, राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन (5वीं/6ठी अनुसूची), एवं असम में जनजातीय क्षेत्र परिषद। राज्यपाल पद को लेकर केन्द्र-राज्य विवाद सदैव चर्चा का विषय रहा है।

पंचायती राज एवं स्थानीय शासन

73वें संशोधन (1992) ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया (भाग IX, अनुच्छेद 243–243O)। 74वें संशोधन (1992) ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक मान्यता दी (भाग IX-A, अनुच्छेद 243P–243ZG)। ये दोनों संशोधन 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुए।

पंचायती राज — त्रि-स्तरीय संरचना

स्तरसंस्थाक्षेत्रप्रमुख
ग्राम स्तरग्राम पंचायतगाँव/गाँवों का समूहसरपंच
खण्ड स्तरपंचायत समितिविकास खण्ड (Block)प्रधान
जिला स्तरजिला परिषदजिलाजिला प्रमुख

प्रमुख प्रावधान: SC/ST के लिए जनसंख्या अनुपात में आरक्षण (अनु. 243D); महिलाओं के लिए कम-से-कम 1/3 आरक्षण; 5 वर्ष का कार्यकाल; राज्य वित्त आयोग (अनु. 243I); राज्य निर्वाचन आयोग (अनु. 243K); 11वीं अनुसूची में 29 विषय। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की तैयारियाँ इसी संवैधानिक ढाँचे के अन्तर्गत हो रही हैं।

केन्द्र-राज्य सम्बन्ध (Centre-State Relations)

संविधान का भाग XI (अनुच्छेद 245–263) केन्द्र-राज्य सम्बन्धों को तीन आयामों में विभाजित करता है:

आयामअनुच्छेदमुख्य बिन्दु
विधायी सम्बन्ध245–255तीन सूचियाँ (7वीं अनुसूची): संघ सूची (100 विषय — रक्षा, विदेश, मुद्रा), राज्य सूची (61 विषय — पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि), समवर्ती सूची (52 विषय — शिक्षा, वन, श्रम); टकराव पर केन्द्रीय विधि प्रबल; अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र में (अनु. 248)
प्रशासनिक सम्बन्ध256–263केन्द्र के निर्देशों का पालन (अनु. 256); अखिल भारतीय सेवाएँ (अनु. 312); अन्तर्राज्य परिषद (अनु. 263)
वित्तीय सम्बन्ध268–293करों का विभाजन; अनुदान (अनु. 275); वित्त आयोग (अनु. 280); GST परिषद (अनु. 279A — 101वाँ संशोधन)

सरकारिया आयोग (1983) एवं पुंछी आयोग (2007) ने केन्द्र-राज्य सम्बन्धों पर महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं, जिनमें सहकारी संघवाद को बल देने पर जोर दिया गया।

आपातकालीन उपबन्ध (Emergency Provisions)

संविधान का भाग XVIII (अनुच्छेद 352–360) तीन प्रकार के आपातकाल का प्रावधान करता है, जो जर्मन संविधान (वाइमर) से प्रेरित हैं:

प्रकारअनुच्छेदआधारघोषणाप्रभावअनुमोदन
राष्ट्रीय आपातकाल352युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह (मूलतः "आन्तरिक अशान्ति"; 44वें संशोधन से परिवर्तित)राष्ट्रपति; मंत्रिमण्डल की लिखित सिफारिशमौलिक अधिकार (अनु. 19) स्वतः निलम्बित; अनु. 20–21 कभी निलम्बित नहीं (44वाँ संशोधन)1 माह में संसद; विशेष बहुमत; 6-6 माह विस्तार
राष्ट्रपति शासन356राज्य में संवैधानिक तन्त्र की विफलताराष्ट्रपति; राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्यथाराज्य सरकार भंग/निलम्बित; राज्य की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में; विधानसभा भंग/निलम्बित2 माह में संसद; अधिकतम 3 वर्ष (6-6 माह विस्तार)
वित्तीय आपातकाल360भारत की वित्तीय स्थिरता/प्रत्यय को खतराराष्ट्रपतिसरकारी कर्मचारियों के वेतन में कटौती; राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति नियन्त्रण2 माह में संसद

ऐतिहासिक तथ्य: भारत में राष्ट्रीय आपातकाल तीन बार घोषित हुआ — 1962 (चीन युद्ध), 1971 (पाक युद्ध), एवं 1975 (आन्तरिक अशान्ति; 25 जून 1975 — 21 मार्च 1977)। राष्ट्रपति शासन 100 से अधिक बार लगाया गया। वित्तीय आपातकाल आज तक कभी घोषित नहीं हुआ।

एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) निर्णय ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक पुनरवलोकन के अधीन है, और धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल संरचना है।

निर्वाचन प्रणाली (Electoral System)

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) एक स्वतन्त्र संवैधानिक निकाय है (अनुच्छेद 324) जो स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है। इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं दो अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं।

विषयविवरण
निर्वाचन प्रणालीलोक सभा/विधान सभा: सर्वाधिक मत प्राप्त व्यक्ति विजयी (FPTP); राज्य सभा/राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति: एकल संक्रमणीय मत (STV) — आनुपातिक प्रतिनिधित्व
मतदान आयु18 वर्ष (61वाँ संशोधन, 1989)
चुनाव चिह्ननिर्वाचन आयोग द्वारा आवंटित; राष्ट्रीय/राज्यीय/पंजीकृत दल
आचार संहिताचुनाव घोषणा से मतगणना तक लागू
EVM एवं VVPATइलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन; पेपर ट्रेल सत्यापन
NOTA"इनमें से कोई नहीं" — 2013 से (PUCL बनाम भारत संघ)
दल-बदल विरोधी कानून10वीं अनुसूची; 52वाँ संशोधन (1985); 91वें संशोधन (2003) ने 1/3 विभाजन प्रावधान समाप्त किया

मतदाता पंजीकरण एवं निर्वाचक नामावली संशोधन के लिए प्ररूप-1 (नाम जोड़ना), प्ररूप-2 (नाम हटाना) एवं प्ररूप-3 (विवरण संशोधन) का प्रयोग होता है।

संविधान संशोधन (Constitutional Amendment)

अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित करता है। भारतीय संविधान न तो पूर्णतः कठोर है और न ही पूर्णतः लचीला — यह दोनों का मिश्रण है:

संशोधन की विधिप्रक्रियाउदाहरण
साधारण बहुमत (अनु. 368 के बाहर)संसद का साधारण बहुमतनये राज्य का निर्माण (अनु. 2–3), नागरिकता (अनु. 11), राज्य सभा में प्रतिनिधित्व (अनु. 169)
विशेष बहुमतप्रत्येक सदन में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 + कुल सदस्यता का बहुमतमौलिक अधिकार, DPSP, अधिकांश संशोधन
विशेष बहुमत + राज्य अनुसमर्थनविशेष बहुमत + कम-से-कम आधे राज्यों की विधान सभाओं की सहमतिराष्ट्रपति निर्वाचन (अनु. 54), SC/HC (अनु. 124/214), शक्ति विभाजन (7वीं अनुसूची), संशोधन प्रक्रिया (अनु. 368 स्वयं)

UPSC की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण संशोधन

संशोधनवर्षविषय
1st19519वीं अनुसूची; मौलिक अधिकारों पर युक्तियुक्त प्रतिबन्ध; भूमि सुधार
7th1956राज्य पुनर्गठन; A/B/C/D श्रेणी समाप्त
24th1971संसद की संविधान संशोधन शक्ति स्पष्ट; राष्ट्रपति की अनुमति अनिवार्य
42nd1976"मिनी संविधान"; समाजवादी, पन्थनिरपेक्ष, अखण्डता जोड़े; मौलिक कर्तव्य; DPSP को FR पर वरीयता
44th197842वें में सुधार; सम्पत्ति मौलिक अधिकार से हटाया; आन्तरिक अशान्ति → सशस्त्र विद्रोह; अनु. 20–21 आपातकाल में भी संरक्षित
52nd1985दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची)
61st1989मतदान आयु 21 → 18 वर्ष
73rd1992पंचायती राज संवैधानिक दर्जा (भाग IX, 11वीं अनुसूची)
74th1992नगरपालिका संवैधानिक दर्जा (भाग IX-A, 12वीं अनुसूची)
86th2002अनुच्छेद 21-A शिक्षा का मौलिक अधिकार; 11वाँ मौलिक कर्तव्य
91st2003मंत्रिपरिषद 15% सीमा; 1/3 दल-बदल छूट समाप्त
97th2011सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा (भाग IX-B)
99th2014NJAC (राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग) — सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित
101st2016GST; अनुच्छेद 246A; GST परिषद (अनु. 279A)
103rd2019आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण
104th2020SC/ST आरक्षण 10 वर्ष विस्तार; आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त
106th2023नारी शक्ति वन्दन अधिनियम — लोक सभा/विधान सभा में महिलाओं को 1/3 आरक्षण

नागरिकता (Citizenship)

संविधान का भाग II (अनुच्छेद 5–11) नागरिकता का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता से सम्बन्धित विधि बनाने का अधिकार देता है, जिसके अन्तर्गत नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया गया। भारत में एकल नागरिकता है — अर्थात् कोई राज्य नागरिकता नहीं, केवल भारतीय नागरिकता।

नागरिकता प्राप्ति के पाँच आधार: जन्म, वंशानुक्रम, पंजीकरण, देशीयकरण (Naturalisation), एवं भूभाग समाविष्ट होने पर। नागरिकता की समाप्ति: स्वैच्छिक त्याग, अन्य देश की नागरिकता ग्रहण, या सरकार द्वारा वंचित करने पर (कपट, अनिष्ठा, शत्रु देश से व्यापार आदि)। OCI (Overseas Citizen of India) कार्ड प्रवासी भारतीयों को सीमित अधिकार प्रदान करता है।

विशेष अनुच्छेद (370, 371)

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश (C.O. 272) एवं संसदीय प्रस्ताव द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया तथा जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केन्द्रशासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) एवं लद्दाख (बिना विधानसभा) — में विभाजित किया। 11 दिसम्बर 2023 को सर्वोच्च न्यायालय की 5 न्यायाधीशों की पीठ ने इस निर्णय को संवैधानिक घोषित किया।

अनुच्छेद 371 (371 से 371-J) विभिन्न राज्यों को विशेष प्रावधान प्रदान करता है — महाराष्ट्र-गुजरात (371), नागालैण्ड (371A), असम (371B), मणिपुर (371C), आन्ध्र प्रदेश/तेलंगाना (371D-E), सिक्किम (371F), मिज़ोरम (371G), अरुणाचल (371H), गोवा (371I), कर्नाटक (371J)।

संवैधानिक एवं वैधानिक निकाय

निकायअनुच्छेदअध्यक्ष/प्रमुख की नियुक्तिमुख्य कार्य
निर्वाचन आयोग324राष्ट्रपतिस्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)315–323राष्ट्रपतिअखिल भारतीय सेवा भर्ती
राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC आदि)315–323राज्यपालराज्य सेवा भर्ती
वित्त आयोग280राष्ट्रपतिकेन्द्र-राज्य कर विभाजन; अनुदान
नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)148–151राष्ट्रपतिसरकारी लेखा परीक्षा; "सार्वजनिक कोष का संरक्षक"
अटॉर्नी जनरल76राष्ट्रपतिसरकार का प्रमुख विधि अधिकारी
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग338राष्ट्रपतिSC अधिकारों की निगरानी
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग338-Aराष्ट्रपतिST अधिकारों की निगरानी
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग338-Bराष्ट्रपतिOBC कल्याण
अन्तर्राज्य परिषद263प्रधानमंत्रीकेन्द्र-राज्य समन्वय
GST परिषद279Aकेन्द्रीय वित्त मंत्रीGST दरें एवं नीति

राजस्थान राजव्यवस्था

राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। इसकी राजव्यवस्था संविधान के भाग VI के अनुसार संगठित है:

विषयविवरण
विधान सभा200 सदस्य (एकसदनीय); 5 वर्ष कार्यकाल
जिले50 (2023 पुनर्गठन के बाद)
संभाग10 (2023 से)
लोक सभा सीटें25
राज्य सभा सीटें10
पंचायती राजत्रि-स्तरीय; राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994
उच्च न्यायालयराजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर (खण्डपीठ: जयपुर)
लोकायुक्तराजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973

राजस्थान OBC आरक्षण, छात्रवृत्ति योजनाएँ, एवं अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से संवैधानिक प्रावधानों को लागू कर रहा है।

प्रश्नोत्तरी एवं अभ्यास (Practice & MCQs)

भारतीय संविधान की समझ को परखने एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु नीचे दिये गए MCQ सेट्स का अभ्यास करें:

यह भी देखें

सन्दर्भ एवं बाह्य कड़ियाँ

स्रोतविवरण
भारत का संविधान (मूल पाठ)legislative.gov.in — विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
M. Laxmikanth — Indian PolityUPSC प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु सर्वाधिक लोकप्रिय पाठ्यपुस्तक
D.D. Basu — Introduction to the Constitution of Indiaसंविधान विधि का प्रामाणिक ग्रन्थ
Subhash Kashyap — Our Constitutionसंविधान का सरल एवं सुबोध विवरण
Granville Austin — The Indian Constitution: Cornerstone of a Nationसंविधान निर्माण का ऐतिहासिक विश्लेषण
sarkariserviceprep.com196+ विस्तृत लेख — इस विश्वकोशीय लेख में एम्बेडेड
भारत का संविधान — सम्पूर्ण विषय नेविगेशन
मूल सिद्धान्त प्रस्तावना · मूल संरचना · संरचना एवं विशेषताएँ · ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अधिकार एवं कर्तव्य मौलिक अधिकार · नीति निदेशक तत्व · मौलिक कर्तव्य · अनु. 14 · अनु. 19 · अनु. 21 · अनु. 32
संघीय शासन राष्ट्रपति · प्रधानमंत्री · संसद · न्यायपालिका
राज्य एवं स्थानीय राज्य सरकार · पंचायती राज · नगरपालिका · तीन सूचियाँ
विशेष विषय आपातकाल · संशोधन · निर्वाचन · नागरिकता · अनु. 370 · अनु. 371
MCQ अभ्यास Set 5 · Set 4 · Set 3 · Set 2 · FR MCQs · Amendments MCQs · राजस्थान 100

भारत का संविधान — सम्पूर्ण विश्वकोशीय लेख

इस लेख में sarkariserviceprep.com पर प्रकाशित 196+ विस्तृत लेखों की कड़ियाँ एम्बेड की गई हैं।

प्रत्येक नीले लिंक पर क्लिक करें → विषय का गहन अध्ययन करें → पुनः इस लेख पर लौटें

© sarkariserviceprep.com | Wikipedia-style Encyclopedia Article | UPSC · RPSC · RAS · REET · RSMSSB

📘 भारत का संविधान — Complete Guide Series

यह श्रृंखला बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।

📤 शेयर करें:

💼

सरकारी नौकरी की तैयारी करें!

SSC, Railway, Bank, UPSC के लिए

Visit Now →

💬 टिप्पणियाँ

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया टिप्पणी करते समय मर्यादित भाषा का प्रयोग करें। किसी भी प्रकार का स्पैम, अपशब्द या प्रमोशनल लिंक हटाया जा सकता है। आपका सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण है!